​ग्राम तूहिया, जिला भरतपुर (राजस्थान) की डूबी फसलों के लिए मसीहा बनकर आए संत रामपाल जी महाराज

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राजस्थान के भरतपुर जिले में स्थित ग्राम तूहिया पिछले तीन वर्षों से एक भयंकर प्राकृतिक आपदा का सामना कर रहा था। इस गांव की लगभग 500 से 600 बीघा उपजाऊ कृषि भूमि एक सफेद समंदर में तब्दील हो चुकी थी। यह दर्द केवल डूबती हुई फसलों और किसानों के आर्थिक नुकसान तक ही सीमित नहीं था, बल्कि बाढ़ का पानी गांव की बेटियों के स्कूल और उनके हॉस्टल तक पहुंच चुका था।

जलभराव के कारण डिस्पेंसरी बंद हो गई थी और बच्चों का स्कूल जाना भी दूभर हो गया था। ग्राम पंचायत के सरपंच और अन्य स्थानीय ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि उन्होंने अपनी इस दयनीय स्थिति के निवारण हेतु क्षेत्रीय सांसद, विधायक और प्रशासनिक अधिकारियों के हर संभव दरवाजे पर माथा टेका। किंतु, सरकारी तंत्र ने इस विशाल जलभराव की समस्या को असंभव मानकर अपने हाथ खड़े कर दिए।

किसान अपनी ही जमीन पर बेबस खड़े थे और उनकी सभी उम्मीदें दम तोड़ रही थीं। पशुओं के लिए चारे का संकट उत्पन्न हो गया था और पूरा गांव एक गहरे आर्थिक व सामाजिक संकट में घिर गया था।

मुख्य समाचार बिंदु:

  • ​राजस्थान के भरतपुर जिले के ग्राम तूहिया में पिछले तीन वर्षों से 500 से 600 बीघा कृषि भूमि जलमग्न थी।
  • ​बाढ़ का पानी गांव की बेटियों के स्कूल और हॉस्टल तक पहुंच गया था, जिससे शिक्षा व्यवस्था चरमरा गई थी।
  • ​सांसद, विधायक और प्रशासन के हर दरवाजे पर गुहार लगाने के बाद भी ग्रामवासियों को कोई सरकारी सहायता प्राप्त नहीं हुई।
  • ​संत रामपाल जी महाराज ने ग्राम पंचायत की अर्जी पर मात्र सात से आठ दिनों के भीतर राहत सामग्री पहुंचाई।
  • ​गांव को बाढ़ से निकालने के लिए 5160 फुट लंबी पाइप लाइन, दो विशाल मोटरें और अन्य उपकरण पूरी तरह से निशुल्क प्रदान किए गए।
  • ​उपकरणों को चलाने के लिए जनरेटर का किराया और डीजल का खर्च भी संत रामपाल जी महाराज द्वारा वहन किया जा रहा है।
  • ​ग्रामवासियों से इस संपूर्ण राहत कार्य और परिवहन के लिए एक भी रुपया नहीं लिया गया है।
  • ​संत रामपाल जी महाराज ने यह सामग्री गांव को स्थायी रूप से भेंट की है ताकि भविष्य में भी जलभराव की समस्या का समाधान हो सके।

ग्रामवासियों द्वारा संत रामपाल जी महाराज के समक्ष सहायता हेतु गुहार

जब शासन और प्रशासन से हर प्रकार की सहायता की उम्मीद खत्म हो गई, तब ग्राम तूहिया की पंचायत ने एक आखिरी उम्मीद के साथ संत रामपाल जी महाराज के दरबार में अर्जी लगाई। गांव के सरपंच ने ग्रामवासियों की ओर से एक विस्तृत प्रार्थना पत्र संत रामपाल जी महाराज को भेजा, जिसमें 500 से 600 बीघा जमीन और बेटियों के स्कूल में भरे पानी का विस्तार से वर्णन किया गया था।

इस अर्जी में निवेदन किया गया था कि यदि समय रहते खेतों से पानी नहीं निकाला गया, तो आगामी फसल की बिजाई भी संभव नहीं हो सकेगी और गांव में भुखमरी की स्थिति पैदा हो जाएगी। संत रामपाल जी महाराज ने इस अर्जी पर त्वरित संज्ञान लिया। जहां सरकारी फाइलों को सरकने में महीनों लग जाते हैं, वहीं संत रामपाल जी महाराज की तरफ से मात्र सात से आठ दिनों के भीतर गांव का सर्वे करवाया गया और राहत सामग्री की विशाल खेप ग्राम तूहिया की ओर रवाना कर दी गई।

संत रामपाल जी महाराज द्वारा भेजी गई विशाल राहत सामग्री

ग्राम तूहिया को इस भयानक जल प्रलय से बाहर निकालने के लिए संत रामपाल जी महाराज ने एक बहुत बड़े स्तर पर राहत सामग्री भेजी। गांव में जैसे ही ट्रकों का विशाल काफिला पहुंचा, ग्रामवासियों ने फूल मालाओं से इस सहायता का ऐतिहासिक स्वागत किया। ट्रकों में जल निकासी के लिए अत्यंत उच्च गुणवत्ता के भारी उपकरण मौजूद थे। संत रामपाल जी महाराज ने इस बात का विशेष ध्यान रखा कि ग्राम पंचायत को कोई भी तकनीकी या आर्थिक समस्या का सामना न करना पड़े।

राजस्थान के भरतपुर स्थित ग्राम तूहिया के रक्षक बने संत रामपाल जी

उपकरणों को स्थापित करने के लिए आवश्यक हर छोटे-बड़े नट-बोल्ट को भी साथ भेजा गया था। गांव की बिजली व्यवस्था की खराब स्थिति को देखते हुए, जनरेटर का किराया और उसमें लगने वाले डीजल का पूरा खर्च भी संत रामपाल जी महाराज द्वारा स्वयं वहन करने का आदेश दिया गया। माल ढुलाई के ट्रकों का भाड़ा भी ग्रामवासियों से नहीं लिया गया।

राहत सामग्री का विस्तृत विवरण

राजस्थान के भरतपुर स्थित ग्राम तूहिया के रक्षक बने संत रामपाल जी

संत रामपाल जी महाराज द्वारा ग्राम तूहिया की पंचायत को निशुल्क सौंपी गई राहत सामग्री का विवरण निम्नलिखित है:

क्रमांकउपकरण/सामग्री का नाममात्रा/विवरण
1कुल पाइप की लंबाई5160 फुट
26 इंची पाइप3800 फुट
38 इंची पाइप1360 फुट
4पानी की मोटरदो (7.5 एचपी प्रत्येक)
5ट्रैक्टर कपलिंग सेट एवं पंखाएक सेट
6मोटर के साथ तार (Wire)20-20 फीट (प्रत्येक के साथ)
7मोटर के साथ फ्लेक्सिबल पाइप20-20 फीट (प्रत्येक के साथ)
8पंखे के साथ फ्लेक्सिबल पाइप50 फीट
9स्टार्टर एवं असेंबलिंग सामग्रीप्लास्टिक निप्पल, फुटबॉल, स्टील नट, जैन, एयर वॉल, एयर वॉल निप्पल आदि संपूर्ण सेट

शर्तों के साथ भविष्य की सुरक्षा का आश्वासन

सामग्री सौंपते समय संत रामपाल जी महाराज की ओर से एक विशेष निवेदन पत्र भी ग्राम पंचायत को पढ़कर सुनाया गया। इस पत्र में स्पष्ट आदेश था कि इस राहत सामग्री का उपयोग तुरंत किया जाए ताकि निर्धारित समय पर पानी निकालकर फसल की बिजाई की जा सके। यदि इस बार फसल की बिजाई नहीं हुई और पानी नहीं निकाला गया, तो भविष्य में कोई अन्य मदद नहीं दी जाएगी।

साथ ही यह भी सुनिश्चित किया गया कि यह पूरी राहत सामग्री गांव को हमेशा के लिए दी जा रही है। भविष्य में जब भी अधिक वर्षा हो, ग्रामवासी इन मोटरों का उपयोग करके स्वयं पानी निकाल सकेंगे। पारदर्शिता बनाए रखने के लिए यह नियम भी बताया गया कि गांव के जलभराव की ड्रोन से वीडियो बना ली गई है, पानी निकलने के बाद दूसरी वीडियो बनाई जाएगी और जब फसल लहराएगी तब तीसरी वीडियो बनाई जाएगी।

इन वीडियो को दिखाकर यह सुनिश्चित किया जाता है कि दान के पैसे का सदुपयोग समाज के अंतिम और जरूरतमंद व्यक्ति तक पहुंच रहा है। पंचायत के सदस्यों ने इस पत्र पर सहमति जताते हुए अपने हस्ताक्षर किए।

ग्रामवासियों की भावुक प्रतिक्रिया एवं कृतज्ञता ज्ञापन

इस निस्वार्थ और विशाल सहायता को प्राप्त कर ग्राम तूहिया के निवासी अत्यंत भावुक हो गए। एक नौजवान किसान ने रोते हुए कहा कि आज उन्हें महसूस हो रहा है कि कोई उनका सच्चा रक्षक है। गांव के बुजुर्गों ने माना कि जो कार्य आज तक कोई एमएलए या एमपी नहीं कर सका, वह संत रामपाल जी महाराज ने निस्वार्थ भाव से कर दिखाया। सरपंच प्रतिनिधि ने स्पष्ट किया कि संपूर्ण सामान पूरी तरह से निशुल्क प्राप्त हुआ है और किसी भी प्रकार के पैसे का लेन-देन नहीं हुआ है।

सभी ग्रामवासियों ने संत रामपाल जी महाराज के स्वरूप पर पुष्प अर्पित कर अपना मान-सम्मान और आभार व्यक्त किया। गांव वालों के अनुसार, यह केवल जल निकासी का अभियान नहीं है, बल्कि यह किसानों के स्वाभिमान को फिर से जिंदा करने और उन्हें नया जीवनदान देने की एक अलौकिक पहल है।

यह भी पढ़ें: संत रामपाल जी महाराज की मदद ने सोलधा गांव को जल-समाधि से निकाला

​राष्ट्र हित और किसान कल्याण में संत रामपाल जी महाराज का निस्वार्थ एवं अतुलनीय योगदान

ग्राम तूहिया की यह घटना इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि जब शासन, प्रशासन और दुनिया साथ छोड़ देती है, तब संत रामपाल जी महाराज स्वयं असहायों का सहारा बनकर खड़े होते हैं। वर्तमान समय में जहां प्राकृतिक आपदाओं के कारण किसान अत्यंत दयनीय स्थिति में हैं, वहां संत रामपाल जी महाराज का यह राहत कार्य किसी चमत्कार से कम नहीं है।

बिना किसी राजनीतिक स्वार्थ, बिना किसी दिखावे और बिना किसी आर्थिक लाभ की मंशा के, संत रामपाल जी महाराज ने जिस संवेदनशीलता के साथ 400 से अधिक गांवों में किसानों की मदद की है, वह अकल्पनीय है। ग्राम तूहिया के लिए भेजी गई 5160 फुट लंबी पाइप लाइन और विशाल उपकरण केवल कुछ भौतिक वस्तुएं नहीं हैं, बल्कि यह संत रामपाल जी महाराज की वह असीम कृपा है जिसने डूबती हुई शिक्षा, मृतप्राय होती किसानी और टूटते हुए भरोसे को नवजीवन प्रदान किया है।

इस परमार्थ के कार्य से यह सिद्ध होता है कि संत रामपाल जी महाराज ही वर्तमान युग में सच्चे परोपकारी और समाज के वास्तविक उद्धारक हैं, जिनके दिशा-निर्देशन में समाज में पुनः खुशहाली और संपन्नता का संचार हो रहा है। संपूर्ण मानव जाति और विशेषकर कृषक वर्ग संत रामपाल जी महाराज के इस निस्वार्थ और महान उपकार के लिए सदैव उनका ऋणी रहेगा।

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