हरियाणा के भिवानी स्थित दांग खुर्द में संत रामपाल जी महाराज का महादान, पानी निकालने के लिए दिए भारी उपकरण

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हरियाणा राज्य के जिला भिवानी की तहसील तोशाम के अंतर्गत आने वाले ग्राम दांग खुर्द में प्रकृति का भारी प्रकोप देखने को मिला। ड्रेन टूट जाने के कारण गांव की हजारों एकड़ उपजाऊ जमीन एक ही रात में समंदर में तब्दील हो गई। इस जलभराव ने किसानों की खरीफ की फसल को पूरी तरह निगल लिया। खेतों में पानी भर जाने से न केवल फसलें नष्ट हुईं, बल्कि पशुओं के लिए चारे का भी भारी संकट उत्पन्न हो गया। इसके अतिरिक्त, गांव की डिस्पेंसरी पानी भरने के कारण बंद पड़ गई थी और बच्चों का स्कूल जाना भी बाधित हो गया था क्योंकि स्कूलों में जलभराव था। खेतों में अत्यधिक पानी होने से किसानों की सबसे बड़ी चिंता आगामी रबी (गेहूं) की फसल की बिजाई को लेकर थी। यदि खेतों से पानी नहीं निकाला जाता, तो बिजाई असंभव थी, जिसके परिणामस्वरूप गरीब किसानों को अनाज खरीदकर खाना पड़ता और 36 बिरादरी के जान-माल पर भारी संकट आ जाता।

मुख्य बिंदु:

  • ​जिला भिवानी के दांग खुर्द गांव में ड्रेन टूटने से हजारों एकड़ जमीन जलमग्न हुई और खरीफ की फसल पूरी तरह नष्ट हो गई।
  • ​स्थानीय प्रशासन से केवल कोरे आश्वासन मिलने के उपरांत ग्राम पंचायत ने जगतगुरु संत रामपाल जी महाराज से मदद की गुहार लगाई।
  • ​संत रामपाल जी महाराज के सख्त आदेश पर मात्र एक सप्ताह के भीतर 14,000 फुट पाइप और तीन 10 एचपी की मोटरें गांव में पहुंचीं।
  • ​मोटर, स्टार्टर, केबल से लेकर नट-बोल्ट तक समस्त सामग्री पूर्णतः निःशुल्क और बिना किसी परिवहन शुल्क के प्रदान की गई।
  • ​गांव की डिस्पेंसरी और स्कूल जलभराव के कारण बंद थे, अब पानी निकलने से 36 बिरादरी को राहत मिलेगी।
  • ​संत रामपाल जी महाराज द्वारा अब तक 400 से अधिक बाढ़ प्रभावित गांवों में राहत सेवा पूरी की जा चुकी है।

​​दांग खुर्द के ग्रामीणों ने मदद के लिए संत रामपाल जी महाराज से कैसे संपर्क किया

जलभराव की इस विकट स्थिति का सामना कर रहे दांग खुर्द के ग्रामीणों ने सर्वप्रथम राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन का दरवाजा खटखटाया। किसानों ने अपनी पीड़ा और जलमग्न खेतों की भयावह स्थिति का पूर्ण विवरण अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत किया। दुर्भाग्यवश, उन्हें प्रशासन की ओर से केवल आश्वासन और खोखले वादे ही प्राप्त हुए। धरातल पर पानी निकालने के लिए कोई भी साधन उपलब्ध नहीं कराया गया। इस घोर निराशाजनक स्थिति में, जब शासन और प्रशासन ने मुंह फेर लिया, तब गांव की पंचायत ने एक आखिरी उम्मीद के साथ जगतगुरु संत रामपाल जी महाराज के समक्ष अपनी अर्जी लगाने का निर्णय लिया। ग्रामीणों को ज्ञात था कि अन्य बाढ़ प्रभावित गांवों में संत रामपाल जी महाराज द्वारा बिना किसी स्वार्थ के बड़ी मात्रा में राहत सामग्री दी जा रही है। इसी अटूट विश्वास के साथ दांग खुर्द की पंचायत ने संत रामपाल जी महाराज के चरणों में प्रार्थना की कि उनके गांव को भी इस संकट से मुक्ति दिलाने के लिए सहयोग प्रदान किया जाए।

त्वरित कार्रवाई और एक सप्ताह के भीतर राहत सामग्री का गांव में आगम

संत रामपाल जी महाराज के पास जैसे ही दांग खुर्द गांव की पंचायत की प्रार्थना पहुंची, उन्होंने बिना कोई विलंब किए त्वरित कार्रवाई का आदेश दिया। उनकी कार्यप्रणाली किसी सरकारी बजट की मंजूरी या जटिल कागजी कार्रवाई की मोहताज नहीं है। उनकी गति का आलम यह था कि अर्जी देने के मात्र एक हफ्ते के भीतर ही राहत सामग्री से भरे ट्रकों और लोडिंग गाड़ियों का एक लंबा काफिला दांग खुर्द गांव की सीमा पर पहुंच गया। यह किसी साधारण व्यक्ति का कार्य नहीं था, बल्कि एक मसीहा द्वारा त्वरित कारवाई थी। सेवादारों द्वारा ड्रोन कैमरों के माध्यम से गांव की भयावह स्थिति का जायजा लिया गया और तुरंत ही मोटर तथा पाइपों को गांव में उतारने का कार्य आरंभ कर दिया गया।

करोड़ों रुपये की राहत सामग्री का पारदर्शी विवरण

संत रामपाल जी महाराज द्वारा भेजी गई राहत सामग्री पूर्णतः मुकम्मल, उच्च गुणवत्ता वाली और ब्रांडेड थी। गांव वालों को यह सामग्री पूर्णतः निःशुल्क प्रदान की गई। सेवादारों ने बताया कि ग्रामीणों को सामग्री गांव तक लाने के लिए गाड़ी का किराया तक नहीं देना पड़ा।

​राहत सामग्री का विवरण इस प्रकार है:

क्रमांकसामग्री का नाममात्रा एवं विस्तृत विवरण
1डबल लेयर पाइप (8 इंच गोलाई)14,000 फुट (प्रत्येक पाइप 30 फुट लंबा)
2शक्तिशाली मोटर (क्रॉम्पटन)3 मोटरें (प्रत्येक 10 हॉर्स पावर क्षमता)
3मोटर स्टार्टर3 स्टार्टर
4बिजली केबल60-60 फुट (स्टार्टर से मोटर तक के लिए)
5फिटिंग सामग्रीएल्बो, बैंड, हांडी
6अन्य आवश्यक उपकरणतार

भविष्य की चेतावनी और पारदर्शिता का सख्त संदेश

राहत सामग्री सौंपते समय ग्राम पंचायत दांग खुर्द को संत रामपाल जी महाराज की ओर से एक विशेष निवेदन और सख्त आदेश पत्र भी सौंपा गया। इस पत्र में स्पष्ट किया गया था कि यह सामग्री इसलिए दी जा रही है ताकि गांव का पानी जल्द से जल्द निकाला जा सके और अगली फसल की बिजाई सुनिश्चित हो सके। पत्र में सख्त हिदायत दी गई कि यदि इस सामग्री से निर्धारित समय पर पानी नहीं निकाला गया और लापरवाही के कारण फसल की बिजाई नहीं हुई, तो भविष्य में किसी भी आपदा में संत रामपाल जी महाराज द्वारा उनके गांव की कोई मदद नहीं की जाएगी। यदि गांव वालों को और अधिक सामान की आवश्यकता है, तो वे प्रार्थना करके मांग सकते हैं, लेकिन पानी हर हाल में निकलना चाहिए। पारदर्शिता के लिए ड्रोन से वर्तमान जलभराव की वीडियो बनाई गई है। पानी निकलने के बाद दूसरी वीडियो बनाई जाएगी, और जब फसल लहरा रही होगी तब तीसरी वीडियो बनेगी। इन सभी वीडियो को सभी सतलोक आश्रमों के समागमों में प्रोजेक्टर पर चलाया जाएगा ताकि संगत को विश्वास हो कि उनके द्वारा दिए गए दान का कोई दुरुपयोग नहीं होता और इससे लाखों लोगों को जीवनदान मिल रहा है।

यह भी पढ़ें: जब बिरधाना (झज्जर) बना ‘नरक’, तब संत रामपाल जी महाराज ने भेजी ‘संजीवनी’ | “अन्नपूर्णा मुहिम” 

किसानों, मजदूरों और ग्राम पंचायत की भावुक प्रतिक्रिया

जब करोड़ों रुपये की राहत सामग्री गांव में पहुंची, तो गांव वालों की आंखों में वह चमक थी जो किसी दिवाली के त्योहार से कम नहीं थी। गांव के पंच, सरपंच और अन्य सभी ग्रामीण वहां एकत्रित हुए और उन्होंने पूरी पंचायत के साथ संत रामपाल जी महाराज के आदेश पत्र को स्वीकार कर उस पर हस्ताक्षर किए। ग्रामीण खूबराम और अन्य किसानों ने भावुक होते हुए कहा कि सरकार ने तो उन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया था, लेकिन संत रामपाल जी महाराज उनके लिए साक्षात भगवान बनकर आए हैं। ग्रामीणों ने बताया कि यह मदद उनके लिए “सोने पर सुहागा” के समान है। यदि यह सहायता नहीं मिलती, तो उनका जीवन अंधकारमय हो जाता, क्योंकि फसल नष्ट होने से किसान और मजदूर दोनों बर्बाद हो जाते। ग्रामीणों ने एक स्वर में कहा कि वे जीवन भर संत रामपाल जी महाराज के इस उपकार को नहीं भूलेंगे।

अन्य धार्मिक संस्थाओं के लिए एक अनुकरणीय और ऐतिहासिक मिसाल

बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं का अंदाजा लगाना कठिन होता है, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहां अमूमन सूखा रहता है। जब सरकार के प्रयास नाकाफी साबित होते हैं, तब समाज की मदद के लिए धार्मिक संस्थाओं को आगे आना चाहिए। वर्तमान में, कई कथावाचक जो कथा करने के लाखों रुपये लेते हैं, वे सारा धन हजम कर जाते हैं और आपदा के समय समाज की कोई सुध नहीं लेते। इसके विपरीत, संत रामपाल जी महाराज ने एक अद्वितीय मिसाल पेश की है। दान में प्राप्त एक-एक पैसे को निस्वार्थ भाव से परमार्थ और जनसेवा में लगाया जा रहा है। अब तक 400 से अधिक बाढ़ प्रभावित गांवों में यह विशाल सेवा कार्य पूरा किया जा चुका है और यह निरंतर जारी है।

प्रशासनिक नाकामी के बीच आशा की किरण: संत रामपाल जी महाराज का परोपकार

निष्कर्ष के रूप में यह सत्य है कि वर्तमान युग में जहां लोग परोपकार में कुछ भी खर्च नहीं करना चाहते, वहां संत रामपाल जी महाराज बिना किसी राजनीतिक स्वार्थ के करोड़ों रुपये की सामग्री समाज के कल्याण के लिए प्रदान कर रहे हैं। जिस गति और निस्वार्थ भावना के साथ उन्होंने दांग खुर्द के किसानों का जीवन संवारा है, वह सिद्ध करता है कि वे ही वास्तव में मानवता के सच्चे रक्षक हैं। संत रामपाल जी महाराज ने किसानों की पीड़ा को समझा और उनके आंसू पोंछने का वह महान कार्य किया है जो किसी भी सरकार के लिए संभव नहीं था। उन्होंने गांव वालों को वह अनमोल उपहार दिया है जिससे न केवल उनके वर्तमान की फसल का पानी निकलेगा, बल्कि भविष्य में भी बाढ़ की समस्या का सदा के लिए समाधान हो जाएगा।

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