संत रामपाल जी महाराज ने हिसार के देवा गांव में जलभराव से बचाई किसानों की फसल

Published on

spot_img

हरियाणा के हिसार जिले की तहसील हिसार के अंतर्गत आने वाले गांव देवा में ड्रेन के पानी के कारण भीषण जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो गई थी। ड्रेन के समीपवर्ती क्षेत्रों में पानी भरने से किसानों की खरीफ की फसलें, जिनमें मुख्य रूप से धान, बाजरा और नरमा शामिल थे, पूरी तरह नष्ट हो चुकी थीं। 

ग्रामीणों के अनुसार, प्रशासन से कोई प्रभावी सहायता न मिलने के कारण आगामी रबी की फसल (साड़ी की फसल) की बिजाई की कोई उम्मीद शेष नहीं बची थी। जलभराव का क्षेत्र लगभग 100 एकड़ भूमि पर विस्तृत था, जहाँ पानी का प्रवाह इतना तीव्र था कि खेतों के सूखने के आसार न्यूनतम थे।

संत रामपाल जी महाराज द्वारा त्वरित राहत कार्यों का संचालन

जब देवा गांव के ग्रामीणों ने अपनी विषम परिस्थिति को लेकर संत रामपाल जी महाराज के समक्ष प्रार्थना भेजी, तो उसके मात्र तीन से चार दिनों के भीतर राहत सामग्री और मशीनों का काफिला गांव पहुंच गया। 

संत रामपाल जी महाराज ने अन्नपूर्णा मुहिम के माध्यम से गांव में शक्तिशाली पंपिंग मशीनें, भारी मात्रा में पाइप और आवश्यक तकनीकी समाधान उपलब्ध कराए। 

सेवादारों ने स्पष्ट किया कि गांव के सरपंच या ग्रामीणों को बाजार से एक नट भी खरीदने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि पाइप चिपकाने वाले सोल्यूशन से लेकर अन्य सभी उपकरण संत रामपाल जी महाराज द्वारा सीधे उपलब्ध कराए गए थे।

जल निकासी और रबी की फसल की बिजाई का विवरण

संत रामपाल जी महाराज द्वारा प्रदान की गई मशीनों ने लगभग 20 से 25 दिनों तक निरंतर कार्य किया, जिसके परिणामस्वरूप 100 एकड़ में भरे पानी का 95% हिस्सा निकाला जा चुका है।

संत रामपाल जी महाराज ने हिसार के देवा गांव में जलभराव से बचाई फसल
  • बिजाई की स्थिति: वर्तमान में अधिकांश क्षेत्र में गेहूं की बिजाई पूर्ण हो चुकी है और खेतों में हरियाली दिखाई दे रही है।
  • सिंचाई व्यवस्था: ग्रामीण अब उन्हीं संसाधनों (पाइप और मशीनों) का उपयोग गेहूं की सिंचाई के लिए भी कर रहे हैं।
  • भविष्य की सुरक्षा: ड्रेन का पानी दोबारा खेतों में न घुसे, इसके लिए ग्रामीणों ने पाइपों को सुरक्षित रख लिया है।

आर्थिक प्रभाव और किसानों की वर्तमान स्थिति

जलभराव के कारण किसानों को दोहरी आर्थिक मार झेलनी पड़ रही थी। एक ओर पिछली फसल बर्बाद हो गई थी, वहीं दूसरी ओर पंचायत की जमीन का ठेका लगभग 30,000 से 35,000 रुपये प्रति एकड़ था। 

इसके अतिरिक्त, पानी निकालने के लिए व्यक्तिगत स्तर पर किए गए प्रयासों में प्रति एकड़ लगभग 7,000 रुपये का डीजल खर्च हो रहा था।

  • लाभार्थी क्षेत्र: देवा गांव के साथ-साथ कैमरी, गंगवा, टोकस और पातन जैसे समीपवर्ती क्षेत्रों के लगभग 700 से 800 किलों (एकड़) पर इस राहत कार्य का सकारात्मक प्रभाव पड़ा है।
  • कर्ज से मुक्ति: ग्रामीणों के अनुसार, यदि संत रामपाल जी महाराज सहायता न करते, तो किसान भारी कर्ज में डूब जाते और भुखमरी की स्थिति उत्पन्न हो जाती।

यह भी पढ़े: किसान मसीहा बनकर आए संत रामपाल जी महाराज और उभारा देवां गांव को बाढ़ के एक विशाल संकट से

ग्रामीणों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के वक्तव्य

  • सरपंच, ग्राम पंचायत देवा: सरपंच ने पुष्टि की कि संत रामपाल जी महाराज के सहयोग के बिना अगली फसल की बिजाई असंभव थी। उन्होंने पूरी ग्राम पंचायत की ओर से इस परोपकारी कार्य के लिए आभार व्यक्त किया।
  • दलजीत सिंह (ग्रामीण बुजुर्ग): इन्होंने बताया कि खेतों में बुरा हाल था और किसान बर्बादी के कगार पर थे। संत रामपाल जी महाराज ने बिजली और पाइप का प्रबंध कर किसानों की जान बचाई है।
  • विक्रम और विनोद कुमार (स्थानीय किसान): इन्होंने जानकारी दी कि कुछ निचले क्षेत्रों में अभी भी कीचड़ है जहाँ 10 दिनों बाद बिजाई की संभावना है, परंतु अधिकांश क्षेत्र अब सुरक्षित है।
  • सुनील कुमार (ग्रामीण): सुनील ने कहा कि हजारों एकड़ क्षेत्र में पानी भरा था जो अब संत रामपाल जी महाराज की बदौलत निकल चुका है।

देवा गांव राहत कार्य सारांश

विवरणविवरण के तथ्य
प्रभावित स्थानगांव देवा, तहसील व जिला हिसार, हरियाणा
कुल प्रभावित रकबालगभग 100 एकड़ (देवा गांव) और 700-800 किले (क्षेत्रीय)
प्रदान की गई सहायताशक्तिशाली मोटरें, पाइप, बिजली कनेक्शन प्रबंधन, तकनीकी सेवादार
सहायता का माध्यमसंत रामपाल जी महाराज (अन्नपूर्णा मुहिम)
वर्तमान स्थिति95% जल निकासी सफल, गेहूं की बिजाई पूर्ण
बर्बाद फसलेंधान, बाजरा, नरमा
वर्तमान फसलगेहूं (साड़ी की फसल)

संत रामपाल जी महाराज के मानवीय सहयोग से देवा गांव में पुनः खुशहाली

देवा गांव के निवासियों का मानना है कि जहाँ प्रशासनिक प्रक्रियाएं फाइलों तक सीमित रहीं, वहीं संत रामपाल जी महाराज ने प्रत्यक्ष और त्वरित सहायता प्रदान कर गांव की कृषि अर्थव्यवस्था को पुनः पटरी पर ला दिया है। 

बुजुर्ग ग्रामीणों ने इस सहयोग की तुलना ‘संजीवनी बूटी’ से करते हुए कहा कि इस निस्वार्थ सेवा ने न केवल उनकी भूमि को सुरक्षित किया है, बल्कि किसानों के बच्चों के भविष्य को कर्ज के अंधकार में डूबने से भी बचा लिया है।

Latest articles

तकनीकी सर्वे के बाद तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज ने झज्जर के गांव बाजिदपुर टप्पा हवेली को फेज़ II के तहत जल राहत सहायता...

झज्जर (हरियाणा): हरियाणा के झज्जर जिले के गांव बाजिदपुर टप्पा हवेली में करीब दो...

ग्रामीण भारत में जल क्रांति: संत रामपाल जी महाराज ने शुरू किया “शुद्ध पेयजल सेवा अभियान” 

आज इक्कीसवीं सदी के तीसरे दशक में भी वैश्विक और क्षेत्रीय स्तर पर ग्रामीण...

World Youth Skills Day 2026: True Spiritual Knowledge Can Empower Every Youth

Last Updated on 10 July 2026 IST | World Youth Skills Day 2026: Did...
spot_img

More like this

तकनीकी सर्वे के बाद तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज ने झज्जर के गांव बाजिदपुर टप्पा हवेली को फेज़ II के तहत जल राहत सहायता...

झज्जर (हरियाणा): हरियाणा के झज्जर जिले के गांव बाजिदपुर टप्पा हवेली में करीब दो...

ग्रामीण भारत में जल क्रांति: संत रामपाल जी महाराज ने शुरू किया “शुद्ध पेयजल सेवा अभियान” 

आज इक्कीसवीं सदी के तीसरे दशक में भी वैश्विक और क्षेत्रीय स्तर पर ग्रामीण...