राजस्थान के डीग जिले के नगला चाहर गाँव में संत रामपाल जी महाराज ने 50 साल पुरानी समस्या का किया समाधान

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बरसों से पानी में डूबे खेत, थमी हुई उम्मीदें और आंखों में सिर्फ एक सवाल क्या हमारी जमीन कभी फिर से सोना उगलेगी? राजस्थान का एक ऐसा गांव, जहां हर बरसात किसानों के लिए वरदान नहीं, बल्कि अभिशाप बन जाती थी, आज वहां जश्न का माहौल है। जहाँ सरकार और प्रशासन दशकों तक समाधान नहीं दे पाए, वहां जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज ने मात्र कुछ ही दिनों में खुशहाली लौटा दी है।

गांव नगला चाहर की विकट परिस्थिति

राजस्थान के जिला डीग, तहसील कामा का गांव नगला चाहर पिछले 30 से 50 वर्षों से भीषण जलभराव की समस्या से जूझ रहा था। स्थिति इतनी भयावह थी कि गांव की लगभग 250 बीघा उपजाऊ भूमि 3 से 4 फीट गहरे पानी में डूबी रहती थी, और नहर के पास यह जलस्तर 6 से 7 फीट तक पहुंच जाता था।

किसानों के लिए फसल उगाना तो दूर, अपने खेतों को देखना भी पीड़ादायक हो गया था। पानी की निकासी का एकमात्र मार्ग खेतों से लगभग 6600 फीट (लगभग 2 किलोमीटर) दूर था, जिसके कारण गरीब किसानों के लिए अपने स्तर पर पानी निकालना असंभव था। गांव वालों ने कई बार प्रशासन से गुहार लगाई, लेकिन समस्या जस की तस बनी रही। पलायन और बेरोजगारी ने ग्रामीणों को घेर लिया था।

मदद की गुहार और संत रामपाल जी महाराज का आश्रय

जब चारों तरफ से निराशा हाथ लगी, तब गांव के सरपंच शिवराम जी और अन्य ग्रामीणों को पड़ोसी गांव ऐंचवाड़ा के सरपंच मानसिंह जी के माध्यम से संत रामपाल जी महाराज द्वारा चलाई जा रही विशाल ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ के बारे में पता चला।

उम्मीद की एक किरण लेकर ग्रामीण संत रामपाल जी महाराज के सतलोक आश्रम पहुंचे। वहां उन्होंने विनम्रतापूर्वक अपनी व्यथा सुनाई और बताया कि पानी निकालने के लिए उन्हें लंबी पाइपलाइन, भारी मोटरों और बिजली की कमी के कारण डीजल जनरेटर की आवश्यकता है।

संत रामपाल जी महाराज की त्वरित कृपा और समाधान

जैसे ही यह प्रार्थना संत रामपाल जी महाराज तक पहुंची, उन्होंने एक क्षण की भी देरी नहीं की। संत रामपाल जी महाराज ने तत्काल प्रभाव से आदेश दिया कि गांव वालों को जो भी सामग्री चाहिए, वह तुरंत उपलब्ध कराई जाए।

उनके आदेश पर मात्र 3 दिनों के भीतर ही राहत सामग्री का एक विशाल काफिला गांव नगला चाहर पहुंच गया। संत रामपाल जी महाराज ने गांव को निम्नलिखित सामग्री उपहार स्वरूप प्रदान की:

  • 6600 फीट लंबी पाइपलाइन: 8 इंची के बड़े पाइप।
  • 4 शक्तिशाली मोटरें: 20 हॉर्स पावर (HP) की चार हैवी-ड्यूटी मोटरें।
  • सक्शन पाइप: 160 फीट का 6 इंची फ्लैक्सिबल पाइप।
  • सम्पूर्ण एक्सेसरीज: स्टार्टर, फुट वाल्व , नट-बोल्ट और आवश्यक उपकरण।
  • ईंधन और जनरेटर का खर्च: बिजली की समस्या को देखते हुए उन्होंने जनरेटर किराए पर लेने और दिन-रात मोटर चलाने के लिए डीजल का पूरा खर्च भी स्वयं वहन करने का जिम्मा उठाया।

पारदर्शिता और “काम करके दिखाने” का आदेश

संत रामपाल जी महाराज का स्पष्ट उद्देश्य है लोक दिखावा नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर सेवा। उन्होंने ग्राम पंचायत को एक लिखित संदेश भी भिजवाया, जिसमें स्पष्ट निर्देश थे कि सामग्री का उपयोग पूरी ईमानदारी से किया जाए।

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पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए ड्रोन कैमरों के माध्यम से ‘पहले’ (डूबे हुए खेत), ‘दौरान’ (पानी निकासी) और ‘बाद’ (लहलहाती फसल) की वीडियोग्राफी का प्रावधान किया गया। उनके कड़े निर्देश थे कि “पानी निकलना चाहिए और फसल होनी चाहिए,” ताकि दान का सदुपयोग हो और किसानों के घर फिर से खुशहाली आए।

ग्रामीणों की प्रतिक्रिया: “वे हमारे लिए भगवान हैं”

राहत सामग्री से भरे ट्रकों को गांव में प्रवेश करते देख ग्रामीणों की आंखों में खुशी के आंसू छलक पड़े। पाइपों और मोटरों के रूप में उन्हें अपना भविष्य सुरक्षित दिखाई दिया।

सरपंच शिवराम जी ने कहा: “मैं संत रामपाल जी महाराज के चरणों में नमन करता हूँ। 30 साल से हम जिस समस्या से जूझ रहे थे, सरकारें जिसे हल नहीं कर पाईं, उसे महाराज जी ने 3 दिन में हल कर दिया। यह हमारे लिए सपने जैसा है।”

एक ग्रामीण ने भावुक होकर कहा: “नेपोलियन ने कहा था कि असंभव शब्द उनकी डिक्शनरी में नहीं है, आज संत रामपाल जी महाराज ने इसे सच कर दिखाया है। वे हमारे लिए साक्षात भगवान का रूप हैं। आज हमारे गांव में असली दिवाली आई है।”

एक अन्य व्यक्ति ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा, “मैं वास्तव में आश्चर्यचकित हूं कि इतने कम समय में 16-17 गांवों तक हर दो घंटे में राहत सामग्री पहुंचाई गई। किसानों के जो चेहरे पहले मुरझाए हुए थे, अब खुशी से खिल उठे हैं क्योंकि इस मदद से एक नई आशा जगी है कि 10-15 दिनों के भीतर बुवाई शुरू हो सकेगी। मैं संत रामपाल भगवान का हृदय से धन्यवाद करता हूं कि उन्होंने इतनी तत्परता से हमारे पूरे क्षेत्र में इतनी बड़ी राहत पहुंचाई और हमारे खेतों को समय पर लहलहाने का अवसर दिया।”

परहित सरिस धर्म नहिं भाई

नगला चाहर गांव को दी गई यह सहायता कोई एकमात्र घटना नहीं है। यह संत रामपाल जी महाराज द्वारा आयोजित विशाल और निरंतर “अन्नपूर्णा मुहिम” का ही एक हिस्सा है। यह मुहिम, जो भोजन और आश्रय प्रदान करने के प्रयास के रूप में शुरू हुई थी, अब एक व्यापक मानवीय सहायता अभियान में बदल गई है, जो 300 से अधिक गांवों तक पहुंच चुकी है।

उनका दृष्टिकोण बिल्कुल स्पष्ट है: “रोटी, कपड़ा, चिकित्सा, शिक्षा और मकान, हर जरूरतमंद को दे रहा कबीर भगवान।”

जहां अन्य लोग संकट के समय मुंह मोड़ लेते हैं, वहीं संत रामपाल जी महाराज किसानों और गरीबों के लिए सहयोग का एक मजबूत स्तंभ बनकर खड़े हैं। इन सभी सेवा कार्यों की पल-पल की जानकारी  SA NEWS  द्वारा सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रमुखता से दिखाई जा रही है। राहत कार्यों की विस्तृत रिपोर्ट देखने के लिए आप ‘Flood Relief | SA News Channel‘ पर जा सकते हैं। नगला चाहर को दी गई इस राहत सेवा को विस्तार से समझने और देखने के लिए, हमारी पूरी कवरेज यहां देखें:

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