Good Governance Day Hindi सुशासन दिवस पर जाने कैसे आएगा सुशासन

Good Governance Day (Hindi): सुशासन दिवस पर जानिए कैसे आएगा सुशासन?

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Good Governance Day Hindi: आपको बता दें कि भारत में सुशासन नामक दिवस मनाने का कारण बड़ा ही अनूठा है। यह दिवस हमारे भारत के दसवें प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी के जन्म दिन के रूप में मनाया जाता है। अटल जी के विलक्षण व्यक्तित्व के कारण ही आज उन्हें यह दिवस समर्पित किया गया है। भारत सरकार द्वारा घोषणा की गई है कि प्रत्येक वर्ष 25 दिसंबर को सुशासन दिवस के रूप में अटल बिहारी वाजपेयी जी का जन्म दिन मनाया जाएगा।

सुशासन दिवस (Good Governance Day Hindi): मुख्य बिंदु

  • प्रत्येक वर्ष 25 दिसंबर को सुशासन दिवस मनाया जाता है।
  • भारत के दसवें प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती को सुशासन दिवस के नाम से मनाया जाता है।
  • सुशासन अर्थात वह शासन जिसमें गुणवत्ता हो एवं वह स्वयं में एक सौम्य(उचित) मूल्य व्यवस्था को ग्रहण करता हो।
  • सुशासन दिवस मनाने का प्रयोजन है कि आम आदमियों का कल्याण व भलाई हो सके। 
  • संत रामपाल जी महाराज के अद्वितीय संकल्प से मानव समाज, सुराज्य की ओर बढ़ रहा है।

Good Governance Day 2021: क्यों मनाया जाता है सुशासन दिवस?

अटल बिहारी वाजपेयी जी और पंडित मदन मोहन मालवीय (मृत्यूपरांत) को भारत के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार, भारत रत्न से सम्मानित करने हेतु 23 दिसंबर 2014 को घोषणा की गई थी। इसके पश्चात, भारत सरकार  द्वारा घोषणा की गई कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की जयंती को भारत में प्रत्येक वर्ष सुशासन दिवस के नाम से मनाया जाएगा। दूसरी ओर यदि देखा जाए तो इस निष्कर्ष पर मुख्य विपक्षी दल, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने टीका-टिप्पणी की थी। 25 दिसंबर को क्रिसमस के साथ-साथ इस दिन सरकार के कार्य दिवस के रूप में घोषित करने के लिए सुशासन दिवस की शुरुआत की गई थी।

वाजपेयी जी का संक्षिप्त जीवन परिचय

अटल जी का जन्म 25 दिसंबर 1924 को मध्यप्रदेश (ग्वालियर) में हुआ था। अटल जी का जीवन बहुत सरल एवं उत्तम था। अटल जी हिंदी कवि होने के साथ-साथ एक प्रखर वक्ता एवं पत्रकार भी थे। वे जीवन भर भारतीय राजनीति में लीन रहे। वे बीजेपी की ओर से अपना विचार रखते थे। अटलजी (Atal Bihari Vajpayee) हमारे देश के प्रधानमंत्री भी रह चुके थे। आपको बता दें कि 2005 में उन्होंने राजनीति से संन्यास ले लिया था। 16 अगस्त 2018 को अटल जी का बीमारी के चलते निधन हो गया। वे जीवन में हर भारतीय को खुश एवं उन्नत देखता चाहते थे ।

सुशासन दिवस (Good Governance Day Hindi) का पुरावृत्त

आइए जानते है सुशासन नामक दिवस का पुरावृत्त क्या है। 2014 में भारत के पूर्व प्रधानमंत्री (दसवें ) श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी का जन्मदिन भारत सरकार द्वारा प्रत्येक वर्ष सुशासन दिवस के नाम से मनाने की घोषणा की गई। अटल जी के जन्मदिन को सुशासन दिवस के रूप में सुशोभित किया गया और इस नाम से भारतीय जनता इसको मनाती है। अटल जी जन्मदिन पर सुशासन दिवस की प्रथम घोषणा भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के माध्यम से की गई थी। 

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अटलजी ऐसे व्यक्तित्व के धनी थे कि वह विचारो को पहले स्वयं पर लागू करते थे फिर शासन में लाते थे। इसको मध्य नजर रखते हुए सुशासन दिवस की घोषणा “ई-गवर्नेंस के माध्यम से सुशासन” के आधार पर की गई। इस सुशासन दिवस के कार्यक्रम में सर्व सरकारी अधिकारियों को आमंत्रित करके, सबके साथ मिलकर मनाया जाता है। इस कार्यक्रम में एक दिन की लंबी प्रदर्शनी का आयोजन करके और सरकारी अधिकारियों को भाग लेने के साथ ही ई-गवर्नेंस और प्रदर्शनी के माध्यम से उन्हें जागरूक किया जाता है ।

सुशासन दिवस (Good Governance Day Hindi) के उपलक्ष्य में आयोजन

सुशासन दिवस के उपलक्ष्य में सरकारी कार्यालयों, स्कूलों, कॉलेजों और अन्य शिक्षण संस्थानों में विभिन्न गतिविधियों का आयोजन करके सुशासन दिवस को मनाने का संदेश दिया जाता है। स्कूलों और कॉलेजों के विद्यार्थियों द्वारा गतिविधियों में भाग लिया जाता है जिसमें निबंध लेखन प्रतियोगिता, वाद-विवाद, समूह चर्चा, प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता, खेल आदि कराए जाते हैं। इसका उद्देश्य एक ही है कि सब सुशासन के अर्थ से रूबरू हो सकें। सभी के अंदर अटलजी के समान कार्य करने की प्रेरणा उत्पन्न हो सके। लोगों को पता चल सके कि अटल जी का मुख्य उद्देश्य क्या था।

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विद्यार्थियों की सुगमता के लिए प्रतियोगिताओं की ऑनलाइन व्यवस्था भी करवाई जाती है। जिसमें ऑनलाइन निबंध लेखन, ऑनलाइन प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता, आदि। इसका सीधा अर्थ है कि ऑफलाइन /ऑनलाइन किसी भी तरह बच्चे इस आयोजन के भागीदार बन सकते हैं। बच्चों को पुरुस्कार से सम्मानित भी किया जाता है। जिससे बच्चों में उत्साह उमड़ता है ।

Good Governance Day Hindi: सुशासन के उत्तम लक्षण 

सुशासन में निर्णय लेने के लिए जनता को स्वतंत्र होना चाहिए। कानूनी नियम मुख्य रूप से लोगों के अधिकारों से संबंधित होने चाहिए एवं यह कानून सभी पर निष्पक्ष रूप से लागू होना चाहिए। प्रत्येक प्रयोजन की सूचना हेतु पारदर्शिता सुनिश्चित होनी चाहिए। हर भारतीय को उसके हक और हित के लिए प्रयास करने का मौका मिले ये सुशासन की निशानी है। इसके साथ ही सभी में व्यापक सहमति हो, पूरे समाज को पता लग सके कि कोई भी योजना सर्वोत्तम हित में है और इसे कैसे लागू किया जाए। इसलिए भागीदारी, विधि का शासन, पारदर्शिता, जवाबदेही, आम सहमति, प्रभावशीलता और दक्षता के साथ जवाबदेही भी होनी चाहिए तभी एक सर्वोत्तम सुशासन तैयार हो सकता है ।

Good Governance Day 2021 (Hindi): सुशासन दिवस मनाने के प्रयोजन 

निम्न प्रयोजनों की उपलब्धि हेतु अटल बिहारी वाजपेयी जी का जन्मदिन सुशासन दिवस के मनाने के बाबत घोषित हुआ।

  • मुख्य प्रयोजन है कि सरकार द्वारा जो प्रक्रिया है उन्हें व्यवहारिक बनाकर देश में – “खुला और  जवाबदेह प्रशासन”  आदान – प्रदान  किया जा सके।
  • भारत की आम जनता को सरकार के समीप लाकर सुशासन की प्रक्रिया में उन्हें क्रियाशील भागीदार बनाने हेतु।
  • मुनाफ़ा और प्रगति को सुशासन के माध्यम से देश में बढ़ाने के लिए।
  • सरकारी अधिकारियों को भीतरी प्रक्रियाओं एवं उनके कार्य हेतु प्रतिबद्धता के लिए भी सुशासन दिवस मनाया जाता है।
  • सुशासन दिवस का प्रयोजन है कि आम जनता का कल्याण एवं भलाई हो सके ।
  • सुशासन दिवस () देश में एक जवाबदेह प्रशासन और पारदर्शी व्यवस्था मुहैया करवाने हेतु सरकार की प्रतिबद्धता के सम्बंध में जनता को रूबरू करने के लिए भी मनाया जाता है ।
  • भारत में शक्तिशाली नीतियां लागू हो सकें एवं सुशासन का उद्देश्य पूरा करने के लिए मनाया जाता है।

मानव को सुखी सतभक्ति के माध्यम से  ही किया जा सकता है

मानव को सुख पूर्ण परमात्मा ही दे सकते है और ऐसा सुख पाने के लिए सतभक्ति जरूरी है।  वास्तविक भक्ति पाने के लिए ज्ञान का होना जरूरी है। ऐसा निर्मल ज्ञान केवल संत रामपाल जी महाराज के द्वारा ही बताया जा रहा है। उनके द्वारा ही सत्य ज्ञान का प्रचार किया जा रहा है। संत जी के भक्त कभी भी किसी को दुख हानि नहीं पहुंचाते है। कभी भी कोई नशा नहीं करते है। इसलिए इस ज्ञान को यदि पूरा विश्व समझता है तो शांति ही रहेगी। कोई भी देश एक दूसरे से लड़ने के बारे में नहीं सोचेगा। इसलिए संत रामपाल जी महाराज जी के निर्मल ज्ञान व मानव देह का मूल्य समझ कर सतभक्ति करने का अटल संकल्प ले और जीवन का कल्याण कराए।

संत गरीब दास  जी कहते हैं कि –

राम नाम निज सार है, राम नाम निज मूल।

राम नाम सौदा करो, राम नाम न भूल ।।

यदि हम इस बात को ध्यान में रखते हुए कर्म करते हैं तो परमात्मा हमें सर्व सुख प्रदान करते है, फिर हमें अपने अधिकारों को प्राप्त करने के लिए किसी भी व्यक्ति के आगे हाथ नहीं फैलाने पड़ते हैं । 

संत रामपाल जी महाराज के सतज्ञान से सुशासन आ सकता है  

मनुष्य को मूल कर्तव्य से अवगत कराता है संत रामपाल जी महाराज का ज्ञान। संत रामपाल जी महाराज ने अपने अनमोल ज्ञान के आधार पर मानव समाज को सर्व बुराइयों से मुक्त कराने का जो बीड़ा उठाया है वह निश्चित रूप से अद्वितीय है। आध्यात्मिक ज्ञान के आभाव से विश्व का मानव अपने मूल उद्देश्य से भटक चुका है। यदि हम सद्गुणों को ग्रहण करें तो हम धार्मिक बनेंगे धार्मिक बनकर हम भविष्य में होने वाले महाकष्ट से बचेंगे। सीधे शब्दो में कहें तो मानव जीवन का मूल उद्देश्य भक्ति करके भगवान के पास जाना है। संत रामपाल जी महाराज की अद्वितीय विचारधारा को विस्तृत रूप से जानने के लिए संत रामपाल जी महाराज द्वारा मानव कल्याण के उत्थान हेतु लिखित पुस्तक “जीने की राह” अवश्य अध्ययन करें व अधिक जानकारी हेतु सतलोक आश्रम यूट्यूब चैनल देखें।


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