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World Environment Day 2021 [Hindi]: 5 जून 2021 विश्व पर्यावरण दिवस पर जानिए पर्यावरण बचाने में हम क्या कर सकते हैं?

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Last Updated on 5 June 2021: 1:15 PM IST: आज हम जानेंगे World Environment Day 2021 के बारे में जो कि इस वर्ष शुक्रवार, 5 जून 2021 को मनाया जाने वाला है। प्रत्येक वर्ष पर्यावरण दिवस एक विशेष थीम के तहत एक देश को चुनकर आधिकारिक रूप से वहां पर्यावरण दिवस, पर्यावरण के प्रति समस्याओं और सुझावों को लेकर मनाया जाता है। यह पर्यावरण के आयामों को सतत विकास करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच है । जानिए World Environment Day Hindi के बारे में विस्तार से.

World Environment Day (विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून 2021) के मुख्य बिन्दु

  • विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून 2021 को
  • पर्यावरण जागरूकता के लिए संयुक्त राष्ट्र द्वारा संचालित दुनिया का सबसे बड़ा वार्षिक आयोजन
  • 5 जून 1974 से इसे प्रत्येक वर्ष मनाना शुरू कर दिया गया
  • जर्मनी के साथ साझेदारी में कोलंबिया में किया जाएगा आयोजित
  • इस वर्ष विश्व पर्यावरण दिवस 2021 का विषय है “‘समय और प्रकृति”
  • COVID-19 लॉकडाउन से पर्यावरण में सुधार

World Environment Day पर जानिए पर्यावरण क्या है?

पर्यावरण जिसका शाब्दिक अर्थ है, परि + आवरण यानी हमारे आसपास का आवरण जो हमें ढके है, हम जिसके भीतर जी रहे हैं, जिसका प्रभाव हम पर तथा हमारे कार्यों का उस पर पड़ता है यही पर्यावरण है।

विश्व पर्यावरण दिवस 2021 की थीम क्या है?

इस साल की थीम ‘Ecosystem Restoration‘ है। जिसका हिंदी में मतलब है- पारिस्थितिक तंत्र की पुनर्बहाली। इसे पारिस्थितिकी तंत्र बहाली भी कहा जाता है। इसका अर्थ सामान्य शब्दों में ये है कि हमारे वातावरण को फिर से अच्छी अवस्था में लाना। इस साल की तरह ही हर साल इसकी एक थीम निर्धारित की जाती है। साल 2021 में पर्यावरण दिवस की थीम थी- “जैव विविधता, 2019 में थीम थी- वायु प्रदूषण और 2018 में इस दिवस की थीम थी- बीट प्लास्टिक पॉल्यूशन।

World Environment Day in Hindi: विश्व पर्यावरण दिवस 2021 की थीम हिंदी में क्या संदेश देती हैं?

विश्व पर्यावरण दिवस 2021 की थीम है, पारिस्थितिकी तंत्र की पुनर्बहाली। किसी भी क्षेत्र के पारिस्थितिकी तंत्र में वहां के जीव जंतु व वनस्पति आते है। इस साल की थीम हमें बताती है कि यदि किसी क्षेत्र में पारिस्थितिकी तंत्र नष्ट या क्षतिग्रस्त हो गया है तो उसे फिर से स्वस्थ अवस्था में लाया जाए। लेकिन इसमें सिर्फ क्षतिग्रस्त हो चुके पारिस्थितिकी तंत्र ही नहीं बल्कि उनको भी अच्छा करने पर ज़ोर दिया जाता है जो क्षतिग्रस्त होने की कगार पर हैं। 

पारिस्थितिकी तंत्र को कई तरह से बहाल किया जा सकता है जैसे क्षेत्र में अधिक से अधिक वहां के वातावरण के अनुसार पेड़ लगाना। साथ ही साथ वहां पाई जाने वाली वनस्पति व जीव जंतुओं का संरक्षण करना भी इसमें शामिल है।

World Environment Day History (विश्व पर्यावरण दिवस का इतिहास)

क्या आप जानते हैं, पहली बार विश्व पर्यावरण दिवस कब मनाया गया?


संयुक्त राष्ट्र ने 1972 में स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में आयोजित सम्मेलन में पर्यावरण प्रदूषण की समस्या पर विचार विमर्श किया। इस सम्मेलन में 119 देशों ने भाग लिया था। संयुक्त राष्ट्र संघ ने 5 जून 1972 को World Environment Day मनाने का प्रस्ताव स्वीकार किया । 2 वर्ष पश्चात 5 जून 1974 से इसे प्रत्येक वर्ष मनाना शुरू कर दिया गया । यह दिवस पर्यावरण के प्रति मानव कर्तव्यों की ओर ध्यान आकर्षित करने, पर्यावरण की सुरक्षा, समस्या आदि पर विचार करने हेतु मनाया जाता है ।

वर्ष 1987 में इसके केंद्र प्रतिवर्ष बदलते रहने पर विचार किया गया और इस तरह प्रति वर्ष पर्यावरण दिवस पर प्रत्येक देश में यह दिवस तो मनाया ही जाता है साथ ही किसी एक देश को आधिकारिक रूप से चुनकर उस देश में इसका आयोजन किया जाता है। इसमें लगभग 143 देश हिस्सा लेते हैं।

विश्व पर्यावरण दिवस 2020 के लिए थीम और मेजबान देश

विश्व पर्यावरण दिवस 2020 जैव विविधता पर ध्यान केंद्रित करेगा और जर्मनी के साथ साझेदारी में कोलंबिया में आयोजित किया गया। विश्व पर्यावरण दिवस 2020 का विषय “समय और प्रकृति” था।

यह भी पढें: World Earth Day 2020 in Hindi

कोलंबिया के पर्यावरण और सतत विकास मंत्री,जर्मनी के जलवायु राज्य मंत्री और संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के कार्यकारी निदेशक ने संयुक्त रूप से कहा था की विलुप्त होने का सामना कर रहे पौधों और जानवरों की दस लाख प्रजातियों के साथ जैव विविधता की समस्या पर ध्यान केंद्रित करने के लिए महत्वपूर्ण समय है । वर्ष 2020 जैव विविधता संरक्षण के लिए राष्ट्रों की प्रतिबद्धताओं को प्रदर्शित करने का एक महत्वपूर्ण वर्ष था।

भारत में पर्यावरण की स्थिति

भारत भी अन्य देशों के साथ सदैव जाग्रत रहा है । विश्व पर्यावरण दिवस पर भारत ने हमेशा ही पर्यावरण की ओर चिंता व सजगता ज़ाहिर की हैं। भारत में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 पहले ही बनाया गया था।

COVID-19 लॉकडाउन से पर्यावरण में सुधार

फिलहाल तमाम फैक्ट्रियां और वाहन बंद रहने से लॉकडाउन के चलते विश्व भर में वायु प्रदूषण कम हुआ है। भारत की नदी गंगा हरिद्वार से हुगली तक निर्मल हो गई है। जालन्धर से लगभग 200 किमी दूर बर्फ की पहाड़ियां नज़र आने लगी हैं। नासा की रिपोर्ट के अनुसार भारत का प्रदूषण पिछले 20 वर्षों की तुलना में सबसे नीचे पहुंच गया है। और विश्व की ओजोन परत की समस्या का समाधान भी हो गया है। कोपरनिकस एटमॉस्फियर मोनिटरिंग सर्विस CAMS और कोपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस C3S के अनुसार आर्कटिक के ऊपर का सबसे बड़ा ओजोन परत का छेद बंद हो गया है।

पर्यावरण बचाने में हम क्या कर सकते हैं ?

  • व्यक्तिगत स्तर पर हमें पहले दूसरों के सुधरने के इंतज़ार की बजाय स्वयं से शुरुआत करनी होगी।
  • वृक्षारोपण करें।
  • छोटे बच्चों को प्रेरित करें और उन्हें संस्कार दें कि यह पृथ्वी उनका घर है जिसे सहेजने की जिम्मेदारी उनकी भी है।
  • प्रदूषण कम फैलाएं। बहुत साधारण बातों का ध्यान रखना ही बड़े बदलाव लेकर आता है। जैसे गीले व सूखे कचरे के लिए अलग अलग पात्र रखना आदि।
  • जल संरक्षण की विभिन्न विधियां अपनाएं। जल का व्यर्थ बहाना गलत है। संपत्ति ज़रूर आपकी हो सकती है पर संसाधन नहीं।

World Environment Day 2021 Hindi Quotes

पर्यावरण पर कई विद्वानों, साहित्यकारों और पर्यावरणविदों ने टिप्पणी की है और उसे सहेजने की ओर ध्यान आकर्षित किया है। साथ ही मानव के क्रियाकलापों को सीमित करने की ओर भी जोर दिया है। भारत के बर्डमैन सलीम अली ने “The Book of Indian Birds (1979)”, “The Fall of a Sparrow (1985)” जैसी किताबें चिड़ियों के प्रति सजग करते हुए लिखी थीं। कविता और प्रकृति का रिश्ता पुराना है।

साहित्यकार नागार्जुन ने नदी पर पंक्तियां जाहिर की थीं-

एक नदी के प्राण सूख जाने पर सिर्फ नदी नहीं, बहुत कुछ सूख जाता है।

नागार्जुन

प्रकृत शक्ति तुमने यंत्रों से सबकी छीनी, शोषण कर जीवनी बना दी जर्जर झीनी

जयशंकर प्रसाद

मैं सोते के साथ बहता हूँ, पक्षी के साथ गाता हूँ

सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेय

कोई भी दिवस मनाने का उद्देश्य उस दिवस के निहितार्थ की तरफ लोगों को, उनके ध्यान को आकर्षित करना होता है। पर्यावरण दिवस पर्यावरण संकट की तरफ लोगों का ध्यान खींचने और इस संकट के बारे में लोगों को याद दिलाने के लिए मनाया जाता है लेकिन यह अब औपचारिकता बनकर रह गया है -पर्यावरणविद और जलपुरुष राजेंद्र सिंह ( 2019 में IANS से बातचीत पर )


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