गांव कापड़ों को संत रामपाल जी महाराज से मिली जल भराव और पेयजल संकट से स्थायी मुक्ति

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हासी, हरियाणा – संत रामपाल जी महाराज ने अपने जन कल्याणकारी अभियानों का विस्तार करते हुए हरियाणा के जिला हासी (हिसार) की तहसील नारनौंद के गांव कापड़ों में वर्षों से व्याप्त गंभीर जल संकट और जल भराव की समस्या का स्थायी समाधान कर दिया है। 

गांव में गंदे पानी की निकासी और पशुधन के लिए स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था न होने से त्रस्त ग्रामीणों की करुण पुकार पर संत रामपाल जी महाराज ने तुरंत संज्ञान लिया और मात्र 72 घंटे के भीतर हजारों फुट लंबी पाइपलाइन तथा अन्य सभी आवश्यक उपकरण गांव में पहुंचा दिए।

गांव की विकट स्थिति और वर्षों पुरानी समस्या

गांव कापड़ों के निवासी और किसान पिछले कई वर्षों से तालाबों के पानी की निकासी और पशुओं के लिए स्वच्छ पानी की कमी से जूझ रहे थे। गर्मी के मौसम में (विशेषकर जेठ के महीने में) गांव के तालाब पूरी तरह सूख जाते थे, जिससे पशुओं के पीने के पानी का गंभीर संकट पैदा हो जाता था।

वहीं मानसून के दौरान बारिश का पानी तालाबों में ओवरफ्लो होकर आबादी क्षेत्र और आसपास के खेतों में भर जाता था। कई स्थानों पर 5 से 6 फुट तक गंदा पानी जमा हो जाता था। गंदे पानी की स्थायी निकासी की कोई व्यवस्था न होने के कारण किसानों की तैयार फसलें जलमग्न होकर नष्ट हो जाती थीं। ग्रामीणों ने प्रशासन और सरकार से कई बार गुहार लगाई तथा मांग पत्र भी सौंपे, परंतु उन्हें कोई राहत नहीं मिली।

राहत की गुहार और संत रामपाल जी महाराज का तुरंत निर्णय

जब सरकारी स्तर पर कोई सुनवाई नहीं हुई, तब ग्राम पंचायत कापड़ों को संत रामपाल जी महाराज द्वारा चलाए जा रहे ‘पशुधन बचाओ, शुद्ध जल पिलाओ अभियान’ के बारे में जानकारी मिली। 

इसके बाद सरपंच प्रतिनिधि कपिश गोयत तथा गांव के गणमान्य व्यक्तियों का एक प्रतिनिधिमंडल संत रामपाल जी महाराज के दरबार में पहुंचा और एक औपचारिक प्रार्थना पत्र सौंपा। ग्राम पंचायत की प्रार्थना स्वीकार करते ही संत रामपाल जी महाराज ने बिना किसी विलंब के उसी दिन अपनी सर्वे टीम को गांव कापड़ों में निरीक्षण हेतु भेज दिया।

ज़मीनी सर्वे और स्वीकृत सहायता

संत रामपाल जी महाराज के आदेश से सर्वे टीम ने गूगल मैप्स और ज़मीनी निरीक्षण के माध्यम से दोनों मुख्य पाइपलाइन पॉइंटों की सटीक दूरी और आवश्यकता का निर्धारण किया:

  • पहला पॉइंट: माइनर तक की दूरी लगभग 2.3 किलोमीटर पाई गई, जिसके लिए 7,800 फुट 8 इंची पाइपलाइन और एक 10 एचपी मोटर निर्धारित की गई।
  • दूसरा पॉइंट: माइनर तथा रास्ते में आने वाले अन्य तालाबों को जोड़ने के लिए लगभग 2.6 किलोमीटर की दूरी तय की गई, जिसके लिए 9,000 फुट 8 इंची पाइपलाइन और एक 10 एचपी मोटर की आवश्यकता सामने आई।

ग्राम पंचायत ने 16,500 फुट पाइपलाइन की मांग की थी, परंतु संत रामपाल जी महाराज ने सर्वे रिपोर्ट के आधार पर मांग से 300 फुट अधिक, यानी कुल 16,800 फुट 8 इंची पाइपलाइन और दो 10 एचपी मोटरें देने का निर्णय लिया।

मात्र 72 घंटे में पहुंची सहायता सामग्री

प्रार्थना स्वीकृत होने के मात्र 2 से 3 दिनों के भीतर संत रामपाल जी महाराज ने राहत सामग्री से भरे ट्रकों का विशाल काफ़िला गांव कापड़ों भेज दिया।

संत रामपाल जी महाराज ने गांव कापड़ों को निम्नलिखित सामग्री पूर्णतः निःशुल्क उपलब्ध करवाई:

  • 16,800 फुट उच्च गुणवत्ता वाली 8 इंची PVC पाइपलाइन
  • एयर वाल्व, पीवीसी बैंड, फेविकोल/सॉल्वेंट, लोहे की प्लेटें, नट-बोल्ट और रबर ज़ैन जैसी सभी आवश्यक एक्सेसरीज

संत रामपाल जी महाराज ने निर्देश दिया कि पाइपलाइन को भूमिगत बिछाकर और पानी छोड़कर लीकेज जांचने के बाद मिट्टी डाली जाए। निरीक्षण कार्य पूर्ण होते ही संत रामपाल जी महाराज दोनों 10 एचपी मोटरें भी तुरंत ग्राम पंचायत को सुपुर्द कर देंगे।

ग्रामीणों में खुशी की लहर और प्रतिक्रियाएं

सहायता सामग्री से भरे ट्रक गांव पहुंचते ही संपूर्ण कापड़ों गांव में उत्सव जैसा माहौल बन गया। ग्रामीणों ने पुष्प वर्षा करके संत रामपाल जी महाराज का भव्य स्वागत किया और जयकारे लगाए।

“हमने संत रामपाल जी महाराज से 16,500 फुट पाइप की मांग की थी, लेकिन उन्होंने हमारी जरूरत को देखते हुए 16,800 फुट पाइप भेजा। मात्र परसों हम प्रार्थना लेकर गए थे और आज पूरा सामान गांव में मौजूद है। संत रामपाल जी महाराज का जितना धन्यवाद करें, उतना कम है।”- कपिश गोयत, सरपंच प्रतिनिधि, गांव कापड़ों

“जो काम आज संत रामपाल जी महाराज ने हमारे गांव के लिए किया है, उतना बड़ा काम आज तक किसी विधायक या सांसद ने भी नहीं किया। वे आज किसानों के सच्चे मसीहा बनकर उभरे हैं।”- सुरेंद्र लिणी, प्रदेश सलाहकार, भारतीय किसान यूनियन

“संत रामपाल जी महाराज हमारे लिए साक्षात भगवान हैं। इतनी जल्दी सुनवाई तो सरकार भी नहीं करती। उन्होंने हमारे पशुओं और हमारी फसलों को बचा लिया है।”- गांव कापड़ों के निवासी

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