वृद्धाश्रम में भी गूंजा संत रामपाल जी महाराज जी का आध्यात्मिक तत्वज्ञान

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वृद्धाश्रम सत्संग: मध्यप्रदेश के जिला विदिशा के श्री हरि वृद्धाश्रम में संत रामपाल जी महाराज जी का आध्यात्मिक सत्संग सम्पन्न हुआ जिसमें आश्रम के सभी बुज़ुर्गों ने बड़ी ही श्रद्धा से सत्संग को सुना तथा प्रभावित होकर संत रामपाल जी महाराज जी का तहे दिल से शुक्रिया अदा किया। संत रामपाल महाराज जी के अनुयायी बहुत ही बढ़ चढ़कर समाज सेवा में आगे रहते हैं। वे बताते है कि उनके गुरुजी ने उन्हें यही शिक्षा दी है।

आखिरकार एक मनुष्य को दूसरे मनुष्य के काम आना चाहिए। सुख तथा दुख में एक दूसरे का सहभागी बनना चाहिए। संत रामपाल जी महाराज के अनुयायी समय समय पर रक्तदान शिविर, देहदान शिविर, दहेजमुक्त शादियां, वृक्षारोपण अभियान, विशाल भंडारे आदि आदि समाज सुधार के कार्य आयोजित करते रहते है। इस लेख के माध्यम से संत रामपाल जी महाराज के मिशन विश्व कल्याण के बारे में जानें।

वृद्धाश्रम में सत्संग कर पेश की अनोखी मिसाल

मध्यप्रदेश के विदिशा जिले में स्थित श्री हरी वृद्धाश्रम में संत रामपाल जी महाराज के अनुयायियों एक दिवसीय सत्संग कार्यक्रम आयोजित करवाकर एक अनोखी मिसाल को पेश किया गया है। अक्सर वृद्धाश्रम में खेल कूद, हास्य कार्यक्रम, नाटक, फिल्म प्रदर्शन आदि कार्यक्रम आयोजित किए जाते है। जिससे आश्रम में रहने वाले वृद्ध का मनोरंजन तो होता है लेकिन वे अपने जीवन के मूल उद्देश्य से अपरिचित रह जाते है। ऐसे में शास्त्र प्रमाणित सत्संग कार्यक्रम आयोजित करवाकर संत रामपाल जी महाराज के शिष्यों ने एक अनोखा कार्य कर दिखाया है। 

सत्संग में बताया जाता है कि बिगड़े मानव समाज में आज जहां मानवता तथा नैतिकता का ह्रास अपनी चरम सीमा पर है। ऐसे में आध्यात्मिक तत्वज्ञान लोगों के लिए सच्चे मूल्यों तथा संस्कार का स्त्रोत सिद्ध हो रहे है। जगह जगह सत्संग कार्यक्रम के आयोजन से लोगों को मानवता के साथ साथ आध्यात्मिकता का भी पाठ पढ़ाया जा रहा है। कहते हैं कि बुरे कर्म करने का फल भी बुरा ही होता है, लेकिन अगर उन बुरे कर्मों को करने से पहले ही परमात्मा के ज्ञान का बोध हो जाये तो गलतियां करना असंभव हैं। यह बातें वृद्धाश्रम में रहने वाले वृद्धों को प्रोजेक्टर द्वारा चलाये गए सत्संग में संत रामपाल जी महाराज जी के मुखारबिंद से बताई गई। जिसको सुनने के बाद वृद्धों के मुख से एक ही बात निकली, कि हे भगवान! ऐसा अनमोल ज्ञान अब तक क्यों नही मिला?

सत्संग सुनकर लोगों ने बुराई छोड़ने का संकल्प लिया

सत्संग के पश्चात सैकड़ों लोगों ने संत रामपाल जी महाराज जी की प्रेरणा से आजीवन बुराइयां जैसे कि जुआ, चोरी, जारी, रिश्वतखोरी, मांस, शराब, मारपीट आदि अन्य बुराइयों से मुक्त जीवन जीने का संकल्प लिया। आपको बता दें कि समाज में व्याप्त इन सभी बुराइयों को जड़-मूल से समाप्त करने के लिए संत रामपाल जी महाराज जी दिन रात प्रयत्नशील हैं। वहीं दूसरी तरफ देखा जाए तो पूरे विश्व में संत रामपाल जी महाराज जी के अतिरिक्त ऐसा कोई भी अन्य संत पृथ्वी पर आज की तिथि में मौजूद नहीं है जो मानव समाज को आध्यात्मिक ज्ञान के आधार पर भक्ति युक्त करके मोक्ष प्राप्ति योग्य बना रहा हो। 

सत्संग समारोह में वृद्धाश्रम के लोगों ने जाना कि संत रामपाल जी महाराज देवी देवताओं की भक्ति छुड़वाते नहीं बल्कि उनकी शास्त्र अनुकूल सत्य भक्ति साधना बताते है। सभी धर्मो के सद्ग्रंथो को खोलकर सभी देवी देवताओं की प्रमाणित भक्ति प्रदान करते है। सत्संग के बाद संत रामपाल जी महाराज द्वारा लिखित “ज्ञान गंगा“, “गीता तेरा ज्ञान अमृत“, और “जीने की राह” जैसी अनमोल पुस्तकों को भी बांटा गया।

क्या है संत रामपाल जी का मिशन विश्व कल्याण?

वर्तमान समय में मानव समाज इस हद तक बिगड़ चुका है जिसको देखकर यह प्रतीत होता है कि कलयुग आज अपनी चरम सीमा पर है। इस घोर कलयुग में आज समाज माया की आंधी दौड़ में लगा हुआ है। यहां पर हर किसी की फितरत रातों रात करोड़पति बनने की बनी हुई है। एक का दो करने की इस स्पर्धा में लोग चोरी, तस्करी, जारी, ठगी, रिश्वत, मिलावट, मारपीट, आदि बुराइयों का सहारा ले रहे हैं। अपनी मानसिक टेंशन दूर करने के लिए बीड़ी, तंबाखू, सिगरेट, शराब, अफीम, गांजा, भांग आदि के नशे में धुत है। 

इसी के साथ कन्या भ्रूण हत्या, दहेज कुप्रथा, लिंग भेदभाव, बलात्कार, आदि बुराइयां समाज में घर कर चुकी है। ऐसे में जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जी का उद्देश्य है कि इन सभी बुराइयों को जड़मूल से समाप्त करके एक नेक मानव समाज का निर्माण करें। एक ऐसा समाज जिसमें किसी भी प्रकार की बुराईयां न हो। संत रामपाल जी महाराज का उद्देश्य धरती को स्वर्ग समान बनाना है तथा कलयुग में सतयुग जैसा माहौल बनाना है। जिसके लिए वे दिन रात प्रयत्नशील है। 

संत रामपाल जी महाराज द्वारा सामाजिक बुराइयों का किया जा रहा है सफाया

समाज में फैली कुरीतियों, बुराइयों ,पाखंडवाद और अंधविश्वास को जड़ से खत्म करने के लिए संत रामपाल जी महाराज जी द्वारा जगह–जगह एक दिवसीय सत्संग समारोह आयोजित करवाए जा रहे हैं। समाज में व्याप्त भ्रष्टाचार, नशे के जाल, जातिवाद, दहेज प्रथा, मिलावट, चोरी–डकैती, नग्नता, परनारी गमन जैसी अनेकानेक बुराइयों को आध्यात्मिक ज्ञान से दूर करने का संत रामपाल जी महाराज जी का यह प्रयत्न सफल हो रहा है। जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जी के विश्व कल्याण के लिए चलाए जा रहे मिशन के तहत आयोजित सत्संग को प्रोजेक्टर पर दिखाया गया।

जिसमें संत रामपाल जी महाराज जी ने सर्व मानव समाज के लिए अहम संदेश दिए तथा कहा कि विश्व के सभी मनुष्यों को एक पूर्ण परमात्मा की भक्ति करनी चाहिए। सत्संग सभी धर्मों के वेद, शास्त्रों जैसे पवित्र गीता, कुरान, बाइबल, गुरुग्रंथ साहेब के आधार पर किया गया। 

संत रामपाल जी महाराज जी का उद्देश्य समाज में फैली जाति-पाति, ऊंच-नीच और धार्मिक भेदभाव को सदा के लिए मिटाना है तथा आध्यात्मिक जागृति लाना, समाज में फैले हर प्रकार के नशे से लोगों को निजात दिलाना, समाज से दहेज रुपी कुरीति को खत्म कर समाज में शांति व भाईचारा स्थापित करना, सामाजिक बुराईयों को समाप्त करके स्वच्छ समाज तैयार करना व भ्रष्टाचार को खत्म करना है। संत रामपाल जी महाराज जी द्वारा बताए जा रहे आध्यात्मिक ज्ञान से समाज के एक बहुत बड़े हिस्से में बदवाल साफ दिखाई दे रहा है। निसंदेह संत रामपाल जी महाराज जी के इन प्रयत्नों से एक दिन पूरे विश्व में शांति स्थापित होगी और पूरा मानव समाज सतभक्ति करेगा।

संत रामपाल जी बता रहे है मनुष्य जीवन का मूल उद्देश्य

सत्संग सुनने से ये ज्ञान होता है कि मानव जीवन का मूल कर्तव्य पूर्ण परमात्मा की भक्ति करना है। सत्संग सुनने से जनसाधारण अपने मूल कर्तव्य की तरफ अग्रसर होते हुए सभी विकारों को दूर करते हुए सत भक्ति करना प्रारंभ करते है। जिससे उन्हें अनेको लाभ मिलने शुरु हो जाते है। वर्तमान समय में पूरे विश्व में केवल संत रामपाल जी महाराज जी ही शास्त्र प्रमाणित सत्संग प्रवचन कर रहे है। जिनका प्रसारण हर रविवार को गांवों तथा नगरों में दिखाया जा रहा है। जन्म से ही प्रारंभ हो जाने वाली प्राणी के जीवन की यात्रा जहां उसकी मंजिल भी निर्धारित है कि उसे मोक्ष मार्ग को खोजकर उसी अनुसार जीवन की यात्रा तय करनी है। ऐसी स्थिति में सत्संग ही वो माध्यम है जहां यह पता चलता है कि हम मनुष्य जन्म पाकर क्या कर रहे हैं और हमें क्या करने के लिए यह मनुष्य जन्म दिया गया है। 

इस अनमोल मनुष्य जीवन को सफल करने का मार्ग भी सत्संग से ही प्रशस्त होता है। सत्संग से प्राणी को अच्छे संस्कार तथा जीवन जीने की सही राह मिलती है। साथ ही विकारों तथा बुराइयों से छुटकारा पाने का भी रास्ता मिलता है। बीते रविवार जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जी के सानिध्य में ऐसे ही शास्त्र प्रमाणित सत्संग प्रवचनों का प्रसारण दिखाया गया जिसमें लोगों को शास्त्र प्रमाणित आध्यात्मिक ज्ञान बताया गया।

वैज्ञानिकों के पास भी नहीं है संत रामपाल जी महाराज जैसा अद्वितीय तत्वज्ञान

अधूरा वैज्ञानिक ज्ञान और सभी अधूरे व नकली धर्म गुरुओं का अपना अलग ही विज्ञान और लोकवेद आधारित ज्ञान है जिसके कारण भक्त समाज पूर्ण परमात्मा तथा सर्व सृष्टि के रचनहार से आज तक अनभिज्ञ हैं। विज्ञान का मानना है कि यह पृथ्वी, सूर्य इत्यादि सभी ग्रह, उपग्रह गैसों की उथल पुथल से अस्तित्व में आए हैं। तो वहीं हिंदू धर्म के लोग ब्रह्मा, विष्णु, महेश और माता दुर्गा को सृष्टि का रचनहार मानते हैं। उसी तरह मुस्लिम और ईसाई धर्म के लोग अपने अपने धर्म के देवताओं को सर्वोच्च मानते हैं। लेकिन तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज सभी धर्मग्रंथों के आधार पर भक्त समाज को सृष्टि के रचनहार तथा उत्पत्तिकर्ता के विषय में धर्म ग्रंथों के आधार पर प्रमाण सहित सतज्ञान प्रदान कर रहें है। 

सृष्टि रचना का प्रमाण चारों प्रमुख धर्म के पवित्र ग्रंथों में लिखित है जिनमें हिन्दू, मुस्लिम, सिख और ईसाई धर्म के पवित्र ग्रन्थ शामिल हैं जो यह साबित करते हैं कि कबीर साहेब जी जिन्हें लोग कबीर जुलाहा के नाम से जानते है वही सारी सृष्टि के रचनहार तथा पूर्ण परमात्मा हैं। संत रामपाल जी महाराज जी के सानिध्य में जगह जगह सत्संग प्रवचनों के माध्यम से सर्व श्रृष्टि के रचयिता कबीर साहेब जी के बारे में वास्तविक जानकारी दी जा रही है। जिसको आप गूगल प्लेस्टोर से “संत रामपाल जी महाराज” एंड्रॉयड एप्लीकेशन को डाउनलोड करके प्राप्त कर सकते है।

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