धवलपुरी (महाराष्ट्र) के स्कूल को 2 दिन में मिला स्मार्ट बोर्ड: संत रामपाल जी की जनसेवा ने जीता महाराष्ट्र का दिल

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महाराष्ट्र के अहिल्यानगर (पूर्व में अहमदनगर) जिले के धवलपुरी गांव से एक स्कूल शिक्षक और गांव के सरपंच ने सतलोक आश्रम धनाना, पहुंचकर संत रामपाल जी महाराज का विशेष आभार व्यक्त किया। यह मुलाकात इस बात का जीवंत प्रमाण है कि संत रामपाल जी महाराज का समाज सुधार और जनसेवा का मिशन हरियाणा से निकलकर अब देश के अन्य राज्यों में भी गहरी छाप छोड़ रहा है।

2 दिन में स्मार्ट बोर्ड की सौगात 

धवलपुरी गांव में पिछले 20 वर्षों से शिक्षा दे रहे शिक्षक अजीत नामदेव सांगले ने आश्रम पहुंचकर बताया कि उन्होंने अपने स्कूल के बच्चों की बेहतर शिक्षा के लिए एक इंटरएक्टिव स्मार्ट बोर्ड (Interactive Board) की अर्जी लगाई थी। संत रामपाल जी महाराज के निर्देश पर मात्र 2 दिन के भीतर स्कूल को डेढ़ से दो लाख रुपये की कीमत का वह स्मार्ट बोर्ड उपलब्ध करा दिया गया। इतनी त्वरित मदद देखकर स्कूल के बच्चे और पूरा स्टाफ हैरान रह गया। शिक्षक ने संत जी का आभार जताते हुए कहा, “दो दिन में ऐसा चमत्कार हुआ कि हमें यकीन ही नहीं हुआ।”

नशामुक्त और दहेजमुक्त समाज की सराहना 

शिक्षक ने संत रामपाल जी द्वारा चलाए जा रहे समाज सुधार अभियानों विशेषकर नशामुक्त भारत, दहेजमुक्त विवाह, 2.5 एकड़ से कम ज़मीन वाले किसानों को मुफ्त खाद-बीज और अनाथ बच्चों को गोद लेने की मुहिम की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि आज जब लोग छोटी-छोटी मदद के लिए लाखों रुपये मांगते हैं, ऐसे में आपका यह निस्वार्थ सेवा भाव समाज के लिए एक बहुत बड़ा वरदान है।

सरपंच ने ली नाम दीक्षा, गांव का बदल रहा माहौल 

इस प्रतिनिधिमंडल में धवलपुरी के सरपंच भी शामिल थे। उन्होंने बताया कि गांव में संत रामपाल जी महाराज का नया आश्रम (सतलोक आश्रम) खुलने के बाद से वहां का पूरा माहौल ही बदल गया है। सरपंच ने संत जी के ज्ञान और सेवा कार्यों से प्रभावित होकर स्वयं भी ‘नाम दीक्षा’ (सत्यभक्ति) ले ली है। संत जी ने उन्हें आशीर्वाद देते हुए राजनीति से दूर रहने और अपना वर्तमान कार्यकाल पूरा करने के बाद चुनाव न लड़ने का आदेश दिया, जिसे सरपंच ने सहर्ष स्वीकार किया।

महाराष्ट्र की पारंपरिक पगड़ी से किया सम्मान 

आश्रम से मिल रही निरंतर मदद और आध्यात्मिक मार्गदर्शन से गदगद होकर, शिक्षक और सरपंच ने धवलपुरी ग्राम पंचायत की ओर से संत रामपाल जी महाराज को महाराष्ट्र की पारंपरिक पगड़ी और पुण्य कार्यों में पहनाया जाने वाला विशेष ‘गमछा’ भेंट कर उन्हें गुलदस्ते से भी सम्मानित किया। उन्होंने संत जी से महाराष्ट्र आने का विशेष आग्रह भी किया।

पूरे देश में सतभक्ति की नई अलख

संत रामपाल जी महाराज की ‘अन्नपूर्णा मुहिम’, शिक्षा में सहयोग और समाज सुधार के कार्य आज सीमाओं को पार कर पूरे देश में सतभक्ति की नई अलख जगा रहे हैं। महाराष्ट्र के धवलपुरी से आई यह मार्मिक भेंट इस बात का स्पष्ट संदेश है कि जहाँ सच्ची नीयत और निस्वार्थ सेवा होती है, वहाँ समाज का हर वर्ग चाहे वह शिक्षक हो, सरपंच हो या आम ग्रामीण स्वतः ही नतमस्तक हो जाता है।

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