इमरती देवी कमलनाथ (Imarti Devi Kamal Nath) आइटम विवाद Hindi News: इमरती देवी को कमलनाथ द्वारा आइटम बताने वाले बयान पर मध्य प्रदेश में बवाल. मध्य प्रदेश में 3 नवम्बर को होने वाले उपचुनाव के पहले ही राजनीतिक बयान बाजी देखने मिल रही है। मध्य प्रदेश में कमलनाथ द्वारा इमरती देवी पर की गई टिप्पणी से राजनीतिक तना तनी का माहौल बना हुआ है जिस पर कमलनाथ ने अपनी सफाई भी पेश की है वहीं भाजपा के नेताओं ने धरना प्रदर्शन किया। यह भी जानिए कि सतभक्ति करती है शुचिता मनसा वाचा कर्मणा तीनों से।

इमरती देवी कमलनाथ (Imarti Devi Kamal Nath) आइटम विवाद के मुख्य बिंदु

  • मध्य प्रदेश पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ द्वारा इमरती देवी को एक जनसभा में “आइटम” कहा गया। यह दूसरी बार है जब किसी नेता ने इमरती देवी पर टिप्पणी की है
  • आइटम टिप्पणी पर इमरती देवी ने कहा कि वे गरीब परिवार से हैं और दलित हैं जिसमें उनका क्या कसूर है? कमलनाथ के इस बयान पर इमरती देवी ने दिया जवाब
  • सियासी विवादित टिप्पणी ने महाभारत का रूप लिया और पक्ष विपक्ष में शुरू हुई तना तनी
  • अचार, व्यवहार और भाषा पर लगाम होगा सत्संग, सद्भक्ति और विवेक से

कमलनाथ सिंह की इमरती देवी पर आपत्ति जनक टिपण्णी

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ सिंह डबरा में सुरेश राजे के समर्थन में प्रचार करने पहुँचे और उस समय वहाँ जनसभा पर उन्होंने इमरती देवी का नाम याद न आने पर उन्हें आइटम कहकर संबोधित कर दिया जिससे पक्ष विपक्ष दोनों ही पार्टियों में मचा बवाल। उन्होंने कहा कि “सुरेश राजे हमारे उम्मीदवार हैं। सरल व सीधे स्वभाव के हैं….यह उसके जैसे नहीं हैं। क्या है उसका नाम?…..आपको तो मुझे पहले ही सावधान कर देना चाहिए था ‘यह क्या आइटम है।’ “

इमरती देवी कमलनाथ (Imarti Devi Kamal Nath): कांग्रेस नेता अजय सिंह भी कर चुके हैं विवादित टिप्पणी

इमरती देवी पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अजय सिंह भी विवादित टिप्पणी कर चुके हैं। उन्होंने इमरती देवी को सम्बोधित करते हुए कहा था कि जनता 3 नवम्बर को इमरती देवी की जलेबी बना देगी। जानकारी के लिए बता दें कि इमरती देवी ने कुछ समय पूर्व ही कांग्रेस छोड़कर बीजेपी पार्टी की ओर रुख किया था। इसके पहले वे कमलनाथ सरकार में महिला एवं बाल विकास मंत्री थीं। बताया जाता है कि वे ज्योतिरादित्य सिंधिया की कट्टर समर्थक हैं।

कमलनाथ ने कहा कि नाम याद न आने के कारण बोला आइटम

मध्य प्रदेश पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने दोबारा दिए बयान में कहा कि आइटम कोई असम्मानजनक शब्द नहीं है तथा इमरती देवी का नाम याद न आने के कारण उन्होंने ‘जो यहाँ की आइटम हैं’ प्रयुक्त किया। उन्होंने कहा कि जब लोकसभा में सूची आती है तब उसमें भी लिखा होता है आइटम नम्बर 1, आइटम नम्बर 2। पूर्व मुख्यमंत्री ने आइटम टिप्पणी को लेकर कोई भी गलत इरादा या दुर्भावना होना नहीं बताया है। उन्होंने कहा कि यह असम्मानजनक शब्द नहीं है। वहीं इमरती देवी ने कानूनी कार्यवाही करने की बात कही है और सोनिया गांधी से अपील करते हुए कहा कि इस तरह के लोगों को पार्टी में स्थान न दें। उन्होंने 20 वर्ष कांग्रेस की सेवा की। दूसरी ओर भाजपा के कई नेताओं ने प्रदेश के अलग अलग स्थानों पर इमारती देवी के सम्मान में धरना प्रदर्शन किया है।

इमरती देवी का अपमान मध्य प्रदेश की बेटी का अपमान:ज्योतिरादित्य सिंधिया

ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि एक गरीब और दलित वर्ग की आगे आई महिला के लिए आइटम और जलेबी कहना निंदनीय और आपत्तिजनक है। वहीं शिवराज सिंह चौहान ने कड़े शब्दों में पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ की निंदा की व सोमवार सुबह 10 से 12 बजे तक भोपाल में इमरती देवी के सम्मान में धरना प्रदर्शन किया। उनका कहना है कि इमरती देवी का अपमान मध्य प्रदेश की बेटी के, बहनों के, धरती के अपमान के समान है। वर्षों तक जिस बेटी ने कांग्रेस की सेवा की उसके लिए असम्मानजनक शब्दों का प्रयोग ठीक नहीं है।

कौन हैं इमरती देवी?

इमरती देवी मध्य प्रदेश में दतिया के गांव चबरा में पैदा हुईं। हायर सेकेंडरी की शिक्षा प्राप्त कर चुकीं इमरती देवी का मुख्य व्यवसाय कृषि रहा है। 2004 से 2009 के बीच जिला पंचायत ग्वालियर व कृषि उपज मंडी ग्वालियर की सदस्य, 2008 में तेरहवीं विधानसभा की निर्वाचित सदस्य, 2008 से 2011 तक पुस्तकालय समिति की सदस्य, 2011 से 2014 तक महिला एवं बालक कल्याण समिति की सदस्य रहीं फिर क्रमशः 2013 व 2015 में डबरा क्षेत्र से विधानसभा सदस्य निर्वाचित हुईं। इमरती देवी अनुसूचित जाति/जनजाति हित रक्षा संघ की संरक्षक भी रही हैं। 25 दिसम्बर 2018 में कैबिनेट में मंत्रीपद की शपथ ली उसके बाद शिवराज सरकार से जुड़ने के बाद 2 जुलाई 2020 में फिर उन्होंने कैबिनेट मंत्री की शपथ ग्रहण की।

सत्संग किस प्रकार करता है विवेक और वाचन संयमित?

सत्संग हो वह भी पूर्ण तत्वदर्शी संत का हो तब विचारों और व्यवहार में परिवर्तन आता है। व्यक्ति के लिए कोई पद या विशेष मान की इच्छा से अधिक महत्व आचरण और आत्मा के गहने अर्थात सदाचार, विवेक, संयम रखते हैं। व्यक्ति प्रत्येक क्षण परमात्मा को ध्यान में रखकर कार्य करता है। ना तो स्वयं कोई अप्रिय कथन कहता और न ही किसी अन्य के विषय में अटकलबाजी करता है। वह जानता है कि परमात्मा के पास सबका लेखा है। अल्लाह कबीर सबके दिलों की बात जानता है अतः किसी की गलती का ढिंढोरा पीटने का बीड़ा वह नहीं उठाता। सत्य भक्ति करते साधक के मन, कर्म और वचन में तालमेल बना रहता है। यही उसके जीवन और भाषा मे भी स्पष्ट लक्षित होता है। व्यक्ति में दास भाव बना रहता है और वह भक्ति की प्रथम अनिवार्यता है। कबीर परमात्मा कहते हैं,

राज तजना सहज है, सहज त्रिया का नेह |
मान, बड़ाई, ईर्ष्या, दुर्लभ तजना येह ||

अर्थात राज-पाट त्यागना, स्त्री का प्रेम त्यागना आसान है किंतु मान, बड़ाई की इच्छा, ईर्ष्या इसे त्यागना अत्यंत कठिन कार्य है। दास भाव लाना एक कठिन कार्य है जो एक पूर्ण संत की शरण में सत भक्ति करता हुआ भक्त ही कर सकता है।

पूर्णगुरु की शरण ग्रहण कर बचें बुराइयों से

पूर्ण तत्वदर्शी संत की शरण लें और बुराइयों से बचें साथ ही अपने परिवार और बच्चों को भी बचाएं। मनुष्य में बुराई एक नहीं हजारों होती हैं। साथ ही वह नित्य नई बुराइयाँ गढ़ता रहता है जैसे दहेज, नशा, मान, ईर्ष्या आदि। इन से बचेंगे तब मोक्ष हो सकेगा। जब मोक्ष होगा तब 84 लाख योनियों से बचेंगे। इसे ध्यान रखें और पूरे विश्व में एकमात्र पूर्ण तत्वदर्शी संत “संत रामपाल जी महाराज जी” की शरण ग्रहण करें। अधिक जानकारी के लिए सुनें सतलोक आश्रम यूट्यूब चैनल