जहाँ सरकार चूक गई, वहां भिवानी के बाढ़ग्रस्त सिवाड़ा गांव में संत रामपाल जी बनकर आए जीवनदाता

Published on

spot_img

हरियाणा के भिवानी जिले के अंतर्गत आने वाले सिवाड़ा गांव में पिछले लगभग पांच महीनों से बाढ़ के पानी का प्रकोप जारी था। यह गांव, जो कि एक ‘सत्संग नगरी’ के रूप में जाना जाता है, विगत कई माह से जलमग्न था, जिससे क्षेत्र में गंभीर संकट उत्पन्न हो गया। किसानों की लगभग 75% फसलें तबाह हो चुकी थीं, और गांव में बीमारियों का खतरा बढ़ने लगा था। 

मवेशियों के चारे का संकट और घरों में पानी भरने की समस्या ने ग्रामीणों का जीवन दूभर कर दिया था। बच्चों का स्कूल जाना बंद हो चुका था और स्थानीय डिस्पेंसरी भी पानी भरने के कारण ठप्प पड़ गई थी। यह संकट केवल किसानों तक सीमित नहीं था, बल्कि मजदूर वर्ग और समूची 36 बिरादरी के लिए जीविका का प्रश्न बन गया था।

इस प्राकृतिक आपदा से त्रस्त ग्रामीणों ने सर्वप्रथम सरकारी तंत्र से गुहार लगाई। गांव की पंचायत डीसी, एमएलए और तहसीलदार तक गई, लेकिन हर बार उन्हें केवल “खाली आश्वासन” देकर विदा कर दिया गया। स्थानीय ग्रामवासियों ने बताया कि संकट की इस घड़ी में किसी भी सरकारी प्रतिनिधि ने धरातल पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया।

जब आस्था के केंद्र बने उपेक्षा के पात्र

सिवाड़ा गांव की एक और असाधारण विशेषता यह है कि यह विभिन्न पंथों के अनुयायियों का गढ़ है। ग्रामीणों के अनुसार, गांव के 40% लोग सिरसा के डेरा सच्चा सौदा के शिष्य हैं, जबकि शेष आबादी राधास्वामी और अन्य संतों के अनुयायी हैं। ग्रामीणों ने पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि जिन गुरुओं में उन्होंने ‘तन-मन-धन’ से अपनी आस्था रखी, वहाँ से भी उन्हें एक रुपए तक की सहायता प्राप्त नहीं हुई। अपने ही पंथों से निराश होने के बाद, गांव वालों ने एक ऐसी हस्ती की ओर आशा भरी निगाहों से देखा, जिसका इस गांव में एक भी शिष्य नहीं था।

संत रामपाल जी महाराज की ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ बनी सहारा

जब सारी उम्मीदें टूट गईं, तब सिवाड़ा ग्राम पंचायत ने घबराकर जगतगुरु संत रामपाल जी महाराज के समक्ष एक आपातकालीन प्रार्थना लगाई। परमार्थ और मानव सेवा के लिए संत रामपाल जी महाराज को पूरे भारतवर्ष में ऐसे संकटों में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए जाना जाता है। ग्रामीणों की प्रार्थना मिलते ही, संत रामपाल जी महाराज ने बिना किसी धार्मिक भेदभाव या पंथ की परवाह किए, तत्काल सहायता का आदेश दिया।

संत रामपाल जी महाराज ने सिर्फ उनकी आत्मा की पुकार सुनी और रात के अंधेरे में ही राहत काफिला सिवाड़ा गांव पहुंच गया। राहत सामग्री को तीननभरे हुए ट्रकों और अन्य गाड़ियों में गांव लाया गया। पंचायत ने अपनी शर्म महसूस करते हुए जो मदद मांगी थी, संत रामपाल जी महाराज ने उससे इंच भर भी कम नहीं किया, बल्कि सर्वोत्तम और त्वरित सहायता प्रदान की।

लाखों की निशुल्क सहायता और स्थायी समाधान

सिवाड़ा गांव को मिली राहत सामग्री का विवरण इस प्रकार है:

  • दो विशाल मोटरें: 15 एचपी क्षमता के दो पूरे मोटर सेट।
  • उच्च गुणवत्ता वाली पाइपलाइन: 8 इंच व्यास की 8000 फुट लंबी पाइपलाइन।
  • ए-टू-ज़ेड उपकरण: मोटर और पाइपलाइन के उपयोग में आने वाले नट-बोल्ट (पेच), स्टील बैंड सहित सभी छोटे-बड़े उपकरण।

यह संपूर्ण राहत सामग्री गांव वालों को निशुल्क सेवा के रूप में उपलब्ध कराई गई। यह सहायता लगभग दस दिन के भीतर ही उपलब्ध करा दी गई, जिसकी गति से ग्रामीण अचंभित थे, क्योंकि उनका मानना था कि सरकार या प्रशासन भी इतनी तेजी से काम नहीं कर सकता।

मानव धर्म का सर्वोच्च उदाहरण

इस पूरी घटना का सबसे अद्भुत और मार्मिक पहलू यह है कि सिवाड़ा गांव में संत रामपाल जी महाराज का कोई भी शिष्य नहीं था। गांव के लोगों ने स्वयं इस बात को दोहराया कि “चेला किसी का और समाधान कोई और कर रहा है।” 

ग्रामीणों ने अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए कहा कि संत रामपाल जी महाराज उनके लिए भगवान बनकर आए हैं, क्योंकि भगवान की पहचान उनके कार्यों से होती है, न कि वेशभूषा या चमत्कारों से। उनके इस निस्वार्थ कार्य से हरियाणा का बच्चा-बच्चा उन्हें भगवान मान रहा है। 

Also Read: जब सबने छोड़ा साथ, तब संत रामपाल जी महाराज बने सहारा: सोरखी में अन्नपूर्णा मुहिम की मिसाल

संत रामपाल जी महाराज के लिए ‘मानव धर्म’ सबसे बड़ा धर्म है, और सभी प्राणी परमात्मा के बच्चे हैं। यह सहायता उनकी उसी भावना का प्रतीक है, जिसने अब तक पंजाब, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर सहित 300 से अधिक बाढ़ पीड़ित गांवों में सेवाएं प्रदान की हैं।

अगली फसल की बिजाई हेतु सख्त आदेश

राहत सामग्री सौंपते समय, संत रामपाल जी महाराज के निर्देश पर सेवादारों ने ग्राम पंचायत के समक्ष एक विशेष निवेदन पत्र पढ़कर सुनाया। इसमें यह स्पष्ट किया गया कि यह सामग्री केवल तात्कालिक नहीं, बल्कि बाढ़ की समस्या का एक सदा के लिए समाधान है। 

महाराज जी ने सरपंच और ग्रामवासियों से विनम्र प्रार्थना के साथ ही यह सख्त आदेश भी दिया कि वे सभी मिलकर जल्द से जल्द पानी बाहर निकालें और अगली गेहूं की फसल की बिजाई सुनिश्चित करें।

इस पत्र में स्पष्ट सूचना थी कि यदि गांव पानी निकालने में विफल रहा और फसल की बिजाई नहीं हुई, तो भविष्य में उनके ट्रस्ट द्वारा गांव को किसी भी आपदा में कोई मदद नहीं दी जाएगी। यह संदेश किसानों के दर्द को समझने वाले संत रामपाल जी महाराज की ओर से एक प्रेरणा और मार्गदर्शन है, ताकि मिली सहायता का सदुपयोग हो सके और किसानों को जीवन दान मिल सके।

‘अन्नपूर्णा मुहिम’: मानवता की मिसाल  

संत रामपाल जी महाराज ने सिवाड़ा गांव में एक ऐसा परमार्थ का कार्य किया है, जिसने लाखों लोगों की जिंदगी सँवारी है। उन्होंने न केवल बाढ़ पीड़ितों को तुरंत राहत दी, बल्कि समाज को यह शिक्षा भी दी कि धर्म का असली स्वरूप निस्वार्थ सेवा और मानव कल्याण में निहित है। ग्रामीणों ने उनके इस सराहनीय कदम को “जीवन दान” करार दिया है। 

संत रामपाल जी महाराज की ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ आज देश भर में बाढ़ पीड़ितों के लिए चिंतामणि बनकर उभरी है, जो यह साबित करती है कि परमार्थ से बड़ा धरती पर कोई पुण्य नहीं है। इस घटना ने अन्य धार्मिक संस्थाओं को भी समाज की सेवा में आगे आने के लिए एक बड़ा संदेश दिया है।

Latest articles

‘दीनानाथ’ बनकर आए संत रामपाल जी महाराज: मथुरा के फोडर गांव में लौटा खुशहाली का सवेरा

उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले की गोवर्धन तहसील में स्थित गांव फोडर और इसके...

संत रामपाल जी महाराज की सेवा से बाढ़ से उबरा हरियाणा का मोखरा गांव

हरियाणा के रोहतक जिले का मोखरा गांव, जो अपनी विशाल आबादी और बड़े भू-भाग...

World Environment Day 2026 [Hindi]: जानिए पर्यावरण का महत्व, इतिहास, थीम और धरती को बचाने के आसान उपाय

Last Updated on 28 May 2026 IST | विश्व पर्यावरण दिवस 2026: प्रति वर्ष...

भोड़ा होशनाक बाढ़ राहत: महीनों के जलभराव के बाद हरियाणा के गांव में फिर लौटी खेती

हरियाणा के फतेहाबाद जिले के भोड़ा होशनाक गांव में करीब तीन महीने तक गंभीर...
spot_img

More like this

‘दीनानाथ’ बनकर आए संत रामपाल जी महाराज: मथुरा के फोडर गांव में लौटा खुशहाली का सवेरा

उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले की गोवर्धन तहसील में स्थित गांव फोडर और इसके...

संत रामपाल जी महाराज की सेवा से बाढ़ से उबरा हरियाणा का मोखरा गांव

हरियाणा के रोहतक जिले का मोखरा गांव, जो अपनी विशाल आबादी और बड़े भू-भाग...

World Environment Day 2026 [Hindi]: जानिए पर्यावरण का महत्व, इतिहास, थीम और धरती को बचाने के आसान उपाय

Last Updated on 28 May 2026 IST | विश्व पर्यावरण दिवस 2026: प्रति वर्ष...