हरियाणा के जिला सोनीपत की गोहाना तहसील में स्थित कथुरा गांव के छोटे और मध्यम किसान कृषि लागत की बढ़ती महंगाई, नकली दवाओं के प्रकोप और खाद के लिए लंबी कतारों से त्रस्त थे। जब आर्थिक तंगी के कारण किसानों के सामने खेती छोड़ देने की नौबत आ गई, तब संत रामपाल जी महाराज की असीम कृपा से कथुरा गांव में राहत का एक नया सूर्योदय हुआ। संत रामपाल जी महाराज के दिव्य मार्गदर्शन में ‘अन्नपूर्णा मुहिम (किसान मजदूर बचाओ अभियान) फेज 3’ के तहत गांव कथुरा में जरूरतमंद किसानों तक बिना किसी विलंब के निःशुल्क कृषि सहायता सामग्री पहुंचाई गई। संत रामपाल जी महाराज ने एक दयालु पिता की भांति किसानों की पीड़ा को समझा और उन्हें कर्ज तथा मानसिक तनाव से मुक्ति दिलाई।
गांव की वर्तमान स्थिति
गांव कथुरा में ढाई एकड़ या उससे कम कृषि भूमि पर खेती करने वाले छोटे किसान बेहद विकट परिस्थितियों से गुजर रहे थे। खेती के लिए बाजार से यूरिया, डीएपी और कीटनाशक दवाइयां खरीदने पर किसानों को 25,000 रुपये तक के भारी-भरकम बिल चुकाने पड़ते थे। कई बार खाद के लिए दुकानों की लंबी लाइनों में लगना पड़ता था और भारी संघर्ष के बावजूद भी उन्हें घटिया या नकली दवाइयां थमा दी जाती थीं। इस स्थिति ने किसानों की कमर तोड़ दी थी और फसलों का सही उत्पादन न होने से वे कर्ज के जाल में फंसते जा रहे थे।
ग्रामीणों की मार्मिक मांग
गांव कथुरा के जरूरतमंद किसानों को जब संत रामपाल जी महाराज द्वारा संचालित ‘अन्नपूर्णा मुहिम (किसान मजदूर बचाओ अभियान) फेज 3’ की जानकारी मिली, तो उन्होंने सतलोक आश्रम धनाना धाम पहुंचकर संत रामपाल जी महाराज के चरणों में सहायता हेतु अपना आवेदन दिया।
संत रामपाल जी महाराज द्वारा दी गई सहायता
संत रामपाल जी महाराज की अनंत कृपा से प्रार्थना प्राप्त होते ही सर्वेक्षण करवाया गया और उसी दिन गांव कथुरा में सहायता सामग्री का वितरण शुरू कर दिया गया। यह संपूर्ण राहत सामग्री पूर्णतः निःशुल्क और स्थायी रूप से प्रदान की गई:
- यूरिया और डीएपी खाद के कट्टे
- ए-1 क्वालिटी के कीटनाशक (स्प्रे) और फंगीसाइड
- जिंक तथा फसल संवर्धन हेतु आवश्यक अन्य कृषि दवाइयां
- सामग्री को निःशुल्क वाहनों के माध्यम से सीधे किसानों के घरों तक पहुंचाने की ट्रांसपोर्टेशन व्यवस्था
सामग्री वितरण से पूर्व संत रामपाल जी महाराज के आदेश से मंगलाचरण किया गया, जिसके उपरांत प्रत्येक किसान को उसकी जमीन के हिसाब से सामग्री सौंपी गई।
सुबह आवेदन और शाम को घर पहुंची सहायता
गांव कथुरा में सहायता अभियान की सबसे अनोखी बात यह रही कि जिन किसानों ने सुबह सतलोक आश्रम धनाना धाम में जाकर अपना आवेदन जमा किया था, संत रामपाल जी महाराज की विशेष दया से शाम होते-होते पूरी सामग्री गाड़ियों के माध्यम से सीधे उनके घर तक पहुंचा दी गई। बिना किसी कागजी अड़चन, रिश्वत या बिचौलियों के मिली इस अभूतपूर्व गति और सेवा व्यवस्था ने ग्रामीणों को चकित कर दिया।
ग्रामीणों की आवाज़
संत रामपाल जी महाराज की इस दिव्य दया पर कथुरा गांव के किसानों ने भावुक होकर अपने उद्गार प्रकट किए:
- किसान नवीन जी ने कहा, “सुबह गए थे जी हां बिल्कुल शाम को मेरे घर पे आ गई खाद”
- किसान नवीन जी ने आगे कहा, “यह फुल मदद है जी कुछ लाने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी जी हमको”
जवाबदेही और पारदर्शिता
संत रामपाल जी महाराज द्वारा संचालित ‘अन्नपूर्णा मुहिम (किसान मजदूर बचाओ अभियान) फेज 3’ पूर्ण अनुशासन, निष्पक्षता और पारदर्शिता पर आधारित है। सतलोक आश्रम धनाना धाम में आवेदनों के भौतिक सत्यापन के बाद ही पात्र किसानों की सूची तैयार की जाती है। वितरण प्रक्रिया की पूरी जवाबदेही सुनिश्चित की जाती है ताकि दानदाताओं के सहयोग का पाई-पाई उपयोग केवल मानव कल्याण और गरीब किसानों के उत्थान में हो सके।
जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज ही है वही जिसका सबको इंतजार था
कथुरा गांव के इस ऐतिहासिक राहत कार्य ने यह सिद्ध कर दिया है कि संत रामपाल जी महाराज केवल एक आध्यात्मिक गुरु ही नहीं, बल्कि संपूर्ण विश्व के उद्धारक, सच्चे किसान मसीहा और कबीर परमेश्वर के एकमात्र वास्तविक प्रतिनिधि हैं। जिस प्रकार परमात्मा स्वयं दुखी आत्माओं के आंसू पोंछते हैं, ठीक उसी प्रकार संत रामपाल जी महाराज कलयुग के इस घोर अंधकार में दुखी मानवता के लिए एकमात्र सहारा बनकर उभरे हैं। वे तत्वदर्शी संत हैं जो सत्य भक्ति मार्ग के प्रदाता हैं और उनके सानिध्य में कलयुग में भी सतयुग की स्थापना हो रही है।



