जब बिरधाना (झज्जर) बना ‘नरक’, तब संत रामपाल जी महाराज ने भेजी ‘संजीवनी’ | “अन्नपूर्णा मुहिम”

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​हरियाणा के झज्जर जिले का गाँव बिरधाना एक ऐसी त्रासदी झेल रहा था जिसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है। यह कहानी किसी बाढ़ की नहीं, बल्कि एक हंसते-खेलते गाँव के “नरक” में तब्दील हो जाने की है। महीनों से गाँव का पानी निकल नहीं रहा था। खेतों में जमा पानी इतना पुराना हो चुका था कि उस पर हरी काई की मोटी परत जम गई थी। लेकिन असली खौफ बस्तियों और घरों के अंदर था।

​डूबते घर और बंद स्कूल

​गाँव वालों का दर्द सुनकर रूह कांप जाती है। उनके घरों के अंदर तीन-तीन फीट पानी भरा था। गंदे पानी में जहरीले कीड़े, सांप और कांटे तैर रहे थे। जीना मुहाल हो चुका था। सबसे दुखद स्थिति शिक्षा की थी, गाँव के तीन स्कूल 6 फीट गहरे पानी में पूरी तरह डूब गए थे। बच्चों की पढ़ाई ठप थी और उनका भविष्य पानी में समा रहा था।

इतनी बड़ी आपदा के सामने प्रशासन का रवैया शर्मनाक था। मदद के नाम पर उन्होंने गाँव को एक पुरानी, टूटी-फूटी मोटर दी थी, जो बार-बार बंद हो जाती थी। यह गाँव वालों के ज़ख्मों पर नमक छिड़कने जैसा था। लोग मान चुके थे कि अब इसी नरक में घुट-घुटकर मरना उनकी नियति है।

​सतगुरु के दरबार में आखिरी पुकार

​जब इंसान हर तरफ से हार जाता है, तो वह भगवान को पुकारता है। बिरधाना के ग्रामीणों और पंचायत ने भी यही किया। उन्होंने जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज के सतलोक आश्रम में अर्जी लगाई। उन्होंने धन-दौलत नहीं मांगी, उन्होंने बस जीने का अधिकार मांगा और दयालु सतगुरु रामपाल जी महाराज जी ने उनकी पुकार को पल भर में सुन लिया।

​ऐतिहासिक राहत: 7 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन

​रात के अंधेरे में बिरधाना की सड़कों पर एक विशाल काफिला दाखिल हुआ। यह काफिला था उम्मीद का, जीवन का। संत रामपाल जी महाराज ने गाँव को बचाने के लिए 22,000 फीट (लगभग 7 किलोमीटर) लंबे 8 इंच के पाइप भेजे। इसके साथ ही 5 विशालकाय 15 हॉर्स पावर की मोटरें भी भेजी गईं।

जैसे ही ट्रकों से नीले और काले पाइप उतरने शुरू हुए, गाँव वालों की आँखों में आँसू आ गए। लोग छतों पर चढ़कर इस नज़ारे को देखने लगे। गाँव की सड़कें पाइपों से भर गईं। सेवादारों ने बताया कि स्टार्टर, बैंड, नट-बोल्ट और फेविकोल तक सब कुछ साथ लाया गया है, ताकि गाँव वालों का एक रुपया भी खर्च न हो।

यह भी पढ़ें: भैणी महाराजपुर, रोहतक (हरियाणा) में संत रामपाल जी महाराज ने किया चमत्कार, 20 साल पुराना रिश्ता बना किसानों के लिए संजीवनी

​”यह हमारे लिए संजीवनी बूटी है”

​राहत सामग्री देखकर एक ग्रामीण ने बहुत ही भावुक बात कही। उन्होंने कहा,

“जिस तरह मूर्छित लक्ष्मण के लिए हनुमान जी संजीवनी बूटी लाए थे और उन्हें होश आ गया था, उसी तरह हमारा गाँव मूर्छित पड़ा था। संत रामपाल जी महाराज ने ये पाइप और मोटरें भेजकर हमें संजीवनी दी है। आज गाँव फिर से सांस ले पा रहा है।”

​ग्रामीणों की जुबानी: “हरि हरियाणा में आ गए”

  • रिटायर्ड मास्टर रामफल जी ने कहा: “यह जगह नरक बन गई थी। अगर यह मदद न मिलती, तो अगले साल तक भी यह पानी नहीं सूखता। सरकार की मोटरें तो दम तोड़ गईं, लेकिन गुरुजी ने हमें बचा लिया।”
  • सरपंच ने गदगद होकर बताया: “हमने 5 मोटरें और 22,000 फीट पाइप मांगे थे। गुरुजी ने सब कुछ दे दिया और वो भी बिल्कुल मुफ्त। उन्होंने हमारे लिए ‘मौज’ कर दी।”
  • एक युवा साथी ने कहा: “आज पूरे हरियाणा में जो ‘रामपाल जी भगवान की जय’ हो रही है, वो यूं ही नहीं है। जिधर देखो उनकी मदद पहुंच रही है। हमारे लिए तो वही भगवान हैं।”

​परमानेंट समाधान और सेवा का संकल्प

​यह मदद केवल पानी निकालने तक सीमित नहीं थी। यह उपकरण अब हमेशा के लिए गाँव की संपत्ति हैं। भविष्य में अगर दोबारा बाढ़ आती है, तो गाँव वाले खुद उससे निपट सकेंगे। सेवादारों ने पंचायत को निवेदन पत्र सौंपा कि वे जल्द से जल्द पानी निकालकर बच्चों के स्कूल और किसानों के खेत खाली करें। पंचायत ने भी संकल्प लिया कि वे इस मदद का पाई-पाई सदुपयोग करेंगे।

​हर धड़कन में उत्साह 

​बिरधाना की कहानी हमें बताती है कि सच्चा धर्म क्या है। सच्चा धर्म है, डूबते को बचाना, रोते को हंसाना। संत रामपाल जी महाराज ने बिरधाना के स्कूलों से पानी निकालकर बच्चों के हाथों में फिर से किताबें थमा दी हैं। उन्होंने घरों से ज़हरीले कीड़ों को निकालकर वहां फिर से खुशियां लौटा दी हैं। आज जब बिरधाना की 5 मोटरें एक साथ गरजती हैं, तो उनकी आवाज़ में एक ही संदेश सुनाई देता है, “संत रामपाल जी महाराज की जय ।”

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