प्रेमनगर का पुनर्जन्म: संत रामपाल जी महाराज ने फूँकी उजड़े हुए आशियानों में नई जान

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हिसार जिले का गाँव प्रेमनगर, जो कभी अपनी खुशहाली के लिए जाना जाता था, पिछले तीन महीनों से प्रकृति की मार और प्रशासनिक उपेक्षा का दंश झेल रहा था। यह कहानी केवल जलमग्न खेतों की नहीं थी, बल्कि उन डूबते हुए मकानों और बिखरते परिवारों की थी, जहाँ पानी लोगों के बेडरूम तक पहुँच चुका था। फर्श धंस रहे थे और दीवारों में आई दरारें ग्रामीणों के भविष्य पर प्रश्नचिह्न लगा रही थीं। ऐसे घोर संकट के समय में, जब सरकारी तंत्र मौन था, तब संत रामपाल जी महाराज एक मसीहा बनकर उभरे और गाँव को विनाश के मुहाने से बाहर निकाल दिया।

बदहाली का मंजर: जब अपने ही गाँव में शरणार्थी बन गए लोग

प्रेमनगर के हालात इतने बदतर थे कि पिछले 90 दिनों से ग्रामीण नारकीय जीवन जीने को मजबूर थे। गाँव के एक स्थानीय डॉक्टर ने अपना दर्द साझा करते हुए बताया कि वे तीन महीने से अपना घर खाली कर दूसरे के घर में शरण लिए हुए हैं। खेतों में खड़ी फसलें बर्बाद हो गई। तीन महीने तक प्रशासन से कोई मदद न मिलने के कारण ग्रामीण असहाय महसूस कर रहे थे।

उम्मीद की एक नई किरण: संत रामपाल जी महाराज के दरबार में गुहार

जब चारों ओर से निराशा हाथ लगी और शासन-प्रशासन की ओर से कोई ठोस सहायता प्राप्त नहीं हुई, तब विवश ग्रामीणों ने संत रामपाल जी महाराज के सेवादारों को दयनीय परिसतिथि से अवगत करवाने के बाद संत रामपाल जी महाराज जी के चरणों में अपनी करुण पुकार लगाई। उनकी मांग में शामिल था:

  • 15 HP की एक विशाल मोटर
  • 12,000 फुट 8 इंची पाइप

त्वरित सहायता और विशाल राहत सामग्री का वितरण

जैसे ही सेवादारों के माध्यम से गाँव प्रेमनगर की विकट स्थिति का विवरण संत रामपाल जी महाराज तक पहुँचा था, उन्होंने तुरंत निर्णय लेते हुए आदेश देते हुए कहा: ”गाँव की पंचायत को समस्त आवश्यक राहत सामग्री जल्दी से जल्दी उपलब्ध कराई जाए, ताकि वे समय पर अपने खेतों से पानी निकाल सकें और आने वाली गेहूं की फसल की बिजाई कर पाएँ।”

गाँव वालों ने भावुक होकर बताया था कि प्रार्थना लगने के बाद आश्चर्यजनक रूप से मात्र 10 दिनों के भीतर ही सारी सहायता सामग्री गाँव पहुँच गई थी। संत रामपाल जी महाराज ने बिना किसी विलंब के ग्रामीणों की पीड़ा को समझा था और न केवल मदद भेजी थी, बल्कि उस समस्या को जड़ से समाप्त करने का संकल्प भी लिया था। किसानों के संकट को देखते हुए, उन्होंने सैकड़ों एकड़ भूमि में भरे पानी को निकालने के लिए भारी मात्रा में उच्च क्षमता वाली आधुनिक मशीनरी उपलब्ध करवाई थी।

सरपंच जी ने सामग्री प्राप्त होने पर कहा था: “हमने सारा सामान प्राप्त कर लिया है। इसमें 12,000 फीट पाइप लाइन, एक 15 HP की मोटर और साथ में लगने वाली सभी आवश्यक सामग्री हमें प्राप्त हो चुकी है। इसके लिए हम महाराज जी का तहे दिल से धन्यवाद करते हैं।”

महाराज जी ने स्पष्ट आदेश दिया था कि सामान चाहे कितना ही लग जाए, बस गाँव से पानी निकलना चाहिए। उन्होंने वह समस्त सामग्री पंचायत को स्थायी उपहार स्वरूप प्रदान कर दी थी, ताकि भविष्य में भी कभी ऐसी आपदा आए, तो ग्रामीण तुरंत उसका समाधान कर सकें।

प्रेमनगर का परिवर्तन: रिकॉर्ड होगी बदहाली से हरियाली तक की पूरी कहानी

गाँव के इस बदलाव को तीन चरणों में वीडियो के माध्यम से रिकॉर्ड किया जा रहा है:

  1. पहला चरण: ड्रोन द्वारा जलमग्न खेतों और गाँव की बदहाली की वर्तमान स्थिति।
  2. दूसरा चरण: जल निकासी के बाद खाली हुए खेतों और घरों की स्थिति।
  3. तीसरा चरण: जब खेतों में दोबारा फसलें लहलहाने लगेंगी।

संत रामपाल जी महाराज ने यह सुनिश्चित किया था कि दान के एक-एक पैसे का सदुपयोग हो और गरीब के घर का चूल्हा दोबारा जल सके। इसके साथ ही उन्होंने ग्रामीणों को प्रोत्साहित करते हुए एक चेतावनी भी दी थी कि यदि इतनी सहायता मिलने के बाद भी ग्रामीणों ने कड़ी मेहनत कर पानी नहीं निकाला, तो भविष्य में उन्हें किसी भी प्रकार का सहयोग नहीं दिया जाएगा।

ग्राम पंचायत और कमेटी का सामूहिक धन्यवाद

एक ग्रामीण ने गाँव की परिस्थिति बताते हुए कहा था: “संत रामपाल जी महाराज ने जो हमारी सहायता की थी, उसके लिए हम सभी कमेटी के सदस्यों और पूरी ग्राम पंचायत ने मिलकर उनका धन्यवाद किया था। हमारे यहाँ पानी से बहुत ज्यादा नुकसान हुआ था और जल निकासी का कोई रास्ता नहीं बचा था, इसीलिए हम उनके बहुत आभारी है। यह समस्या पिछले सवा तीन महीने से चल रही थी। जलभराव के कारण हालात यहाँ तक बिगड़ गए थे कि कुछ घरों में तो खाना तक नहीं पक पाता था। उस समय हमें विश्वास हो गया था कि अब हमारा निवारण होगा क्योंकि महाराज जी के आदेश हो चुके थे। माना कि हमारा नंबर सबसे अंत में आया था, लेकिन वह दिन हमारे लिए बहुत ही कीमती है।”

ग्रामीणों की अभिव्यक्ति

बाढ़ राहत सामग्री का विशाल काफिला पहुँचने के बाद प्रेमनगर में उत्सव का माहौल था। ग्रामीणों ने अपने भाव कुछ इस प्रकार व्यक्त किए थे। 

  • “भगवान ने बहुत बढ़िया काम किया था। इससे किसानों को पूरी राहत मिल गई थी और पूरे गाँव का किसान खुश हो गया था। तब समय पर खेतों की बिजाई होने की उम्मीद जग गई थी।”
  • “हमारे लिए तो वही परमात्मा है। मैने यही कहा था कि हमारे लिए उनसे बढ़कर कोई परमात्मा नहीं हैं, जो हमारे दुख-सुख में काम आए थे। उस समय पूरे गाँव में खुशी की लहर थी।”
  • “यह हमारे लिए बहुत बड़ी खुशी की बात है। गाँव का पानी निकलवाने के लिए महाराज जी ने पाइप और मोटरें भिजवाई थीं, जिसके लिए पूरा गाँव तहे दिल से उनका धन्यवाद कर रहा था। इससे हमें बहुत राहत मिली थी। संत रामपाल जी महाराज हमारे लिए भगवान के रूप में आए है। उनके लिए हमारे पास शब्द कम पड़ रहे है, क्योंकि भगवान की महिमा बताने के लिए कोई पर्याप्त शब्द नहीं होते है। तब हमारा पूरा गाँव बहुत खुश था।”
  • “इतना तो सगा बाप भी नहीं करता है। वह इंसान नहीं, भगवान का रूप है।”
  • “राहत सामग्री का सारा सामान पूरे स्टैंडर्ड का है। बढ़िया कंपनी की मोटर दिए थे और बढ़िया पाइप दिए थे। हम उनके बहुत-बहुत आभारी है और परमात्मा से अरदास कर रहे है कि वे हमारे सामने आकर हमें दर्शन दें।”

“कलयुग में सतयुग की झलक: एक ग्रामीण की जुबानी संत रामपाल जी की महिमा”

एक ग्रामीण बताते हैं कि संत रामपाल जी महाराज कलयुग में सतयुग का आगाज ला रहे हैं। उन्होंने कहा था, “वे सबको एक ही नज़र से देखते हैं और सबकी समान रूप से सेवा करते हैं, जिससे यह संभव हो रहा है। ऐसा कार्य हर किसी के बस की बात नहीं होती; यह किसी विरले व्यक्ति का ही काम होता है जो निस्वार्थ भाव से दूसरों का भला करता है। अपना स्वार्थ तो पूरी दुनिया पूरा करती है और अपने माँ-बाप की सेवा भी करती है, लेकिन असली पहचान तब होती है जब कोई दूसरों के लिए कुछ करता है।

युग परिवर्तन तो केवल परमात्मा ही कर सकते हैं, क्योंकि ऐसा कार्य कोई साधारण व्यक्ति नहीं कर पाता। वहाँ तो सभी सरकारें असफल दिखाई देती हैं; मैं किसी एक सरकार की नहीं, बल्कि सभी की बात कर रहा हूँ। अधिकांश लोग अपना-अपना हित देखते हैं, जबकि बहुत कम लोग ऐसे होते हैं जो सबके कल्याण के बारे में सोचते हैं। अपने लिए तो हर कोई प्रयास करता है, इसमें कोई विशेष बात नहीं होती।

हमारे लिए तो भगवान जैसे संत रामपाल जी ही हैं, और कोई नहीं है। हमें दूर-दूर तक ऐसी कोई दूसरी संस्था दिखाई नहीं देती जो दूसरों का इतना भला करे। किसानों और गरीबों की ओर अक्सर कोई ध्यान नहीं देता; ऐसा लगता है जैसे व्यवस्था केवल अमीरों के लिए ही काम करती है। गरीबों की पुकार तो कोई परमात्मा जैसा ही सुनता है, और हमारे लिए वे परमात्मा समान संत रामपाल जी महाराज हैं। मैं उनके चरणों में बार-बार हाथ जोड़कर नमन कर रहा था और उनका शुक्रिया अदा कर रहा हूं।”

प्रेमनगर की पुकार: निराशा से खुशहाली की ओर एक कदम

विषयडॉक्टर जी द्वारा साझा किया गया विवरण
किसानों की वर्तमान स्थितिकिसान अत्यधिक परेशान थे; चाहे जमीन ठेके पर थी, हिस्सेदारी पर थी या स्वयं की, पहली फसल पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है थी। 
नई उम्मीद और राहतपाइप लाइन और जल निकासी से तब अगली फसल की बिजाई की उम्मीद जगी थी, जिससे किसानों में खुशी की लहर दौड़ गई थी।
मदद का स्रोतसंत रामपाल जी महाराज द्वारा सरकार से भी ऊपर उठकर किए जा रहे उस धार्मिक और निस्वार्थ कार्य के लिए ग्रामीणों ने उनका तहे दिल से धन्यवाद किया था।
सहायता की जानकारीसोशल मीडिया और वीडियो के माध्यम से यह पता चला था कि महाराज जी की गाड़ियाँ पूरे हरियाणा में पाइप और मोटरें पहुँचा रही हैं, जिससे प्रेरित होकर ग्रामीणों ने विनती की थी।
निजी और ढाणियों का संकटपिछले 3 महीनों से 100-150 मकानों (ढाणियों) में पानी भरा था। डॉक्टर जी स्वयं अपना घर छोड़कर दूसरे के यहाँ रहने को मजबूर थे। 
मकानों की जर्जर हालतपानी के कारण मकान धंस (बैठ) गए थे और दीवारों में बड़ी-बड़ी दरारें आ गई थीं। किसानों और ग्रामीणों की स्थिति बहुत दयनीय थी।
विस्थापन और घरों की हालतमैं आज भी अपने घर नहीं जा पाया था और दूसरे के घर रहने को मजबूर था। जब हम अपना घर संभाल कर आए, तो देखा कि पड़ोसियों के मकान धंस (बैठ) गए थे और दीवारों में बड़ी-बड़ी दरारें आ गई थीं। 
निष्कर्षकिसानों और ग्रामीणों, सबका बहुत बुरा हाल था। लेकिन तब महाराज जी की मदद से राहत की किरण दिखाई दे रही थी। 

समाज सुधार और मानवता का शंखनाद

संत रामपाल जी महाराज अब तक 400 से अधिक गाँवों में इसी प्रकार की सेवा पहुँचा चुकी हैं। उनका यह कार्य सिद्ध करता है कि एक सच्चा संत वही होता है जो केवल उपदेश ही नहीं देता, बल्कि समाज के दुखों को अपनी प्राथमिकता भी मानता है। राजनीति और स्वार्थ से दूर, संत रामपाल जी महाराज द्वारा चलाई जा रही यह ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ आज पूरे देश में मानवता की नई मिसाल पेश कर रही है। प्रेमनगर के खेतों में भी अब फिर से हरियाली की उम्मीद जाग रही है, और इसका श्रेय संत रामपाल जी महाराज के निस्वार्थ प्रयासों को जाता है।

सेवा के इन सभी कार्यों को आप SA NEWS CHANNEL के सभी सोशल मीडिया पेज पर देख सकते हैं। अलग-अलग गाँवों में बाढ़ से हुई तबाही और वहाँ पहुँच रही मदद की पूरी जानकारी के लिए सर्च करें: ‘बाढ़ राहत | SA News Channel

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