संत रामपाल जी महाराज ने फेज़ 2 में झज्जर के कासनी में पाइपलाइन दी

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हरियाणा राज्य के जिला झज्जर की तहसील साल्हावास (सालाबाद) के अंतर्गत स्थित गांव कासनी में पिछले 8 से 10 वर्षों से वर्षा ऋतु के दौरान गंभीर जलभराव की स्थिति बनी हुई थी। प्रत्येक वर्ष मानसून के समय गांव के खेतों में 3 से 4 फीट तक पानी भर जाता था। इस जलभराव के कारण गांव की लगभग 400 एकड़ कृषि भूमि पूरी तरह से जलमग्न होकर प्रभावित होती थी।

जलभराव के कारण किसानों की प्रमुख फसलें जैसे धान, बाजरा, ज्वार और गेहूं प्रतिवर्ष पानी में डूबकर नष्ट हो जाती थीं। फसलें नष्ट होने से किसानों द्वारा बीज, खाद, श्रम और ट्रैक्टर जुताई पर किया गया संपूर्ण खर्च व्यर्थ चला जाता था। किसानों को प्रति एकड़ 20,000 रुपये से 25,000 रुपये का सीधा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा था। अत्यधिक पानी भरा रहने के कारण फसल का उत्पादन घटकर मात्र 5 से 10 मण प्रति किला रह जाता था, जबकि सामान्य परिस्थिति में यह उत्पादन 50 से 60 मण प्रति एकड़ होना चाहिए था।

जल निकासी के समाधान के लिए ग्राम पंचायत और स्थानीय किसानों ने सिंचाई विभाग (इरिगेशन डिपार्टमेंट) के बार-बार चक्कर काटे। परंतु सरकारी विभाग से कोई स्थायी समाधान प्राप्त नहीं हुआ। विभाग द्वारा केवल एक मोटर उपलब्ध करवाकर औपचारिकता पूरी की जाती थी, जिससे 400 एकड़ भूमि का जल निष्कासन संभव नहीं था।

संत रामपाल जी महाराज द्वारा किसान मजदूर बचाओ अभियान चरण 2 के तहत त्वरित कार्रवाई

सरकारी स्तर पर जलभराव की समस्या का समाधान न होने पर ग्राम पंचायत कासनी और स्थानीय ग्रामीणों ने संत रामपाल जी महाराज के समक्ष सहायता के लिए अर्जी प्रस्तुत की।

  • 27 तारीख को अर्जी: गांव के सरपंच और ग्रामीणों ने 27 तारीख को संत रामपाल जी महाराज के आश्रम में जाकर अपनी समस्या रखी और स्थायी जल निकासी के लिए प्रार्थना की।
  • 30 तारीख को धरातलीय सर्वेक्षण: अर्जी प्राप्त होने के तीन दिन बाद, 30 तारीख को संत रामपाल जी महाराज ने अपनी सर्वे टीम को गांव कासनी भेजा। सर्वे टीम ने प्रभावित 400 एकड़ कृषि भूमि, जलभराव वाले क्षेत्रों और संभावित जल निकासी मार्गों का धरातलीय निरीक्षण किया।
  • 1 तारीख को राहत सामग्री का वितरण: सर्वेक्षण रिपोर्ट प्रस्तुत होने पर संत रामपाल जी महाराज ने तुरंत स्वीकृति प्रदान की और 1 तारीख को राहत सामग्री का पूरा जत्था गांव कासनी पहुंचा दिया। अर्जी देने के मात्र चार दिनों के भीतर संपूर्ण प्रक्रिया पूरी कर सामग्री उपलब्ध करा दी गई।

स्वीकृत एवं हस्तांतरित की गई राहत सामग्री का पूर्ण विवरण

संत रामपाल जी महाराज ने किसान मजदूर बचाओ अभियान फेज़ 2 के अंतर्गत ग्राम पंचायत कासनी को निम्नलिखित सामग्री उपलब्ध करवाई:

  • पाइपलाइन: 5,600 फीट लंबी 8-इंच पीवीसी पाइपलाइन (लगभग 30 किले/एकड़ दूरी की पाइपलाइन)।
  • इलेक्ट्रिक मोटर: 10 एचपी क्षमता की 4 मोटरें जल निष्कासन के लिए स्वीकृत की गईं।
  • सहायक सामग्री (Accessories):
    • एयर वाल (Air Valves)
    • पीवीसी बेंड (PVC Bends)
    • लोहे की प्लेट (Iron Joint Plates)
    • पीवीसी पाइप
    • फेविकोल / फेविकोल एसआर (Favicol SR)
    • जैन / गैस्केट (Gaskets)
    • नट-बोल्ट (Nut-Bolts)
    • पाइप जोड़ने के लिए आवश्यक सभी अन्य हार्डवेयर उपकरण

जल निकासी की तकनीकी योजना और भौगोलिक बिंदु

सर्वे टीम द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट के अनुसार गांव कासनी में जल निकासी के लिए निम्नलिखित भौगोलिक बिंदुओं और तकनीकी मापदंडों को निर्धारित किया गया:

  • पीपल वाला कुआं से कासनी माइनर: गांव के समीप स्थित ‘पीपल वाले कुएं’ (पीपल वाले खेत) से कासनी माइनर (दाहिनी ओर स्थित) तक 5,600 फीट लंबी 8-इंच पाइपलाइन दबाई जा रही है। इस पाइपलाइन के माध्यम से पानी सीधे कासनी माइनर में जाएगा और वहां से ड्रेन नंबर 8 (Drain No. 8) में प्रवाहित होगा। इससे पीपल वाले कुएं के पास की 100 एकड़ भूमि सहित पूरे प्रभावित क्षेत्र को जलभराव से मुक्ति मिलेगी।
  • समानांतर मोटर व्यवस्था: पीपल वाले कुएं की पाइपलाइन के लिए किसानों और ग्राम पंचायत ने पहले से ही सोलर मोटर की व्यवस्था कर रखी है।
  • भिंडावास रोड एवं कोसली-झज्जर रोड बिंदु: भिंडावास रोड और कोसली-झज्जर रोड के पास सिंचाई विभाग द्वारा बनाई गई 4.5 फीट (4 ½ फीट) चौड़ी कंक्रीट की होदी (चेंबर) स्थित है, जो ड्रेन नंबर 8 से जुड़ी हुई है।
  • चार 10 एचपी मोटरों का स्थान: झील क्षेत्र और जलभराव वाले चार अलग-अलग निकासी बिंदुओं से पानी उठाकर 4.5 फीट की लाइन और ड्रेन नंबर 8 में डालने के लिए 10 एचपी की 4 मोटरों की आवश्यकता चिन्हित की गई है।

पाइपलाइन बिछाने के निर्देश और मोटरों के हस्तांतरण की प्रक्रिया

संत रामपाल जी महाराज के निर्देशानुसार सर्वे टीम ने ग्राम पंचायत कासनी को पाइपलाइन स्थापित करने के संबंध में विशिष्ट तकनीकी निर्देश दिए:

  • भूमिगत पाइपलाइन कार्य: ग्राम पंचायत ने सामग्री प्राप्त होते ही पाइपलाइन को भूमिगत (Underground) करने का कार्य प्रारंभ कर दिया, जिसे 2 से 3 दिनों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया।
  • लीकेज परीक्षण का अनिवार्य नियम: पाइप दबाते समय पाइपलाइन में पानी छोड़कर सभी जोड़ों की लीकेज जांचने और नियमानुसार एयर वाल लगाने के बाद ही मिट्टी डालने के निर्देश दिए गए।
  • सत्यापन एवं मोटर हस्तांतरण: पाइपलाइन भूमिगत होने के पश्चात ग्राम पंचायत द्वारा सूचित किए जाने पर संत रामपाल जी महाराज के आदेश से सर्वे टीम पुनः कासनी पहुंचेगी। सर्वे टीम द्वारा पाइपलाइन के सही ढंग से स्थापित होने का सत्यापन करने के तुरंत बाद 10 एचपी की चारों मोटरें ग्राम पंचायत कासनी को सौंप दी जाएंगी।

गांव में सामग्री आगमन, स्वागत समारोह एवं जनप्रतिनिधियों के वक्तव्य

गांव कासनी की सीमा पर पाइपलाइनों से भरे वाहनों के पहुंचने पर ग्रामीणों और ग्राम पंचायत द्वारा औपचारिक स्वागत किया गया:

  • मंगलाचरण एवं स्वागत: राहत सामग्री पहुंचने पर मंगलाचरण का पाठ किया गया। गांव के सरपंच और ग्रामीणों ने फूलों की मालाएं भेंट करके संत रामपाल जी महाराज का स्वागत और आभार व्यक्त किया।
  • सरपंच का वक्तव्य: कासनी गांव के सरपंच ने बताया कि गांव पिछले 8-10 वर्षों से जलभराव से पीड़ित था और 400 एकड़ जमीन बेकार पड़ी रहती थी। सरकारी विभागों के चक्कर लगाने के बाद भी समाधान नहीं हुआ। संत रामपाल जी महाराज ने अर्जी लगाने के मात्र चार दिनों में 5,600 फीट पाइपलाइन और 4 मोटरें उपलब्ध करवाकर किसानों की वर्षों पुरानी समस्या का स्थायी समाधान कर दिया।
  • ग्रामीण कृष्ण कुमार का वक्तव्य: कासनी निवासी कृष्ण कुमार ने कहा कि हर साल 400 एकड़ जमीन बाढ़ के पानी में डूब जाती थी और पैदावार 5-10 मण तक गिर जाती थी। संत रामपाल जी महाराज ने सहायता प्रदान करके किसानों को आर्थिक तबाही से बचा लिया है।
  • अतिरिक्त समाज सेवा कार्य: सरपंच ने यह भी जानकारी दी कि संत रामपाल जी महाराज कासनी गांव की एक जरूरतमंद लड़की को हर महीने निःशुल्क राशन सामग्री भी घर पहुंचाकर उपलब्ध करवाते हैं, तथा गांव के अन्य असहाय लोगों की मदद के लिए सदैव तत्पर रहते हैं।

गांव कासनी (झज्जर) में जलभराव राहत परियोजना का विवरण

विवरण श्रेणीपूर्ण तथ्य एवं आंकड़े
प्रभावित स्थानगांव कासनी, तहसील साल्हावास (सालाबाद), जिला झज्जर, हरियाणा
जलभराव की अवधि8 से 10 वर्ष
जलभराव का स्तर3 से 4 फीट पानी
प्रभावित कृषि भूमि400 एकड़
प्रभावित फसलेंधान, बाजरा, ज्वार, गेहूं
आर्थिक नुकसान₹20,000 – ₹25,000 प्रति एकड़ लागत व्यर्थ
उपज में अंतरजलभराव में: 5-10 मण/एकड़ | समाधान के बाद संभावित: 50-70 मण/एकड़
अभियान का नामकिसान मजदूर बचाओ अभियान फेज़ 2 (चरण 2)
अर्जी एवं पूर्ति समय27 तारीख को अर्जी, 30 को सर्वे, 1 तारीख को सामग्री वितरण (कुल 4 दिन)
स्वीकृत सामग्री5,600 फीट 8-इंच पीवीसी पाइपलाइन (30 किले)
स्वीकृत उपकरण10 एचपी क्षमता की 4 इलेक्ट्रिक मोटरें
स्वीकृत एक्सेसरीजएयर वाल, पीवीसी बेंड, लोहे की प्लेट, फेविकोल SR, गैस्केट/जैन, नट-बोल्ट
निकासी मार्गपीपल वाला कुआं से कासनी माइनर होकर ड्रेन नंबर 8 तथा भिंडावास रोड की 4.5 फीट लाइन
अन्य सामाजिक सेवागांव की असहाय लड़की को प्रतिमाह निःशुल्क राशन वितरण

400 एकड़ कृषि भूमि के स्थायी जल निष्कासन से कासनी को मिली राहत

संत रामपाल जी महाराज द्वारा उपलब्ध कराई गई 5,600 फीट पाइपलाइन और 4 मोटरों के माध्यम से कासनी गांव की 400 एकड़ कृषि भूमि से बरसाती पानी की निकासी सुचारू रूप से संचालित होगी। इस स्थायी व्यवस्था के बनने से खेतों में जलभराव समाप्त होगा, फसलों का गलना रुकेगा और किसानों की प्रति एकड़ पैदावार बढ़कर 50 से 70 मण तक पहुंचेगी। वर्षों पुरानी जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान होने से कासनी के किसानों का आर्थिक संकट समाप्त होगा और कृषि उत्पादन सुरक्षित रहेगा।

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