राजस्थान के सांवई गांव में 20 साल बाद लौटी उम्मीद: तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज ने खत्म किया जलभराव का संकट

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राजस्थान के डीग जिले की ग्राम पंचायत सांवई में पिछले 20 सालों से एक ऐसा संकट छाया हुआ था जिसने किसानों की कमर पूरी तरह तोड़ दी थी। गांव की करीब 600 बीघा उपजाऊ भूमि एक विशाल गंदी झील में तब्दील हो चुकी थी। किसान अपनी ही जमीन के मालिक होते हुए भी भुखमरी की कगार पर थे। प्रशासन और राजनेताओं के दरवाजे खटखटाते हुए दो दशक बीत गए, लेकिन सिवाय झूठे आश्वासनों के कुछ नहीं मिला। जब सरकारी तंत्र पूरी तरह फेल हो गया और किसानों के बच्चों का भविष्य अंधकार में डूबने लगा, तब तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज की अन्नपूर्णा मुहिम ने इस गांव की तस्वीर और तकदीर दोनों बदल दी।

20 साल तक गंदी झील बनी रही 600 बीघा जमीन

सांवई गांव के सरपंच और ग्रामीणों ने अपनी पीड़ा बयां करते हुए बताया कि पूरे भरतपुर और डीग जिले में सबसे ज्यादा जलभराव की समस्या इसी पंचायत में थी। पिछले 20 साल से इन खेतों में एक दाना तक नहीं उगा था। 

किसान कर्ज और लाचारी में बर्बाद हो रहे थे। लोग यह मान चुके थे कि शायद अब उनकी मिट्टी में कभी दोबारा अनाज नहीं उगेगा। लेकिन जब उन्होंने पड़ोसी गांव बहज में तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज द्वारा की जा रही निस्वार्थ सेवा को देखा, तो उनके मन में भी एक आखिरी उम्मीद जगी और उन्होंने आश्रम में अपनी अर्जी लगाई।

महज 3 दिन में पहुंचा 6200 फुट पाइप का विशाल काफिला

संत रामपाल जी महाराज के दरबार में अर्जी लगते ही चमत्कारिक रूप से काम हुआ। ग्रामीणों ने बताया कि प्रार्थना पत्र देने के मात्र 3 से 4 दिनों के भीतर ही राहत सामग्री का एक विशाल काफिला सांवई की गलियों में पहुंच गया। यह रफ्तार किसी सरकारी फाइल की नहीं, बल्कि एक सच्चे संत की करुणा की थी। 

मुख्य बिंदु: राहत सामग्री में क्या-क्या मिला? 

संत रामपाल जी महाराज ने गांव को इस संकट से निकालने के लिए संसाधनों का ढेर लगा दिया। पंचायत को निम्नलिखित सामग्री बिल्कुल मुफ्त सौंपी गई:

  • कुल 6200 फुट पाइप, जिसमें 3700 फुट 8 इंची और 2500 फुट 6 इंची पाइप शामिल है।
  • पानी निकालने के लिए 10 HP की तीन विशाल मोटरें।
  • पाइपों को जोड़ने के लिए 20 किलो फेविकोल।
  • स्टार्टर, 20-20 फुट की तार, फ्लेक्सिबल पाइप, एयर वाल्व, निप्पल, फुट वाल्व और हर प्रकार के स्टील के नट-बोल्ट। 
  • गांव में बिजली की समस्या को देखते हुए जनरेटर का किराया और उसमें डलने वाले डीजल का पूरा खर्च भी संत रामपाल जी महाराज की तरफ से ही दिया गया।

ठाकुर जी से भी जल्दी सुनी हमारी पुकार: ग्रामीणों ने किया भव्य स्वागत

राहत सामग्री पहुंचने पर सांवई गांव का नजारा किसी बड़े उत्सव जैसा था। गांव के किसानों ने दर्जनों ट्रैक्टरों की विशाल रैली निकालकर संत रामपाल जी महाराज के काफिले का ढोल-नगाड़ों के साथ भव्य स्वागत किया। गांव की माताओं और बहनों ने संत जी के स्वरूप पर फूल मालाएं अर्पित कीं और हाथ जोड़कर वंदन किया।

एक बुजुर्ग ग्रामीण ने भावुक होते हुए कहा कि ठाकुर जी भी सुनने में समय लेते हैं, लेकिन संत रामपाल जी महाराज ने हमारी पुकार तुरंत सुन ली। जैसे भगवान कृष्ण ने ब्रज को डूबने से बचाया था, वैसे ही संत जी ने हमारे गांव को डूबने से बचा लिया है। अपना अपार आभार प्रकट करने के लिए ग्राम पंचायत ने संत रामपाल जी महाराज के सम्मान में अन्नपूर्णा मुहिम की टीम को पगड़ी भेंट की।

कठोर नियम और मानवता की सच्ची मिसाल

यह राहत सामग्री ग्राम पंचायत को स्थाई रूप से दे दी गई है ताकि भविष्य में कभी भी जलभराव की समस्या न आए। हालांकि, सेवादारों ने संत रामपाल जी महाराज की ओर से पंचायत को एक सख्त हिदायत भी पढ़कर सुनाई कि गांव से पानी हर हाल में निकलना चाहिए और अगली फसल की बिजाई होनी चाहिए। यदि सामान का सही उपयोग नहीं हुआ और पानी नहीं निकाला गया, तो भविष्य में आश्रम की तरफ से कोई मदद नहीं मिलेगी। 

संत रामपाल जी महाराज का नारा है, 

रोटी, कपड़ा, चिकित्सा, शिक्षा और मकान।

हर जरूरतमंद को देगा कबीर भगवान।।

 संत रामपाल जी महाराज पूरे देश में इसी नारे के साथ निस्वार्थ भाव से मानवता की सेवा कर रहे है। आज सांवई के खेतों में सड़ा हुआ पानी नहीं, बल्कि किसानों के चेहरों पर खुशहाली की नई चमक दिखाई दे रही है।

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