उजड़ते खेतों को मिला नया जीवन: संत रामपाल जी महाराज ने कैसे बचाई किशनगढ़ और इमलीगढ़ की लाज

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हरियाणा के रोहतक जिले में स्थित किशनगढ़ पंचायत (पाँच गाँवों का समूह) और इमलीगढ़ गाँव हाल ही में एक ऐसी प्राकृतिक आपदा से जूझ रहे थे, जिसने किसानों की कमर तोड़ दी थी। खेतों में कई महीनों से 6 फुट गहरा सड़ा हुआ पानी खड़ा था, जिससे न केवल पिछली फसल बर्बाद हुई, बल्कि अगली बिजाई की उम्मीद भी खत्म हो चुकी थी। इस लेख में हम जानेंगे कि कैसे संत रामपाल जी महाराज के एक निर्णय ने इस पूरे क्षेत्र की किस्मत बदल दी।

संकट का समय: जब पानी ने छीन ली थी किसानों की मुस्कान

किशनगढ़ और इमलीगढ़ के खेतों की स्थिति अत्यंत दयनीय थी। लगभग 1000 से 1500 एकड़ भूमि जलमग्न थी। प्रशासन की ओर से मिलने वाली मदद नाकाफी साबित हो रही थी। किसानों का दर्द गहरा था:

  • खेतों में 3-6 फुट तक पानी जमा था।
  • किसान अपनी पुश्तैनी जमीन को बंजर होते देख रहे थे।
  • अगली फसल (गेहूं और सरसों) की बिजाई का समय निकला जा रहा था।
  • अनुमानित रूप से पूरे गाँव को लगभग 54 करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान होने की आशंका थी।

मसीहा का आगमन: संत रामपाल जी महाराज की निःस्वार्थ सेवा

जब ग्रामीणों की सारी उम्मीदें टूट गईं, तब सरपंच संदीप कुमार दहिया और ग्रामीणों ने संत रामपाल जी महाराज से गुहार लगाई। महाराज जी ने बिना किसी देरी के राहत सामग्री का बड़ा काफिला गाँव भेजा।

इस व्यापक ऑपरेशन में निम्नलिखित सामग्री प्रदान की गई:

संत रामपाल जी महाराज ने बदली किशनगढ़ और इमलीगढ़ की सूरत: बाढ़ की त्रासदी से उबरे खेत, लौटी खुशहाली
  • दो चरणों में मदद: पहले किशनगढ़ और फिर इमलीगढ़ के लिए अलग-अलग राहत सामग्री भेजी गई।
  • शक्तिशाली मशीनरी: कुल 5 बड़ी मोटरें (15 HP) और लगभग 30,000 फुट (8 इंची) उच्च गुणवत्ता वाले पाइप दिए गए।
  • संपूर्ण सेटअप: मोटरों के साथ स्टार्टर, केबल और हर छोटा-बड़ा सामान महाराज जी की ओर से मुफ्त उपलब्ध कराया गया। ग्रामीणों को एक चवन्नी भी खर्च नहीं करनी पड़ी।

यह भी पढ़े: संत रामपाल जी महाराज की अन्नपूर्णा मुहिम: हरियाणा के गाँव किशनगढ़ (रोहतक) को मिली जीवन-रक्षक सहायता

परिवर्तन का चमत्कार: ‘बाढ़ के मैदान’ से ‘हरियाली के खेत’ तक

संत रामपाल जी महाराज के अनुयायियों और मशीनों ने दिन-रात काम किया। लगभग डेढ़ से दो महीने तक लगातार पंपिंग चली। इसका परिणाम यह हुआ कि वह पानी, जिसके बारे में किसान सोच रहे थे कि साल भर नहीं निकलेगा, वह समय रहते बाहर खदेड़ दिया गया।

एक अद्भुत दृश्य: जैसे ही पानी उतरा, किसानों ने बिना ट्रैक्टर चलाए, गीली मिट्टी में ही सरसों का बीज छिड़क दिया। आज उन खेतों में सरसों के पीले फूल और गेहूं की हरी फसलें लहलहा रही हैं।

                  पहलू             हस्तक्षेप से पहले            हस्तक्षेप के बाद
जल स्तर3 से 6 फुट गहरा पानीपानी पूरी तरह साफ
भूमि की स्थितिजलमग्न और बंजरउपजाऊ और हरी-भरी
किसानों की भावनानिराशा और आत्महत्या का डरखुशी और नया जीवन
आर्थिक स्थितिकरोड़ों का संभावित नुकसानकरोड़ों की फसल की उम्मीद

ग्रामीणों की जुबानी: “वह हमारे लिए भगवान हैं”

गाँव के बुजुर्ग और युवा आज संत रामपाल जी महाराज के प्रति नतमस्तक हैं।

  • दलबीर सिंह (किसान): उन्होंने बताया कि उनके 4 किलों में ढाई फुट पानी था। महाराज जी की मदद से आज वहाँ ₹2.5 लाख की सरसों तैयार खड़ी है।
  • बुजुर्ग किसान (79 वर्ष): उन्होंने भावुक होकर कहा कि 1995 की बाढ़ में पानी साल भर नहीं उतरा था, लेकिन महाराज जी ने इस बार हमें भूख से मरने से बचा लिया।
  • कुलवीर (किसान): इन्होंने बताया कि इस मदद से न केवल किशनगढ़ और इमलीगढ़ बल्कि पड़ोसी गाँव सिसर का पानी भी निकल गया, जिससे वहाँ के किसानों को भी लाभ हुआ।

मानवता की मिसाल

किशनगढ़ और इमलीगढ़ की यह कहानी केवल बाढ़ राहत की कहानी नहीं है, बल्कि यह इस बात का प्रमाण है कि एक सच्चा संत समाज के हर दुख में ढाल बनकर खड़ा होता है। संत रामपाल जी महाराज ने न केवल भूमि से पानी निकाला, बल्कि किसानों के जीवन से अंधकार भी निकाल दिया। आज यह गाँव फिर से आबाद है और यहाँ की लहलहाती फसलें संत रामपाल जी महाराज जी के परोपकारी कार्यों की गवाही दे रही हैं।

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