पलवल जिले का आदुपुर गांव आज एक ऐसी विजय का जश्न मना रहा है जिसकी उम्मीद गांव की एक पूरी पीढ़ी छोड़ चुकी थी। यह कहानी है 20 साल के उस जल-संकट के अंत की, जिसे संत रामपाल जी महाराज के निस्वार्थ परोपकार ने मुमकिन बनाया है।
20 साल का दर्द और बंजर होती उम्मीदें
आदुपुर गांव के करीब 500 एकड़ खेत पिछले 15-20 सालों से जलमग्न थे। स्थिति इतनी हृदयविदारक थी:
- जमीन के मालिक, अनाज के मोहताज: किसान अपनी जमीन होते हुए भी बाजार से गेहूं खरीदकर अपने बच्चों का पेट भर रहे थे।
- पेड़ भी दे गए जवाब: 6 फीट गहरे पानी के कारण शीशम जैसे मजबूत पेड़ भी जड़ों से सड़कर सूख चुके थे।
- प्रशासनिक नाकामी: दो दशकों तक सरकारें आईं और गईं, लेकिन आदुपुर का ‘समुद्र’ कम नहीं हुआ।
संजीवनी बनकर आई ‘अन्नपूर्णा मुहिम’
जब ग्रामीणों ने संत रामपाल जी महाराज के दरबार में अरदास लगाई, तो उनकी पुकार पलक झपकते ही सुन ली गई। राहत का जो काफिला गांव पहुंचा, उसने पूरे क्षेत्र में उत्साह भर दिया।

संत जी ने प्रदान किया:
- 4,000 फुट 8-इंची पाइपलाइन।
- 15 HP की 3 शक्तिशाली मोटरें।
- निशुल्क सेवा: सरपंच लाल सिंह ने बताया कि पाइप, मोटर, स्टार्टर से लेकर नट-बोल्ट तक का सारा खर्चा ट्रस्ट ने उठाया।
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स्थायी समाधान: भविष्य की नींव
शक्तिशाली मोटरों ने दिन-रात काम करके उस 6 फीट गहरे पानी को गांव से कोसों दूर निकाल दिया।
अंडरग्राउंड पाइपलाइन: ग्रामीणों ने दूरदर्शिता दिखाते हुए करीब 1 किलोमीटर लंबी इस पाइपलाइन को जमीन के नीचे स्थायी रूप से दबा दिया है।
90% बिजाई पूरी: जहाँ कभी नाव चलती थी, वहां आज गेहूं और सरसों की फसल अंगुल-अंगुल ऊंची हो गई है।
ग्रामीणों की आपबीती: “परमात्मा ही ऐसा कर सकते हैं”
एक किसान ने भावुक होकर कहा, “सरकारें बजट का बहाना बनाती रहीं, लेकिन महाराज जी ने पिता की तरह हमारी लाज बचा ली। आज हमारे बच्चे अपने घर का अनाज खाएंगे।”
सरपंच लाल सिंह के अनुसार, “पूरा गांव गदगद है। जो काम 20 साल में कोई नहीं कर सका, वो संत जी ने कुछ हफ्तों में मुमकिन कर दिखाया।”
सेवा का नया मानक
आदुपुर की यह कहानी सिर्फ जल-निकासी की नहीं है, बल्कि एक गांव के आत्मविश्वास की वापसी की है। आज आदुपुर के किसान और मजदूर मिलकर अपनी पहली फसल की सिंचाई कर रहे हैं। संत रामपाल जी महाराज ने न केवल उनकी जमीन बचाई, बल्कि उनके बच्चों के लिए एक सुरक्षित भविष्य की नींव भी रख दी है।



