संत रामपाल जी महाराज ने किसान मज़दूर बचाओ अभियान के चरण 2 के तहत झज्जर के बीड़ छुचकवास में पाइप पहुंचाए

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हरियाणा राज्य के झज्जर जिले के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत बीड़ छुचकवास के गांव सूरजगढ़ (जिसके तहत भालगढ़, सूरजगढ़ और बीड़ छुचकवास क्षेत्र शामिल हैं) में पिछले कई दशकों से भीषण जलभराव की समस्या बनी हुई थी। स्थानीय ग्रामीणों और बुजुर्गों के अनुसार, वर्ष 1967 के बाद से इस क्षेत्र के किसानों ने अपनी कृषि भूमि को कभी भी पूरी तरह से सूखा नहीं देखा था। 

लगभग 50-60 वर्षों की इस लंबी समयावधि के दौरान गांव की लगभग 250 से 300 एकड़ उपजाऊ कृषि भूमि पूरी तरह से एक भयानक और गहरी झील में तब्दील हो चुकी थी। खेतों के इस डूब क्षेत्र में निरंतर 4 से 5 फुट गहरा सड़ा हुआ और बदबूदार पानी खड़ा रहता था, जिसमें सांप और बिच्छू तैरते रहते थे। इस स्थाई जलभराव के कारण स्थानीय किसान खरीफ के मौसम में धान और बाजरा की फसल तथा रबी के मौसम में गेहूं और सरसों की फसल की बिजाई करने में पूरी तरह असमर्थ थे। 

पूरी-पूरी खड़ी फसलें पानी में गलकर नष्ट हो जाती थीं। इस प्रकार, एक पूरी पीढ़ी गुजर जाने के बाद भी इन खेतों ने अनाज का उत्पादन नहीं देखा था। इसके अतिरिक्त, जलभराव के दिनों में जब बाढ़ आती थी, तो पानी का स्तर अत्यधिक बढ़ने के कारण पूरा गांव डूबने की कगार पर पहुँच जाता था। ग्रामीणों को मजबूरन घास काटने या खेतों में आवागमन करने के लिए तसलों और अन्य देशी साधनों का सहारा लेना पड़ता था।

प्रशासनिक उपेक्षा, राजनीतिक विफलता और पंचायत की अर्जी

पिछले 50 वर्षों से अधिक समय से राज्य सरकारों और स्थानीय प्रशासन ने इस गंभीर समस्या के प्रति पूरी तरह से उपेक्षापूर्ण रवैया अपनाया हुआ था। चुनाव के समय विभिन्न राजनीतिक नेता और प्रत्याशी गांव में आकर वोट मांगते थे, परंतु चुनाव जीतने के बाद कोई भी सुध लेने नहीं आता था। 

सरकार द्वारा कभी-कभी अस्थाई तौर पर जो मोटरें लगाई जाती थीं, उनसे पानी का स्तर नाममात्र ही कम होता था और जल निकासी का कोई स्थाई प्रबंध नहीं हो पाता था। इस निरंतर बर्बादी के कारण स्थानीय किसान पूरी तरह से कर्ज, आर्थिक तबाही और गहरी मायूसी के दलदल में डूब चुके थे।

जब प्रशासनिक स्तर पर समाधान के सारे मार्ग बंद हो गए, तब ग्राम पंचायत बीड़ छुचकवास ने संत रामपाल जी महाराज द्वारा चलाए जा रहे ‘किसान मजदूर बचाओ अभियान’ का रुख करने का निर्णय लिया। ग्राम पंचायत के सरपंच, पंच और अन्य गणमान्य बुजुर्गों ने संत रामपाल जी महाराज के चरणों में अपनी लिखित अर्जी लगाई। ग्राम पंचायत द्वारा अपने ऑफिशियल लेटर हेड पर प्रस्तुत की गई इस अर्जी में समस्या के समाधान हेतु 3000 फीट लंबे पाइप तथा 1 विद्युत मोटर उपलब्ध कराने की मांग रखी गई थी।

सेवादार सर्वे टीम का तकनीकी निरीक्षण और संशोधित आकलन

ग्राम पंचायत बीड़ छुचकवास द्वारा अर्जी प्रस्तुत किए जाने के तुरंत बाद संत रामपाल जी महाराज के आदेशानुसार सेवादारों की एक विशेष तकनीकी सर्वे टीम सूरजगढ़ गांव पहुंची। इस टीम ने जलभराव वाले खेतों, भूमि की ढलान और पानी की निकासी के मार्गों का अत्यंत बारीकी से स्थलीय मुआयना और तकनीकी मूल्यांकन किया।

सर्वे टीम के निरीक्षण में निम्नलिखित तथ्य और तकनीकी आवश्यकताएं सामने आईं:

  • ग्राम पंचायत ने अपने प्रार्थना पत्र में केवल 1 मोटर की मांग रखी थी, परंतु सर्वे टीम के तकनीकी आकलन के अनुसार पानी के अत्यधिक भराव और क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए केवल 1 मोटर से जल निकासी संभव नहीं थी।
  • खेतों का पानी पूरी तरह निकालने के लिए कम से कम 2 शक्तिशाली मोटरों की आवश्यकता पाई गई।
  • इस समस्या के स्थाई निवारण हेतु कुल 3000 फीट लंबे और 8 इंच व्यास (चौड़ाई) वाले भारी-भरकम पाइपों की आवश्यकता को अंतिम रूप से पास किया गया।
  • जल निकासी के लिए चिन्हित किए गए मुख्य पॉइंट पर, जो कि चौकीदार लखीराम के खेत के पास स्थित है, वहां पर एक विशेष रूप से 20 एचपी (HP) की भारी-भरकम विद्युत मोटर सहित कुल 2 मोटरें लगाने का तकनीकी निर्णय लिया गया ताकि पानी को सीधे मुख्य नहर में फेंका जा सके।

महज 24 घंटे में राहत सामग्री की आपातकालीन आपूर्ति और ग्रामीणों द्वारा भव्य स्वागत

अर्जी लगाए जाने और सर्वे पूरा होने के महज 24 घंटे के भीतर एक अभूतपूर्व चमत्कारिक घटनाक्रम के तहत राहत सामग्री की पूरी खेप गांव की चौपाल पर पहुँच गई। संत रामपाल जी महाराज ने चरण 2 की इस बाढ़ राहत मुहिम के अंतर्गत रातों-रात 3000 फीट लंबी 8 इंची भारी-भरकम पाइपों की खेप, पाइपों को आपस में जोड़ने के लिए आवश्यक फेविकोल (सॉल्यूशन), एसआर (SR), एयर वाल्व और अन्य सभी सहायक तकनीकी उपकरण गांव में भिजवा दिए।

इस अकल्पनीय और तीव्र सहायता के सूरजगढ़ गांव में पहुँचते ही ग्रामीणों में अत्यंत हर्ष का माहौल व्याप्त हो गया। संत रामपाल जी महाराज के इस परोपकारी कार्य के सम्मान और स्वागत में पूरा गांव उमड़ पड़ा। दर्जनों ट्रैक्टरों के काफिले, ढोल-नगाड़ों की थाप और अंतरराष्ट्रीय बीन वादक कैलाशनाथ जी की सुरीली बीन की धुनों के बीच एक विजय जुलूस निकाला गया। 

गांव के सरपंच और प्रबुद्ध नागरिकों ने हाथों में फूलों की मालाएं लेकर तथा संत रामपाल जी महाराज के स्वरूप पर पुष्प वर्षा करके और माल्यार्पण करके अपनी गहरी कृतज्ञता प्रकट की। गांव वालों ने इस अवसर पर खुशी में लड्डू बांटे और संत रामपाल जी महाराज के जयकारे लगाए।

बीड़ छुचकवास (सूरजगढ़) बाढ़ राहत परियोजना का विस्तृत विवरण

परियोजना मापदंडप्रामाणिक विवरण एवं सांख्यिकी आंकड़े
प्रभावित क्षेत्रगांव सूरजगढ़, भालगढ़, ग्राम पंचायत बीड़ छुचकवास, जिला झज्जर, हरियाणा
समस्या की ऐतिहासिक अवधिवर्ष 1967 से (लगभग 50-60 वर्षों से निरंतर जलभराव)
प्रभावित कृषि क्षेत्रलगभग 250 से 300 एकड़ उपजाऊ भूमि (बंजर पड़ी झील)
राहत अभियान का नामअन्नपूर्णा मुहिम के अंतर्गत किसान मजदूर बचाओ अभियान — चरण 2
आपूर्ति की गई पाइपलाइन3,000 फीट लंबे, 8 इंच व्यास (चौड़ाई) के भारी-भरकम पाइप
तकनीकी उपकरण व सामग्रीऔद्योगिक फेविकोल (सॉल्यूशन), एसआर (SR), और एयर वाल्व (Air Valve)
पास की गई विद्युत मोटरेंकुल 02 शक्तिशाली मोटरें (जिसमें एक 20 एचपी की मोटर शामिल है)
मुख्य स्थापना स्थल (पॉइंट)चौकीदार लखीराम का कृषि खेत क्षेत्र
लॉजिस्टिक समयावधिप्रार्थना पत्र और सर्वे के महज 24 घंटे के भीतर (आपातकालीन डिलीवरी)
जल निकासी का गंतव्यक्षेत्र की मुख्य सरकारी सिंचाई नहर
ग्राम पंचायत का संकल्पआगामी 01 सप्ताह (7 दिन) के भीतर संपूर्ण पाइपलाइन को भूमिगत करना
पूर्व में दी गई सहायताइसी ग्राम पंचायत के तहत भालगढ़ क्षेत्र में पहले 6000 फीट पाइप और 2 मोटरें दी जा चुकी हैं

परियोजना के क्रियान्वयन की आवश्यक शर्तें और पंचायत का समयबद्ध संकल्प

राहत सामग्री की सुपुर्दगी (हैंडओवर) के समय संत रामपाल जी महाराज की ओर से सेवादारों ने ग्राम पंचायत और स्थानीय ग्रामीणों के समक्ष परियोजना के सुचारू क्रियान्वयन हेतु एक महत्वपूर्ण नियम और शर्त रखी। 

संत रामपाल जी महाराज का स्पष्ट आदेश है कि गांव को प्राप्त हुए इन 3000 फीट लंबे पाइपों को सबसे पहले ग्राम पंचायत अपनी देखरेख में चिन्हित मार्गों पर पूर्णतः भूमिगत (जमीन के नीचे दबाने) करने का कार्य संपन्न करे।

इस निर्देश के अनुपालन में ग्राम पंचायत बीड़ छुचकवास के सरपंच और पंचों ने सार्वजनिक रूप से यह समयबद्ध संकल्प लिया है:

  • ग्राम पंचायत आगामी एक हफ्ते (7 दिन) के भीतर-भीतर इन सभी 3000 फीट पाइपों को जमीन के नीचे स्थाई रूप से भूमिगत करने का कार्य पूर्ण करवा देगी।
  • जैसे ही पाइपलाइन को दबाने और जोड़ने का कार्य पूरा हो जाएगा, ग्राम पंचायत इसकी आधिकारिक सूचना आश्रम की केंद्रीय प्रबंधन कमेटी को देगी।
  • सूचना प्राप्त होने के पश्चात सेवादारों की टीम पुनः आकर बिछाई गई लाइन का स्थलीय भौतिक निरीक्षण करेगी।
  • लाइन के सही तरीके से दबे होने की पुष्टि होते ही संत रामपाल जी महाराज के चरणों में प्रार्थना करके तुरंत दोनों शक्तिशाली विद्युत मोटरें गांव को सौंप दी जाएंगी, ताकि खेतों से पानी निकालने का कार्य सुचारू रूप से शुरू किया जा सके।

अन्नपूर्णा मुहिम के माध्यम से संचालित राष्ट्रव्यापी सामाजिक और परोपकारी कार्य

इस राहत वितरण समारोह के दौरान उपस्थित सेवादारों और अंतरराष्ट्रीय बीन वादक कैलाशनाथ जी ने स्पष्ट किया कि संत रामपाल जी महाराज द्वारा की जाने वाली ये सभी सामाजिक और मानवीय सेवाएं पूर्णतः निःस्वार्थ भावना से प्रेरित हैं। 

इन कार्यों का किसी भी प्रकार की राजनीति, राजनीतिक चुनाव, वोट बैंक या किसी भी सरकारी सहयोग से कोई लेना-देना नहीं है। संत रामपाल जी महाराज ने अन्नपूर्णा मुहिम के माध्यम से संपूर्ण देश में मानव समाज के उत्थान और कल्याण के लिए एक विशाल मॉडल प्रस्तुत किया है।

इस मुहिम के अंतर्गत निम्नलिखित राष्ट्रव्यापी कल्याणकारी कार्य किए जा रहे हैं:

  • बाढ़ पीड़ित क्षेत्रों में गांव-गांव जाकर सर्वे के आधार पर पाइप, मोटर और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जा रही है, जिसके तहत हरियाणा, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और गुजरात सहित विभिन्न राज्यों के सैकड़ों गांवों को लाभान्वित किया गया है।
  • समाज के अत्यंत निर्धन, बेसहारा और असहाय परिवारों के लिए पक्के concrete के मकानों का निर्माण पूरी तरह से निःशुल्क करवाया जाता है।
  • समाज के गरीब और असहाय लोगों के लिए बिना किसी खर्चे के पूर्णतः दहेज-रहित शादियों (रमैनी) का आयोजन करवाया जाता है।
  • समाज के जरूरतमंद परिवारों को हर महीने संपूर्ण राशन किट प्रदान की जाती है, ताकि कोई भी भूखा न रहे।
  • संत रामपाल जी महाराज का मुख्य उद्देश्य संपूर्ण मानव समाज को पूर्ण रूप से नशा मुक्त, सामाजिक कुरीतियों से मुक्त और दहेज मुक्त बनाना है, ताकि आध्यात्मिक ज्ञान के आधार पर भारत देश को पुनः विश्व स्तर पर ‘सोने की चिड़िया’ बनाया जा सके।
  • इसके अतिरिक्त, आध्यात्मिक ज्ञान के प्रसार हेतु प्रतिदिन शाम 7:30 बजे से 8:30 बजे तक साधना टीवी चैनल पर संत रामपाल जी महाराज का पावन सत्संग प्रसारित किया जाता है, जो समाज को नैतिक और आध्यात्मिक राह दिखाता है।

50 वर्ष पुराने संकट का स्थाई निवारण और किसानों की आर्थिक बहाली

संत रामपाल जी महाराज द्वारा दिए गए इस ऐतिहासिक सहयोग से ग्राम पंचायत बीड़ छुचकवास के भालगढ़ और सूरजगढ़ सहित तीनों संबद्ध गांवों के सैकड़ों किसान परिवारों को एक नया जीवनदान और स्थाई आर्थिक सुरक्षा मिली है। 

50 वर्षों से बंजर और वीरान पड़ी 300 एकड़ भूमि से पानी का पूर्ण निष्कासन होने के बाद अब वहां पुनः हरी-भरी फसलों का लहलहाना सुनिश्चित हो गया है। स्थानीय बुजुर्ग किसान भीम सिंह सहित अन्य युवाओं ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि जो राजनेता केवल चुनाव के समय हाथ जोड़कर वोट लेने आते थे और बाद में कभी सुध नहीं लेते थे, उनका कार्य आज बिना किसी वोट या स्वार्थ के साक्षात भगवान के रूप में संत रामपाल जी महाराज ने पूर्ण कर दिया है।

इस स्थाई जल निकासी व्यवस्था के क्रियान्वयन से किसानों को प्रतिवर्ष रबी और खरीफ दोनों मौसमों की फसलें समय पर बोने का अवसर मिलेगा, जिससे क्षेत्र में खाद्यान्न संकट समाप्त होगा और किसानों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी। 

पूर्व में भी इस मुहिम के माध्यम से जिन किसानों ने सहायता प्राप्त कर फसलों की बिजाई की थी, उनके खेतों में पैदावार 50 मण से बढ़कर 70 मण प्रति एकड़ तक दर्ज की गई थी। इस अभूतपूर्व राहत से पूरे क्षेत्र के किसानों, बुजुर्गों और बच्चों में भारी उत्साह और उल्लास की लहर व्याप्त है।

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