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Eid Al Fitr in Hindi: आज आप को ईद उल फितर (Eid ul Fitr 2020) के बारे में विशेष जानकारी Hindi में देंगे. हम निम्नलिखित बिन्दुओ पर ईद उल फितर के बारे में जानकारी देंगे.

रमजान ईद उल फितर 2020 (Eid Al Fitr)

ईद एक इस्लामिक उत्सव है इसे इस्लाम में बहुत ही पाक त्यौहार माना जाता है यह त्यौहार दुनिया के बहुत से राष्ट्रों में बड़ी धूमधाम के साथ मनाया जाता है इस त्यौहार को कई धार्मिक रस्मों (दावत, उपहार, नृत्य और उत्सव) के साथ मनाया जाता है इसके साथ ही ईद को भाईचारे का प्रतीक भी माना जाता है। ईद अल-फितर मुस्लिम पवित्र उपवास महीने रमजान के पूरे होने का प्रतीक है, जो इस्लामी कैलेंडर के 10वें महीने शव्वाल के पहले तीन दिनों के दौरान मनाया जाता है। ईद अल-फितर चंद्रमा के दिखाई देने पर धर्मगुरुओं द्वारा घोषित किया जाता है ।

पहली ईद अल-फितर (Eid ul Fitr)

पैगंबर मुहम्मद और उनके साथियों ने बदर की लड़ाई में अपनी जीत हासिल करने पर 624 ईस्वी में पहली ईद अल-फितर मनाई। इस जीत ने मुहम्मद को इस्लाम के प्रारम्भिक दिनों में मक्का में अपने विरोधियों के खिलाफ ज्यादा मजबूत बनने में मदद की

Eid Al Fitr Hindi-ईद उल फितर 2020 में कब है?

23 मई शनिवार और 24 मई रविवार को दुनिया के सभी मुस्लिम राष्ट्रों में ईद मनाई जाएगी। शनिवार 23 मई 2020 की शाम को चंद्रमा को देखने के लिए धार्मिक लोग टकटकी लगाए रहेंगे। यदि वे उस शाम को चंद्रमा को देख पाते हैं, तो यह रविवार 24 मई 2020 को मनाया जाएगा । ऐसा नहीं होने पर यह सोमवार 25 मई 2020 को होगा। बताया जा रहा है कि ईद के कारण 25 मई को भारत में बैंकों का राष्ट्रीय अवकाश रहेगा।

ईद उल-फितर क्यों मनाते हैं?

ईद उल-फितर क्यों मनाते हैं?

इसे छोटी ईद के रूप में भी जाना जाता है जिसे तीन दिनों तक मनाया जाता है। यह इस महीने का एकमात्र दिन है जिसके दौरान मुस्लिमों को उपवास करने की अनुमति नहीं होती। यह त्योहार सामूहिक प्रार्थनाएँ करके महीने भर के उपवास को तोड़ने का प्रतीक है। यह अक्सर कहा जाता है कि पवित्र कुरान शरीफ का ज्ञान पैगंबर हजरत मुहम्मद को इस महीने में पहली बार प्राप्त हुआ था। ऐसा माना जाता है कि अल्लाह ने रमजान के अंतिम दिन तक मुसलमानों को उपवास नहीं तोड़ने की आज्ञा दी थी, जो पवित्र कुरान में भी उल्लिखित है।

एक किंवदंती के मुताबिक जब पैगंबर मुहम्मद मक्का से मदीना चले गए तब लोगों को दो छुट्टियों ईद-अल-फितर (छोटी ईद), और ईद-अल-अधा (बड़ी ईद) के बारे में बताया, जो तीन और चार दिनों के लिए मनाई जाती है। उत्सव में खुले मैदान में की जाने वाली विशेष अनूठी धार्मिक प्रार्थनाएँ शामिल हैं जो अल्लाह में उनकी आस्था और विश्वास का प्रतीक है। ईद-अल-फितर के महत्व में गरीब और जरूरतमंद लोगों को धर्मार्थ सहायता प्रदान करना, कम से कम पांच बार प्रार्थना ( नमाज ) करके अल्लाह से अपनी गलतियों की माफी मांगना और उपवास वाले महीने के दौरान अल्लाह की असीम दया के लिए धन्यवाद देना शामिल है।

Read in English: When is Eid Ul Fitr 2020 in India?

Eid Al Fitr in HIndi: यह इस्लामिक पंचांग की अगले महीने शव्वाल का पहला दिन होता है और इस दिन किसी भी मुस्लिम को उपवास रखने की अनुमति नहीं दी जाती कहते हैं कि मोहम्मद साहब जब मक्का से मदीना लौटे थे तो उस दौरान वे उन लोगों से मिले जो खेल मनोरंजन के साथ जश्न मना रहे थे तब मोहम्मद साहब ने उस अनुभव को अपना लिया और ईद उल फितर के दिन को जश्न का दिन घोषित कर दिया ईद उल फितर से एक दिन पहले की रात को चांद की रात कहते हैं। अधिकांश मुस्लिम लोग इस दिन बाजारों में खरीदारी करते हैं एक दूसरे से मुलाकात करते हैं और नमाज पढ़ते हैं

ईद उल-फितर के दिन मुस्लिम क्या करते है?

ईद रमज़ान के महीने के आखिरी में होती है। ईद का निर्धारण एक दिन पहले चाँद देखकर किया जाता है। चाँद दिखने के दूसरे दिन ईद मनाई जाती है। सऊदी अरब में चाँद एक दिन पहले और भारत मे चाँद एक दिन बाद दिखने के कारण दो दिनों तक ईद मनाई जाती है। ईद राष्ट्रीय त्यौहार है और छुट्टी का दिन होता है। सुबह से ही ईद की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। लोग तरह तरह के व्यंजन, पकवान बनाने में और नए वस्त्र पहनकर तैयार आदि होने में व्यस्त रहते हैं।

सऊदी अरब और इराक में ईद और रमज़ान में खजूर खाने का अलग ही महत्व है। भारत मे इस खास दिन दूध से सेवईं भी बनाई जाती है। खास ईद के दिन सुबह से नहाधोकर फ़ज़्र की नमाज़ और फिर ईद की नमाज़ पढ़ी जाती है। लोग परिवारजनों एवं मित्रों, रिश्तेदारों को “ईद मुबारक” कहकर बधाई देते हैं। इस्लाम के पांच मुख्य स्तम्भों में एक है ज़कात अर्थात भोजन देना। ईद में गरीबो को भोजन खिलाने के प्रचलन है। इस तरह से ईद मनाना, तोहफ़े जिसे ईदी कहते हैं देना और मुबारकबाद देने और एक दूसरे से मिलने जाने का सिलसिला तकरीबन तीन दिनों तक जारी रहता है।

ईद पर कबीर साहेब का मुस्लिमो के लिए सन्देश

नबी मुहम्मद नमस्कार है, राम रसूल कहाया।
एक लाख अस्सी कूं सौगंध, जिन नहीं करद चलाया।
अरस कुरस पर अल्लह तख्त है, खालिक बिन नहीं खाली।
वे पैगम्बर पाख पुरुष थे, साहिब के अब्दाली।
माँस माँस सब एक है, मुरगी हिरनी गाय।
आँखि देखि नर खात है, ते नर नरकहिं जाय।
यह कूकर को भक्ष है, मनुष देह क्यों खाय।
मुखमें आमिख मेलिके, नरक परंगे जाय
जीव हनै हिंसा करै, प्रगट पाप सिर होय।
निगम पुनि ऐसे पाप तें, भिस्त गया नहिं कोय।
पीर सबनको एकसी, मूरख जानैं नाहिं।
अपना गला कटायकै, क्यों न बसो भिश्त के माहिं।
मुरगी मुल्लासों कहै, जबह करत है मोहिं।
साहब लेखा माँगसी, संकट परिहै तोहिं।
जोर करि जबह करै, मुखसों कहै हलाल।
साहब लेखा माँगसी, तब होसी कौन हवाल।
जोर कीयां जुलूम है, मांगै ज्वाब खुदाय।
खालिक दर खूनी खडा, मार मुहीं मुँह खाय।
गला काटि कलमा भरै, कीया कहै हलाल।
साहब लेखा माँगसी, तब होसी जबाब-सवाल।
गला काटि कलमा भरै, कीया कहै हलाल।
साहब लेखा माँगसी, तब होसी जबाब-सवाल।
गला गुसाकों काटिये, मियां कहरकौ मार।
जो पाँचू बिस्मिल करै, तब पावै दीदार।
ये सब झूठी बंदगी, बेरिया पाँच निमाज।
सांचहि मारै झूठ पढि, काजी करै अकाज।
दिनको रोजा रहत हैं, रात हनत है गाय।
यह खून वह बंदगी, कहुं क्यों खुशी खुदाय।

Eid Al Fitr HIndi Quotes कबीर साहिब जी

Eid Al Fitr in HIndi-जीव हत्या करना पाप है

मुस्लिम दिन में तो रोजा रखते है और रात में गाय का मांस खाते है। यह तो एक जीव हत्या है यह अल्लाह की इबादत नहीं है। अल्लाह कबीर ने किसी भी मानव को मांस खाने का आदेश नहीं फरमाया है और आदरणीय नबियो ने भी मांस को छुआ तक नहीं, तो वर्तमान के मुसलमान, काजी मुल्लाओ से भ्रमित होकर अल्लाह के आदेश के विपरीत जीव हत्या करके मांस खाकर दोजख के भागी बन रहे है।

Eid al Fitr in Hindi: पवित्र मुसलमान धर्म के लोगों का मानना है कि ईद के दिन कलमा पढ़कर बकरी और गाय की कुर्बानी देने से अल्लाह उस आत्मा को तो जन्नत में स्थान दे देते हैं और फिर उनका मांस खाने से हमें शबाब मिलता है यानी जीव हिंसा करने से हमें पाप नहीं लगता।

Eid Al-Fitr-SA News Channel

यदि ऐसे ही बकरी और गाय को हलाल करने से जन्नत की प्राप्ति होती है तो सबसे पहले मुसलमान समाज को अपने बच्चों तथा खुद को हलाल कर देना चाहिए क्योंकि कहीं ना कहीं मुसलमानों का उद्देश्य भी तो जन्नत जाना ही है फिर इससे अच्छा मौका और क्या हो सकता है।

“रोजा बंग नमाज दई रे बिस्मिल की नहीं बात कही रे”

  • अल्लाह ताला ने हमें रोजा बंग और नमाज करने का ही आदेश दिया था।
  • जीव हिंसा करने का आदेश अल्लाह ने नहीं दिया।
  • इस्लाम धर्म के पैगंबर हजरत मोहम्मद जी ने कभी मांस नहीं खाया और ना ही उनके एक लाख 80 हजार अनुयायियों ने कभी मास को छुआ ।
  • हजरत मोहम्मद जी का जीवन चरित्रपुस्तक के पृष्ठ 307 से 315 में लिखा है कि हज़रत मोहम्मद जी ने कभी खून खराबा करने का आदेश नहीं दिया मतलब साफ है बकरे काटने का आदेश न अल्लाह का हैं न मोहब्बत जी का।
  • फिर भी मुसलमान समाज मांस खाकर पवित्र कुरान शरीफ और अल्लाह का अपमान कर रहे हैं।

कबीर अल्लाह कहते हैं कि जो व्यक्ति जीव हिंसा करते हैं वह महापापी है वे कभी मुक्ति प्राप्त नहीं कर सकते।

तिलभर मछली खाएके, कोटि गऊ दै दान।
काशी करौत ले मरे, तो भी नरक निदान।।

कौन है अल्लाह हू अकबर?

वास्तव में अल्लाह हू अकबर कबीर साहेब है और वही हज़रत मोहम्मद को मिले थे और उन्हें सतलोक दिखाया था लेकिन जिब्रिल फरिश्ते के बार-बार डराने के कारण हजरत मोहम्मद जी ने कबीर साहेब द्वारा बताए मार्ग को छोड़ दिया और गलत साधना में लिप्त हो गए। इसी साधना के फलस्वरुप उनके सामने उनके तीनों बेटे अल्लाह को प्यारे हो गए और वह स्वयं भी बुखार से तड़पकर मरे। मुस्लिम समाज के श्रद्धालु समझ सकते हैं यदि हजरत मोहम्मद जी की मृत्यु व हालत इस तरह से हुई तो एक साधारण मुसलमान जोकि हजरत मोहम्मद जितनी साधना भी नहीं कर सकता उनकी क्या हालत होगी।

पवित्र कुरान शरीफ सूरत फुर्कानी 25 आयत नंबर 52 से 59 में स्पष्ट लिखा है कि इस संपूर्ण कायनात की रचना करने वाला, वह अल्लाह ताला कबीर है जिसने 6 दिन में सारी कायनात की रचना की। कुरान का ज्ञान दाता हजरत मोहम्मद को कहता है कि ऐ पैगंबर! उस कबीर अल्लाह की जानकारी के लिए बाखबर को खोज। वह बाखबर आज संत रामपाल जी महाराज हैं जो कि पूर्ण परमात्मा की जानकारी रखते हैं और उनके बताएं भक्ति मार्ग पर चलने से जीव को मोक्ष मिल सकता है। अल्लाह कबीरू की इबादत जानने के लिए देखे– “साधना चैनल” पर सत्संग 7.30 to 8.30pm.