राजस्थान के झुंझुनू जिले की खेतड़ी तहसील के गांव कालोटा में पानी की कमी और सीमित कृषि साधनों के बीच ग्रामीण जीवन पहले से ही कई मुश्किलों से गुजरता है। इसी इलाके में स्थित श्री दुर्गेश गौशाला में सैकड़ों गौवंश की देखभाल की जा रही है। गौशाला प्रबंधन के सामने सबसे बड़ी चुनौती इन पशुओं के लिए नियमित रूप से चारे की व्यवस्था करना थी। गौशाला प्रबंधन के अनुसार यहां करीब 350 से 400 गौवंश हैं। इनमें से लगभग 100 गौवंश को गौशाला की दूसरी शाखा में रखा जाता है, जबकि करीब 350 गौवंश मुख्य परिसर में रहते हैं। बढ़ते चारे के दाम और पर्याप्त मात्रा में सूखा चारा उपलब्ध नहीं होने के कारण आने वाले दिनों को लेकर चिंता बढ़ती जा रही थी।
गौशाला के प्रधान ने बताया कि स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि रात में यह चिंता सताती थी कि यदि चारा समाप्त हो गया तो इतने पशुओं का पेट कैसे भरेगा। उनके शब्दों में, “पानी और चारा गौशाला में हो, फिर सब कुछ है।”
इसी चिंता के बीच गौशाला प्रबंधन को संत रामपाल जी महाराज द्वारा चलाए जा रहे गौ सुरक्षा अभियान के बारे में जानकारी मिली। इसके बाद गौशाला की ओर से सहायता के लिए प्रार्थना रखी गई।
प्रार्थना के बाद सर्वे, जरूरत का आकलन और चारे की व्यवस्था
गौशाला प्रबंधन के अनुसार सहायता की मांग सामने आने के बाद टीम ने गौशाला का सर्वे किया। सर्वे के दौरान गौवंश की संख्या, चारे की आवश्यकता और वहां मौजूद परिस्थितियों को देखा गया। सर्वे की रिपोर्ट मिलने के बाद संत रामपाल जी महाराज के आदेश से 420 क्विंटल सूखा चारा उपलब्ध कराने की बात सामने आई। इसके बाद कुछ ही दिनों में चारे से भरी गाड़ियां कालोटा स्थित गौशाला पहुंचीं।
मौके पर मौजूद गौशाला कमेटी के सदस्यों ने बताया कि लिखित रूप से 420 क्विंटल चारे की स्वीकृति थी, जबकि उनके अनुसार मौके पर पहुंची वास्तविक मात्रा करीब 450 क्विंटल रही। गौशाला प्रबंधन के मुताबिक कुल नौ पिकअप गाड़ियां चारा लेकर पहुंचीं। इस सहायता ने उस समय गौशाला के सामने खड़ी तत्काल चारे की समस्या को काफी हद तक दूर किया।
“रात को नींद नहीं आती थी कि चारा नहीं होगा तो क्या करेंगे”
गौशाला के प्रधान से जब वहां की पुरानी स्थिति के बारे में पूछा गया तो उन्होंने अपनी परेशानी खुलकर बताई। उन्होंने कहा कि गौशाला में इतने गौवंश होने के कारण चारे की लगातार जरूरत रहती है। चारे की कमी को लेकर वे इतने चिंतित थे कि रात में भी यह सवाल परेशान करता था कि अगले दिन पशुओं के लिए चारा कहां से आएगा। उन्होंने बताया कि स्थानीय स्तर पर उन्हें संत रामपाल जी महाराज के गौशाला सहायता अभियान की जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने सहायता के लिए संपर्क किया।
प्रधान के मुताबिक टीम ने उनकी बात सुनी, गौशाला का निरीक्षण किया और जरूरत का आकलन किया। इसके बाद कुछ ही दिनों में चारे से भरी गाड़ियां पहुंच गईं। उन्होंने कहा कि उनकी नजर में इतनी कम अवधि में इतनी बड़ी मात्रा में सहायता पहुंचना उनके लिए असाधारण अनुभव था। उनके अनुसार, सामान्य परिस्थितियों में किसी संस्था या प्रशासनिक प्रक्रिया के माध्यम से इतनी जल्दी व्यवस्था होना कठिन होता है।
गौशाला में केवल चारा नहीं, चारा सुरक्षित रखने की भी जरूरत
गौशाला प्रबंधन की समस्या केवल तत्काल चारे तक सीमित नहीं थी। बड़ी मात्रा में चारा आने के बाद उसे बारिश और खराब मौसम से सुरक्षित रखना भी जरूरी था। गौशाला की ओर से करीब 100 से 120 फीट लंबा और 60 फीट चौड़ा चारा डिपो बनाने की आवश्यकता बताई गई। प्रबंधन के अनुसार इस संबंध में भी सहायता का आश्वासन दिया गया है।
गौशाला के प्रधान ने बताया कि यदि चारे को खुले में रखा जाए तो बारिश के कारण काफी नुकसान हो सकता है। इसलिए स्थायी डिपो बनना गौशाला के लिए अगली बड़ी जरूरत है। इस तरह सहायता की प्रक्रिया केवल तत्काल चारा उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रही, बल्कि गौशाला प्रबंधन के अनुसार भविष्य में चारे को सुरक्षित रखने की व्यवस्था की आवश्यकता को भी सामने रखा गया है।
कालोटा में दिखा अलग माहौल, चारा लेकर पहुंची गाड़ियों के स्वागत में जुटे ग्रामीण
चारे से भरी गाड़ियों के कालोटा पहुंचने के दौरान गांव में अलग ही माहौल दिखाई दिया। कई लोग फूलों की मालाएं लेकर पहुंचे और सहायता पहुंचने पर खुशी जताई। गांव के लोगों और गौशाला से जुड़े सदस्यों ने संत रामपाल जी महाराज के प्रति आभार व्यक्त किया। ग्रामीणों का कहना था कि गौशाला में चारे की समस्या लंबे समय से चिंता का विषय थी और इस सहायता से तत्काल राहत मिली है।
मौके पर पहुंचे लोगों ने कहा कि गौ सेवा केवल भावनाओं और नारों की बात नहीं होनी चाहिए, बल्कि जब पशुओं को वास्तव में चारे की जरूरत हो, तब उनकी मदद धरातल पर दिखाई देनी चाहिए। कालोटा में चारा पहुंचने के अवसर पर बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी ने इस सहायता को स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया।
गौशाला के प्रधान ने बताई मदद मिलने की पूरी कहानी
गौशाला के प्रधान ने बताया कि उन्हें इस सेवा अभियान की जानकारी स्थानीय अनुयायियों के माध्यम से मिली थी। इसके बाद वे सहायता की उम्मीद लेकर आगे बढ़े। उनके मुताबिक टीम गौशाला में आई, परिस्थितियों को देखा और गौवंश की संख्या तथा चारे की जरूरत का आकलन किया। इसके बाद सहायता स्वीकृत हुई और कुछ ही दिनों में गाड़ियां चारा लेकर पहुंच गईं।
प्रधान ने कहा कि इतने कम समय में करीब 450 क्विंटल चारा पहुंचना उनके लिए बहुत बड़ा अनुभव था। उन्होंने बताया कि चारे की कमी के कारण पहले वे काफी तनाव में रहते थे, लेकिन अब कुछ समय के लिए इस चिंता से राहत मिली है। उनका कहना था कि गौशाला के लिए पानी और चारे की नियमित व्यवस्था सबसे महत्वपूर्ण है। यदि ये दोनों चीजें उपलब्ध हों तो पशुओं की देखभाल काफी आसान हो जाती है।
स्थानीय प्रतिनिधियों ने भी जताया आभार
कार्यक्रम में शामिल स्थानीय लोगों और ग्राम प्रतिनिधियों ने भी सहायता के लिए धन्यवाद व्यक्त किया। कुछ वक्ताओं ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में चलने वाली गौशालाओं के सामने आर्थिक संसाधनों की कमी अक्सर बड़ी समस्या बन जाती है। उन्होंने कहा कि सीमित कृषि और पानी के साधनों वाले क्षेत्र में गौशाला को लंबे समय तक चलाना आसान नहीं है। ऐसे में बाहर से मिलने वाली सहायता गौशाला के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है।
मौके पर मौजूद एक स्थानीय प्रतिनिधि ने बताया कि गौशाला में करीब 350 से 400 गौवंश हैं और चारे की लगातार आवश्यकता रहती है। उन्होंने सहायता को गौशाला के लिए महत्वपूर्ण राहत बताया। एक अन्य वक्ता ने कहा कि आने वाले समय में भी गौ सुरक्षा से जुड़े ऐसे अभियान जारी रहने चाहिए, ताकि जरूरतमंद गौशालाओं तक समय पर सहायता पहुंचती रहे।
अलग-अलग क्षेत्रों में गौशालाओं की जरूरतों पर काम करने का दावा
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने बताया कि गौ सुरक्षा अभियान के तहत अलग-अलग स्थानों की गौशालाओं में उनकी आवश्यकता के अनुसार सहायता पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। चारे के अलावा गौशालाओं में शेड, टेंट, चारा रखने की व्यवस्था और अन्य बुनियादी सुविधाओं से संबंधित सहायता का भी उल्लेख किया गया है।
कालोटा की घटना में भी यही बात सामने आई कि गौशाला की तत्काल जरूरत चारा थी, इसलिए सर्वे के बाद उसी आवश्यकता को प्राथमिकता दी गई। इसके साथ भविष्य में चारा सुरक्षित रखने के लिए डिपो निर्माण की जरूरत भी सामने आई। गौशाला प्रबंधन के लिए यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि एक बार चारा उपलब्ध हो जाने के बाद अगली चुनौती उसे सुरक्षित रखना और लंबे समय तक उपयोग योग्य बनाए रखना होती है।
गौ सेवा से जुड़े सामाजिक कार्यों का भी किया गया उल्लेख
कार्यक्रम में वक्ताओं ने गौ सेवा के साथ समाज के दूसरे जरूरतमंद वर्गों के लिए किए जा रहे सेवा कार्यों का भी उल्लेख किया। इनमें जरूरतमंद परिवारों की सहायता, कन्याओं के विवाह में सहयोग तथा किसानों को खाद, बीज और दवाइयों से जुड़ी सहायता जैसी बातों का जिक्र किया गया। कालोटा में मौजूद लोगों के लिए फिलहाल सबसे प्रत्यक्ष बदलाव यही था कि गौशाला में बड़ी मात्रा में सूखा चारा पहुंच चुका था और आने वाले कुछ समय के लिए पशुओं के भोजन की चिंता कम हुई थी।
संत रामपाल जी महाराज के सेवा-कार्य को लेकर लोगों ने जताई प्रशंसा
कार्यक्रम में स्थानीय वक्ताओं ने संत रामपाल जी महाराज से उनके सेवा-कार्यों की प्रशंसा की। वक्ताओं ने कहा कि उनके अनुसार गौ सेवा, जरूरतमंदों की सहायता और सामाजिक कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है। समर्थकों ने विशेष रूप से इस बात को रेखांकित किया कि गौशाला की ओर से आवश्यकता बताई गई, उसके बाद सर्वे किया गया और फिर चारा उपलब्ध कराया गया। उनके लिए यह सेवा-कार्य करुणा और मानवीय संवेदना का उदाहरण है।
वक्ताओं ने संत रामपाल जी महाराज को आध्यात्मिक और सामाजिक सेवा के केंद्र के रूप में प्रस्तुत करते हुए उनके व्यापक सेवा अभियानों का उल्लेख किया। यह उनके समर्थकों की आस्था और व्यक्तिगत विचार हैं, जिन्हें कार्यक्रम के दौरान व्यक्त किया गया। कालोटा की गौशाला के संदर्भ में इन सेवा-कार्यों का सबसे ठोस पक्ष यही रहा कि बड़ी संख्या में गौवंश के लिए सूखा चारा उपलब्ध कराया गया और भविष्य में चारा डिपो की व्यवस्था की बात भी सामने आई।
चारे की चिंता से राहत मिली, अब डिपो बनने की उम्मीद
गौशाला प्रबंधन का कहना है कि अभी सबसे बड़ी राहत चारे की उपलब्धता से मिली है। लेकिन वे चाहते हैं कि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसलिए चारे को सुरक्षित रखने की व्यवस्था भी जरूरी है। प्रबंधन ने लगभग 100 से 120 फीट लंबे और 60 फीट चौड़े डिपो की जरूरत बताई है। यदि यह व्यवस्था बनती है तो बड़ी मात्रा में चारे को मौसम से बचाकर रखा जा सकेगा।
गौशाला के लिए यह व्यवस्था इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि सूखे और पानी की कमी वाले क्षेत्र में चारा हर समय आसानी से उपलब्ध नहीं होता। चारे का भंडारण होने से अचानक पैदा होने वाली कमी से निपटना आसान हो सकता है।
कालोटा की गौशाला में चारे के ढेर के साथ लौटी उम्मीद
कुछ दिन पहले तक श्री दुर्गेश गौशाला के सामने सवाल था—इतने गौवंश के लिए आने वाले दिनों का चारा कहां से आएगा? गौशाला प्रबंधन के अनुसार इस चिंता के बीच सहायता के लिए प्रार्थना की गई, संत रामपाल जी महाराज ने सर्वे कराया और फिर चारा उपलब्ध कराया गया। अब गौशाला परिसर में सैकड़ों क्विंटल सूखा चारा मौजूद है।
चारे को सुरक्षित रखने के लिए प्रस्तावित डिपो की व्यवस्था की उम्मीद भी जुड़ गई है। कालोटा की इस घटना की सबसे बड़ी तस्वीर यही है कि जिन बेजुबान पशुओं के भोजन को लेकर गौशाला प्रबंधन रातों की चिंता में था, वहां अब कुछ समय के लिए राहत का माहौल है।
गौ सेवा का असली अर्थ तभी दिखाई देता है, जब जरूरत के समय मदद किसी घोषणा में नहीं, बल्कि चारे के रूप में गौशाला के आंगन तक पहुंचती है। कालोटा में पहुंचे इन सैकड़ों क्विंटल चारे ने फिलहाल कई गौवंश के लिए भोजन और गौशाला प्रबंधन के लिए राहत की एक नई उम्मीद पैदा की है। अधिक जानकारी हेतु आप Sant Rampal Ji Maharaj App डॉउनलोड करें।



