अवतरण दिवस 2020: पूर्ण ब्रह्म परमात्मा कबीर साहेब सतलोक में विधमान रहते हैं। अपनी पुण्यात्माओं के प्रति सजग हैं और किसी की पुकार पर कही भी प्रकट होकर उनके कष्टों को हरते हैं। वे काल ज्योति निरंजन द्वारा जीवों पर किये जाने वाले अत्याचारों से बचाने के लिए कलयुग के 5505 वर्ष बीत जाने के बाद सन 1997 की योजना पहले से निर्धारित किये हुए हैं। आज पाठक गण जानेंगे कि यह योजना कैसे कार्यान्वित की गई और परमात्मा द्वारा नियुक्त “धरती पर अवतार” संत कौन हैं?

अवतरण दिवस 2020: सूक्ष्म वेद के अनुसार तत्वदर्शी संत की पहचान

एक बार परमेश्वर कबीर जी का जोगजीत के रूप में काल ब्रह्म के साथ संवाद हुआ था। वह ‘‘स्वसमवेद बोध‘‘ पृष्ठ 117 से 122 तथा ‘‘अनुराग सागर‘‘ पृष्ठ 60 से 67 में अंकित है। परमेश्वर कबीर जी अपने पुत्र जोगजीत के रूप में काल के प्रथम ब्रह्माण्ड (जगत दृष्टि से इक्कीसवां ब्रह्माण्ड) में प्रकट हुए। काल ब्रह्म ने जोगजीत से पहले झगड़ा किया और फिर विवश होकर चरण पकड़कर क्षमा याचना की तथा उनसे प्रतिज्ञा करवाकर कुछ सुविधाएं माँग लीं।

जैसे तीनों युगों (सत्ययुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग) में थोड़े जीव पार करना। जोर-जबरदस्ती करके जीव मेरे लोक से न ले जाना। कलयुग में पहले मेरे दूत प्रकट होने चाहिए बाद में आपका दूत आना चाहिए। जो जीव आपके ज्ञान को माने वह आपके लोक में जाएगा और जो मेरे ज्ञान को माने वह मेरे पास ही रहेगा।

  • “सूक्ष्म वेद अनुराग सागर की वाणी पृष्ठ 64-65 से

सतयुग, त्रोता, द्वापर मांहीं। तीनों युग जीव थोड़े जाहीं।।
चौथा युग जब कलयुग आवे। तब तुव शरण जीव बहु जावे।।

प्रथम दूत मम प्रकटै जायी। पीछे अंश तुम्हारा आयी।।
ऐसा वचन हरि मोहे दीजे। तब संसार गवन तुम कीजे।।

परमेश्वर ने काल निरंजन की माँगें मान लेना

परमेश्वर ने सर्व माँगें स्वीकार कर ली और वचनबद्ध हो गए। कबीर साहेब ने काल को चेतावनी देते हुए कहा कि जो भी जीव हमारा नाम लेगा उसे तुम जाने दोगे।

  • ‘‘जोगजीत वचन = ज्ञानी बचन‘‘ पृष्ठ 64, 66 से अनुराग सागर की वाणी:-

जस बीनती तू मोसन कीन्ही। सो अब बख्स तोहे दीन्ही।।
चैथा युग जब कलयुग आवै। तब हम अपना अंश पठावैं।।
जो कोई लेई नाम हमारा। ताहि छोड़ तुम हो जाना नियारा।।
जो तुम मोर हंस को रोको भाई। तो तुम काल रहन नहीं पाई।।

काल निरंजन ने जीवों को उलझाने के लिए नाना द्वंद रचने की बात कहना

कबीर साहेब के प्रतिज्ञाबद्ध होते ही काल ने कहा कि मैं जीवों को अपने फंदे में ऐसे फँसा लूंगा कि कोई भी आप के साथ जाने को तैयार नहीं होगा।

  • ‘‘धर्मराय (काल निरंजन) बचन‘‘ पृष्ठ 62 तथा 63 से अनुराग सागर की वाणी:-

दृढ़ फंदा मैं रचा बनाई। जामें सकल जीव उरझाई।।
वेद-शास्त्र सुमरत गुणगाना। पुत्र मेरे तीन प्रधाना।।
देवल देव पाषाण पुजाई। तीर्थ व्रत जप तप मन लाई।।
जग (यज्ञ) होम और नेम आचारा। और अनेक फंद मैं डारा।।

सत्य शब्द देकर जीवों का कल्याण कराऊँगा: कबीर साहेब (परमात्मा)

इस पर कबीर साहेब ने काल को उत्तर दिया कि मेरे द्वारा दिए गए सत्य शब्द से सब जीव तुम्हारे जाल से मुक्त हो जाएंगे।

  • ‘‘ज्ञानी (कबीर) वचन‘‘ पृष्ठ 63 से अनुराग सागर की वाणी

हमने कहा सुनो अन्याई। काटों फंद जीव ले जाई।।
जेते फंद तुम रचे विचारी। सत्य शब्द ते सबै विडारी।।
जौन जीव हम शब्द दृढ़ावैं। फंद तुम्हारा सकल मुक्तावैं।।
जबही जीव चिन्ही ज्ञान हमारा। तजही भ्रम सब तोर पसारा।।
सत्यनाम जीवन समझावैं। हंस उभार लोक लै जावै।।
पुरूष सुमिरन सार बीरा, नाम अविचल जनावहूँ।
शीश तुम्हारे पाँव देके, हंस लोक पठावहूँ।।
ताके निकट काल नहीं आवै। संधि देख ताको सिर नावै।।
(संधि = सत्यनाम+सारनाम)

कलयुग के 5505 वर्ष बीतने पर सत्य शब्द लेने वाले जीव मुक्त होंगे

कबीर साहेब ने बताया कि कलयुग के 5505 वर्ष बीत जाने के बाद मेरा सत्य शब्द लेने वाले सब जीव मुक्त हो जाएंगे।

  • ‘‘ज्ञानी (कबीर) वचन‘‘ चैपाई अध्याय ‘‘स्वसमवेद बोध‘‘ पृष्ठ 121:-

पाँच हजार पाँच सौ पाँचा। तब यह वचन होयगा साचा।।
कलयुग बीत जाए जब येता। सब जीव परम पुरूष पद चेता।।

परमेश्वर कबीर जी के पंथ चलाने से पहले काल निरंजन नकली 12 कबीर पंथ चलाएगा

इसपर काल ज्योति निरंजन ने कहा आप अपने नाम से एक पंथ चलाओगे लेकिन कलयुग में 5505 वर्ष पूरा होंने तक मेरे दूत आपके (कबीर जी) के नाम से 12 कबीर पंथ चला देंगे। सर्व मानव को भ्रमित करके अपने जाल में फाँसकर रखूँगा। मेरे चलाए नकली पंथ सतलोक, सच्चखण्ड की बातें किया करेंगे। आपकी सत्य साधना की जगह गलत नामों को जाप करके ऐसे भक्त मेरे जाल में ही रह जाऐंगे। मैं पूरी पृथ्वी पर शास्त्र विरुद्ध मनमाना आचरण करवाकर गलत साधना का अभ्यस्त कर दूँगा। जब आपका तेरहवां अंश आकर सत्य (यथार्थ) कबीर पंथ चलाएगा, उसकी बात पर कोई विश्वास नहीं करेगा, उल्टे उसके साथ झगड़ा करेंगे।

  • ‘‘धर्मराय (काल) वचन‘‘ ‘‘ज्ञानी (कबीर) वचन‘‘ पृष्ठ 64 तथा 65 से अनुराग सागर की वाणी

पंथ एक तुम आप चलाऊ। जीवन को सतलोक लै जाऊ।।
द्वादश पंथ करूँ मैं साजा। नाम तुम्हारा ले करों आवाजा।।
द्वादश यम संसार पठाऊँ। नाम कबीर ले पंथ चलाऊँ।।

कलयुग के 5505 वर्ष पूरे होने पर सतयुग जैसा वातावरण निर्मित होगा

परमेश्वर कबीर साहेब को पता था कि जब कलयुग के 5505 वर्ष पूरे होंगे (सन् 1997 में) तब शिक्षा की क्रांति लाई जाएगी। सर्व मानव अक्षर ज्ञानयुक्त किया जाएगा। उस समय मेरा दास सर्व धार्मिक ग्रन्थों को ठीक से समझकर मानव समाज के रूबरू करेगा।

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सर्व प्रमाणों को आँखों देखकर शिक्षित मानव सत्य से परिचित होकर तुरंत मेरे तेरहवें पंथ में दीक्षा लेगा और पूरा विश्व मेरे द्वारा बताई भक्ति विधि तथा तत्त्वज्ञान को हृदय से स्वीकार करके भक्ति करेगा। उस समय पुनः सत्ययुग जैसा वातावरण होगा। 13वें पंथ के प्रारम्भ होने के पश्चात् पाप कर्म करने वाले व्यक्तियों को बुरा माना जाएगा और जो भक्ति करेंगे, सामान्य जीवन व्यतीत करेंगे उनको महान और सम्मानित व्यक्ति माना जाएगा।

  • स्वसमवेद बोध पृष्ठ 171 – सत्य कबीर वचन

पाँच हजार अरू पाँच सौ पाँच जब कलयुग बीत जाय।
महापुरूष फरमान तब, जग तारन कूं आय।।
हिन्दु तुर्क आदि सबै, जेते जीव जहान।
सत्य नाम की साख गही, पावैं पद निर्वान।।
यथा सरितगण आप ही, मिलैं सिन्धु मैं धाय।
सत्य सुकृत के मध्य तिमि, सब ही पंथ समाय।।
जब लग पूर्ण होय नहीं, ठीक का तिथि बार।
कपट-चातुरी तबहि लौं, स्वसम बेद निरधार।।
सबही नारी-नर शुद्ध तब, जब ठीक का दिन आवंत।
कपट चातुरी छोड़ि के, शरण कबीर गहंत।।
एक अनेक ह्नै गए, पुनः अनेक हों एक।
हंस चलै सतलोक सब, सत्यनाम की टेक।।
घर घर बोध विचार हो, दुर्मति दूर बहाय।
कलयुग में सब एक होई, बरतें सहज सुभाय।।
कहाँ उग्र कहाँ शुद्र हो, हरै सबकी भव पीर(पीड़)।।
सो समान समदृष्टि है, समर्थ सत्य कबीर।।

परमेश्वर ने बताया था कि काल पंथ गुरु मेरे संत से झगड़ा क्लेश करेंगे

परमात्मा सत्य भक्ति करने वालों के सांसारिक कष्ट दूर करेगा। उस 13वें (तेरहवें) पंथ का प्रवर्तक (अर्थात परमात्मा के द्वारा नियुक्त सतगुरु) सबको समान दृष्टि से देखेगा अर्थात् ऊँच-नीच में भेदभाव नहीं करेगा। वह मुझे जान, मेरा ही स्वरूप, समर्थ सत्य कबीर ही होगा। लेकिन इस संत से सभी नकली संत झगड़ा करेंगे।

जो मम संत सत उपदेश दृढ़ावै, वाके संग सभि राड़ बढ़ावै।
या सब संत महंतन की करणी, धर्मदास मैं तो से वर्णी।।

काल निरंजन ने एक लाख अस्सी हजार पीर, पैगंबर और दस अवतार पृथ्वी पर उतारे

परमेश्वर कबीर साहेब ने बताया कि काल निरंजन ने क्रमबद्ध तरीके से बाबा आदम से लेकर हजरत मुहम्मद तक एक लाख अस्सी हजार पीर, पैगंबर और राम और कृष्ण सहित हिन्दू धर्म के दस अवतार पृथ्वी पर उतार दिए। ये सब काल की महिमा बनाकर सर्व जीवों को भ्रमित करके काल साधना को दृढ़ कर रहें हैं। इस सबका मुखिया ज्योति निरंजन काल (ब्रह्म) है।

  • स्वसमवेद बोध पृष्ठ 170 – अथ स्वसम वेद की स्फुटवार्ता-चैपाई

एक लाख और असि हजारा। पीर पैगंबर और अवतारा।।
सो सब आही निरंजन वंशा। तन धरी-धरी करैं निज पिता प्रशंसा।।
दश अवतार निरंजन के रे। राम कृष्ण सब आहीं बडेरे।।
इनसे बड़ा ज्योति निरंजन सोई। यामें फेर बदल नहीं कोई।।

अवतरण दिवस: बारह वे पंथ में परमेश्वर कबीर स्वयं आए

यहां पर साहेब कबीर जी अपने शिष्य धर्मदास जी को समझाते हैं कि संवत् 1775 में मेरे ज्ञान का प्रचार होगा जो बारहवां पंथ होगा। बारहवें पंथ में हमारी वाणी प्रकट होगी लेकिन सही भक्ति मार्ग नहीं होगा। फिर बारहवें पंथ में हम ही चल कर आएगें और सभी पंथ मिटा कर केवल एक पंथ चलाएंगे। लेकिन धर्मदास तुझे लाख सौगंध है कि यह सारशब्द किसी कुपात्र को मत दे देना नहीं तो बिचली पीढ़ी के हंस पार नहीं हो सकेंगे। इसलिए जब तक बारह पंथ मिटा कर एक पंथ नहीं चलेगा तब तक मैं यह मूल ज्ञान छिपा कर रखूंगा।

Satlok Ashram
  • कबीर सागर ‘‘कबीर बानी‘‘ द्वादश पंथ चलो सो भेद पृष्ठ 136 -137:-

द्वादश पंथ काल फुरमाना। भूले जीव न जाय ठिकाना।।
तातें आगम कह हम राखा। वंश हमारा चुड़ामणि शाखा।।

सम्वत् सत्रासै पचहत्तर होई, ता दिन प्रेम प्रकटें जग सोई।
साखी हमारी ले जीव समझावै, असंख्य जन्म ठौर नहीं पावै।
बारवें पंथ प्रगट ह्नै बानी, शब्द हमारे की निर्णय ठानी।
अस्थिर घर का मरम न पावैं, ये बारा पंथ हम ही को ध्यावैं।
बारवेंपंथ हम ही चलि आवैं, सब पंथ मेटि एक ही पंथ चलावें।

धर्मदास मोरी लाख दोहाई, सारशब्द बाहर नहीं जाई।
सार शब्द बाहर जो परही, बिचली पीढी हंस नहींतरहीं।

तेरहवां पंथ कौन-सा है तथा उसका प्रवर्तक कौन है?

तेरहवां पंथ ‘‘यथार्थ सत कबीर‘‘ पंथ है जिसके प्रवर्तक स्वयं पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब हैं। वर्तमान में तत्वदर्शी संत रामपाल दास जी परमात्मा के आदेश से इसका संचालन करते हैं। प्रमाण के लिए जानेंगे कि 5505 वां वर्ष कलियुग में कब आता है और कबीर साहेब का पृथ्वी पर कैसे आए?

सन 1997 में 5505 वर्ष पूरे होने की गणना

हिन्दू धर्म में आदि शंकराचार्य जी का विशेष स्थान है। पुस्तक ‘‘हिमालय तीर्थ‘‘ में आदि शंकराचार्य जी का जन्म कलयुग के 3000 वर्ष बीत जाने के पश्चात् होना बताया गया है। पुस्तक ‘‘जीवनी आदि शंकराचार्य‘‘ में लिखा है कि आदि शंकराचार्य जी का जन्म 508 वर्ष ईसा जी से पूर्व हुआ था। कलियुग प्रारंभ होने से 1997 तक का समय हुआ 3000+508+1997=5505 वर्ष। संवत् के हिसाब से भारतीय वर्ष फाल्गुन महीने यानि फरवरी मार्च में पूरा हो जाता है। विशेष है, जो संतजन मानते हैं कि श्रीमद्भगवत गीता 5151 वर्ष पूर्व कही गई थी वह उपरोक्त गणना के हिसाब से गलत है।

फरवरी-मार्च 1997 ई. को कलयुग 5505 वर्ष पूरा हो जाता है। यही वर्ष है जिसमें कबीर साहेब स्वयं संत रामपाल जी महाराज को पृथ्वी पर आकर मिले और स्पष्ट निर्देश दिए।

अवतरण दिवस 2020: संत रामपाल दास जी को तत्व भेद की प्राप्ति कैसे हुई ?

संत रामपाल जी का जन्म 8 सितम्बर 1951 को गांव धनाना, तहसील गोहाना व जिला सोनीपत हरियाणा में एक किसान परिवार में हुआ। संत रामपाल जी ने परम संत रामदेवानंद जी से 17 फरवरी सन 1988 फाल्गुन महीने की अमावस्या को रात्रि में नाम दीक्षा प्राप्त की तथा तन-मन से सक्रिय होकर स्वामी रामदेवानंद जी द्वारा बताए भक्ति मार्ग से साधना की तथा परमात्मा का साक्षात्कार किया। उस समय संत रामपाल जी महाराज की आयु 37 वर्ष थी। सन 1993 में स्वामी रामदेवानंद जी महाराज ने संत रामपाल जी को सत्संग करने की आज्ञा दी तथा सन 1994 में नामदान करने की आज्ञा प्रदान की।

गुरुदेव ने सन 1994 को संत रामपाल दास जी को नाम दान करने का आदेश दिया तथा अपने सर्व शिष्यों से कह दिया:

“आज के बाद यह रामपाल ही तुम्हारा गुरु है। आज के बाद मैं तुम्हारा गुरु नहीं हैं। जिसने कल्याण करवाना हो, इस रामपाल से उपदेश प्राप्त करो।“

परमेश्वर ने संत रामपाल दास जी को सार शब्द उपदेश की आज्ञा दी

मार्च 1997 में संवत् 2054 फाल्गुन शुक्ल पक्ष एकम को दिन के दस बजे परमेश्वर कबीर साहेब जी ने अपने वास्तविक रूप में संत रामपाल दास जी को दर्शन दिए। परमेश्वर सार शब्द की वास्तविकता तथा भक्तों को सार शब्द दान करने का सही समय का संकेत देकर अंतर्ध्यान हो गए तथा इसको अगले आदेश तक गुप्त रखने का आदेश दिया। यह वही सत्य नाम सार शब्द है जिसे सतगुरु द्वारा विशेष विधि से जप कराने से साधक के सभी संचित पाप कर्म नष्ट करके सर्व दुख मिटाकर पूर्ण मोक्ष प्राप्त कराते हैं।

साक्षात परमात्मा प्रदत्त शास्त्र अनुकूल यथार्थ भक्ति साधना करें

तत्वदर्शी संत रामपाल दास जी से उपदेश लेने से सर्व सुख लाभ प्राप्त होंगे तथा पूर्ण मोक्ष भी प्राप्त होगा। दुर्लभ मानव जीवन को नादान संतों, महंतों व आचार्यों, महर्षियों तथा पंथों के पीछे लग कर नष्ट नहीं करना चाहिए। साक्षात परमात्मा से प्रदत्त शास्त्र अनुकूल यथार्थ भक्ति साधना पूर्ण संत रामपाल दास जी से नाम उपदेश प्राप्त करके अपना आत्म कल्याण करवाना ही श्रेयकर है। 8 सितंबर अवतरण दिवस के अवसर पर साधना चैनल पर प्रातः 9 बजे से विशेष सत्संग प्रसारण देखें।