बाढ़ से तबाह बिठमड़ा गांव में फिर आई हरियाली: निराशा से खुशहाली तक का सफर

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हरियाणा के हिसार जिले का बिठमड़ा गांव, जो बाढ़ के पानी में डूबकर एक टापू बन चुका था, आज फिर से हरा-भरा हो गया है। जहां प्रशासन और सरकार ने हाथ खड़े कर दिए थे, वहां संत रामपाल जी महाराज ने मानवता की एक ऐसी मिसाल पेश की, जिसे इतिहास याद रखेगा।

संकट की घड़ी: जब गांव बना टापू

हिसार जिले की उकलाना तहसील का बिठमड़ा गांव पिछले दिनों कुदरत के कहर का गवाह बना। भारी बारिश और बाढ़ के कारण यह गांव पूरी तरह जलमग्न हो चुका था। स्थिति इतनी भयावह थी कि 150 से अधिक मकानों में दरारें आ गई थीं और कई छतें गिर चुकी थीं। किसानों की मेहनत यानी नरमा, बाजरा और धान की फसलें पूरी तरह नष्ट हो चुकी थीं।

ग्रामीणों ने प्रशासन के दरवाजे खटखटाए, यहाँ तक कि मुख्यमंत्री का दौरा भी हुआ, लेकिन सिवाय खोखले आश्वासनों के गांव को कुछ नहीं मिला। किसान हताश थे, उनकी दिनचर्या अस्त-व्यस्त थी और भविष्य अंधकारमय नजर आ रहा था।

संत रामपाल जी महाराज का त्वरित हस्तक्षेप और विशाल राहत

निराश ग्राम पंचायत की प्रार्थना पर संत रामपाल जी महाराज ने तत्काल सहायता का आदेश दिया। संत जी ने सरकारी लेटलतीफी से परे, मात्र 24 घंटे में युद्धस्तर पर कार्य करते हुए राहत सामग्री से लदे 8-10 ट्रक बिठमड़ा भेज दिए।

संत रामपाल जी ने गांव को जलमुक्त करने हेतु यह विशाल सामग्री प्रदान की:

  • पाइपलाइन: 25,000 फीट (8 इंची) और 15,000 फीट (10 इंची)।
  • मशीनरी: 20 हॉर्स पावर की 6 मोटरें, 6 स्टार्टर और 1000 मीटर वायर।

संत रामपाल जी ने संकल्प लिया कि वे खेतों से पानी निकालकर ही रहेंगे, ताकि किसान दोबारा फसल बो सकें।

बदलाव की बयार: डेढ़ महीने बाद का दृश्य

संत रामपाल जी महाराज द्वारा भेजी गई सहायता का परिणाम आज धरातल पर स्पष्ट दिखाई देता है। लगभग डेढ़ महीने बाद, बिठमड़ा गांव की तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है।

  • जल निकासी: जिस 2000 एकड़ जमीन पर 2 से 3 फीट पानी भरा था, वहां आज संत जी की कृपा से एक बूंद पानी शेष नहीं है।
  • लहलहाती फसलें: खेतों में रवि की फसल (गेहूं और सरसों) की 100% बिजाई हो चुकी है और चारों तरफ हरियाली लौट आई है।
  • भविष्य की सुरक्षा: संत रामपाल जी महाराज द्वारा दी गई पाइप लाइनों को अब अंडरग्राउंड दबा दिया गया है, ताकि भविष्य में भी गांव किसी आपदा का सामना कर सके।

यह भी पढ़े: हिसार के डाटा गांव में संत रामपाल जी महाराज बने ‘किसान मसीहा’: 32,000 फीट पाइप से बदला 4000 एकड़ भूमि का भाग्य

ग्रामीणों की जुबानी: “यह कार्य भगवान ही कर सकता है”

गांव के लोग और पंचायत प्रतिनिधि संत रामपाल जी महाराज को अपना रक्षक मान रहे हैं। उनकी प्रतिक्रियाएँ इस प्रकार हैं:

“जो काम सरकार और मुख्यमंत्री नहीं कर सके, वह संत रामपाल जी महाराज ने एक दिन में कर दिखाया। आज अगर हमारे खेतों में फसल लहलहा रही है, तो यह केवल संत जी की देन है। हमारे लिए वे भगवान स्वरूप हैं।”  – कुलदीप, सरपंच प्रतिनिधि, बिठमड़ा

“कुदरत ने हमें मार दिया था, लेकिन गुरु जी ने हमें बचा लिया। उन्होंने असंभव को संभव कर दिखाया है। आज पूरा गांव खुशहाल है।” –  सतीश, ग्रामीण

“सरकार ने हमारा साथ छोड़ दिया था, हमने कई चक्कर काटे पर कुछ नहीं हुआ। लेकिन संत रामपाल जी महाराज ने बिना हमारा एक पैसा खर्च कराए, हमारे खेतों को फिर से जीवित कर दिया।” –  कर्मवीर, किसान नेता

वास्तविक प्रभाव

भारत एक ऐसा राष्ट्र है जहाँ एक बड़ी जनसंख्या अपनी आजीविका के लिए मुख्य रूप से कृषि पर निर्भर है। यहाँ का प्रत्येक किसान अपने अस्तित्व के लिए प्रकृति पर आश्रित है। जब समाज के इस सबसे कमजोर वर्ग पर ऐसी आपदाएँ आती हैं, तो उनके परिणाम केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रहते, बल्कि प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से पूरे राष्ट्र को प्रभावित करते हैं।

इन किसानों को करोड़ों रुपये का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा और उनकी इस पीड़ा को बड़े पैमाने पर अनदेखा कर दिया गया। केवल संत रामपाल जी महाराज ही एकमात्र ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने उनकी दुर्दशा पर ध्यान दिया और कार्रवाई करने का दृढ़ संकल्प लिया। उनके इन कार्यों ने दान और भक्ति की परिभाषा को मौलिक रूप से बदल दिया है।

एक नई सुबह

बाढ़ के पानी ने  बिठमड़ा के सपनों को डुबो दिया था, लेकिन संत रामपाल जी महाराज उनके लिए तारणहार बनकर आए। जहाँ दूसरों ने आँखें मूंद ली थीं, वहाँ संत रामपाल जी महाराज ने समस्या का स्थायी समाधान प्रदान किया। आज  बिठमड़ा बाढ़ मुक्त और खुशहाल खड़ा है, जो संत रामपाल जी महाराज की दया और शक्ति का जीता-जागता प्रमाण है।

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