Tehreek-e-Taliban Pakistan: तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान ( تحریک طالبان پاکستان‎, ) से, पाकिस्तान अब डर और खौफ के साए में

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अफगान तालिबानियों के साथ मिलकर पाकिस्तान में आतंकवादियों के सबसे बड़े संगठनों में से एक तहरीक-ए-तालिबान (Tehreek-e-Taliban Pakistan) ने खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान की आजादी का रोडमैप तैयार कर लिया है। इसके लिए बाकायदा ‘टॉप आठ’ कमांडरों की तैनाती भी कर दी गई है। बीते कुछ दिनों से काबुल में अफगान तालिबान और तहरीक-ए-तालिबान के साथ पाकिस्तान में मुजाहिदों की नई फौज तैयार करने की बैठकें भी चल रही हैं।

तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान टीटीपी , (TTP) या पाकिस्तानी तालिबान इनका मकसद पाकिस्तान में लोकतन्त्र खत्म कर वहाँ शरिया पर आधारित एक कट्टरपन्थी इस्लामी अमीरात को क़ायम करना है। इसकी स्थापना दिसम्बर 2007 को हुई जब बैतुल्लाह महसूद​ के नेतृत्व में 13 गुटों ने एक तहरीक (अभियान) में शामिल होने का निर्णय लिया। 

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तालिबान ने TTP (Tehreek-e-Taliban Pakistan) के आतंकवादियों को आज़ाद किया

अशरफ गनी सरकार ने सैकड़ों TTP तहरीक-ए-तालिबान (Tehreek-e-Taliban Pakistan) के आतंकवादियों को अपने शासनकाल के दौरान जेल में बंद कर दिया था। इन लड़ाकों को अब तालिबान ने आजाद कर दिया है। रिहा होने वालों में TTP के पूर्व उप प्रमुख मौलवी फकीर मोहम्मद भी शामिल है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि फकीर की रिहाई अफगानिस्तान और पाकिस्तान दोनों के लिए नया खतरा पैदा कर सकती है। रिपोर्ट्स बताती हैं कि मौलवी फकीर को फरवरी 2013 में नंगरहार में अफगान सुरक्षा बलों ने गिरफ्तार किया था। ये वे आतंकवादी हैं जिन्हें पाकिस्तान की शह पर अफगानिस्तान की पुरानी सरकार ने जेलों में बंद कर रखा था। लेकिन अफगानिस्तान में तख्तापलट होते ही तालिबानी आतंकियों ने तहरीक-ए-तालिबान के संस्थापक बैतुल्लाह महसूद के कभी दाहिने हाथ रहे और उनके ड्राइवर कमांडर जोली को अफगानिस्तान में सत्ता पाने के बाद तालिबान ने रिहा कर दिया। इसके अलावा कमांडर वकास महसूद, हमजा महसूद, जरकावी महसूद, जैतुल्लाह महसूद, हमीदुल्लाह महसूद, डॉक्टर हमीद महसूद और मजहर महसूद समेत को भी रिहा कर दिया।

पाकिस्तान की गुजारिश के बाद भी अफगानिस्तान तहरीक-ए-तालिबान के आतंकवादियों को लगातार रिहा कर रहा है। विदेशी मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान की गुजारिश के बाद भी अफगानिस्तान के तालिबानी शासकों ने उसकी एक नहीं सुनी। इसका सीधा और स्पष्ट संदेश है कि पाकिस्तान के लिए राहें आने वाले दिनों में बहुत आसान नहीं हैं।

तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (Tehrik-e-Taliban Pakistan): मुख्य बिंदु

  • इसे तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान ( تحریک طالبان پاکستان‎, ), ( टीटीपी , TTP) या पाकिस्तानी तालिबान भी कहते हैं।
  • इनका उद्देश्य पाकिस्तान में शरिया पर आधारित एक कट्टरपन्थी इस्लामी अमीरात को क़ायम करना है
  • ये पाकिस्तान-अफ़गानिस्तान सीमा के पास स्थित संघीय प्रशासित कबायली क्षेत्र से उभरने वाले 13 चरमपन्थी उग्रवादी गुटों का एक संगठन हैं
  • 16 दिसम्बर 2014 को पेशावर के सैनिक स्कूल पर हमला करके तहरीक-ए-तालिबान के छः आतंकियों ने 126 बच्चों की हत्या कर दी थी
  • ये आतंकवादी संगठन पाकिस्तान के अंदर एक लाख से ज्यादा लोगों को मौत के घाट उतार चुका है 
  • अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद, पाकिस्तानी तालिबान के इरादे मजबूत हो गये हैं
  • संयुक्त राष्ट्र की जुलाई में आई एक रिपोर्ट के मुताबिक अफ़ग़ानिस्तान में तहरीक ए तालिबान पाकिस्तान के छह हज़ार से ज़्यादा प्रशिक्षित लड़ाके हैं
  • “फला-तूतिईल-काफिरिन-व-जाहिदुम-बिहि-जिहादन-कबीरन” (हिंसा कभी मत करना)।

तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान क्या है ( تحریک طالبان پاکستان‎, )? 

तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान, को (संक्षिप्त रूप से टीटीपी , TTP) या पाकिस्तानी तालिबान भी कहते हैं, पाकिस्तान-अफ़गानिस्तान सीमा के पास स्थित संघीय प्रशासित कबायली क्षेत्र से उभरने वाले चरमपन्थी (कट्टरपंथी) उग्रवादी (आतंकवादी)13 गुटों का एक संगठन है।

क्या है तहरीक-ए-तालिबान (Tehreek-e-Taliban Pakistan) पाकिस्तान का अर्थ? 

तालिब’ का अर्थ होता है = ज्ञानार्थी, ‘छात्र’ (या ‘पान्थिक शिक्षा माँगने वाला’) और ‘तहरीक’ का अर्थ ‘अभियान’ या ‘मुहिम’ होता है। तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान का मतलब ‘पाकिस्तानी छात्र अभियान’ है।

तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान की स्थापना कब हुई थी? 

इसकी स्थापना दिसम्बर 2007 को हुई जब बैतुल्लाह महसूद​ के नेतृत्व में 13 गुटों ने एक तहरीक (अभियान) में शामिल होने का निर्णय लिया।

तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (Tehreek-e-Taliban Pakistan) का संस्थापक कौन था? 

बैतुल्लाह मेहसूद ही तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान का संस्थापक था, इसका जन्म 1972, बन्नू ज़िला, पाकिस्तान में हुआ। इसकी मृत्यु 5 अगस्त 2009, दक्षिणी वजीरिस्तान में हुई थी। यह अब्दुल्ला महसूद का भाई था।

तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान और अफगानिस्तान तालिबान में क्या अंतर है?

यह अफ़गानिस्तानी तालिबान से अलग है हालाँकि उनकी विचारधाराओं से काफ़ी हद तक सहमत है। इनका ध्येय पाकिस्तान में शरिया पर आधारित एक कट्टरपन्थी इस्लामी अमीरात को क़ायम करना है और अफगानिस्तानी तालिबान अफगानिस्तान के अंदर कट्टरपंथी इस्लामी अमीरात बनाना चाहता हैं । काबुल पर कब्जे के बाद से लगातार तालिबानी इस बात को कह रहे हैं, कि वे अफगानिस्तान में इस्लामी सरकार और शरिया कानून लागू करेंगे।

पाकिस्तान के कितने लोगों को मार चुका है तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (Tehreek-e-Taliban Pakistan)? 

16 दिसम्बर 2014 को पेशावर के सैनिक स्कूल पर हमला करके तहरीक-ए-तालिबान के छः आतंकियों ने 126 बच्चों की निर्मम हत्या कर दी थी। इस आतंकवादी संगठन की वजह से पाकिस्तान में अब तक तकरीबन एक लाख से ज्यादा लोग मारे गए हैं।

क्या होगा पाकिस्तान के 60 प्रतिशत भू-भाग (डूरंड रेखा) के विवादित क्षेत्र का?

अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच  2430 कि.मी. लम्बी अन्तराष्ट्रीय सीमा का नाम डूरण्ड रेखा है। अफगानिस्तान चारों ओर से जमीन से घिरा हुआ है और इसकी सबसे बड़ी सीमा पूर्व की ओर पाकिस्तान से लगी है, इसे डूरण्ड रेखा कहते हैं। भूराजनैतिक तथा भूरणनीति की दृष्टि से डूरण्ड रेखा को विश्व की सबसे खतरनाक सीमा माना जाता है। अफगानिस्तान इस सीमा को अस्वीकार करता रहा है।

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अफगान टाइम्स ने रिपोर्ट में दावा किया है कि इस मुद्दे का परिणाम पाकिस्तान के विघटन के रूप में सामने आ सकता है। आंदोलन को ‘पश्तूत तहफुज मूवमेंट’ (पीटीएम) नाम से मंजूर अहमद पश्तीन जैसे नेताओं द्वारा खड़ा किया गया है। पाकिस्तान का कुल 60 प्रतिशत भू-भाग डूरंड रेखा के विवादित क्षेत्र में है। मांग है कि ग्रेटर अफगानिस्तान की स्थापना के लिए दोनों देशों की सरहद पर रह रहे पश्तून व बलूच नागरिक यदि एक हो गये तो पाकिस्तान का 60 प्रतिशत हिस्सा जाएगा।

Tehreek-e-Taliban Pakistan: पाकिस्तान इस समय क्यों चिंतित है?

पाकिस्तान सरकार की चिंता ‘तहरीक-ए-तालिबान (Tehreek-e-Taliban Pakistan)‘ यानी टीटीपी को लेकर है। टीटीपी पर पाकिस्तान में चरमपंथ की कई घटनाओं को अंजाम देने का आरोप है। इस संगठन को पाकिस्तानी तालिबान के तौर पर भी पहचाना जाता है और ये पाकिस्तान-अफ़ग़ानिस्तान के सरहदी इलाकों में सक्रिय है। पाकिस्तान मीडिया में आई रिपोर्टों के मुताबिक काबुल पर तालिबान के नियंत्रण स्थापित होने के बाद अफ़ग़ानिस्तान में ‘तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान’ के कई चरमपंथियों को रिहा कर दिया गया है। पाकिस्तान के गृह मंत्री शेख रशीद अहमद ने बताया कि इमरान ख़ान सरकार ने इसे लेकर अफ़ग़ान तालिबान से संपर्क किया है और तालिबान ने भरोसा दिलाया है कि वो टीटीपी के चरमपंथियों को पाकिस्तान के ख़िलाफ़ अफ़ग़ानिस्तान की ज़मीन इस्तेमाल नहीं करने देंगे।

पाकिस्तान में इस्लामिक शासन और शरिया कानून लागू हुआ तो क्या होगा?

तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के नेता मौलवी फकीर मुहम्मद ने तालिबान के इस्लामिक अमीरात के प्रति निष्ठा दिखाई है। उन्होंने कहा है कि वह पाकिस्तान में इसी तरह का इस्लामी शासन चाहते हैं। यदि शरिया लागू हुआ तो पाकिस्तान,भारत, चीन, रूस, ईरान, कजाकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, तजाकिस्तान, किर्गिस्तान, समेत यह एक बड़े भाग को हिंसा के माहौल में लपेट लेगा। सबसे पहले हिंसा पाकिस्तान के अंदर ही हो सकती है क्योंकि पाकिस्तान के अंदर लोकतांत्रिक और स्वतंत्र तरीके से रहने वाले लोगों की संख्या बहुत है, निश्चित ही वह इस कट्टर इस्लामिक सरकार और शरिया कानून का विरोध करेंगे।

पाकिस्तान में इस्लामिक सरकार और शरिया कानून लागू होने से दूसरे देशों के अंदर बैठे आतंकवादी-चरमपंथी, कट्टरवादी, संगठनों को तालिबान की तरह रवैया करने की होड़ लग जाएगी। यह आग भारत तक भी आ सकती है क्योंकि तालिबान के आतंकी कश्मीर में आतंक फैलाने की कोशिश करेंगे और भारत को मुंहतोड़ जवाब देना पड़ेगा जिसकी वजह से एक बड़ा युद्ध होने की आशंका भी है।

पाकिस्तान के परमाणु हथियार केंद्रों पर क्यों मंडरा रहा है खतरा?

ब्रिटिश सेना के पूर्व कमांडर ने कहा कि अफगानिस्तान में तालिबान की जीत के बाद सबसे बड़ा खतरा पाकिस्तान के परमाणु हथियार केंद्रों पर उसके नियंत्रण की आशंका से है। उन्होंने ईरान, चीन और रूस पर भी तालिबान को समर्थन देने का आरोप है।

सच्चा मुसलमान कौन?

सुल्तान अधम जो पहले नौ शेरवां का बादशाह था उसने ईश्वर प्राप्ति के लिए अस्सी गंज खजाने का त्याग किया और बाद में बलख बुखारे का बादशाह बनकर अपना पूरा राज्य त्यागा, नबाब वाजिद खान ने भी अपना राज्य त्याग दिया था, राबिया जिसने एक कुत्तिया के बच्चों की प्यास बुझाने के लिए अपने सिर के बाल उखाड़ कर रस्सी बनाई और अपने कपड़े तक उतार दिए थे, शेख फरीद जिन्होंने अल्लाह की प्राप्ति के लिए अपने गुरु की हर एक आज्ञा का पालन किया, भक्त सेऊ ने संतों के भोजन के लिए अपनी गर्दन कटवाई, मंसूर जिसने अपने शरीर के टुकड़े टुकड़े करवा लिए, यह लोग सच्चे मुसलमान थे और अल्लाह से खौफ करने वाले थे। जिन्होंने अपना शरीर, धन दौलत, ऐशो आराम, रूतबा और ताकत त्याग कर सच्चे कबीर अल्लाह की इबादत की और अविनाशी जन्नत प्राप्त की इन सभी को कबीर परमेश्वर जी ही मिले थे और असली इबादत करने का ढंग बताया था।

हम ही अलख अल्लाह हैं क़ुतुब गोश और पीर ।

ग़रीब दास खालिक धनी अविगत सत कबीर।।

जो तालिबानी संगठन शरिया कानून को लागू करवाने के लिए दूसरों की गर्दन काट रहे हैं, गोली और बम से लोगों की जान ले रहे हैं वह अल्लाह और उसके संविधान से बिल्कुल भी परिचित नहीं है, वे लोग जन्नत नहीं दोजख के पात्र हैं।

सभी चरमपंथियों, आतंकवादियों, लड़ाकों और कट्टरपंथियों से यह प्रार्थना है कि मार-काट का यह गलत मार्ग तुरंत त्याग दे क्योंकि एक मुसलमान के लिए हिंसा करना बिल्कुल वर्जित है। अल्लाह ऐसे लोगों को कभी माफ नहीं करेगा। एक मुसलमान को हमेशा रहमदिल , नेक, औरतौं और कमज़ोरों की हिफाजत करने वाला, बच्चों से प्रेम करने वाला और अल्लाह से डरने वाला होना चाहिए।

पवित्र कुरान शरीफ सूरत फुरकान 25 आयत नंबर 52, 58, 59 के अनुसार आप अल्लाह की सही इबादत विधि न समझ कर काजी मुल्लाओं द्वारा बताए झूठे ज्ञान से बहकाए गए हो और गलत ज्ञान की वजह से रहम दिल, उदारवादी, दानी, क्षमाशील, संतोषी बनने की जगह कट्टरपंथी बनकर रह गए हो।

क्या इस्लाम की तालिमों में हिंसा करने की इजाजत है?

कुरान सूरत फुरकान आयत 25:52

“फला-तूतिईल-काफिरिन-व-जाहिदुम-बिहि-जिहादन-कबीरन”

इसका अर्थ है कि इस कुरान शरीफ की दलीलों की सहायता से उस कबीर के लिए संघर्ष (जिहाद) करना (हिंसा करने को नहीं कहा गया है) और मेरे द्वारा दिये गए निर्देश पर कायम रहना।

‘वल्लत कबीर बुल्लाह आला माह दकूबवला अल्लाह कुमदर गुरु’

तुम कबीर अल्लाह की बढ़ाई बयां करो। इस बात पर तुम को हिदायत फरमाए ताकि अल्लाह ताला का शुक्र कर सको। वह कबीर अल्लाह तमाम पोशीदा और जाहिर चीजों को जानने वाला है। वह कबीर आलीशान रुतबे वाला है। कबीर गुनाहों से बचाने वाला है। केवल कबीर अल्लाह ही हमारे पापकर्मों को काट सकता है। पवित्र कुरान शरीफ के अनुसार अल्लाह की इबादत की सही जानकारी कोई बाखबर (इल्मवाला) ही जानता है। वर्तमान में वह बाखबर जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज हैं जो अल्लाह के भेजे हुए अंतिम रसूल और अंतिम पैगंबर हैं। हज़ारों मुस्लिम भाई बहन उनसे नाम दीक्षा लेकर कबीर अल्लाह की सच्ची इबादत कर रहे हैं । आप संत रामपाल जी महाराज जी से फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब के माध्यम से जुड़ सकते हैं। 

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