रिलीज के दो दिन बाद भारत में ZEE5 से हटाई गई ‘सतलुज’, जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित फिल्म फिर चर्चा में. मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित अभिनेता दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘सतलुज’ रिलीज के महज दो दिन बाद भारत में ZEE5 से हटा दी गई है। ZEE5 ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि मौजूदा परिस्थितियों के मद्देनजर फिल्म अगली सूचना तक भारत में उपलब्ध नहीं रहेगी। हालांकि, ZEE5 Global पर यह फिल्म अंतरराष्ट्रीय दर्शकों के लिए स्ट्रीम होती रहेगी। इससे पहले यह फिल्म सेंसर संबंधी अड़चनों के कारण करीब तीन वर्षों तक रिलीज नहीं हो सकी थी।
फिल्म हटाए जाने के बाद एक बार फिर बड़ा सवाल चर्चा में है—जसवंत सिंह खालड़ा कौन थे, उन्होंने ऐसा क्या उजागर किया था और उनकी कहानी तीन दशक बाद भी इतनी संवेदनशील क्यों बनी हुई है?
मुख्य बात: ‘सतलुज’ का भारत में हटाया जाना केवल एक फिल्म की उपलब्धता का मामला नहीं है। इससे मानवाधिकार, ऐतिहासिक स्मृति, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और न्याय की लंबी लड़ाई पर नई बहस शुरू हुई है।
Jaswant Singh Khalra News: प्रमुख बातें
- दिलजीत दोसांझ अभिनीत फिल्म ‘सतलुज’ 3 जुलाई को ZEE5 पर रिलीज हुई।
- रिलीज के दो दिन बाद ZEE5 ने भारत में फिल्म को अपनी लाइब्रेरी से हटा दिया।
- ZEE5 ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों के मद्देनजर फिल्म अगली सूचना तक भारत में उपलब्ध नहीं रहेगी।
- फिल्म पहले ‘Punjab ’95’ शीर्षक से बनाई गई थी।
- 2022 में फिल्म को CBFC के समक्ष प्रमाणन के लिए भेजा गया था।
- रिपोर्ट के अनुसार CBFC ने 127 कट लगाने और शीर्षक बदलने का सुझाव दिया था।
- फिल्म मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित है।
- निर्देशक हनी त्रेहान और निर्माता रॉनी स्क्रूवाला की RSVP तथा MacGuffin Pictures ने फिल्म का निर्माण किया है।
ZEE5 ने भारत में ‘सतलुज’ क्यों हटाई?

रविवार (5 जुलाई) को जारी बयान में ZEE5 ने कहा, “वर्तमान परिस्थितियों के मद्देनजर ‘सतलुज’ अगली सूचना तक भारत में उपलब्ध नहीं रहेगी।” प्लेटफॉर्म ने यह भी कहा कि वह सभी उचित प्रक्रियाओं के माध्यम से फिल्म को भारतीय दर्शकों तक दोबारा पहुंचाने के हर संभव विकल्प पर काम करता रहेगा।
ZEE5 ने दर्शकों से मिले “अभूतपूर्व प्रतिसाद” के लिए उनका धन्यवाद भी किया और कहा कि वह फिल्म की रचनात्मक दृष्टि के साथ खड़ा है। प्लेटफॉर्म के अनुसार, प्रभावशाली कहानियां लोगों को प्रेरित करने और लंबे समय तक असर छोड़ने की क्षमता रखती हैं तथा रचनाकारों और प्रामाणिक कहानी कहने के प्रति उसकी प्रतिबद्धता बनी हुई है।
हालांकि भारत में फिल्म हटा दी गई है, लेकिन ZEE5 Global पर यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपलब्ध है।
कौन थे जसवंत सिंह खालड़ा?
जसवंत सिंह खालड़ा अमृतसर के रहने वाले मानवाधिकार कार्यकर्ता थे। उन्होंने 1980 और 1990 के दशक में पंजाब में उग्रवाद के दौर के दौरान हजारों सिख युवाओं के कथित लापता होने के मामलों को उठाया। बाद में इनमें से कई लोगों के कथित फर्जी मुठभेड़ों में मारे जाने की बात सामने आई।
कोऑपरेटिव बैंक के निदेशक रहे खालड़ा बाद में मानवाधिकार आंदोलन से जुड़े। उन्हें शिरोमणि अकाली दल के मानवाधिकार प्रकोष्ठ का महासचिव भी बनाया गया था, जिसका गठन कथित न्यायेतर हत्याओं के मामलों की जांच के लिए किया गया था।
1995 में हुआ अपहरण, बाद में हत्या का मामला
रिपोर्ट के अनुसार 6 सितंबर 1995 को जसवंत सिंह खालड़ा का अमृतसर स्थित उनके आवास से कथित तौर पर तत्कालीन पंजाब पुलिस अधिकारियों के निर्देश पर अपहरण कर लिया गया। आरोप है कि उन्हें झबाल पुलिस स्टेशन में प्रताड़ित किया गया, बाद में गोली मारकर उनकी हत्या कर दी गई और शव को हरिके पुल के निकट सतलुज नदी में फेंक दिया गया।
उनकी पत्नी परमजीत कौर द्वारा दायर याचिका पर 1996 में सुप्रीम कोर्ट ने मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपने का आदेश दिया।
रिपोर्ट के अनुसार पटियाला की अदालत ने पुलिसकर्मियों को इस मामले में दोषी ठहराया था और बाद में सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले को बरकरार रखा। इसी अवधि में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने उग्रवाद के दौर में लावारिस शवों के अंतिम संस्कार से जुड़े मामलों की जांच के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित करने का निर्देश भी दिया था।
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आज परमजीत कौर खालड़ा मिशन ऑर्गेनाइजेशन का संचालन करती हैं। वर्ष 2025 में अमेरिका के कैलिफोर्निया स्थित फ्रेज़्नो में एक प्राथमिक विद्यालय का नाम जसवंत सिंह खालड़ा के नाम पर रखा गया, जिसे इस तरह का पहला विद्यालय बताया गया।
प्रत्यक्षदर्शी राजीव सिंह रंधावा ने क्या बताया?
करीब 31 वर्ष बाद भी राजीव सिंह रंधावा ने दावा किया कि उन्हें 6 सितंबर 1995 की घटना आज भी स्पष्ट रूप से याद है।
उन्होंने बताया कि वह उस सुबह रिपोर्टिंग के लिए जसवंत सिंह खालड़ा के घर पहुंचे थे। उनके अनुसार सुबह लगभग 9 बजे के बीच उन्होंने बाहर हलचल सुनी। जब वह गेट तक पहुंचे तो उन्होंने पंजाब पुलिस के कर्मियों को जसवंत सिंह खालड़ा को जबरन ले जाते देखा।
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रंधावा के अनुसार उन्होंने अधिकारियों से कहा था कि यदि वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक पूछताछ करना चाहते हैं तो वे स्वेच्छा से साथ चलने को तैयार हैं, लेकिन उन्हें धक्का देकर गिरा दिया गया और जसवंत सिंह खालड़ा को वैन में ले जाया गया।
रंधावा ने कहा कि जसवंत सिंह खालड़ा की कहानी किताबों से सीमित पाठकों तक पहुंची, लेकिन दिलजीत दोसांझ जैसे अभिनेता की फिल्म लाखों लोगों तक यह कहानी पहुंचा सकती है और मानवाधिकारों के महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ा सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि न्याय की लड़ाई सबसे कठिन दौर था और इसमें परमजीत कौर खालड़ा ने अपने दो छोटे बच्चों की परवरिश के साथ लगातार संघर्ष किया।
‘Punjab ’95’ से ‘Satluj’ तक का सफर
फिल्म के निर्माण से पहले निर्माताओं ने खालड़ा परिवार की सहमति प्राप्त की थी।
फिल्म का मूल शीर्षक ‘Punjab ’95’ था। 2022 में इसे CBFC के पास प्रमाणन के लिए भेजा गया। रिपोर्ट के अनुसार बोर्ड ने 127 कट लगाने और शीर्षक बदलने का सुझाव दिया। इसके बाद निर्माताओं ने बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया, हालांकि बाद में मामला वापस ले लिया गया।
वर्ष 2023 में फिल्म का टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में प्रस्तावित प्रीमियर भी वापस ले लिया गया। करीब तीन वर्षों तक अटकी रहने के बाद निर्माताओं ने सिनेमाघरों में रिलीज की योजना छोड़ते हुए इसे सीधे ZEE5 पर रिलीज करने का फैसला किया।
निर्देशक हनी त्रेहान ने कहा कि प्लेटफॉर्म पर रिलीज हुआ संस्करण वही पूर्ण फिल्म है, जैसा वह शुरू से दर्शकों तक पहुंचाना चाहते थे।
फिल्म हटने पर निर्देशक और दिलजीत दोसांझ की प्रतिक्रिया
निर्देशक हनी त्रेहान ने द इंडियन एक्सप्रेस से कहा कि उन्हें रविवार शाम करीब 8:15 बजे भारत में फिल्म हटाए जाने की जानकारी मिली। उन्होंने कहा कि इस घटनाक्रम पर उनकी तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं है और उन्हें स्वयं इस फैसले की जानकारी बाद में मिली।
फिल्म हटाए जाने से पहले सोशल मीडिया पर एक लाइव बातचीत के दौरान दिलजीत दोसांझ ने कहा था कि उन्हें आशंका थी कि फिल्म हटाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि उम्मीद है दर्शकों ने तब तक फिल्म डाउनलोड कर ली होगी।
दिलजीत दोसांझ इससे पहले भी पंजाब में उग्रवाद के दौर से जुड़े विषयों पर काम कर चुके हैं। उनकी फिल्म ‘Punjab 1984’ वर्ष 2014 में रिलीज हुई थी। इसके बाद वह 1988 में मारे गए गायक अमर सिंह चमकीला के जीवन पर आधारित ‘Chamkila’ में भी नजर आए।
दल खालसा की प्रतिक्रिया
दल खालसा के प्रवक्ता कंवर पाल सिंह ने कहा कि भारत में ‘सतलुज’ पर रोक लगाने से पंजाब में उग्रवाद के दौर की घटनाओं की स्मृतियां समाप्त नहीं होंगी। उन्होंने कहा कि फिल्म मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित है और यह उन घटनाओं से जुड़ी है जिन्हें पंजाब के लोगों ने स्वयं देखा और झेला है।
इस घटनाक्रम का महत्व
‘सतलुज’ का भारत में हटाया जाना केवल एक फिल्म तक सीमित मामला नहीं रहा, बल्कि इससे जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन, उनके मानवाधिकार अभियान, फिल्म के लंबे प्रमाणन विवाद और इसके सार्वजनिक प्रदर्शन को लेकर नई चर्चा शुरू हुई है। ZEE5 ने कहा है कि वह उचित प्रक्रिया के माध्यम से फिल्म को दोबारा भारतीय दर्शकों तक पहुंचाने के विकल्प तलाशता रहेगा।
मानवाधिकार का वास्तविक अर्थ क्या है?
मानवाधिकार का अर्थ केवल किसी एक धर्म, जाति, भाषा या क्षेत्र के व्यक्ति के अधिकारों की रक्षा करना नहीं है। मानवाधिकार का मूल विचार है कि प्रत्येक मनुष्य का जीवन मूल्यवान है और हर व्यक्ति को न्याय, सम्मान और निष्पक्ष प्रक्रिया का अधिकार मिलना चाहिए।
किसी भी सभ्य समाज में कानून का शासन अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। अपराध का आरोप कितना भी गंभीर क्यों न हो, जांच और दंड की प्रक्रिया कानून के अनुसार होनी चाहिए। न्यायेतर हिंसा, जबरन गुमशुदगी और बिना निष्पक्ष प्रक्रिया के दंड जैसे आरोप लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर प्रश्न पैदा करते हैं।
जसवंत सिंह खालड़ा की कहानी का व्यापक संदेश यही है कि सत्ता के सामने भी मानव जीवन और न्याय के प्रश्न उठाए जा सकते हैं।
संत रामपाल जी महाराज का मानवता, समानता एवं सामाजिक सद्भाव का संदेश
जसवंत सिंह खालड़ा का जीवन मानवाधिकारों की रक्षा, न्याय की स्थापना और मानवीय गरिमा के लिए किए गए संघर्ष का महत्वपूर्ण अध्याय है। उनके जीवन से जुड़े घटनाक्रम यह स्मरण कराते हैं कि किसी भी सभ्य समाज की वास्तविक पहचान न्याय, संवेदनशीलता और प्रत्येक व्यक्ति के सम्मान में निहित होती है। इसी संदर्भ में तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज का सतज्ञान मानवता, समानता और सामाजिक शांति का व्यापक आध्यात्मिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है।
मानवता को सर्वोपरि मानने का संदेश:
संत रामपाल जी महाराज का मूल संदेश है—“जीव हमारी जाति है, मानव धर्म हमारा।” यह विचार जाति, धर्म, भाषा और क्षेत्रीय सीमाओं से ऊपर उठकर सम्पूर्ण मानव समाज को एक परिवार के रूप में देखने की प्रेरणा देता है। मानवाधिकारों की रक्षा का मूल आधार भी यही है कि प्रत्येक व्यक्ति समान सम्मान, सुरक्षा और न्याय का अधिकारी है।
अहिंसा, शांति और भाईचारे का मार्ग:
संत रामपाल जी महाराज का सतज्ञान मनुष्य को अहंकार, क्रोध, हिंसा, प्रतिशोध, लोभ और द्वेष जैसी प्रवृत्तियों से दूर रहने की शिक्षा देता है। उनके अनुसार प्रतिशोध संघर्ष को जन्म देता है, जबकि क्षमा, संयम और पारस्परिक सद्भाव ही स्थायी शांति का आधार बनते हैं। सामाजिक सौहार्द और भाईचारा किसी भी स्वस्थ समाज की सबसे बड़ी शक्ति हैं।
समानता और मानवीय गरिमा की स्थापना:
आध्यात्मिक दृष्टि से संत रामपाल जी महाराज बताते हैं कि प्रत्येक मनुष्य एक ही पूर्ण परमात्मा की संतान है। इसलिए जाति, धर्म, भाषा, क्षेत्र या किसी अन्य आधार पर भेदभाव करना मानवता के मूल सिद्धांतों के विरुद्ध है। उनका संदेश सभी लोगों के लिए समान अधिकार, सम्मान और गरिमा की भावना को सुदृढ़ करता है।
न्याय, करुणा और सामाजिक सुधार का संदेश:
जिस प्रकार जसवंत सिंह खालड़ा ने न्याय, निष्पक्षता और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए आवाज़ उठाई, उसी प्रकार संत रामपाल जी महाराज का दर्शन भी यह सिखाता है कि न्याय प्रत्येक व्यक्ति के लिए समान रूप से उपलब्ध होना चाहिए। वे वैचारिक जागरण के माध्यम से नशामुक्ति, दहेज प्रथा का उन्मूलन, सामाजिक कुरीतियों का त्याग तथा नैतिक एवं आध्यात्मिक जीवन अपनाने का संदेश देकर मानव कल्याण का मार्ग प्रशस्त करते हैं।
मानवता सर्वोच्च मूल्य के रूप में स्थापित हो
जसवंत सिंह खालड़ा का जीवन न्याय और मानवाधिकारों के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक है। वहीं संत रामपाल जी महाराज का आध्यात्मिक संदेश करुणा, समानता, अहिंसा और भाईचारे के माध्यम से ऐसे समाज के निर्माण की प्रेरणा देता है, जहाँ प्रत्येक व्यक्ति की गरिमा सुरक्षित रहे और मानवता सर्वोच्च मूल्य के रूप में स्थापित हो।
जिस प्रकार किसी राष्ट्र को सही दिशा देने के लिए सक्षम नेतृत्व आवश्यक है, उसी प्रकार आत्मकल्याण के लिए पूर्ण सतगुरु का मार्गदर्शन आवश्यक है। सच्चे परमात्मा कौन हैं, पूर्ण सतगुरु की पहचान क्या है और मोक्ष कैसे संभव है, यह जानने के लिए Sant Rampal Ji Maharaj YouTube Channel पर शास्त्र-आधारित आध्यात्मिक प्रवचन देखें।
FAQs on Jaswant Singh Khalra
1. जसवंत सिंह खालड़ा कौन थे?
वे अमृतसर के मानवाधिकार कार्यकर्ता थे, जिन्होंने पंजाब में कथित जबरन गायब किए गए लोगों के मामलों को उठाया।
2. ‘सतलुज’ फिल्म किस पर आधारित है?
यह फिल्म जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन और उनके मानवाधिकार अभियान पर आधारित है।
3. ZEE5 ने ‘सतलुज’ क्यों हटाई?
ZEE5 ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों के कारण फिल्म अगली सूचना तक भारत में उपलब्ध नहीं रहेगी।
4. फिल्म का पहले क्या नाम था?
फिल्म का मूल शीर्षक ‘Punjab ’95’ था, जिसे बाद में बदलकर ‘Satluj’ किया गया।
5. फिल्म कब रिलीज हुई थी?
‘सतलुज’ 3 जुलाई को ZEE5 पर रिलीज हुई थी और दो दिन बाद भारत में हटा दी गई।



