आज के दौर में जहां ग्रामीण समाज अपनी छोटी-छोटी समस्याओं के लिए वर्षों तक सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटता रहता है, वहीं कुछ ऐसी निःस्वार्थ पहल भी चल रही हैं जो सीधे धरातल पर उतरकर लोगों के आंसू पोंछ रही हैं। जगन्नाथ महाप्रभु संत रामपाल जी महाराज जी द्वारा चलाए जा रहे जनकल्याणकारी कार्य आज समाज के हर वर्ग किसान, युवा, हरिजन और गौशाला समितियों के लिए एक बहुत बड़ा सहारा बन चुके हैं।
हाल ही में हरियाणा के झज्जर, हिसार और रोहतक (जैसे बुपनिया, खरैंटी, डावला, लाडवा और जमावड़ी) से सरपंच, खेल समितियां, गौशाला प्रधान और किसान संत रामपाल जी महाराज जी से मिलने उनके सतलोक आश्रम श्री धनाना धाम पहुंचे। इन मुलाकातों में जलभराव से निजात, खेलों को बढ़ावा देने, जाति-पाति मिटाने और हज़ारों बेसहारा गायों के संरक्षण जैसे विषयों पर चर्चा हुई और मौके पर ही समाधान भी दिए गए।
एक नज़र प्रमुख मुलाकातें और निस्वार्थ जनसेवा कार्य
| क्रम | आगंतुक / प्रतिनिधि | स्थान (ज़िला) | मुख्य चर्चा / जनसेवा का विषय |
| 1. | ग्रामीण व किसान | जमावड़ी, हांसी (हिसार) | 1995 (31 साल) से रुकी जल निकासी का मात्र 10 दिन में पाइपलाइन और मोटर से समाधान। |
| 2. | गौशाला प्रधान व कमेटी | खरैंटी (रोहतक) | गौशाला के लिए मांगे गए छोटे ट्रैक्टर के बजाय बड़े 4×4 ट्रैक्टर का दान मिलना। |
| 3. | सरपंच प्रतिनिधि व हरिजन समाज | बुपनिया (झज्जर) | जाति-पाति से ऊपर उठकर सम्मान और गांव में मिट्टी भराव की मांग पर स्वीकृति। |
| 4. | गौशाला कमेटी | लाडवा (हिसार) | सूखे के कारण 1200 बेसहारा गायों के लिए चारे की संकटकालीन व्यवस्था की मंजूरी। |
| 5. | कबड्डी/वॉलीबॉल खिलाड़ी | डावला (झज्जर) | युवाओं को नशे से दूर रखने और खेलों को बढ़ावा देने के लिए खेल सामग्री का आश्वासन। |
विस्तृत रिपोर्ट: मुलाकातों के मुख्य अंश
1. 31 साल से डूबे थे खेत, संत की पहल से 10 दिन में खत्म हुआ 16 एकड़ का जलभराव
हिसार जिले के हांसी क्षेत्र के जमावड़ी गांव से दर्जनों किसान भावुक होकर संत रामपाल जी महाराज जी का आभार व्यक्त करने पहुंचे। किसानों ने बताया कि उनके खेतों में साल 1995 (पिछले 31 वर्षों) से पानी भरा हुआ था, जिसके कारण फसलें पूरी तरह बर्बाद हो रही थीं। सरकारी मदद न मिलने पर उन्होंने आश्रम में अरदास लगाई। संत रामपाल जी महाराज के सेवादारों ने मात्र 10 दिनों के भीतर पाइपलाइन और मोटर की व्यवस्था करके 16 एकड़ से पूरा पानी निकाल दिया।
2. खरैंटी गौशाला को मिला 4×4 ट्रैक्टर, प्रधान ने कहा— “मांगा थोड़ा, मिला बहुत”
रोहतक के खरैंटी गांव से आए गौशाला प्रधान और ग्रामीणों ने महाराज जी का धन्यवाद किया। उन्होंने बताया कि गौशाला के कार्यों के लिए उन्होंने आश्रम से एक छोटे ट्रैक्टर की मदद मांगी थी, लेकिन उन्हें उम्मीद से कहीं बड़ा और शानदार 4×4 ट्रैक्टर दान में मिला। ग्रामीणों ने कहा कि गौमाता की इस निःस्वार्थ सेवा ने पूरे गांव का दिल जीत लिया है।
3. बुपनिया के हरिजन भाइयों को मिला सम्मान, खत्म हुआ जाति-पाति का भेद
झज्जर जिले के बुपनिया गांव से सरपंच प्रतिनिधि और 25 हरिजन भाई दर्शन करने पहुंचे। उन्होंने बताया कि समाज में अक्सर जाति-पाति का भेदभाव होता है, लेकिन आश्रम के सेवा कार्यों में इसका कोई स्थान नहीं है। वहां सभी को समान सम्मान मिलता है। महाराज जी ने पहले भी उनके गांव में पाइप और मोटर दिए थे, और अब गांव में मिट्टी भराव की समस्या को भी हल करने का आश्वासन दिया।
4. लाडवा की 1200 गायों के लिए सूखे में चारे का बड़ा प्रबंध
हिसार के लाडवा गौशाला की पूरी कमेटी मदद की आस लेकर पहुंची। उन्होंने बताया कि महाराज जी ने पहले भी बाढ़ के समय उनके मकान बनवाए थे और पानी निकाला था। अब सूखे के कारण गौशाला की 1200 गायों के लिए चारे का भारी संकट पैदा हो गया है। बिना कोई देरी किए, संत रामपाल जी महाराज जी ने चारे की इस बड़ी मांग को तत्काल स्वीकार कर लिया।
5. डावला के युवाओं का खेल के प्रति उत्साह और मिला साथ
झज्जर के डावला गांव से वॉलीबॉल और कबड्डी की खेल टीम आश्रम पहुंची। युवाओं को नशे और सामाजिक बुराइयों से दूर रखने के लिए खेल बहुत जरूरी हैं। खिलाड़ियों ने अपने स्टेडियम और खेल सामग्री की कमियों को सामने रखा। महाराज जी ने युवाओं का उत्साह बढ़ाते हुए उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई करने का भरोसा दिया।
मानवता की भलाई और एक नए युग की शुरुआत
आज जहां एक ओर किसान अपनी बर्बाद फसलों पर आंसू बहा रहा है और युवा सही मार्गदर्शन के अभाव में भटक रहा है, वहीं दूसरी ओर आश्रम द्वारा चलाए जा रहे ये कार्य एक नई उम्मीद बनकर उभरे हैं। 31 साल पुरानी समस्या का समाधान, 1200 गायों का भरण-पोषण और जाति-पाति की बेड़ियों को तोड़कर समाज को एक साथ लाना कोई मामूली बात नहीं है।
यह परमेश्वर के संविधान का वह व्यावहारिक रूप है, जो समाज को यह सिखाता है कि जब अध्यात्म और निःस्वार्थ समाज सेवा आपस में मिलते हैं, तो न केवल गरीबों और मज़लूमों का दुख दूर होता है, बल्कि एक मज़बूत, नशामुक्त और खुशहाल समाज का निर्माण भी होता है।



