हरियाणा राज्य के भिवानी जिले के अंतर्गत आने वाले सैय गाँव की 95 प्रतिशत आबादी अपनी आजीविका के लिए पूर्णतः कृषि पर आधारित है। अगस्त के महीने में हुई अत्यधिक वर्षा के कारण गाँव की लगभग 1000 एकड़ कृषि भूमि 4 से 5 फुट गहरे पानी में डूब गई थी।
इस प्राकृतिक आपदा के कारण खरीफ की फसल (धान और कपास) पूर्णतः नष्ट हो गई थी। ग्रामीणों के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती आगामी रबी की फसल (गेहूँ) की बिजाई को लेकर थी, क्योंकि जलभराव के कारण खेतों के सूखने की कोई संभावना नहीं दिख रही थी।
प्रशासनिक विफलता और संत रामपाल जी महाराज से सहायता की गुहार
गाँव के सरपंच और निवासियों ने स्थिति से निपटने के लिए सरकारी विभागों और प्रशासन से संपर्क किया, किंतु वहां से सहायता की प्रक्रिया अत्यंत जटिल और लंबी थी। ऐसी परिस्थिति में गाँव के प्रतिनिधि मंडल ने बरवाला जाकर संत रामपाल जी महाराज के समक्ष सहायता हेतु एक प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया। ग्रामीणों की पुकार पर संत रामपाल जी महाराज ने अन्नपूर्णा मुहिम के माध्यम से तत्काल प्रतिक्रिया दी:

- त्वरित कार्रवाई: अर्जी देने के मात्र 3 दिन के भीतर सहायता सामग्री का विशाल काफिला सैय गाँव पहुँचा।
- वितरित सामग्री: संत रामपाल जी महाराज ने 15 हॉर्स पावर (HP) की चार बड़ी मोटरें और 12,000 फुट पाइप उपलब्ध कराए।
- अतिरिक्त उपकरण: मशीनों को सुचारू रूप से चलाने के लिए स्टार्टर, 80 फुट केबल और अन्य सभी आवश्यक तकनीकी उपकरण भी प्रदान किए गए।
आर्थिक सुधार और बिजाई के परिणाम
संत रामपाल जी महाराज द्वारा प्रदान की गई शक्तिशाली मशीनों ने दिन-रात कार्य करके खेतों से पानी को गाँव की सीमाओं से बाहर निकाला। इसके परिणामस्वरूप गाँव की कृषि अर्थव्यवस्था में निम्नलिखित सुधार देखे गए:
- भूमि बहाली: लगभग 1000 एकड़ जलमग्न भूमि में से 99 प्रतिशत क्षेत्र अब जलमुक्त हो चुका है।
- गेहूँ की बिजाई: गाँव के लगभग सभी खेतों में गेहूँ की बिजाई सफलतापूर्वक पूर्ण हो चुकी है।
- सिंचाई सुविधा: बिजाई के पश्चात गेहूँ की पहली सिंचाई भी इन्हीं पाइपों और मोटरों की सहायता से की जा रही है।
- आर्थिक सुरक्षा: ग्रामीणों के अनुसार, इस सहायता ने गाँव को लगभग 7 करोड़ रुपये के संभावित फसल नुकसान से बचा लिया है।
यह भी पढ़े: सैय गांव में अन्नपूर्णा मुहिम के अंतर्गत संत रामपाल जी महाराज द्वारा विशाल बाढ़ राहत अभियान
सहायता और कृषि लाभ का संक्षिप्त विवरण
| श्रेणी | विवरण |
| प्रदान की गई मोटरें | 4 मोटरें (प्रत्येक 15 HP क्षमता) |
| पाइप की कुल लंबाई | 12,000 फुट |
| प्रभावित कृषि क्षेत्र | लगभग 1000 एकड़ |
| बिजाई की स्थिति | 99% भूमि पर गेहूँ की फसल लहलहा रही है |
| अनुमानित आर्थिक बचत | ₹7 करोड़ |
| मुख्य फसलें | गेहूँ और चारा |
| सहायता का समय | अर्जी के 3 दिन के भीतर |
व्यक्तिगत किसानों की आपबीती और राहत
गाँव के विभिन्न किसानों ने संत रामपाल जी महाराज द्वारा अन्नपूर्णा मुहिम के माध्यम से दी गई इस सहायता पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की:
- रणबीर (स्थाई निवासी): इन्होंने बताया कि जलभराव 10 अगस्त से नवंबर के अंत तक रहा। यदि संत रामपाल जी महाराज सहायता नहीं करते, तो पशुओं और ग्रामीणों का गुजारा असंभव था।
- विजय सिंह (सरपंच के भाई): इनके स्वयं के 10 एकड़ खेत जलमग्न थे। प्रति एकड़ ₹70,000 के नुकसान के हिसाब से इन्हें अकेले ₹7 लाख का घाटा होने वाला था।
- अशोक कुमार: इनके परिवार के पास 50 एकड़ भूमि है। इन्होंने बताया कि खरीफ की फसल से ₹1 की भी आय नहीं हुई थी और यदि गेहूँ की बिजाई न होती, तो स्थिति अत्यंत दयनीय हो जाती।
- मजदूर किसान: एक बटाईदार किसान, जिसने 20-22 हजार रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से 8 एकड़ जमीन ठेके पर ली थी, ने भावुक होकर बताया कि यदि फसल न होती, तो उनके पास जहर खाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता।
भविष्य की सुरक्षा के लिए स्थायी बुनियादी ढाँचा
ग्रामीणों ने दूरदर्शिता का परिचय देते हुए संत रामपाल जी महाराज द्वारा प्रदान की गई इस पाइपलाइन को भविष्य की सुरक्षा के लिए स्थायी रूप से सुरक्षित कर लिया है।
कुछ पाइप लाइनों को जमीन के नीचे अंडरग्राउंड बिछा दिया गया है ताकि भविष्य में कभी भी ऐसी बाढ़ की स्थिति उत्पन्न होने पर तत्काल जल निकासी की जा सके।
गाँव के सरपंच और अन्य मौजिज व्यक्तियों ने कहा कि प्रशासन के पास सीमित संसाधन थे और उन्हें सहायता के लिए नंबर का इंतजार करना पड़ता था, जबकि संत रामपाल जी महाराज ने बिना किसी देरी और बिना किसी शर्त के गाँव की लाज बचा ली।
सैय गाँव में कृषि पुनरुद्धार और सामाजिक प्रभाव
वर्तमान में सैय गाँव के खेतों में हरियाली छा गई है। जहाँ कुछ समय पहले 5 फुट गहरा गंदा पानी खड़ा था, वहाँ अब गेहूँ की फसल लहलहा रही है।
ग्रामीणों का मानना है कि संत रामपाल जी महाराज ने अन्नपूर्णा मुहिम के माध्यम से न केवल उनके खेतों को बचाया, बल्कि उजड़ते हुए परिवारों को नया जीवन दान दिया है। गाँव का हर घर अब इस निस्वार्थ सेवा के प्रति कृतज्ञता व्यक्त कर रहा है।



