हरियाणा राज्य के अंतर्गत जिला जींद की तहसील नरवाना का गाँव गुरथली लंबे समय से गंदे पानी की निकासी की एक विकट समस्या से जूझ रहा था। गाँव में मौजूद गंदे पानी के तालाब (जोहड़) की निकासी के लिए कोई भी स्थाई प्रशासनिक या तकनीकी प्रबंध उपलब्ध नहीं था। इसके कारण प्रतिवर्ष विशेषकर मानसून तथा सामान्य बरसात के मौसम में यह तालाब पूरी तरह ओवरफ्लो (उफान पर) हो जाता था। इस ओवरफ्लो के कारण तालाब का गंदा और दूषित पानी आसपास के कृषि क्षेत्रों, फसलों, खेतों, स्थानीय रास्तों और पशुओं के स्वच्छ पानी पीने व नहाने वाले जोहड़ में अनियंत्रित रूप से फैल जाता था।
इस गंभीर जलभराव और गंदगी के प्रसार के कारण गाँव के जनजीवन पर निम्नलिखित प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहे थे:
- कृषि और फसलों को भारी क्षति: खेतों में लगातार गंदा पानी जमा रहने के कारण किसानों की फसलें पूरी तरह नष्ट हो रही थीं।
- पशुधन में संक्रामक बीमारियां: दूषित पानी जब पशुओं के स्वच्छ जोहड़ में मिल जाता था, तो उसे पीने और उसमें नहाने के कारण दुधारू पशुओं में चर्म रोग (त्वचा की बीमारियां) फैल रहे थे और उनका दूध सूख रहा था।
- मानवीय स्वास्थ्य संकट: गंदे पानी के ठहराव से अत्यधिक मात्रा में मच्छर और मक्खियां पैदा हो रही थीं। जब हवा चलती थी, तो पूरे गाँव में तीव्र बदबू फैल जाती थी, जिससे ग्रामीणों को त्वचा रोग एवं अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था।
- गंभीर दुर्घटनाएं: इस अनियंत्रित और असुरक्षित तालाब के कारण गाँव के दो छोटे बच्चों (जिनकी आयु लगभग 5 से 7 वर्ष थी) की पानी में डूबने से मृत्यु भी हो चुकी थी।
गाँव के वर्तमान सरपंच, जिनकी आयु 27 वर्ष है, उन्होंने बताया कि यह समस्या उनके जन्म से भी पहले यानी पिछले लगभग 20 से अधिक वर्षों से निरंतर बनी हुई थी. गाँव में निर्मित पानी का पुराना टैंक अत्यंत छोटा था, जबकि गाँव की जनसंख्या के अनुपात में गंदे पानी की मात्रा बहुत अधिक थी।
शासन-प्रशासन की विफलता और किसान मजदूर बचाओ अभियान चरण 2 के तहत गुहार
गाँव गुरथली के ग्रामीणों और ग्राम पंचायत द्वारा इस गंभीर समस्या के निवारण के लिए विगत कई वर्षों में अनेक राजनीतिक और प्रशासनिक प्रयास किए गए। स्थानीय प्रशासन, विभिन्न मंत्रियों और विधायकों के चक्कर काटने के बावजूद समस्या का कोई धरातलीय समाधान नहीं हुआ।
पूर्व पंचायती कार्यकाल में ग्राम पंचायत के सदस्य रह चुके ग्रामीणों ने बताया कि वे राज्य सरकार के मंत्रियों के पास गए, लेकिन उन्हें केवल आश्वासन ही प्राप्त हुए। नरवाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले इस क्षेत्र से भूतपूर्व मुख्यमंत्री (सीएम) और अनाज मंडी के वर्तमान चेयरमैन जैसे बड़े राजनीतिक पद जुड़े होने के बावजूद इस गंदे पानी की निकासी का कोई प्रबंध नहीं किया गया।
विगत वर्ष नरवाना इलाके के बखेवाला तथा अन्य समीपवर्ती गांवों में आई भीषण बाढ़ के समय संत रामपाल जी महाराज द्वारा की गई जनसेवा और पाइपलाइन वितरण के कार्यों से गुरथली गाँव की पंचायत अत्यधिक प्रेरित हुई।
इसके बाद, समस्या के स्थाई निवारण हेतु ग्राम पंचायत ने किसान मजदूर बचाओ अभियान चरण 2 के तहत संत रामपाल जी महाराज के समक्ष सहायता की पुकार लगाने का निर्णय लिया। दिनांक 16 जून को दोपहर 3:00 बजे गाँव के सरपंच और अन्य प्रतिनिधियों ने धनाना धाम आश्रम पहुँचकर संत रामपाल जी महाराज के चरणों में लिखित प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया।
आधुनिक ड्रोन और गूगल मैप तकनीक से त्वरित तकनीकी सर्वेक्षण
लिखित प्रार्थना प्राप्त होने के तुरंत बाद, संत रामपाल जी महाराज ने अविलंब संज्ञान लेते हुए अपनी विशेष तकनीकी सर्वे टीम को गाँव गुरथली पहुँचने का आदेश जारी किया। ग्राम पंचायत के प्रतिनिधि जब आश्रम से वापस लौटकर अभी जींद और नरवाना के मध्य ही पहुँचे थे (प्रार्थना लगाने के मात्र 1 से 2 घंटे के भीतर), तभी उनके पास सर्वे टीम का फोन आया कि टीम गाँव पहुँच रही है।
गाँव गुरथली पहुँची तकनीकी सर्वे टीम ने कार्य को पूर्णतः वैज्ञानिक और सटीक बनाने के लिए आधुनिक ड्रोन कैमरों और गूगल मैप (Google Map) तकनीक का उपयोग किया। सर्वे टीम ने गंदे पानी के तालाब (स्टार्टिंग पॉइंट) से लेकर उस अंतिम बिंदु (लास्ट पॉइंट) तक की भौतिक दूरी का मापन किया जहाँ पानी को मुख्य ड्रेन (नाले) में विसर्जित किया जाना था।
सर्वेक्षण के मुख्य निष्कर्ष इस प्रकार रहे:
- तालाब से लेकर ड्रेन तक की एक तरफ की कुल दूरी 767 मीटर मापी गई, जो लगभग 2500 फीट बैठती है।
- पानी की भारी मात्रा को देखते हुए सर्वे टीम ने समानांतर रूप से दो अलग-अलग पाइपलाइनें (दो लाइनें) बिछाने की आवश्यकता को चिन्हित किया।
- दो लाइनों के आधार पर कुल आवश्यक पाइपलाइन की लंबाई 5000 फीट निर्धारित की गई।
- जल को ड्रेन तक सफलतापूर्वक पंप करने के लिए 10-10 हॉर्स पावर (HP) की दो उच्च क्षमता वाली मोटरों की आवश्यकता निर्धारित की गई।
इस त्वरित और पारदर्शी तकनीकी सर्वेक्षण से गाँव के सरपंच और समस्त ग्रामीण पूर्ण रूप से संतुष्ट हुए।
संत रामपाल जी महाराज द्वारा स्वीकृत एवं वितरित राहत सामग्री की विस्तृत सूची
सर्वे रिपोर्ट को संत रामपाल जी महाराज द्वारा तुरंत स्वीकृति प्रदान की गई। प्रार्थना किए जाने के मात्र 32 घंटों के भीतर, संत रामपाल जी महाराज के आदेश से संपूर्ण आवश्यक ढांचागत सामग्री और पाइपों से लदा हुआ बड़ा ट्रक गाँव गुरथली पहुंचा दिया गया।
संत रामपाल जी महाराज ने किसान मजदूर बचाओ अभियान तथा पशुधन बचाओ शुद्ध जल पिलाओ अभियान के अंतर्गत निम्नलिखित सामग्री पूर्णतः निशुल्क उपलब्ध करवाई, जिसका विवरण इस प्रकार है:
वितरित अवसंरचनात्मक सामग्री की विवरणात्मक तालिका
| क्र.सं. | स्वीकृत उपकरण एवं सामग्री | विनिर्देश / आकार | मात्रा / स्थिति |
| 1 | भारी क्षमता वाले पीवीसी पाइप | 8 इंच व्यास (Diameter) | 5000 फीट |
| 2 | इलेक्ट्रिक वाटर पंपिंग मोटर | 10 हॉर्स पावर (HP) | 2 इकाइयां (सर्वेक्षण उपरांत स्थापना हेतु स्वीकृत) |
| 3 | सुरक्षा उपकरण | एयर वाल्व (Air Valve) | आवश्यकतानुसार पूर्ण सेट (निशुल्क) |
| 4 | सहायक इंजीनियरिंग एक्सेसरीज | नट-बोल्ट, प्लेट, जैन, बैंड, फेविकोल | प्रणालीगत आवश्यकतानुसार पूर्ण सेट |
| 5 | निर्माण एवं तकनीकी गुणवत्ता | क्रॉम्पटन (Crompton) / किर्लोस्कर (Kirloskar) | उच्च गुणवत्ता मानक |
सामग्री सौंपने के साथ ही सेवादारों ने ग्राम पंचायत को स्पष्ट तकनीकी निर्देश दिए कि सर्वप्रथम सभी 8 इंच के पाइपों को भूमिगत (जमीन के नीचे) व्यवस्थित रूप से दबाया जाए। पाइपों को आपस में जोड़ने के बाद, मिट्टी डालने से पहले उनमें पानी छोड़कर यह सुनिश्चित किया जाए कि कहीं कोई जोड़ या पाइप लीक तो नहीं हो रहा है।
संत रामपाल जी महाराज के आदेशानुसार हर 10 से 12 किलों की दूरी के हिसाब से पर्याप्त एयर वाल्व भी साथ भेजे गए हैं, जिन्हें लाइन में स्थापित करना अनिवार्य है। जैसे ही ग्राम पंचायत इन पाइपों को भूमिगत करने का कार्य पूर्ण कर इसकी सूचना देगी, सर्वे टीम पुनः आकर भौतिक निरीक्षण करेगी और उसके तुरंत बाद दोनों 10 एचपी की मोटरें गाँव को भौतिक रूप से हैंड ओवर कर दी जाएंगी।
गुरथली बस स्टैंड पर भव्य स्वागत एवं ग्रामीणों में उल्लास का वातावरण
जैसे ही राहत सामग्री से भरा ट्रक गुरथली बस स्टैंड जिला जींद पर पहुँचा, वैसे ही पूरे गाँव में उत्सव का माहौल बन गया। सुबह लगभग 6:20 बजे ही सरपंच के पास सामग्री रवानगी की सूचना आ गई थी, जिसके बाद समस्त ग्रामवासी और विशेषकर सिख समाज के लोग बड़ी संख्या में बस स्टैंड पर एकत्रित हो गए। किसानों ने अपने ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ काफिले की अगवानी की।
सद्गुरु की महिमा के गीतों और पवित्र मंगलाचरण के उच्चारण के साथ काफिले ने मुख्य चौपाल की ओर प्रस्थान किया। आदर प्रकट करने के लिए ग्रामीणों ने अपने जूते-चप्पल उतारकर पैदल चलते हुए संत रामपाल जी महाराज की टीम का स्वागत किया और फूलों की मालाएं अर्पित कीं।
इस अभूतपूर्व और त्वरित कार्य की खुशी में गाँव की मुख्य चौपाल में ग्रामीणों द्वारा लड्डू (प्रसाद) बनवाए गए और पूरे गाँव में वितरित किए गए। 80 वर्षीय बुजुर्ग ग्रामीण सूरजभान सहित अनेक किसानों ने भावुक होकर कहा कि जो कार्य बड़ी-बड़ी सरकारें वर्षों में नहीं कर पाईं, उसे संत रामपाल जी महाराज ने बिना एक भी रुपया लिए मात्र 32 घंटों में सच कर दिखाया है, जिसके लिए गाँव की आने वाली सात पीढ़ियां भी उनकी ऋणी रहेंगी।
गंदे पानी की समस्या का पूर्ण उन्मूलन एवं सुरक्षित पशुधन व कृषि का मार्ग प्रशस्त
संत रामपाल जी महाराज द्वारा उपलब्ध करवाई गई 5000 फीट लंबी इस दोहरी पाइपलाइन और उच्च क्षमता वाली मोटरों के माध्यम से गाँव गुरथली की वर्षों पुरानी गंदे पानी की समस्या का पूरी तरह से स्थाई समाधान सुनिश्चित हो गया है।
इस भूमिगत अवसंरचना के स्थापित होने से अब गाँव की नालियों और घरों का गंदा पानी खेतों, स्वच्छ रास्तों या पशुओं के पीने वाले जोहड़ में ओवरफ्लो नहीं होगा, बल्कि सीधे मुख्य सरकारी ड्रेन में सुरक्षित रूप से विसर्जित कर दिया जाएगा।
इसके परिणाम स्वरूप आसपास की कृषि भूमि जलभराव से मुक्त होकर पुनः उपजाऊ बनेगी, मच्छरों और मक्खियों के प्रकोप से होने वाली बीमारियां समाप्त होंगी और सबसे महत्वपूर्ण रूप से, गाँव का बहुमूल्य पशुधन चर्म रोगों से पूरी तरह सुरक्षित होकर स्वच्छ जल प्राप्त कर सकेगा, जिससे संपूर्ण ग्रामीण अर्थव्यवस्था सुदृढ़ होगी।



