चार साल से डूबे खेतों में लौटी हरियाली: आदमपुर में किसानों के चेहरे पर संत रामपाल जी महाराज ने फिर लाई मुस्कान

Published on

spot_img

हिसार के आदमपुर की वह दर्दभरी कहानी, जहां खेत बन गए थे तालाब और किसानों की उम्मीदें डूबने लगी थीं। हिसार जिले की मंडी आदमपुर तहसील के गांव आदमपुर में कुछ महीने पहले तक हालात ऐसे थे कि दूर-दूर तक नजर डालने पर खेत कम और पानी का समंदर ज्यादा दिखाई देता था। गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि उन्होंने अपने जीवन में कई बार बारिश और जलभराव देखा, लेकिन पिछले कुछ वर्षों जैसी स्थिति पहले कभी नहीं देखी थी।

करीब 1500 एकड़ उपजाऊ कृषि भूमि लगातार जलभराव की चपेट में थी। खेतों में दो-दो, तीन-तीन और कहीं-कहीं पांच फुट तक पानी भरा हुआ था। जमीन का जलस्तर इतना ऊपर आ चुका था कि थोड़ी सी बारिश भी पूरे इलाके को तालाब में बदल देती थी। खरीफ की फसल पहले ही बर्बाद हो चुकी थी और किसानों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह था कि क्या इस बार गेहूं की बुवाई भी हो पाएगी या नहीं।

Table of Contents

गांव की गलियों, चौपालों और खेतों के किनारों पर बस एक ही चर्चा सुनाई देती थी—“अब क्या होगा?”

कई किसानों ने ठेके पर जमीन ले रखी थी। किसी ने लाखों रुपये निवेश किए थे, तो किसी ने परिवार की जमा पूंजी खेती में लगा दी थी। लेकिन पानी ने सब कुछ रोक दिया था। जब खेतों में खड़ी फसल सड़ गई और किसानों के घरों में चिंता ने डेरा डाल लिया। गांव के किसान संतलाल बताते हैं कि खेतों में लगातार पानी भरा रहने से फसलें सड़ गई थीं।

उनकी आवाज में आज राहत है, लेकिन कुछ महीने पहले की याद करते हुए वे कहते हैं—

“दो-दो, तीन-तीन फुट पानी खड़ा था। खेतों में जाना मुश्किल हो गया था। ज्वार की फसल गल गई। पशुओं के लिए चारा खत्म हो गया। कई लोगों को अपने डांगर-पशु तक बेचने पड़े।”

गांव के एक अन्य किसान सतीश बताते हैं कि उस समय किसी को यह उम्मीद नहीं थी कि हालात सुधरेंगे। वे कहते हैं—

“जहां आज हम खड़े हैं, वहीं तीन फुट पानी था। पिछली फसल तो खराब हो ही गई थी। अगली फसल की भी कोई उम्मीद नहीं बची थी। लगता था कि अब जमीन खाली ही रह जाएगी।”

किसानों की चिंता केवल फसल तक सीमित नहीं थी। उनके सामने बच्चों की पढ़ाई, घर का खर्च, खेती का कर्ज और भविष्य की अनिश्चितता जैसे अनेक सवाल खड़े थे।

सरकारी प्रयास हुए, लेकिन समस्या का समाधान नहीं निकल पाया

ग्रामीणों के अनुसार जलभराव की समस्या को दूर करने के लिए पहले भी कई प्रयास किए गए थे। पंचायत ने प्रशासन के सामने बार-बार अपनी बात रखी। गांव के सरपंच सुनील कुमार बताते हैं कि सरकार की ओर से कुछ पाइप और अन्य संसाधन उपलब्ध कराए गए थे, लेकिन समस्या के मुकाबले वे पर्याप्त नहीं थे। वे कहते हैं—

“पूरे हरियाणा में उस समय बाढ़ और जलभराव की स्थिति थी। सरकार भी अपनी सीमाओं में काम कर रही थी। लेकिन हमारे गांव की समस्या इतनी बड़ी थी कि उपलब्ध संसाधनों से समाधान नहीं हो पा रहा था।”

समस्या लगातार बढ़ती जा रही थी। किसान प्रशासनिक दफ्तरों के चक्कर लगाकर थक चुके थे। धीरे-धीरे लोगों की उम्मीदें टूटने लगी थीं।

गांव ने लगाई मदद की पुकार और कुछ ही दिनों में पहुंच गया राहत का बड़ा कारवां

गांव के लोगों ने आसपास के इलाकों में हुए राहत कार्यों के बारे में जानकारी जुटाई। इसी दौरान उन्हें पता चला कि कई गांवों में जलनिकासी और जनसेवा के कार्य किए जा रहे हैं। इसके बाद पंचायत और ग्रामीणों ने सहायता की अपील की। ग्रामीण बताते हैं कि उनकी अपील स्वीकार होने के बाद बहुत कम समय में गांव में राहत सामग्री पहुंच गई।

गांव के सरपंच सुनील कुमार के अनुसार गांव को लगभग 8000 से 10000 फुट तक मजबूत पाइपलाइन और 15 एचपी क्षमता की मोटर उपलब्ध कराई गई। केवल मोटर ही नहीं, बल्कि उसके संचालन के लिए आवश्यक स्टार्टर, केबल, जोड़ने का सामान, पाइप फिटिंग सामग्री, फेविकोल और अन्य छोटे-बड़े उपकरण भी साथ भेजे गए ताकि गांव को किसी अतिरिक्त खर्च का सामना न करना पड़े। ग्रामीणों का कहना है कि यह पूरा सामान गांव की स्थायी संपत्ति के रूप में सौंपा गया, जिससे भविष्य में भी जलनिकासी की समस्या का समाधान किया जा सके।

दिन-रात चलता रहा काम और धीरे-धीरे गायब होने लगा बरसों पुराना पानी

राहत सामग्री मिलने के बाद गांव के लोगों और सेवादारों ने मिलकर तुरंत काम शुरू कर दिया। दिन-रात मोटर चलती रही। पाइपलाइन के माध्यम से खेतों और जलभराव वाले क्षेत्रों का पानी बाहर निकाला जाने लगा।

गांव के बुजुर्ग अतर सिंह बताते हैं—

“पाइप और मोटर लगते ही फर्क दिखना शुरू हो गया। जो पानी महीनों से खड़ा था, वह धीरे-धीरे निकलने लगा। आज हालत बिल्कुल अलग है।”

किसान संतलाल भी बताते हैं—

“लगभग तीन-चार फुट पानी कम हो गया। जहां पहले खेत डूबे हुए थे, वहां अब गेहूं की बुवाई शुरू हो गई है।”

लगातार चल रहे इस अभियान ने कुछ ही समय में वह कर दिखाया जिसकी गांव वालों को उम्मीद तक नहीं थी। किसानों ने बताया अगर पानी नहीं निकलता तो लाखों रुपये डूब जाते। गांव के कई किसानों ने जमीन ठेके पर ले रखी थी। एक किसान ने बताया कि उसने करीब छह लाख रुपये देकर जमीन का ठेका लिया था। यदि समय पर पानी नहीं निकलता तो उसका पूरा निवेश डूब सकता था। गांव के किसान बताते हैं कि अगर पानी नहीं निकलता तो केवल फसल ही नहीं जाती, बल्कि कई परिवार आर्थिक रूप से पूरी तरह टूट जाते।

दिलीप सिंह नामक किसान बताते हैं कि पहले तो लगता था कि इस बार खेती नहीं हो पाएगी। लेकिन अब बुवाई हो चुकी है। किसान फिर से उम्मीद के साथ खेतों में काम कर रहा है। ग्रामीणों के अनुसार इस राहत कार्य से गांव के करोड़ों रुपये के संभावित नुकसान को टाला जा सका।

चार साल बाद खेतों में लौटी रौनक, ट्रैक्टरों की आवाज ने तोड़ी सन्नाटे की चादर

एक समय ऐसा था जब खेतों में केवल पानी दिखाई देता था। लेकिन आज उन्हीं खेतों में ट्रैक्टर चल रहे हैं। कहीं रोटावेटर से जमीन तैयार की जा रही है, तो कहीं किसान गेहूं की बुवाई में जुटे हुए हैं।

सरपंच सुनील कुमार कहते हैं—

“करीब चार साल बाद हम अपने खेतों में इतनी सक्रियता देख रहे हैं। किसान फिर से खेती की तैयारी कर रहे हैं। गांव में खुशी का माहौल है।”

उनकी बातों में संतोष साफ झलकता है। वे बताते हैं कि अब लगभग 80 प्रतिशत क्षेत्र में बुवाई हो चुकी है और शेष क्षेत्र में भी काम तेजी से चल रहा है।

गांव वालों की नजर में सेवा का ऐसा उदाहरण जिसने मुश्किल समय में उम्मीद जगा दी

आदमपुर के ग्रामीणों का कहना है कि संकट के समय जो सहायता उन्हें मिली, उसने उनके जीवन में बड़ा बदलाव ला दिया। कई ग्रामीण भावुक होकर बताते हैं कि जब उन्हें लगने लगा था कि अब कोई रास्ता नहीं बचा, तभी यह मदद उनके लिए उम्मीद की किरण बनकर आई।

एक किसान कहते हैं कि उन्हें लगा था कि अब खेती खत्म हो जाएगी। लेकिन आज फिर खेत तैयार हैं। यह उनके लिए किसी नए जीवन से कम नहीं। गांव की चौपालों पर अब निराशा की जगह राहत और भविष्य की योजनाओं पर चर्चा होने लगी है।

संत रामपाल जी महाराज के सेवा कार्यों को लेकर ग्रामीणों में विशेष सम्मान का भाव

आदमपुर के ग्रामीणों ने विशेष रूप से संत रामपाल जी महाराज के प्रति आभार व्यक्त किया। ग्रामीणों का कहना है कि संकट की इस घड़ी में जिस प्रकार त्वरित सहायता उपलब्ध कराई गई, उसने हजारों लोगों के जीवन को प्रभावित किया। गांव के लोगों के अनुसार सेवा केवल शब्दों से नहीं बल्कि समय पर किए गए कार्यों से सिद्ध होती है। उनका मानना है कि जरूरतमंदों तक बिना किसी भेदभाव के सहायता पहुंचाना समाज के लिए प्रेरणादायक उदाहरण है। ग्रामीणों ने बताया कि जलनिकासी के लिए उपलब्ध कराए गए संसाधनों ने केवल खेतों को ही नहीं बचाया, बल्कि किसानों के आत्मविश्वास को भी वापस लौटाया। गांव के बुजुर्गों से लेकर युवाओं तक अनेक लोगों ने इस सहायता को करुणा, सामाजिक जिम्मेदारी और मानवीय सेवा का उदाहरण बताया।

भविष्य के लिए भी तैयार हुआ गांव, अब स्थायी समाधान की उम्मीद

ग्रामीणों का कहना है कि यह राहत केवल तत्काल समस्या का समाधान नहीं है, बल्कि भविष्य के लिए भी एक सुरक्षा कवच साबित हो सकती है। पंचायत की योजना है कि पाइपलाइन व्यवस्था को व्यवस्थित तरीके से सुरक्षित रखा जाए ताकि आने वाले वर्षों में यदि फिर कभी जलभराव की स्थिति बने तो तुरंत कार्रवाई की जा सके। इससे किसानों में भविष्य को लेकर नया भरोसा पैदा हुआ है।

जब हर उम्मीद टूटने लगी थी, तब सेवा ने थाम लिया किसानों का हाथ

आदमपुर की यह कहानी केवल पानी निकालने की कहानी नहीं है। यह उन किसानों की कहानी है जिनकी आंखों में अपनी जमीन को बचाने की चिंता थी। यह उन परिवारों की कहानी है जो आने वाले दिनों को लेकर भयभीत थे। यह उस संघर्ष की कहानी है जिसमें एक गांव धीरे-धीरे हार मानने लगा था।

लेकिन जब हालात सबसे कठिन थे, तब सहायता का एक हाथ आगे बढ़ा। खेतों से पानी निकला, ट्रैक्टर फिर चले, बुवाई शुरू हुई और किसानों के चेहरों पर मुस्कान लौट आई। आज आदमपुर के खेत केवल गेहूं की फसल नहीं उगा रहे, बल्कि उम्मीद, विश्वास और सामूहिक सहयोग की नई कहानी भी लिख रहे हैं। गांव के लोग कहते हैं कि जब समाज की आवाज कमजोर पड़ने लगती है, तब सच्ची सेवा ही सबसे बड़ा सहारा बनती है। और शायद यही कारण है कि आज आदमपुर की मिट्टी में फिर से हरियाली दिखाई दे रही है और किसानों के दिलों में भविष्य के सुनहरे सपने अंकुरित होने लगे हैं।

Latest articles

गांव कापड़ों को संत रामपाल जी महाराज से मिली जल भराव और पेयजल संकट से स्थायी मुक्ति

हासी, हरियाणा – संत रामपाल जी महाराज ने अपने जन कल्याणकारी अभियानों का विस्तार...

संत रामपाल जी महाराज से मिले देश-विदेश के प्रतिनिधि

सत्य भक्ति, समाज सुधार और मानव सेवा के मार्ग पर अग्रसर संत रामपाल जी...

संत रामपाल जी महाराज से मिलने पहुंचे जे.जे.पी. के युवा अध्यक्ष दिग्विजय सिंह चौटाला और की एक महत्वपूर्ण मुलाकात

सतलोक आश्रम श्री धनाना धाम में समय-समय पर विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य व्यक्ति संत...

International Youth Day 2026: Unveiling The Right Way Of Living For The Youth

Last Updated on 10 August 2026 IST | International Youth Day is an annual...
spot_img

More like this

गांव कापड़ों को संत रामपाल जी महाराज से मिली जल भराव और पेयजल संकट से स्थायी मुक्ति

हासी, हरियाणा – संत रामपाल जी महाराज ने अपने जन कल्याणकारी अभियानों का विस्तार...

संत रामपाल जी महाराज से मिले देश-विदेश के प्रतिनिधि

सत्य भक्ति, समाज सुधार और मानव सेवा के मार्ग पर अग्रसर संत रामपाल जी...

संत रामपाल जी महाराज से मिलने पहुंचे जे.जे.पी. के युवा अध्यक्ष दिग्विजय सिंह चौटाला और की एक महत्वपूर्ण मुलाकात

सतलोक आश्रम श्री धनाना धाम में समय-समय पर विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य व्यक्ति संत...