हरियाणा के जिला जींद की तहसील जुलाना के अंतर्गत आने वाले गांव गढ़वाली में वर्ष 1995 की विनाशकारी बाढ़ के बाद से खेतों में जलभराव की गंभीर समस्या बनी हुई थी। पानी की प्राकृतिक निकासी का कोई स्थाई प्रबंध न होने के कारण गांव की लगभग 300 से 400 एकड़ (कुछ अन्य ग्रामीणों के अनुसार 800 एकड़ तक) उपजाऊ कृषि भूमि पिछले 30 वर्षों से लगातार प्रभावित हो रही थी।
मानसून और भारी बरसात के समय खेतों में कई-कई फीट पानी जमा हो जाता था, जिसके कारण स्थानीय किसानों की गेहूं, धान (जीरी) तथा अन्य फसलें प्रतिवर्ष पूरी तरह नष्ट हो जाती थीं। भूमि का जलस्तर अत्यधिक ऊपर होने के कारण पानी खेतों से प्राकृतिक रूप से नहीं सूखता था। इस निरंतर आर्थिक क्षति के कारण गांव की स्थिति इतनी विकट हो गई थी कि 32 एकड़ जैसी बड़ी जोतों के मालिकों की भी तीन दशकों से कोई फसल नहीं हो पा रही थी।
आर्थिक तंगी के कारण अनेक किसानों को विवश होकर अपनी स्वयं की भूमि छोड़नी पड़ी और अपने परिवारों के पालन-पोषण के लिए उन्हें जुलाना मंडी, रोहतक या अन्य शहरों में जाकर किराने की दुकानों पर अथवा मजदूरी के रूप में कार्य करना पड़ रहा था। स्वयं की कृषि भूमि होने के बावजूद ग्रामीणों को अपने बच्चों का पेट भरने के लिए बाजार से अनमोल अनाज खरीदने को मजबूर होना पड़ रहा था।
प्रशासनिक विफलता और स्थाई समाधान का अभाव
स्थानीय ग्रामीणों और ग्राम पंचायत के प्रतिनिधि अशोक तथा अन्य किसानों के अनुसार, पिछले 25 से 30 वर्षों के दौरान इस जलभराव की पुकार को लेकर प्रशासनिक और सरकारी स्तर पर अनेक बार गुहार लगाई गई थी। क्षेत्र की मुख्य ड्रेन (नाला) खेतों की तुलना में ऊंचे स्तर पर निर्मित होने के कारण खेतों का पानी स्वतः उसमें नहीं चढ़ पाता था, बल्कि ड्रेन का उल्टा पानी और झील का पानी ओवरफ्लो होकर इसी गांव के निचले खेतों में आकर जमा हो जाता था।
सरकारों द्वारा इस संकट का कोई स्थाई निवारण नहीं किया गया। शासन तंत्र केवल आर्थिक रूप से सुदृढ़ व्यवसायियों की ही सुनता था, जिसके कारण गरीब किसानों को उनके हाल पर छोड़ दिया गया था। सरकारी उपेक्षा के कारण जब किसानों की लागत दोगुनी होने के बाद भी पैदावार शून्य रही, तो ग्राम पंचायत ने एक ठोस और स्थाई समाधान की दिशा में प्रयास करने का निर्णय लिया।
ग्राम पंचायत की प्रथम प्रार्थना और पूर्व में प्राप्त सहायता का विवरण
इस भयंकर दुर्दशा से मुक्ति पाने के लिए ग्राम पंचायत गढ़वाली के सरपंच सुशील कुमार के नेतृत्व में किसानों का एक प्रतिनिधिमंडल कुछ समय पूर्व संत रामपाल जी महाराज के आश्रम में उपस्थित हुआ था।
ग्रामीणों की दयनीय स्थिति और 400 एकड़ भूमि के जलमग्न होने की समस्या को देखते हुए संत रामपाल जी महाराज ने तत्काल राहत प्रदान करने का आदेश दिया था। इसके अंतर्गत प्रथम चरण में गांव को निम्नलिखित सहायता प्रदान की गई थी:
- प्रथम चरण की सहायता: संत रामपाल जी महाराज के आदेश से गांव गढ़वाली को पहले ही 5000 फीट लंबी पाइपलाइन भेंट की जा चुकी थी।
- क्रियान्वयन: ग्राम पंचायत और स्थानीय किसानों ने आपसी सहयोग से इस 5000 फीट लंबी पाइपलाइन को खेतों में सफलतापूर्वक दबाकर जल निकासी का कार्य आरंभ कर दिया था।
- परिणाम: इस प्रथम प्रयास से दो मुख्य पॉइंटों के जलभराव वाले क्षेत्र को काफी राहत मिली और पानी की निकासी ड्रेन की तरफ शुरू हुई।
द्वितीय प्रार्थना और आधुनिक तकनीक से त्वरित वैज्ञानिक सर्वे
प्रथम 5000 फीट पाइपलाइन दबाने के बाद जब तकनीकी धरातल पर जांच की गई, तो सामने आया कि समस्या का पूरी तरह समूल नाश करने के लिए एक अन्य जलभराव वाले पॉइंट के लिए अतिरिक्त पाइपलाइन की आवश्यकता शेष है।
इस अपूर्ण कार्य को पूरा करने के लिए सरपंच सुशील कुमार और ग्रामीण दोबारा संत रामपाल जी महाराज के धनाना आश्रम में प्रार्थना पत्र लेकर पहुंचे। इस प्रार्थना पर तत्काल संज्ञान लेते हुए संत रामपाल जी महाराज ने अपनी विशेषज्ञ तकनीकी सर्वे टीम को तुरंत गांव गढ़वाली के लिए रवाना किया।
- त्वरित आगमन: जब ग्राम पंचायत के प्रतिनिधि आश्रम में प्रार्थना देकर अभी वापस अपने गांव भी नहीं पहुंचे थे, उससे पहले ही संत रामपाल जी महाराज द्वारा निर्देशित सर्वे टीम गांव के खेतों में पहुंच चुकी थी।
- आधुनिक सर्वे तकनीक: सर्वे टीम ने पारंपरिक मापन विधियों के स्थान पर अत्याधुनिक ड्रोन (Drone) और गूगल मैप (Google Map) तकनीक का उपयोग किया।
- मापन प्रक्रिया: खेतों के जलभराव के मुख्य स्रोत (फर्स्ट पॉइंट) से लेकर पक्के रास्ते के साथ-साथ मुड़ते हुए अंतिम ड्रेन (निकासी स्थल) तक की कुल दूरी का वैज्ञानिक मापन किया गया।
- सर्वे का परिणाम: ड्रोन और गूगल मैप मापन में यह दूरी कुल 1.6 किलोमीटर निर्धारित हुई, जो तकनीकी रूप से 5300 फीट बैठती है।
36 घंटे के भीतर सहायता सामग्री का आगमन और तकनीकी उपकरण
तकनीकी सर्वे रिपोर्ट के अनुमोदन के तुरंत बाद, ‘किसान मजदूर बचाओ अभियान फेज दो’ के अंतर्गत संत रामपाल जी महाराज के आदेश से मात्र 36 घंटे के भीतर भारी वाणिज्यिक वाहनों (ट्रकों) के माध्यम से पूरी सहायता सामग्री गांव गढ़वाली के कार्यक्रम स्थल पर पहुंचा दी गई। संत रामपाल जी महाराज ने अन्नपूर्णा मुहिम के माध्यम से इस बाढ़ राहत कार्य हेतु निम्नलिखित उच्च गुणवत्ता वाले औद्योगिक उपकरण सीधे ग्राम पंचायत को हैंडओवर करवाए:
- मुख्य पाइपलाइन: 5300 फीट लंबी और 8 इंच व्यास (डायमीटर) वाली पीवीसी (PVC) पाइपलाइन।
- सुरक्षा उपकरण (एयर वाल्व): पाइपलाइन के भीतर पानी के अत्यधिक दबाव और हवा के अवरोध को नियंत्रित करने के लिए विशेष एयर वाल्व (Air Valve) उपलब्ध कराए गए ताकि पाइप फटने की संभावना न रहे।
- कनेक्टिंग एक्सेसरीज: पाइपों को आपस में जोड़ने के लिए आवश्यक संख्या में बैंड (Band), स्टील प्लेट्स, रबर जैन (जॉइंट्स) और भारी नट-बोल्ट।
- केमिकल सॉल्वेंट: पाइपों को पूरी तरह से एयरटाइट और लीक-प्रूफ चिपकाने के लिए औद्योगिक स्तर का फेविकोल व अन्य आवश्यक पीवीसी सॉल्वेंट सामग्री।
पंपिंग मोटर के वितरण के संबंध में तकनीकी निर्देश
वितरण कार्यक्रम के दौरान संत रामपाल जी महाराज के तकनीकी सेवादारों ने ग्रामवासियों के समक्ष मोटर के क्रियान्वयन को लेकर एक स्पष्ट और अनिवार्य प्रोटोकॉल रखा। सेवादारों ने बताया कि इस 5300 फीट लंबी नई लाइन के लिए 7.5 हॉर्स पावर (एचपी) क्षमता की एक हैवी-ड्यूटी वाटर पंपिंग मोटर पूरी तरह स्वीकृत हो चुकी है। इसके सुचारू संचालन के लिए निम्नलिखित चरण निर्धारित किए गए हैं:
- प्रथम चरण: ग्राम पंचायत को निर्देश दिया गया है कि वे सर्वप्रथम इस 5300 फीट पाइपलाइन को निर्धारित रूट पर भूमिगत (अंडरग्राउंड) करने का कार्य पूरा करें।
- द्वितीय चरण (लीकेज परीक्षण): पाइपलाइन दबाते समय उसमें सर्वप्रथम पानी छोड़कर पूर्ण रूप से चेक करना होगा कि कहीं कोई लीकेज तो नहीं है, तथा साथ में दी गई एयर वाल्व को अनिवार्य रूप से स्थापित करना होगा।
- तृतीय चरण (मिट्टी भराव): पानी की सफल टेस्टिंग के बाद ही पाइपों के ऊपर मिट्टी डाली जाएगी।
- चतुर्थ चरण (अंतिम भौतिक सत्यापन): कार्य पूर्ण होने पर ग्राम पंचायत की सूचना पर सर्वे टीम दोबारा आकर दबे हुए पाइपों की स्थिति का भौतिक निरीक्षण करेगी।
- पंचम चरण (मोटर हैंडओवर): निरीक्षण रिपोर्ट सही पाए जाने के तुरंत अगले ही दिन 7.5 एचपी की मोटर अधिकारिक तौर पर गांव में स्थापित कर दी जाएगी।
ग्रामीणों, महिलाओं और बुजुर्गों में उत्साह का माहौल
जैसे ही सहायता सामग्री से भरे ट्रक गांव की सीमा में दाखिल हुए, ग्रामीणों ने ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के विशाल काफिले के साथ और हाथों में फूलों की मालाएं लेकर संत रामपाल जी महाराज की टीम का जोरदार स्वागत किया। लाउडस्पीकरों पर भक्ति गीतों के साथ पूरे गांव की गलियां और मार्ग भर गए।
- सरपंच सुशील कुमार का वक्तव्य: सरपंच ने कहा कि परमात्मा की इस असीम दया से पूरा गांव खुशी से सराबोर है। सरकारें जहां महीनों और सालों तक फाइलों में कमियां निकालती रहती हैं, वहीं संत रामपाल जी महाराज ने परसों की प्रार्थना पर आज सामग्री भेजकर चमत्कारिक गति से कार्य किया है।
- किसान अशोक का बयान: अशोक ने कहा कि पहले 5000 फीट और अब 5300 फीट, यानी कुल 10,300 फीट पाइपलाइन की इतनी विशाल सहायता देकर संत रामपाल जी महाराज ने किसानों को जीवनदान दिया है। समस्त ग्रामवासी सदा उनके ऋणी रहेंगे।
- महिला ग्रामीणों की प्रतिक्रिया: गांव की महिलाओं ने हाथ जोड़कर भावुक होते हुए कहा कि तीन दशकों से उनके बच्चे दाने-दाने को तरस रहे थे और पतियों को बाहर मजदूरी करनी पड़ती थी। अब खेत सुधरने से घर में ही फसल होगी और बच्चों का भविष्य संवरेगा।
- युवा किसानों का मत: युवाओं ने बताया कि सरकारें केवल पूंजीपतियों की सुनती हैं, परंतु संत रामपाल जी महाराज ने बिना किसी भेदभाव के सेकंडों में गरीब अन्नदाता की रीड की हड्डी को मजबूत करने का कार्य किया है।
गांव गढ़वाली (जींद) जलभराव निवारण परियोजना का सांख्यिकीय विवरण
| परियोजना अवयव / पैरामीटर | तकनीकी एवं वास्तविक आंकड़े |
| प्रभावित क्षेत्र का विवरण | गांव गढ़वाली, तहसील जुलाना, जिला जींद (हरियाणा) |
| समस्या का इतिहास (अवधि) | वर्ष 1995 की बाढ़ से निरंतर (पिछले 30 वर्षों से) |
| कुल प्रभावित कृषि रकबा | लगभग 300 से 400 एकड़ (स्थानीय अनुमानुसार 800 एकड़ तक) |
| प्रथम चरण में प्रदान पाइपलाइन | 5,000 फीट लंबी पाइपलाइन (सफलतापूर्वक स्थापित) |
| द्वितीय चरण (फेज दो) प्रदायित पाइप | 5,300 फीट लंबी, 8 इंच व्यास वाली पीवीसी पाइपलाइन |
| वैज्ञानिक सर्वे की दूरी | 1.6 किलोमीटर (खेतों के प्रथम बिंदु से अंतिम मुख्य ड्रेन तक) |
| स्वीकृत कुल वाटर पंप मोटर | 7.5 हॉर्स पावर (HP) क्षमता की 01 हैवी-ड्यूटी मोटर |
| सहायक फिटिंग उपकरण | एयर वाल्व, एसआर बैंड, स्टील प्लेट, नट-बोल्ट, रबर जैन, फेविकोल |
| कुल संचयी पाइपलाइन सहायता | 10,300 फीट (प्रथम चरण 5000 + द्वितीय चरण 5300) |
| परियोजना का मुख्य उद्देश्य | 30 साल पुराने जलभराव को ड्रेन में डालकर भूमि को कृषि योग्य बनाना |
अन्नपूर्णा मुहिम से गढ़वाली में कृषि और आजीविका की पुनर्स्थापना
संत रामपाल जी महाराज ने ‘किसान मजदूर बचाओ अभियान फेज दो’ के अंतर्गत गांव गढ़वाली को कुल 10,300 फीट पाइपलाइन की संचयी सहायता प्रदान कर क्षेत्र के कृषि संकट का स्थाई अंत सुनिश्चित कर दिया है।
इस वैज्ञानिक ड्रेनेज प्रणाली के पूर्ण होने से 400 एकड़ से अधिक की वह कृषि भूमि, जो पिछले तीन दशकों से पूरी तरह जलमग्न और बंजर पड़ी थी, दोबारा उपजाऊ रूप में परिवर्तित होने जा रही है। इससे उन सैकड़ों किसान परिवारों को दोबारा अपनी पुश्तैनी भूमि पर खेती करने का अवसर मिलेगा जो आर्थिक तंगी के कारण शहरों में मजदूरी करने पर विवश थे। यह ऐतिहासिक लोक कल्याणकारी कार्य यह सिद्ध करता है कि बिना किसी फॉर्मेलिटी के धरातल पर किया गया वास्तविक सामाजिक प्रयास ही समाज के अंतिम छोर पर बैठे अन्नदाता और मजदूर का वास्तविक उत्थान कर सकता है।



