हरियाणा के जींद जिले के अहिरका गांव में वर्षों पुरानी जलभराव की समस्या के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। किसान मज़दूर बचाओ अभियान – फेज़ II के तहत तकनीकी सर्वे के बाद तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज ने 8,200 फीट लंबी, 8 इंच व्यास की पाइपलाइन तथा उससे संबंधित आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराने में सहायता प्रदान की। इस पहल का उद्देश्य गांव में जल निकासी व्यवस्था को बेहतर बनाना और जोहड़ों के अतिरिक्त पानी का उपयोग आसपास के कृषि क्षेत्रों की सिंचाई के लिए सुनिश्चित करना है।
अहिरका ग्राम पंचायत ने वर्षों से चली आ रही जलभराव की समस्या के स्थायी समाधान की मांग को लेकर तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज के समक्ष प्रार्थना रखी थी। प्रार्थना प्राप्त होने पर उन्होंने गांव का तकनीकी सर्वे कराने के निर्देश दिए। सर्वे रिपोर्ट के आधार पर जलभराव और सिंचाई, दोनों समस्याओं के समाधान के लिए आवश्यक आधारभूत ढांचे को स्वीकृति प्रदान की गई।
अहिरका जल राहत फेज़ II : प्रमुख बिंदु
- जींद जिले का अहिरका गांव कई दशकों से जलभराव की समस्या से जूझ रहा था।
- बरसात के दौरान गांव के दो जोहड़ों का पानी ओवरफ्लो होकर गलियों और रिहायशी क्षेत्रों में भर जाता था।
- ग्राम पंचायत ने तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज से सहायता की प्रार्थना की।
- ड्रोन सर्वे, गूगल मैप और भौतिक निरीक्षण के माध्यम से तकनीकी सर्वे किया गया।
- सर्वे में 8 इंच व्यास की 8,200 फीट पाइपलाइन, एक 20 एचपी तथा एक 10 एचपी मोटर की आवश्यकता बताई गई।
- पाइपलाइन के साथ बैंड, क्लिप, नट-बोल्ट, एयर वाल्व, एसआर तथा अन्य आवश्यक सामग्री भी स्वीकृत की गई।
- परियोजना का उद्देश्य जोहड़ों के अतिरिक्त पानी को कृषि क्षेत्रों तक पहुंचाकर गांव में जलभराव कम करना है।
- इसके माध्यम से लगभग 200 से 250 एकड़ कृषि भूमि को अतिरिक्त सिंचाई सुविधा मिलने की संभावना है।
सर्वे की प्रमुख जानकारी
| घटक | स्वीकृत व्यवस्था |
| गांव | अहिरका, जिला जींद, हरियाणा |
| कुल पाइपलाइन | 8,200 फीट |
| पाइपलाइन का व्यास | 8 इंच |
| पहले जोहड़ की पाइपलाइन | लगभग 5,250 फीट (1,600 मीटर) |
| दूसरे जोहड़ की पाइपलाइन | लगभग 2,950 फीट (900 मीटर) |
| मोटर | एक 20 एचपी एवं एक 10 एचपी |
| सर्वे का माध्यम | ड्रोन सर्वे, गूगल मैप एवं भौतिक निरीक्षण |
| संभावित सिंचाई क्षेत्र | लगभग 200–250 एकड़ |
दशकों पुरानी जलभराव की समस्या से प्रभावित थे ग्रामीण

अहिरका गांव के ग्रामीण वर्षों से दो बड़े जोहड़ों के कारण जलभराव की समस्या का सामना कर रहे थे। बरसात के मौसम में दोनों जोहड़ भरने के बाद उनका पानी ओवरफ्लो होकर गांव की गलियों और रिहायशी क्षेत्रों में फैल जाता था।
ग्रामीणों के अनुसार, भारी वर्षा होने पर स्थिति गंभीर हो जाती थी। आधे से अधिक गांव के घर प्रभावित होते थे, जबकि कुछ ग्रामीणों का कहना था कि ऊंचाई पर बने कुछ मकानों को छोड़कर लगभग पूरा गांव जलभराव की चपेट में आ जाता था।
गलियों और नालियों में लंबे समय तक गंदा पानी जमा रहने से स्वच्छता और सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं बढ़ जाती थीं। ग्रामीणों ने बताया कि जलभराव के कारण सांप, बिच्छू और मच्छरों का खतरा बढ़ जाता था तथा बीमारियां फैलने की आशंका बनी रहती थी। कई परिवारों को बार-बार आने वाले जलभराव के कारण अपने घर छोड़ने की स्थिति तक का सामना करना पड़ा।
एक ओर अतिरिक्त पानी, दूसरी ओर सिंचाई की कमी
तकनीकी सर्वे के दौरान यह भी सामने आया कि जहां गांव के जोहड़ों में बरसात के समय अतिरिक्त पानी जमा हो जाता था, वहीं आसपास के कुछ कृषि क्षेत्रों में सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं था।
ग्राम पंचायत के प्रतिनिधियों ने बताया कि जोहड़ों में जमा पानी कृषि कार्य के लिए उपयोगी है। इसलिए अतिरिक्त पानी को गांव में फैलने देने के बजाय उन खेतों तक पहुंचाने का प्रस्ताव रखा गया, जहां सिंचाई की सुविधा उपलब्ध नहीं थी।
ग्राम पंचायत के अनुसार, इस परियोजना के माध्यम से बड़ौदी और करखड़ी क्षेत्र की ओर स्थित लगभग 200 से 250 एकड़ कृषि भूमि तक सिंचाई का पानी पहुंचाने में मदद मिलेगी।
तकनीकी सर्वे में तय हुई आवश्यक आधारभूत संरचना
ग्राम पंचायत की प्रार्थना प्राप्त होने के बाद तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज ने गांव का तकनीकी सर्वे कराने के निर्देश दिए।
सर्वे टीम ने विस्तृत अध्ययन के लिए निम्न माध्यमों का उपयोग किया—
- ड्रोन सर्वे
- गूगल मैप
- भौतिक निरीक्षण
सर्वे के अनुसार पहले जोहड़ से कृषि भूमि तक पानी पहुंचाने के लिए लगभग 5,250 फीट (1,600 मीटर) लंबी 8 इंच व्यास की भूमिगत पाइपलाइन की आवश्यकता पाई गई। वहीं दूसरे जोहड़ से बड़ौदी क्षेत्र के खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए लगभग 2,950 फीट (900 मीटर) लंबी अतिरिक्त पाइपलाइन प्रस्तावित की गई।
सर्वे रिपोर्ट के आधार पर निम्न व्यवस्था की अनुशंसा की गई—
- 8 इंच व्यास की 8,200 फीट पाइपलाइन
- एक 20 एचपी मोटर
- एक 10 एचपी मोटर
- पाइपलाइन स्थापना के लिए आवश्यक सभी सहायक सामग्री
इसके बाद सर्वे रिपोर्ट तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज के समक्ष प्रस्तुत की गई, जिसके आधार पर किसान मज़दूर बचाओ अभियान – फेज़ II के तहत आवश्यक सहायता को स्वीकृति प्रदान की गई।
सर्वे रिपोर्ट के बाद तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज ने दी सहायता की स्वीकृति
सर्वे रिपोर्ट प्रस्तुत किए जाने के बाद तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज ने किसान मज़दूर बचाओ अभियान – फेज़ II के तहत परियोजना के लिए आवश्यक आधारभूत संरचना उपलब्ध कराने की स्वीकृति प्रदान की।
स्वीकृत सहायता में शामिल हैं—
- 8 इंच व्यास की 8,200 फीट पाइपलाइन
- एक 20 एचपी मोटर
- एक 10 एचपी मोटर
- पाइपलाइन स्थापना के लिए आवश्यक बैंड, क्लिप, नट-बोल्ट, एयर वाल्व, एसआर तथा अन्य सहायक सामग्री
सर्वे टीम के अनुसार, ग्राम पंचायत द्वारा पाइपलाइन को भूमिगत बिछाने का कार्य पूरा होने के बाद मोटरें उपलब्ध कराई जाएंगी। पाइपलाइन बिछने के उपरांत सर्वे टीम दोबारा निरीक्षण करेगी और अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। सत्यापन के बाद ही मोटरों का हस्तांतरण किया जाएगा।
गांव पहुंची राहत सामग्री, ग्रामीणों ने किया स्वागत
स्वीकृत सामग्री अहिरका गांव पहुंचने पर ग्रामीणों, ग्राम पंचायत के सदस्यों और स्थानीय प्रतिनिधियों ने उसका स्वागत किया। पाइपलाइन सामग्री लेकर पहुंचे काफिले के स्वागत के लिए गांव के प्रवेश द्वार पर ट्रैक्टरों के साथ ग्रामीण एकत्रित हुए।
कार्यक्रम के दौरान ग्राम पंचायत के सदस्यों ने 8,200 फीट पाइपलाइन और उससे संबंधित आवश्यक सामग्री प्राप्त होने की पुष्टि की। सरपंच ने बताया कि पाइपलाइन को भूमिगत बिछाने का कार्य लगभग एक सप्ताह से दस दिनों के भीतर पूरा करने का प्रयास किया जाएगा। इसके बाद मोटरों की स्थापना संबंधी आगे की प्रक्रिया के लिए सर्वे टीम को सूचित किया जाएगा।
ग्रामीणों ने वर्षों से चली आ रही जलभराव की समस्या बताई
सर्वे टीम और कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों ने बताया कि दो जोहड़ों के ओवरफ्लो होने से गांव में वर्षों से जलभराव की गंभीर समस्या बनी हुई थी।
ग्रामीणों के अनुसार, बरसात के दौरान पानी गलियों और रिहायशी क्षेत्रों में भर जाता था, जिससे लंबे समय तक जलभराव बना रहता था। इससे सांप, बिच्छू और मच्छरों का खतरा बढ़ जाता था तथा लोगों के आवागमन में भी कठिनाई होती थी।
कुछ ग्रामीणों ने बताया कि बार-बार आने वाले जलभराव के कारण कई परिवारों को अपने घर छोड़ने तक की नौबत आ गई थी। उनका कहना था कि वर्षों तक विभिन्न स्तरों पर समाधान के प्रयास किए गए, लेकिन स्थायी समाधान नहीं मिल सका।
ग्राम पंचायत के प्रतिनिधियों का कहना है कि यह परियोजना न केवल गांव में जलभराव की समस्या को कम करेगी, बल्कि जोहड़ों के अतिरिक्त पानी का कृषि कार्य में बेहतर उपयोग भी सुनिश्चित करेगी।
जलभराव और सिंचाई, दोनों समस्याओं के समाधान की दिशा में पहल
तकनीकी सर्वे में यह स्पष्ट हुआ कि बरसात के दौरान जोहड़ों से ओवरफ्लो होने वाले पानी को आसपास के कृषि क्षेत्रों तक पहुंचाया जा सकता है।
ग्राम पंचायत के अनुसार, इस परियोजना के दो प्रमुख उद्देश्य हैं—
- बरसात के मौसम में गांव में होने वाले जलभराव को कम करना।
- लगभग 200 से 250 एकड़ कृषि भूमि को अतिरिक्त सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराना।
अतिरिक्त पानी को कृषि क्षेत्रों तक पहुंचाकर एक ओर गांव को जलभराव से राहत मिलेगी, वहीं दूसरी ओर किसानों को सिंचाई के लिए उपयोगी जल उपलब्ध हो सकेगा।
ग्राम पंचायत को सौंपी गई परियोजना की सामग्री
हैंडओवर कार्यक्रम के दौरान ग्राम पंचायत को स्वीकृत सामग्री उपलब्ध कराई गई। इसमें शामिल हैं—
| सामग्री | स्थिति |
| 8 इंच व्यास की 8,200 फीट पाइपलाइन | हस्तांतरित |
| एक 20 एचपी मोटर | सत्यापन के बाद उपलब्ध कराई जाएगी |
| एक 10 एचपी मोटर | सत्यापन के बाद उपलब्ध कराई जाएगी |
| बैंड, क्लिप, नट-बोल्ट, एयर वाल्व, एसआर तथा अन्य सहायक सामग्री | हस्तांतरित |
सर्वे टीम ने दोहराया कि पाइपलाइन के भूमिगत बिछने की पुष्टि होने के बाद ही मोटरों का हस्तांतरण किया जाएगा।
अहिरका गांव दीर्घकालिक जल प्रबंधन की दिशा में आगे बढ़ा
अहिरका गांव में शुरू हुई संत रामपाल जी महाराज की यह पहल वर्षों पुरानी जलभराव की समस्या के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। इस व्यवस्था के तहत जोहड़ों के अतिरिक्त पानी को गांव की गलियों में फैलने से रोकते हुए कृषि क्षेत्रों तक पहुंचाने की योजना बनाई गई है। ग्रामीणों का मानना है कि इससे गांव को जलभराव से राहत मिलेगी और किसानों को सिंचाई के लिए अतिरिक्त जल उपलब्ध होगा, जिससे दोनों वर्गों को दीर्घकालिक लाभ मिलने की उम्मीद है।
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