अकाल पीड़ित क्षेत्रों और गौशालाओं के संबल बने संत रामपाल जी महाराज: ग्रामीणों ने व्यक्त किया आभार

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राजस्थान एवं आसपास के अकाल और सूखे से प्रभावित क्षेत्रों में बेसहारा गौवंश और ग्रामीणों की मदद के लिए संत रामपाल जी महाराज द्वारा चलाए जा रहे सेवा कार्य निरंतर जारी हैं। हाल ही में विभिन्न गांवों, पंचायतों और गौशालाओं से आए प्रतिनिधिमंडलों ने सतलोक आश्रम पहुंचकर महाराज जी से मुलाकात की। इस दौरान प्रतिनिधियों ने अपने क्षेत्रों की समस्याओं से अवगत कराते हुए सहायता की गुहार लगाई, जिस पर संत रामपाल जी महाराज ने त्वरित राहत प्रदान करने का आश्वासन दिया।

खुड्डी गांव के सरपंच नथूराम और पंच-गांव गौशाला समिति ने मांगी चारे की मदद

राजस्थान के जिला चूरू स्थित ग्राम पंचायत खुड्डी से सरपंच नथूराम के नेतृत्व में सात प्रतिनिधियों का दल संत रामपाल जी महाराज से मिलने पहुंचा। प्रतिनिधियों ने बताया कि उनके क्षेत्र के पांच गांवों द्वारा संयुक्त रूप से संचालित गौशाला में सूखे की वजह से चारे की भारी कमी हो गई है। उन्होंने गौवंश के संरक्षण हेतु चारे की व्यवस्था कराने का अनुरोध किया। सरपंच और ग्रामीणों ने महाराज जी द्वारा किसान, गरीब और असहाय वर्ग के लिए चलाई जा रही जनकल्याणकारी योजनाओं की जमकर सराहना की और कहा कि मोबाइल पर सेवा कार्य देखकर वे बहुत प्रभावित हुए थे। संत रामपाल जी महाराज ने उनकी अर्जी स्वीकार करते हुए आश्वस्त किया कि तीन दिनों के भीतर गौशाला में चारा पहुंचा दिया जाएगा और किसी भी स्थिति में गौ माता को भूखा नहीं रहने दिया जाएगा। महाराज जी ने प्रतिनिधियों को फिजूलखर्ची से बचने और सादगी से कार्य करने का मार्गदर्शन भी दिया।

फेफाना गांव की गौशाला समिति को मिला एक महीने के चारे का आश्वासन

राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के फेफाना गांव से गौशाला के प्रधान और सेवादारों का प्रतिनिधिमंडल संत रामपाल जी महाराज के दर्शन करने पहुंचा। उन्होंने बताया कि रेगिस्तानी क्षेत्र होने और वर्षा न होने के कारण गांव में केवल 15 दिनों का चारा ही शेष बचा है, जिससे गौवंश के सामने संकट खड़ा हो गया है। प्रतिनिधियों ने बताया कि आसपास के 200 से अधिक गांवों में आश्रम द्वारा भेजी जा रही राहत सामग्री के बारे में सुनकर वे यहाँ आए हैं। उन्होंने आगामी महीनों के लिए तूड़ी (सूखे चारे) की मांग रखी। संत रामपाल जी महाराज ने उनकी मांग स्वीकार करते हुए परसों तक चारा पहुंचाने का निर्देश दिया। महाराज जी ने यह भी आश्वस्त किया कि 1 महीने की आपूर्ति समाप्त होने से 10 दिन पहले वे पुनः सूचित कर सकते हैं, गौवंश के लिए भोजन की कमी नहीं होने दी जाएगी। साथ ही, प्राथमिकता क्रम आने पर गौशाला में शेड निर्माण कराने का भी भरोसा दिया।

हनुमानगढ़, राजस्थान की श्री कृष्ण गौशाला कमेटी को टिन शेड और चारे की मिली सहायता

राजस्थान के हनुमानगढ़ से आई श्री कृष्ण गौशाला कमेटी के प्रतिनिधियों ने संत रामपाल जी महाराज से मुलाकात कर अकाल राहत कार्यों के अंतर्गत सहायता मांगी। प्रतिनिधियों ने बताया कि उनकी गौशाला में लगभग 1500 गायें हैं और बारिश न होने के कारण चारे के साथ-साथ पशुओं के रख-रखाव हेतु टिन शेड की सख्त आवश्यकता है। उन्होंने 3 से 5 टिन शेड और तूड़ी उपलब्ध कराने का निवेदन किया। प्रतिनिधियों ने आश्रम द्वारा किए जा रहे परोपकारी कार्यों की भूरि-भूरि प्रशंसा की और आभार व्यक्त किया। संत रामपाल जी महाराज ने दोनों मांगों को सहर्ष स्वीकार करते हुए कहा कि तीसरे-चौथे दिन तक चारे की आपूर्ति कर दी जाएगी और शेड निर्माण का कार्य भी क्रमबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा।

मालवी, जींद (हरियाणा) के ग्रामीणों ने व्यक्त किया आभार; जलापूर्ति हेतु पाइप और मोटर का मिला आश्वासन

हरियाणा के जींद जिले स्थित मालवी गांव से आए ग्रामीणों और किसानों के एक दल ने संत रामपाल जी महाराज से भेंट की। ग्रामीणों ने बताया कि आश्रम की ओर से पूर्व में भी उनके गांव को शुद्ध पेयजल सेवा अभियान और कृषि सहायता (जैसे यूरिया, डीएपी और कीटनाशक दवाइयां) के माध्यम से काफी सहायता प्रदान की गई है, जिसके लिए उन्होंने गहरा आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार से आश्रम समाज सेवा कर रहा है, वैसी व्यवस्था सरकार भी नहीं कर पाती। इस बार उन्होंने गांव की पेयजल और सिंचाई संबंधी आवश्यकताओं को देखते हुए पाइप और मोटर उपलब्ध कराने की मांग की। संत रामपाल जी महाराज ने प्रतिनिधियों का स्वागत किया और आश्वस्त किया कि आश्रम के सेवादारों द्वारा मौके पर जाकर जायज जरूरतों का सर्वे कराया जाएगा और दो दिनों के भीतर पाइप व मोटर गांव तक पहुंचा दिए जाएंगे।

समाज सेवा और गौ-रक्षा की अनुपम मिसाल

सतलोक आश्रम में विभिन्न जिलों, गांवों और सामाजिक पृष्ठभूमियों से आने वाले जनसमूह यह प्रमाणित करते हैं कि संत रामपाल जी महाराज का दरबार अकाल, प्राकृतिक आपदा और संकट के समय हर जरूरतमंद के लिए संबल बना हुआ है। बेसहारा गौवंश के संरक्षण से लेकर गांवों में जलापूर्ति और किसान-गरीब कल्याण तक, आश्रम द्वारा निष्पक्ष और निस्वार्थ भाव से की जा रही सेवा समाज के लिए प्रेरणास्रोत बनी हुई है।

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