दरभंगा: दृष्टिहीन पिता और दिव्यांग बेटे के बेसहारा परिवार को मिला नया आशियाना, संत रामपाल जी की प्रेरणा से भेंट किया गया ‘समर्थ कबीर के सुदामा का महल’

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वर्षों से घोर गरीबी, लाचारी और अभावों के बीच जीवन बिता रहे दरभंगा जिले के जाले प्रखंड स्थित ग्राम काजी बहेरा के एक बेसहारा परिवार के लिए 21 जुलाई का दिन जीवन का सबसे बड़ा उपहार लेकर आया। दृष्टिहीन शंकर चौपाल और उनके दिव्यांग बेटे के परिवार को संत रामपाल जी महाराज की प्रेरणा से संचालित ‘मुनींद्र धर्मार्थ ट्रस्ट’ की अन्नपूर्णा मुहिम के तहत एक सर्वसुविधायुक्त पक्का मकान भेंट किया गया। इस नए और आधुनिक घर को ‘समर्थ कबीर के सुदामा का महल’ नाम दिया गया है।

गृह प्रवेश समारोह के दौरान स्थानीय जनप्रतिनिधियों के कर-कमलों द्वारा पीड़ित परिवार को नए घर की चाभी सौंपी गई। इस अवसर पर मौजूद सभी गणमान्य लोगों ने बढ़कर हिस्सा लिया और ट्रस्ट द्वारा की जा रही इस निस्वार्थ मानव सेवा की खुले दिल से सराहना की।

9×74 फुट में निर्मित सर्वसुविधायुक्त ‘सुदामा का महल’

यह पक्का मकान 9×74 फुट के विशाल क्षेत्रफल में बनाया गया है। परिवार की प्राथमिक जरूरतों और सहूलियत को ध्यान में रखते हुए इसमें निम्नलिखित सुविधाएं दी गई हैं:

  • चार कमरे, आधुनिक रसोई, शौचालय एवं स्नानघर: परिवार के सभी सदस्यों के रहने और दैनिक कार्यों के लिए पर्याप्त जगह।
  • बिजली एवं जल आपूर्ति: संपूर्ण मकान में सुरक्षित बिजली फिटिंग, पानी की टंकी और नलों की समुचित व्यवस्था।
  • सुरक्षा और स्वास्थ्य मानक: मच्छरों व कीड़े-मकोड़ों से बचाव के लिए सभी कमरों के वेंटिलेटर और मुख्य दरवाजों पर दोहरी (डबल लेयर) जाली लगाई गई है, जिससे परिवार बीमारियों से सुरक्षित रह सके।

मिथिला की परंपरा अनुसार हुआ सम्मान

समारोह का शुभारंभ मिथिलांचल की समृद्ध संस्कृति और परंपरा के अनुसार किया गया। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने संत रामपाल जी महाराज के चित्र व उनके प्रतिनिधियों को अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया।

उपस्थित जनप्रतिनिधि:

  1. मोहम्मद जुल्करनैन (जिला परिषद सदस्य, जाले क्षेत्र 1/1)
  2. रंजना कुमारी (जिला परिषद सदस्य, सिंघवाड़ा प्रखंड क्षेत्र 2/2)
  3. मोहम्मद सनाउल्लाह अशरफ़ (वर्तमान मुखिया, बंधौली पंचायत)
  4. राम प्रताप चौपाल (सरपंच, बंधौली पंचायत)
  5. महेश प्रसाद (पूर्व मुखिया, ग्राम पंचायत काजी बहेरा)

जनप्रतिनिधियों के विचार और प्रतिक्रियाएं

“संत रामपाल जी महाराज और उनके शिष्य सही मायने में सच्चे मानव धर्म का पालन कर रहे हैं। मानव सेवा ही भगवान की असली सेवा है। आज इस नेत्रहीन शंकर चौपाल के परिवार के लिए इतने सुंदर और अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त मकान की जो व्यवस्था की गई है, वह बेमिसाल है।” — महेश प्रसाद (पूर्व मुखिया, ग्राम पंचायत काजी बहेरा)

“देश के बाकी संतों और संस्थाओं को संत रामपाल जी महाराज से प्रेरणा लेनी चाहिए कि कैसे लाचार और बेसहारा परिवारों को नया जीवन दिया जा सकता है। यह कदम समाज के लिए एक बेहतरीन मिसाल है।” — मोहम्मद सनाउल्लाह अशरफ़ (वर्तमान मुखिया, बंधौली पंचायत)

“मैं संत रामपाल जी महाराज का हृदय से धन्यवाद करता हूं, जो हजारों किलोमीटर दूर हरियाणा में बैठकर बिहार के इस छोटे से गांव के नेत्रहीन परिवार और ऐसे अन्य असहाय लोगों पर अपनी दया दृष्टि रख रहे हैं। उनके इस निस्वार्थ सेवा कार्य से मैं बहुत प्रभावित हूं।” — मोहम्मद जुल्करनैन (जिला परिषद सदस्य, जाले क्षेत्र 1/1)

“हम केवल निमित्त हैं, यह गुरुदेव की शिक्षाओं का फल है”

आयोजन के संदर्भ में मुनींद्र धर्मार्थ ट्रस्ट के सेवादारों ने अत्यंत नम्रता के साथ अपना पक्ष रखा।

बिहार राज्य के सेवादार नागेंद्र दास और सुशांत दास ने संयुक्त रूप से कहा:

“हमारे गुरुदेव संत रामपाल जी महाराज का स्पष्ट संदेश है— ‘जीव हमारी जाति है, मानव धर्म हमारा’। इस परिवार को यह घर या राशन हम नहीं दे रहे, बल्कि परमात्मा की प्रेरणा से समाज का हक समाज तक पहुँचाया जा रहा है। हमारा ट्रस्ट बिना किसी सरकारी अनुदान के पूरी तरह निस्वार्थ भाव से कार्य करता है। समाज के अंतिम पायदान पर खड़े हर असहाय व्यक्ति को भुखमरी और बेघरपन से बाहर निकालकर सम्मानजनक जीवन देना ही हमारे गुरुदेव का मुख्य उद्देश्य है। हम तो केवल उनके आदेशों के निमित्त मात्र हैं।”

मात्र 2,000 रुपये में चल रहा था 7 सदस्यों का परिवार

इस परिवार की स्थिति अत्यंत दयनीय थी:

  • शंकर चौपाल (36 वर्ष): दोनों आँखों से पूर्णतः दृष्टिहीन।
  • अजय (18 वर्ष – बड़ा पुत्र): कमर से दिव्यांग और चलने-फिरने में पूरी तरह असमर्थ।
  • किरण देवी (पत्नी): 7 सदस्यों के इस भूमिहीन परिवार का बोझ उठाने वाली एकमात्र कमाऊ सदस्य, जो एक निजी स्कूल में साफ-सफाई का काम करके महीने के मात्र 2,000 रुपये कमा पाती थीं।
  • चांदनी (बड़ी बेटी): घर के सारे काम संभालते हुए अपने दृष्टिहीन पिता और दिव्यांग भाई की देखभाल करती है।

अप्रैल 2025 से जारी मदद को मिला स्थायी आशियाना

‘मुनींद्र धर्मार्थ ट्रस्ट’ ने अप्रैल 2025 में इस परिवार की दयनीय स्थिति को देखते हुए गोद लिया था। तब से लेकर अब तक परिवार को हर महीने राशन, कपड़े और बच्चों के लिए शिक्षा सामग्री उपलब्ध कराई जा रही थी।

21 जुलाई 2026 को न केवल उन्हें पक्का मकान सौंपा गया, बल्कि नए वस्त्र, संपूर्ण बर्तन सेट, बेड, गद्दे और गृहस्थी का पूरा सामान भी भेंट किया गया, ताकि यह परिवार बिना किसी आर्थिक मानसिक बोझ के एक आत्मनिर्भर और सम्मानजनक शुरुआत कर सके। बिना किसी सरकारी सहायता के चल रही यह ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ आज पूरे जिले और राज्य में सेवा की नई मिसाल बनकर उभरी है।

संत रामपाल जी महाराज: आध्यात्मिक मार्गदर्शक एवं समाज सुधारक

संत रामपाल जी महाराज एक महान आध्यात्मिक मार्गदर्शक और समाज सुधारक हैं, जिन्होंने कबीर साहेब जी के अमर आध्यात्मिक ज्ञान (सत्ज्ञान) के माध्यम से समाज को एक नई दिशा दी है। वे शास्त्रानुकूल भक्ति विधि, नैतिक मूल्यों और विश्व शांति के प्रचार-प्रसार के लिए जाने जाते हैं। उनकी पावन प्रेरणा से उनका अनुयायी समाज दहेज प्रथा, नशा, जात-पात, अंधविश्वास और ढोंग-पाखंड जैसी सामाजिक बुराइयों से पूरी तरह दूर रहकर एक स्वच्छ और व्यसनमुक्त जीवन जीता है। इसके साथ ही, ‘मुनींद्र धर्मार्थ ट्रस्ट’ के माध्यम से उनके मार्गदर्शन में रक्तदान शिविर, असहाय परिवारों को भोजन व आवास प्रदान करने की ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ जैसे अनेक निष्काम जन-सेवा कार्य चलाए जा रहे हैं, जो समाज में मानव धर्म और भ्रातृत्व की अनूठी मिसाल कायम कर रहे हैं।

‘सुदामा का महल’ (दरभंगा) से जुड़े 5 प्रमुख प्रश्नोत्तर

‘सुदामा का महल’ क्या है और यह कहाँ बनाया गया है? 

यह 9×74 फुट में बना एक सर्वसुविधायुक्त पक्का मकान है, जिसे बिहार के दरभंगा जिले के जाले प्रखंड स्थित ग्राम काजी बहेरा में एक बेसहारा परिवार के लिए बनाया गया है।

इस आवास पहल से किस परिवार को लाभ मिला है? 

यह मकान दृष्टिहीन शंकर चौपाल, उनके 18 वर्षीय दिव्यांग बेटे (जो चलने-फिरने में असमर्थ हैं) और उनके 7 सदस्यीय भूमिहीन परिवार को भेंट किया गया है।

इस मकान का निर्माण और हस्तांतरण किस संस्था द्वारा किया गया? 

इस मकान का निर्माण संत रामपाल जी महाराज की प्रेरणा से संचालित ‘मुनींद्र धर्मार्थ ट्रस्ट’ की अन्नपूर्णा मुहिम के तहत निस्वार्थ भाव से किया गया।

इस घर में परिवार के लिए क्या-क्या सुविधाएं दी गई हैं? 

घर में 4 कमरे, आधुनिक रसोई, शौचालय, बाथरूम, बिजली-पानी की पूरी फिटिंग और बीमारियों व मच्छरों से बचाव के लिए दरवाजों व वेंटिलेटरों पर दोहरी (डबल लेयर) जाली लगाई गई है।

गृह प्रवेश और चाभी सौंपने का कार्यक्रम कब आयोजित हुआ? 

स्थानीय जनप्रतिनिधियों की गरिमामय उपस्थिति में 21 जुलाई 2026 को परिवार को नए घर की चाभियाँ और गृहस्थी का पूरा सामान सौंपा गया।

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