60 साल की जलभराव समस्या का अंत: संत रामपाल जी महाराज की पहल से तलाकौर गाँव में लौटी खेती की रौनक

Published on

spot_img

यमुनानगर, हरियाणा – हरियाणा के यमुनानगर जिले के तलाकौर गाँव के किसानों के लिए बरसात का मौसम वर्षों तक राहत नहीं बल्कि एक बड़ी मुसीबत बनकर आता था। लगभग छह दशकों से हर बारिश के बाद खेतों में इतना पानी भर जाता था कि खेती करना लगभग असंभव हो जाता था। कई बार तो खेतों में 4 से 5 फुट तक पानी जमा हो जाता था, जो महीनों तक नहीं निकल पाता था।

इस वजह से किसानों की मेहनत से तैयार की गई फसलें बर्बाद हो जाती थीं और उनकी आर्थिक स्थिति लगातार कमजोर होती चली जाती थी। वर्षों से इस समस्या से जूझते हुए ग्रामीणों ने कई बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाए, नेताओं और अधिकारियों से गुहार लगाई, लेकिन स्थायी समाधान नहीं मिल पाया। ऐसे में किसानों को लगा कि शायद उनकी यह समस्या कभी खत्म नहीं होगी।

 60 वर्षों से जलभराव का दंश झेलता रहा पूरा इलाका

तलाकौर गाँव के लगभग 100 से 150 एकड़ क्षेत्र में हर साल बरसात के दौरान पानी भर जाता था। खेतों का स्तर नीचे होने और निकासी की उचित व्यवस्था न होने के कारण यह पानी लंबे समय तक वहीं जमा रहता था। किसान बताते हैं कि कई बार उन्हें एक ही सीजन में दो-दो या तीन-तीन बार बुवाई करनी पड़ती थी, लेकिन अचानक हुई बारिश और जलभराव से सारी फसल नष्ट हो जाती थी। धान, गन्ना और गेहूँ जैसी फसलें भी पानी में डूबकर खराब हो जाती थीं।

इस लगातार हो रहे नुकसान ने किसानों को मानसिक और आर्थिक रूप से तोड़ दिया था। कई परिवारों के सामने तो अपनी पुश्तैनी जमीन बेचने तक की नौबत आ गई थी। गाँव के बुजुर्गों के अनुसार, यह समस्या इतनी पुरानी थी कि कई पीढ़ियाँ इसे झेलते-झेलते थक चुकी थीं।

 जब सरकारी प्रयास असफल रहे, तब जगी नई उम्मीद

गाँव के सरपंच और किसानों ने कई बार प्रशासन और सरकार को लिखित आवेदन दिए। कई प्रतिनिधि नेताओं और अधिकारियों से मिले, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला। सरकारी प्रक्रियाओं और देरी के कारण कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

जब सभी प्रयास विफल होते दिखाई दिए, तब ग्रामीणों को संत रामपाल जी महाराज द्वारा चलाए जा रहे बाढ़ राहत कार्यों के बारे में जानकारी मिली। यह खबर सुनकर गाँव वालों में एक नई उम्मीद जगी कि शायद अब उनकी समस्या का समाधान संभव हो सके।

यह भी पढ़ें: जब दांग कला (भिवानी) डूब रहा था, तब संत रामपाल जी महाराज ने दी संजीवनी

 संत रामपाल जी महाराज की पहल से पहुँची बड़ी सहायता

ग्रामीणों की समस्या को समझते हुए संत रामपाल जी महाराज ने तुरंत सहायता भेजने का निर्णय लिया। मात्र छः दिनों में गाँव में राहत सामग्री पहुँचाई गई, जिसमें शामिल थे:

  • लगभग 6500 फीट लंबी, 8 इंची पाइप
  • उच्च क्षमता वाली 10HP की 2 मोटरें और स्टार्टर
  • पाइपलाइन को जोड़ने और चलाने के लिए सभी आवश्यक उपकरण

यह पूरी व्यवस्था इस प्रकार तैयार की गई कि खेतों में जमा पानी को सीधे नदी में निकाला जा सके। इस योजना ने वर्षों से चली आ रही समस्या को समाप्त करने की दिशा में बड़ा कदम साबित किया।

 एक समाधान, दो बड़े फायदे

इस पाइपलाइन और मोटर व्यवस्था से गाँव को केवल जल निकासी ही नहीं, बल्कि सिंचाई की भी सुविधा मिल गई। बरसात के समय खेतों में भरने वाला अतिरिक्त पानी मोटरों की मदद से सीधे चितंग नदी में भेजा जा सकता है। वहीं, जब खेतों में पानी की कमी होती है तो किसान इसी सिस्टम के माध्यम से नदी से पानी उठाकर अपने ऊँचे खेतों की सिंचाई भी कर सकते हैं।

गाँव के लोगों ने दूरदर्शिता दिखाते हुए लगभग 3000 फीट पाइप को जमीन के नीचे स्थायी रूप से दबा दिया, जिससे यह व्यवस्था लंबे समय तक बिना किसी बाधा के काम कर सके।

 सूखी पड़ी जमीन पर फिर लहराई हरियाली

इस व्यवस्था के लागू होने के बाद गाँव की स्थिति पूरी तरह बदल गई है। जो जमीन पहले वर्षों तक पानी में डूबी रहती थी, वहीं अब गेहूँ, सरसों और अन्य फसलें लहलहा रही हैं। किसानों के चेहरों पर खुशी साफ दिखाई देती है क्योंकि अब वे अपनी जमीन पर दोबारा खेती कर पा रहे हैं।

ग्रामीणों के अनुसार इस व्यवस्था से लगभग 300 से 350 एकड़ भूमि को सीधा लाभ मिला है। कई किसानों ने बताया कि पहली बार उन्हें लगा कि उनकी जमीन वास्तव में फिर से उपजाऊ बन सकती है।

किसानों की जिंदगी में लौटी उम्मीद

किसानों का कहना है कि यह सहायता केवल राहत नहीं बल्कि उनके लिए एक नया जीवन लेकर आई है। पहले जहाँ हर साल बाढ़ और जलभराव से फसलें नष्ट हो जाती थीं, वहीं अब उन्हें समय पर बुवाई करने और अच्छी पैदावार प्राप्त करने का मौका मिल रहा है।

गाँव के कई किसानों ने भावुक होकर कहा कि वर्षों से चली आ रही उनकी सबसे बड़ी समस्या का समाधान अब संभव हो पाया है और इससे उनके परिवारों का भविष्य सुरक्षित हुआ है।

अन्नपूर्णा मुहिम के तहत चल रहा व्यापक राहत अभियान 

तलाकौर गाँव को दी गई यह सहायता संत रामपाल जी महाराज द्वारा चलाए जा रहे “अन्नपूर्णा मुहिम” का हिस्सा है। इस अभियान के माध्यम से कई बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्य किए जा रहे हैं। किसानों को पाइपलाइन, मोटर और अन्य संसाधन उपलब्ध कराकर उन्हें स्थायी समाधान देने का प्रयास किया जा रहा है।

इस पहल का उद्देश्य केवल तात्कालिक राहत देना नहीं, बल्कि ऐसी स्थायी व्यवस्था तैयार करना है जिससे किसानों की फसलें सुरक्षित रहें और उनकी आजीविका मजबूत हो सके।

Latest articles

सड़े हुए पानी से लहलहाती फसल तक: संत रामपाल जी महाराज ने कैसे बदली बांस खुर्द बिजान की तकदीर?

जहां कुछ महीनों पहले तक सिर्फ सड़ा हुआ पानी और किसानों की सिसकियां थीं,...

World Population Day 2026: The best time for world’s Population to Attain Salvation

Last Updated 04 July 2026, 1:16 PM IST | World Population Day 2026: Today...
spot_img

More like this