किसान मसीहा बनकर आए संत रामपाल जी महाराज और उभारा देवां गांव को बाढ़ के एक विशाल संकट से

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हरियाणा के जिला हिसार में स्थित गांव देवां की यह कहानी केवल एक गांव की नहीं, बल्कि उस पीड़ा की है जिसे झेलते हुए किसान अपनी आंखों के सामने अपनी मेहनत को पानी में डूबता देख रहा था। खेतों में लहराने वाली फसलें ड्रेन के पानी में समा चुकी थीं। आने वाली फसल की उम्मीद भी लगभग समाप्त हो गई थी। यह केवल आर्थिक संकट नहीं था, बल्कि किसानों की रोज़ी-रोटी, पशुओं के चारे और परिवार के भविष्य का सवाल बन चुका था।

जब प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस समाधान नहीं मिला और हर दरवाजा खटखटाने के बाद भी निराशा हाथ लगी, तब गांव वालों ने संत रामपाल जी महाराज के चरणों में एक छोटी-सी प्रार्थना भेजी। गांव वालों के शब्दों में, “दुख चाहे छोटा हो या बड़ा, संत रामपाल जी महाराज उसे अपना समझते हैं।” गांव वालों के दुख को अपना दुख समझते हुए संत रामपाल जी महाराज ने ऐसी राहत दी जो गांव वालो के लिए किसी वरदान से कम नहीं थी। आइए जानते है इस लेख में पूरी कहानी।

देवां गांव के खस्ता हालात 

देवां गांव के ड्रेन से सटे इलाकों में लगभग 50 से 100 एकड़ भूमि जलभराव की चपेट में थी। पिछली फसल पूरी तरह नष्ट हो चुकी थी। खेतों में पानी भरा होने के कारण अगली फसल की बुवाई असंभव लग रही थी। पशुओं के लिए चारा नहीं बचा था, बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही थी और किसान मानसिक रूप से टूट चुके थे। कई परिवार ऐसे हालात में पहुंच गए थे जहां उन्हें जीवनयापन तक कठिन लगने लगा था।

ग्रामीणों की भावनात्मक मांग

सभी तरफ से हार मिलने के बाद देवां गांव की पंचायत द्वारा संत रामपाल जी महाराज को बाढ़ राहत सामग्री के लिए प्रार्थना भेजी गई, उनकी मांग इस प्रकार थी:

  • दो 15 HP की मोटर
  • 350 फीट पाइपलाइन

यह प्रार्थना जब संत रामपाल जी महाराज तक पहुंची, तो मात्र तीन से चार दिनों के भीतर राहत का काफिला गांव देवां पहुंच गया। हैरान करने वाली बात यह है कि बिना किसी कागज़ी करवाई, बिना किसी रिश्वत के इतना बड़ा सहायता की गई, संत रामपाल जी महाराज की यह विशेष दया से किया कार्य तो देखते ही बनता है।

संत रामपाल जी महाराज द्वारा प्रदान की गई सामग्री

संत रामपाल जी महाराज की कृपा से गांव देवां को बाढ़ राहत सेवा अभियान के अंतर्गत:

  • 15 हॉर्स पावर की 2 शक्तिशाली मोटरें
  • 350 फीट उच्च गुणवत्ता के पाइप
  • स्टार्टर, क्लैंप, जॉइंट, रबर, नट-बोल्ट सहित सभी छोटा बड़ा सामान

पानी निकासी के लिए आवश्यक पूरा सेट, वह भी इस प्रकार कि गांव वालों को बाजार से एक भी छोटी चीज लाने की आवश्यकता न पड़े। संत रामपाल जी महाराज ने एक पिता के दृष्टिकोण से देवां गांव को हर छोटा बड़ा सामान पहुंचा कर उनके दुख को हल्का करने के लिए यह निस्वार्थ सहायता की है।

ग्रामीणों द्वारा व्यक्त किया गया आभार

गांव के सरपंच और ग्रामीणों ने एक स्वर में कहा कि यह सहायता बिना किसी सिफारिश, बिना किसी स्वार्थ और बिना किसी देरी के मिली। ग्रामीणों ने स्वीकार किया कि जहां सरकारें कागजी प्रक्रियाओं में उलझा देती हैं, वहीं संत रामपाल जी महाराज ने घर बैठे समस्या का समाधान कर दिया।

Also Read: संत रामपाल जी महाराज की अन्नपूर्णा मुहिम: दिल्ली के कैर गांव में बाढ़ राहत के लिए करोड़ों की सामग्री भेंट

किसी इंसान को इस रफ्तार से कार्य करते शायद आपने कभी नहीं देखा होगा और ना ही संत रामपाल जी महाराज के अतिरिक्त कोई भी मानवता के हित में ऐसे ठोस कदम, आज के समय में, उठा रहा है। ग्रामीणों के इस वाक्य को स्वीकार किया और बताया कि सिर्फ एक प्रार्थना गई और तुरंत आदेश आ गया। इतना तेज और प्रभावी समाधान उन्होंने पहले कभी नहीं देखा।

यह भी पढ़ें: हिसार के बाढ़ग्रस्त भाटला गांव में संत रामपाल जी महाराज की ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ का शंखनाद

देवां गांव के सरपंच जी का यह कहना था

देवां गांव के सरपंच ने राहत सामग्री का हैंडओवर लेने के बाद संत रामपाल जी महाराज का खूब आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस सहायता के अतिरिक्त संत जी गरीबों के मकान भी बनवाने लग रहे है, ऐसा तो सगा बाप भी नहीं करता, संत रामपाल जी महाराज का यह निस्वार्थ सेवा अभियान सही में अद्भुत है।

किसान मसीहा बनकर आए संत रामपाल जी महाराज

अकसर ऐसा देखा जाता है आपदा के वक्त में सरकारी मदद और बड़े बड़े संगठन पतली गली पकड़ते है। और 2025 की भयानक बाढ़ में यह स्थिति दोबारा आ गई थी जब किसानों पर भारी संकट आ गया था। भारत जैसे देश में जहां गरीबों की सुनवाई सिर्फ फोटो खिंचवाने और कागज़ी काम तक रह जाती है, वास्तविक सहायता कहां जाती है, कुछ पता नहीं चलता।

ऐसी भयानक परिस्थितियों में जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज ने 400 से अधिक गाँवों में देवां गाँव जैसी राहत प्रदान कर सबका दिल जीत लिया है। उनके इस अभियान के बाद संत रामपाल जी महाराज को “किसान मसीहा”, “किसान रक्षक” और “किसान गौरव” जैसे सम्मानों से बार-बार विभिन्न गाँवों और सरपंचों द्वारा सम्मानित किया जा रहा है। यह अपने-आप में संत रामपाल जी महाराज की महानता और जनकल्याणकारी योगदान का प्रमाण है।

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