संत रामपाल जी महाराज ने किसान मजदूर बचाओ अभियान फेज़ 2 में झज्जर के अच्छेज की समस्या सुलझाई

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हरियाणा के जिला झज्जर की तहसील मातनहेल के अंतर्गत आने वाले गांव अच्छेज में पिछले 50 से 60 वर्षों से गंभीर जल भराव और बाढ़ की समस्या बनी हुई थी। ग्रामीणों और कृषि विशेषज्ञों के आंकड़ों के अनुसार, इस समस्या के कारण गांव की लगभग 800 से 1200 एकड़ कृषि भूमि स्थायी रूप से प्रभावित रहती थी। वर्षा ऋतु के दौरान और उसके बाद भी कई क्षेत्रों में लगातार 8 से 9 महीने तक पानी जमा रहता था। 

गांव की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि पड़ोसी गांव छुछकवास की जमीन ऊंची होने के कारण वहां धान की बुवाई के बाद ओवरफ्लो होने वाला सारा पानी अच्छेज गांव की तरफ आ जाता था। इसके परिणामस्वरूप अच्छेज गांव के अनेक खेतों में पिछले 15 से 25 वर्षों से किसी भी प्रकार की खेती या बिजाई का कार्य नहीं हो पा रहा था। फसलों के बार-बार नष्ट होने के कारण स्थानीय किसानों को प्रतिवर्ष भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता था, जिसमें केवल पिछले वर्ष ही कुल 5 करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान दर्ज किया गया था।

आवासीय बस्तियों और सार्वजनिक स्थलों पर जलभराव का प्रभाव

जलभराव की यह समस्या केवल कृषि भूमि तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसका प्रभाव गांव की आवासीय बस्तियों और सार्वजनिक बुनियादी ढांचे पर भी गंभीर रूप से पड़ रहा था। वर्षा के दिनों में गांव के दो प्रमुख जोहड़ (तालाब) पूरी तरह ओवरफ्लो हो जाते थे, जिससे बाढ़ का पानी सीधे ग्रामीणों के घरों और मकानों में प्रवेश कर जाता था। 

इस कारण गांव के मुख्य आवागमन मार्ग पूरी तरह अवरुद्ध हो जाते थे और लोगों का संपर्क कट जाता था। जलभराव के दौरान मुख्य रास्तों और गांव के श्मशान घाटों पर लगभग 4-4 फीट तक पानी भर जाता था, जिससे अंतिम संस्कार जैसी आवश्यक गतिविधियों में भी अत्यधिक बाधा उत्पन्न होती थी। ग्रामीणों को पशुओं के लिए चारा लाने, गोबर डालने और दैनिक कार्यों के लिए घुटनों तक भरे दूषित पानी से होकर गुजरना पड़ता था।

सरकारी व्यवस्था की विफलता और ग्रामीणों का प्रयास

ग्रामीणों और वर्तमान सरपंच राजेंद्र सिंह (उम्र 61 वर्ष) के अनुसार, इस पांच दशक पुरानी पुश्तैनी समस्या के समाधान के लिए दशकों से प्रशासनिक और सरकारी स्तर पर बार-बार गुहार लगाई गई थी। सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली अत्यधिक धीमी होने के कारण कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। प्रशासन द्वारा अस्थाई समाधान के रूप में केवल 3 हॉर्स पावर (एचपी) क्षमता की एक मोटर उपलब्ध कराई जाती थी, जो पानी के अत्यधिक दबाव के कारण अक्सर जल जाती थी। 

इसके अतिरिक्त ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की अनियमित आपूर्ति और तकनीकी खराबी आने पर मैकेनिक के समय पर न पहुंचने के कारण सरकारी प्रयास पूरी तरह निष्प्रभावी साबित होते रहे। सरकारी उपेक्षा से तंग आकर ग्राम पंचायत और स्थानीय नागरिकों ने एक स्थाई वैकल्पिक समाधान तलाशने का निर्णय लिया।

संत रामपाल जी महाराज के समक्ष प्रार्थना और त्वरित प्रतिक्रिया

जब अच्छेज गांव के निवासियों को पड़ोसी गांव पानीपुर में हुई सफल जल निकासी व्यवस्था की जानकारी मिली, तो ग्राम पंचायत अच्छेज ने इस संकट से मुक्ति हेतु कदम उठाया। सरपंच राजेंद्र सिंह के नेतृत्व में गांव के बड़े-बुजुर्ग, किसान और मजदूर वर्ग के प्रतिनिधि एक लिखित प्रार्थना पत्र लेकर संत रामपाल जी महाराज के चरणों में पहुंचे। 

ग्रामीणों ने खेतों में जलभराव, बस्तियों में पानी घुसने और कृषि भूमि के दशकों से बंजर पड़े होने की पूरी वस्तुस्थिति उनके समक्ष रखी। इस प्रार्थना पर त्वरित संज्ञान लेते हुए संत रामपाल जी महाराज ने बिना किसी विलंब के अपनी विशेष तकनीकी सर्वे टीम को तत्काल अच्छेज गांव का दौरा करने और स्थाई समाधान हेतु योजना तैयार करने का आदेश जारी किया।

तकनीकी सर्वे टीम का निरीक्षण और सात आयामी योजना

संत रामपाल जी महाराज के आदेशानुसार सर्वे टीम ने गांव अच्छेज पहुंचकर खेतों, आवासीय बस्तियों, ओवरफ्लो होने वाले जोहड़ों और पानी की प्राकृतिक निकासी के मार्गों का अत्यंत बारीकी से निरीक्षण किया। इस तकनीकी निरीक्षण के बाद सर्वे टीम ने संपूर्ण प्रभावित क्षेत्र को कुल सात अलग-अलग पॉइंटों (बिंदुओं) में विभाजित कर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की:

  • कृषि भूमि हेतु पॉइंट: खेतों से पानी निकालने के लिए कुल 5 विशिष्ट पॉइंट निर्धारित किए गए।
  • आवासीय व बस्ती हेतु पॉइंट: गांव के दो बड़े ओवरफ्लो जोहड़ों और रिहायशी बस्तियों की सुरक्षा के लिए 2 पॉइंट तय किए गए।
  • सामग्री की आवश्यकता: सर्वे के आकलन में पाया गया कि सात पॉइंटों को कवर करने के लिए कुल 20,600 फीट लंबी और 8 इंच व्यास वाली पाइपलाइन तथा 10 एचपी क्षमता की कुल 6 वाटर मोटरों की आवश्यकता होगी।

36 घंटे के भीतर सहायता सामग्री का वितरण और तकनीकी उपकरण

सर्वे टीम द्वारा रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद, संत रामपाल जी महाराज ने ‘किसान मजदूर बचाओ अभियान’ के अंतर्गत राहत सामग्री को तुरंत मंजूरी प्रदान की। आवेदन जमा करने के मात्र 7 घंटे के भीतर सर्वे का काम पूरा हुआ और महज 36 घंटे के भीतर सहायता सामग्री से भरे हुए कई बड़े ट्रक अच्छेज गांव पहुंच गए। 

संत रामपाल जी महाराज ने इस राहत कार्य के लिए उच्च गुणवत्ता वाले तकनीकी उपकरण सीधे ग्राम पंचायत को हैंडओवर करवाए। वितरित की गई सामग्रियों की सूची और उनकी विशेषताएं इस प्रकार हैं:

  • मुख्य पाइपलाइन: 20,600 फीट लंबी 8 इंच व्यास वाली भारी प्लास्टिक पाइपलाइन।
  • कनेक्टिंग उपकरण: पाइपलाइन को आपस में जोड़ने के लिए आवश्यक संख्या में एसआर बैंड (SR Band)।
  • सुरक्षा वाल्व: हवा के दबाव को नियंत्रित करने और पाइप को फटने से बचाने के लिए एयर वाल्व (Air Valve)।
  • फिटिंग सामग्री: सुचारू फिटिंग सुनिश्चित करने के लिए उच्च श्रेणी के नट-बोल्ट, स्टील प्लेट्स, रबर जैन (जॉइंट्स) और फेविकोल एक्सेसरीज।
  • पंपिंग मोटर्स: जल निकासी को गति देने के लिए 10 हॉर्स पावर (HP) क्षमता की 6 भारी मोटर्स स्वीकृत की गईं।

मोटरों के वितरण के संबंध में विशेष निर्देश

राहत सामग्री सौंपने के दौरान संत रामपाल जी महाराज के सेवादारों और तकनीकी टीम ने ग्राम पंचायत के समक्ष मोटरों के क्रियान्वयन को लेकर एक स्पष्ट तकनीकी प्रक्रिया रखी। सेवादारों ने स्पष्ट किया कि स्वीकृत की गई 10 एचपी की सभी 6 मोटरें वर्तमान में पूरी तरह सुरक्षित रख ली गई हैं। 

जैसे ही ग्राम पंचायत और अच्छेज गांव के नागरिक मिलकर इन 20,600 फीट लंबे पाइपों को निर्धारित सात पॉइंटों पर भूमिगत (अंडरग्राउंड) बिछाने का कार्य पूर्ण कर लेंगे, वैसे ही आश्रम की टीम को सूचित किया जाएगा। सूचना प्राप्त होने के तुरंत बाद सर्वे टीम द्वारा पाइपलाइन का पुनः भौतिक निरीक्षण किया जाएगा और निरीक्षण सफल होते ही उसके अगले ही दिन सभी 6 हैवी-ड्यूटी मोटरें गांव में स्थापित कर दी जाएंगी ताकि जल निकासी का कार्य स्थाई रूप से शुरू हो सके।

ग्रामीणों, ठेकेदारों और महिलाओं की प्रतिक्रियाएं

गांव में सहायता सामग्री से भरे ट्रकों के पहुंचते ही पूरे अच्छेज गांव में उत्साह का माहौल बन गया। ग्रामीणों ने ढोल-नगाड़ों के साथ फूलों की वर्षा कर और मालाएं पहनाकर संत रामपाल जी महाराज का स्वागत किया। इस दौरान समाज के विभिन्न वर्गों ने अपनी प्रतिक्रियाएं दर्ज कराईं:

  • सरपंच राजेंद्र सिंह का बयान: सरपंच ने बताया कि उनकी स्वयं की उम्र 61 वर्ष हो चुकी है और जब से उन्होंने होश संभाला है, गांव इस त्रासदी को झेल रहा था। सरकारें साल-डेढ़ साल चक्कर कटवाती थीं, जबकि संत रामपाल जी महाराज ने मात्र 36 घंटे में समाधान भेज दिया।
  • संत राम ठेकेदार की गवाही: स्थानीय ठेकेदार संत राम ने बताया कि पुलिस को दुर्घटना स्थल पर आने में घंटों लग जाते हैं, लेकिन संत रामपाल जी महाराज ने इतनी विशाल सार्वजनिक समस्या का निवारण चुटकी बजाते ही कर दिया। इससे आम आदमी का गुजारा बेहतर होगा।
  • महिला ग्रामीणों की पीड़ा और राहत: गांव की एक बुजुर्ग महिला ने बताया कि वह 25 वर्ष पूर्व इस गांव में ब्याह कर आई थीं और तब से उन्होंने अपने डेढ़-दो किले खेत में अनाज का एक दाना भी पैदा होते नहीं देखा था। हमेशा बाहर से अनाज खरीदना पड़ता था। अब पाइप आने से उन्हें अपने खेत से अन्न मिलने की पूरी उम्मीद है।
  • बुजुर्गों का अनुभव: गांव के 85 वर्षीय बुजुर्ग ने भावुक होकर कहा कि उन्होंने अपने पूरे जीवनकाल में किसी भी पार्टी या सरकार द्वारा ऐसा ऐतिहासिक और तीव्र जनकल्याणकारी कार्य होते हुए नहीं देखा।

गांव अच्छेज (झज्जर) जलभराव समाधान योजना तालिका

विवरण / श्रेणीतकनीकी एवं व्यावहारिक आंकड़े
प्रभावित क्षेत्र का नामगांव अच्छेज, जिला झज्जर, तहसील मातनहेल (हरियाणा)
समस्या की कुल अवधिपिछले 50 से 60 वर्ष (पांच दशक से अधिक)
प्रभावित कुल कृषि भूमिलगभग 800 से 1200 एकड़ भूमि
फसलों का वार्षिक नुकसानकेवल पिछले वर्ष कुल 5 करोड़ रुपये का नुकसान
कुल चिह्नित सर्वे पॉइंट07 पॉइंट (05 खेतों के लिए, 02 जोहड़ व बस्ती के लिए)
पाइपलाइन की कुल लंबाई व आकार20,600 फीट लंबी, 8 इंच व्यास वाली पाइपलाइन
वितरित कनेक्टिंग एक्सेसरीजएसआर बैंड, एयर वाल्व, नट-बोल्ट, स्टील प्लेट, रबर जैन, फेविकोल
स्वीकृत वाटर पंप मोटर्स10 हॉर्स पावर (HP) क्षमता की कुल 06 मोटरें
कार्य की कुल समयावधिआवेदन के 7 घंटे में सर्वे, 36 घंटे में सामग्री की डिलीवरी
मोटर स्थापना की शर्त20,600 फीट पाइपलाइन के पूर्ण भूमिगत होने के तुरंत बाद

किसान मजदूर बचाओ अभियान से अच्छेज गांव में कृषि और खुशहाली की पुनर्स्थापना

संत रामपाल जी महाराज ने ‘किसान मजदूर बचाओ अभियान’ के माध्यम से अच्छेज गांव को एक नया जीवनदान प्रदान किया है। इस वृहद राहत सामग्री के गांव में स्थापित होने से सैकड़ों एकड़ भूमि जो दशकों से जलमग्न और बंजर पड़ी थी, वह पुनः कृषि योग्य बन जाएगी। 

इससे न केवल स्थानीय किसानों की आजीविका के साधन सुदृढ़ होंगे बल्कि धान और गेहूं दोनों मुख्य फसलों का उत्पादन सुचारू रूप से शुरू हो सकेगा। यह अभियान प्रमाणित करता है कि यदि सही सर्वे, सटीक योजना और बिना किसी प्रशासनिक लालफीताशाही के समय पर ठोस सहायता पहुंचाई जाए, तो आधी शताब्दी पुरानी उन जटिल समस्याओं का भी स्थाई अंत किया जा सकता है जिन्हें सरकारें हल करने में पूरी तरह असमर्थ रही हैं। अच्छेज गांव के नागरिकों के लिए यह सहायता आने वाले समय में आर्थिक समृद्धि और सामाजिक खुशहाली का एक नया मार्ग प्रशस्त करने वाली है।

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