​हिसार के सातरोड़ कलां गाँव में बाढ़ प्रभावित किसानों की पुकार पर रात 12:30 बजे पहुँचा राहत काफिला: एक सच्ची पुकार का चमत्कारिक जवाब

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हरियाणा के हिसार जिले का सातरोड़ कलां गाँव पिछले तीन महीनों से एक विकट त्रासदी का सामना कर रहा था। अत्यधिक मॉनसून के पानी ने किसानों की धान की फसल को पूरी तरह से नष्ट कर दिया, और खेत इस कदर जलमग्न थे कि रबी की मुख्य फसल, गेहूँ, की बुआई असंभव हो गई थी। स्थानीय किसानों ने हताश होकर प्रशासन और सरकारी विभागों से मदद की गुहार लगाई, लेकिन हर जगह से निराशा ही हाथ लगी। जब निराशा अपने चरम पर थी, तब कुछ किसानों ने अपने डूबे हुए खेतों में खड़े होकर जगतगुरु संत रामपाल जी महाराज से दंडवत प्रणाम करते हुए एक वीडियो संदेश के माध्यम से आखिरी गुहार लगाई। 

उनकी यह पुकार 11 अक्टूबर की शाम 5 बजे दर्ज की गई, जिसका जवाब 13 अक्टूबर की आधी रात 12:30 बजे मोटर और पाइप से भरे एक विशाल काफिले के रूप में गाँव पहुँचा। यह घटना न केवल तत्काल राहत प्रदान करने का एक उदाहरण है, बल्कि उस अदम्य विश्वास और संत की असीमित दया का प्रमाण भी है, जिसने किसानों को आत्महत्या के कगार से वापस खींच लिया।

​​बाढ़ की विभीषिका और तीन महीने का इंतज़ार

​सातरोड़ कलां के किसान पिछले तीन महीनों से जलजमाव की अभूतपूर्व समस्या से त्रस्त थे। पानी खेतों में 5-5 फुट तक चढ़ा हुआ था, जिसने धान की खड़ी फसल को पूरी तरह गला दिया। 11वें महीने में गेहूँ की बुआई का समय नज़दीक आ चुका था, लेकिन खेतों की स्थिति बुआई के लिए बिल्कुल भी अनुकूल नहीं थी। किसानों ने अपनी व्यथा बताते हुए कहा कि उन्होंने सरकार, बिजली बोर्ड, और सिंचाई विभाग के दफ्तरों के अनगिनत चक्कर काटे, ट्रैक्टरों में तेल फूँक कर पानी निकालने की नाकाम कोशिशें कीं, और यहाँ तक कि सात मोटरें भी जला दीं, लेकिन जल निकासी की समस्या हल नहीं हुई।

​किसानों के अनुसार, सरकारी तंत्र से उन्हें कोई उम्मीद नहीं मिली, जिसके चलते उन्होंने अपने कष्टों के निवारण के लिए विश्व के एकमात्र ऐसे संत की ओर देखा जो निस्वार्थ भाव से समाज की सेवा कर रहे हैं। कई किसानों ने वीडियो में यह विश्वास व्यक्त किया कि संत रामपाल जी महाराज ही एकमात्र ऐसी शक्ति हैं जो अब उनकी जान बचा सकती है और उनके बच्चों के लिए दाने का प्रबंध करवा सकती है।

​11 अक्टूबर की शाम: संत रामपाल जी महाराज जी से आखिरी पुकार

​11 अक्टूबर की शाम 5:00 बजे, गाँव के कुछ किसानों ने अपने डूबे हुए खेतों में खड़े होकर एक अत्यंत भावुक वीडियो बनाया, जिसमें उन्होंने संत रामपाल जी महाराज के चरणों में हाथ जोड़कर प्रार्थना की। इस प्रार्थना में उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि जब चारों ओर निराशा है, तब उन्हें केवल संत रामपाल जी महाराज से ही उम्मीद है कि वह उन्हें मोटर और पाइप प्रदान करेंगे ताकि वे पानी उतारकर गेहूँ की फसल बो सकें।

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​एक किसान ने रोते हुए कहा कि महाराज ने पूरे विश्व में किसानों की मदद की है, यहाँ तक कि जिन गरीबों के मकान गिर गए थे, उनके मकान बनवाए हैं। किसानों ने भोजराज, दाईमा और अन्य गाँवों का ज़िक्र किया, जहाँ महाराज जी ने निस्वार्थ भाव से मोटर और पाइप दिए हैं। सातरोड़ कलां के किसानों ने अपनी जान बचाने की गुहार लगाते हुए कहा, “अब हमारी जान संत रामपाल जी महाराज के हाथ में है। कोई दाना बीजेगा तो बच्चे खाएंगे।”

उनकी यह प्रार्थना संत रामपाल जी महाराज द्वारा चलाई जा रही विश्वव्यापी ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ के तहत सुनी गई, जिसका संकल्प है कि कोई भी व्यक्ति भूख या लाचारी में न रहे।

​चमत्कारिक त्वरित कार्रवाई: आधी रात को आगमन

​किसानों की यह सच्ची और हृदय से निकली पुकार सीधे संत रामपाल जी महाराज के पास पहुँची। यद्यपि सहायता अगले दिन, 12 अक्टूबर को पहुँचनी थी, लेकिन उसी दिन संत रामपाल जी महाराज को महम के ऐतिहासिक चौबीसी चबूतरे पर “मानवता रक्षक सम्मान” से सम्मानित किया जा रहा था। संत रामपाल जी महाराज को यह चिंता सता रही थी कि कहीं कोई किसान निराशा में कोई गलत कदम न उठा ले। किसानों की इस पीड़ा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए, उन्होंने तत्काल सहायता पहुँचाने का हुक्म दिया।

परिणामस्वरूप, 13 अक्टूबर की रात ठीक 12:30 बजे राहत सामग्री से भरी गाड़ियों का एक लंबा काफिला सातरोड़ कलां गाँव के बाहर पहुँच गया। यह कार्रवाई किसी भी सरकारी या गैर-सरकारी संस्था द्वारा इतनी तेज़ी से की गई मदद से कहीं अधिक तीव्र और अप्रत्याशित थी। सेवादारों ने गाँव में प्रवेश करने से पहले मंगलाचरण किया और परमात्मा की स्तुति करके पूर्ण भक्ति भाव से सेवा शुरू की।

​राहत सामग्री का विवरण: गुणवत्ता और पूर्णता

​संत रामपाल जी महाराज के हुक्म पर गाँव में भेजी गई सामग्री मात्रा और गुणवत्ता दोनों के मामले में उत्कृष्ट थी, जिसने किसानों की सभी तात्कालिक आवश्यकताओं को पूरा किया। सामग्री का सटीक विवरण निम्नलिखित है:

  • ​मोटरें: तीन बड़ी 10 हॉर्स पावर (HP) की मोटरें
  • ​पाइप: 15,000 फीट 8 इंची व्यास का उच्च गुणवत्ता वाला पाइप।
  • ​उपकरण (एक्सेसरीज): मोटरों को चलाने के लिए स्टार्टर, केबल, फुटबॉल (4 इंची), एल्बो (जेन), असेंबली, और सभी आवश्यक छोटे-बड़े उपकरण भी दिए गए।

​किसानों ने इस व्यवस्था पर आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें अब दुकान पर भी जाने की ज़रूरत नहीं है, क्योंकि महाराज जी ने “कंप्लीट सेट” दिया है, जिससे किसान का “एक रुपया भी नहीं लगेगा।”

किसानों का भावुक आभार: भगवान से तुलना

​राहत सामग्री मिलने के बाद किसानों की प्रतिक्रियाएं अत्यंत भावुक थीं।

  • ​फौजी किसान और अन्य ग्रामीण: उन्होंने संत रामपाल जी महाराज के इस कार्य को “चमत्कार” बताया और कहा कि उन्होंने अपनी 40 साल की उम्र में ऐसी मदद पहले कभी नहीं देखी। उन्होंने कहा, “इस भगवान ने जो काम करा है, कोई नहीं कर सकता।” एक किसान ने कहा कि वे अगर सात जन्म भी ले लें तो भी महाराज जी के एहसानमंद रहेंगे।
  • ​भगवान श्री कृष्ण से तुलना: गाँव वालों ने संत रामपाल जी महाराज की तुलना सीधे भगवान श्री कृष्ण से की। उन्होंने कहा, “जैसे कृष्ण भगवान ने भात भरा था, वैसे ही संत रामपाल जी ने आज किसानों के भंडार भर दिए हैं।” यह तुलना उनके मन में संत रामपाल जी महाराज जी के प्रति अटूट आस्था और सम्मान को दर्शाती है।
  • ​नींद न आने की खुशी: एक किसान ने कहा कि खुशी इतनी है कि आज रात चैन से सोएंगे, लेकिन असल में ख़ुशी के कारण नींद भी नहीं आएगी। उनकी पुकार को 12:30 बजे सुन लिया गया था, जिससे उन्हें दृढ़ विश्वास हो गया कि उनके परमात्मा अब उनकी फसल बचा देंगे।

संत रामपाल जी महाराज का निवेदन पत्र और ट्रस्ट को सख्त आदेश और स्थायी समाधान

​राहत सामग्री सौंपते समय, सेवादारों ने ग्राम पंचायत को एक ‘निवेदन पत्र’ भी सौंपा, जिसमें संत रामपाल जी महाराज के सख्त आदेश निहित थे। इसका उद्देश्य केवल तत्काल मदद नहीं, बल्कि भविष्य के लिए एक स्थायी समाधान देना था। निवेदन पत्र को पढ़ते हुए कहा गया कि:

  • ​पारदर्शिता बनाए रखने के लिए ड्रोन द्वारा तीन वीडियो बनाए जाएंगे। एक वीडियो खेतों में पानी भरे हुए की बना ली है, दूसरी पानी निकालने के बाद और तीसरी फसल लहराने की बनाई जाएगी।
  • ​सामान का सदुपयोग: किसानों से कहा गया कि वे जल्द से जल्द पानी निकालकर गेहूँ की बुआई करें।
  • ​भविष्य की चेतावनी: स्पष्ट किया गया कि यदि पानी नहीं निकलता है और अगली फसल की बुआई नहीं होती है, तो संत रामपाल जी महाराज द्वारा भविष्य में कोई मदद नहीं मिलेगी, क्योंकि इसमें “गलती आप लोगों की होगी।”
  • ​वरदान के रूप में पाइप: सबसे महत्वपूर्ण यह था कि किसानों को सलाह दी गई कि वे पाइप और मोटर को अपनी ज़मीन में दबा लें, ताकि भविष्य में कभी भी जलजमाव की समस्या आए तो वे तुरंत पानी निकाल सकें। यह “अनमोल गिफ्ट” किसानों की बाढ़ की समस्या का सदा के लिए समाधान है, ताकि न तो वर्तमान की फसल खराब हो और न ही आगे वाली फसल बोने में कोई हानि हो।

​सरपंच प्रदीप पुनिया ने पूरी पंचायत और ग्राम वासियों की तरफ से बार-बार धन्यवाद करते हुए लिखित में यह वादा किया कि वे आदेश का पूर्ण रूप से पालन करेंगे और सामान का सदुपयोग करते हुए समय से पहले पानी निकाल लेंगे।

आपदा में सहारा, भविष्य का समाधान: संत रामपाल जी की दूरदर्शी दया

​इस प्रकार, सातरोड़ कलां गाँव की घटना यह प्रमाणित करती है कि संत रामपाल जी महाराज न केवल समाज की तात्कालिक कठिनाइयों को दूर कर रहे हैं, बल्कि निस्वार्थ भाव से मानवता और राष्ट्र हित के लिए कार्य करते हुए किसानों व हर जरूरतमंदो के जीवन में स्थायी खुशहाली लाने का भी प्रयास कर रहे हैं।

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