शिक्षक दिवस अतुल्य अवसर

“माता-पिता की मूरत है गुरू,
इस कलयुग में भगवान की सूरत है गुरू”

किसी भी बच्चे के लिए गुरू बहुत महत्व रखता है। शिक्षक दिवस यानि टीचर्स डे हर स्कूल, कॉलेज और शैक्षिक संस्थान में 5 September को प्रतिवर्ष मनाया जाता है। एक गुरू के लिए और एक छात्र के लिए शिक्षक दिवस का बहुत अधिक महत्व होता है। ये तो हर कोई जानता है कि गुरू अपने छात्र को सही मार्ग पर चलने का रास्ता दिखाते हैं। कामयाबी तक तो हर कोई पहुंचना चाहता है लेकिन कामयाबी की उन सीढ़ियों पर चलना और चलते जाने तक का सफर हमारे गुरू हमें दिखाते हैं। एक छात्र के लिए और उसके जीवन के लिए गुरू का क्या महत्व है? इस सवाल का जवाब देने के लिए शब्द कम पड़ जाएंगे।

शिक्षक दिवस | Teacher’s Day

ये तो हम सभी जानते हैं कि हर साल 5 सितम्बर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है। इस दिन सभी छात्र अपने गुरू को तोहफ़ा देते हैं। कई स्कूलों में छात्रों को उस दिन टीचर बनाया जाता है। छात्र और टीचर बड़े ही धूम धाम से इस दिन को मनाते हैं। अपने गुरू को धन्यवाद कहने के लिए शायद इससे अच्छा दिन और कोई हो ही नहीं सकता। अक्सर लोगों के मन में ये सवाल उठता है कि शिक्षक दिवस क्यों मनाया जाता है? शिक्षक दिवस 5 सितम्बर को ही क्यों मनाया जाता है? इसी से जुड़े सवालों का जवाब जानने के लिए आप इस Blog
को पूरा पढ़ें।

शिक्षक दिवस कब और क्यों मनाया जाता है

हमारे देश में हर वर्ष 5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है। भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन एक विद्वान शिक्षक थे। उन्होंने अपने जीवन के अमूल्य 40 वर्ष एक शिक्षक के रूप में इस देश के भविष्य को संवारने में अपना योगदान दिया। उनका जन्म दिनांक 5 सितंबर 1888 को तमिलनाडु के एक छोटे से गांव तिरुतनी में हुआ था। उनके उप राष्ट्रपति बनने के बाद उनके मित्रों और कुछ छात्रों ने उनका जन्मदिन मनाने की इच्छा व्यक्त की। डॉ. राधाकृष्णन का कहना था कि उनके जन्म दिन को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाएगा तो उन्हें बहुत गर्व होगा। शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को देखते हुए हर वर्ष उनके जन्म दिन को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाने लगा।

शिक्षक दिवस का महत्व

शिक्षक ही नहीं सभी छात्रों के लिए भी शिक्षक दिवस बहुत महत्वपूर्ण है। इस दिन छात्र अपने शिक्षक और शिक्षिकाओं के सामने अपने विचार और अपनी भावनाएं व्यक्त कर सकते हैं। शिक्षक दिवस के दिन देश के पूर्व उप राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को याद किया जाता है। शिक्षक दिवस भारत के साथ अन्य देशों में भी मनाया जाता है। सभी देशों में अलग-अलग दिन मनाया जाता है शिक्षक दिवस। भारत में शिक्षक दिवस 5 सितंबर को मनाया जाता है। विश्व शिक्षक दिवस दिनांक 5 अक्टूबर को मनाया जाता है।
इतने विवेचन के पश्चात अगर मनुष्य जीवन में आध्यात्मिक गुरु के महत्व के बारे में विवरण और विचार विमर्श नहीं किया जाए तो यह आर्टिकल पूर्णतया अधूरा रह जाएगा।

मनुष्य जीवन में आध्यात्मिक गुरु की आवश्यकता और महत्व

संपूर्ण सृष्टि में मनुष्य को सबसे श्रेष्ठ प्राणी माना जाता है जब से मानव की सृष्टि हुई है तब से मानव परमात्मा प्रदत्त बुद्धि से प्रकृति के नियमों का क्रमबद्ध अध्ययन करता आ रहा है और उन पर अनुसंधान भी कर रहा है। कलयुग में ही नहीं सतयुग द्वापर और त्रेता युग में भी मनुष्य की यही प्रवृत्ति रही है लेकिन जन्म से लेकर मृत्यु तक प्रत्येक मनुष्य के जीवन में एक ऐसा इंसान होता है जो इस प्रकृति की अनसुलझी और जटिल पहेलियों के बारे में बताता है जिसको व्यवहार की भाषा में गुरु बोला जाता है।

सदियों से मानव जटिल प्रश्नों का उत्तर जानने के लिए बहुत जिज्ञासु रहा है लेकिन सत्य और प्रमाणित ज्ञान के अभाव में या तो उसको रूढ़िवादी उत्तर मिलता है या उसके प्रश्न को ही झुठला दिया जाता है।
कलयुग के परिपेक्ष्य में जैसे-जैसे समय बीतता जा रहा है उसी के समानांतर मनुष्य की बुद्धि भी प्रखर होती जा रही है उसी के चलते प्रत्येक मनुष्य के दिमाग में ऐसे ऐसे प्रश्न जगह बना रहे हैं जिनका उत्तर देना सुई में से पृथ्वी को निकालने जैसा है अर्थात असंभव जैसा है। जिसके चलते अधूरे ज्ञान वाले शिक्षकों द्वारा उन प्रश्नों के सही उत्तर नहीं मिलते और अपूर्ण और वैकल्पिक उत्तर बता दिए जाते हैं तथा संतोषजनक उत्तर नहीं मिल पाने के कारण प्रश्न कर्ता भी मन मार कर हां भर लेते हैं।

आखिर ऐसा क्यों ?

सृष्टि की रचना के समय परमात्मा ने मनुष्य के लिए सार्थक जीवन यापन करने के लिए संविधान बनाया जिसके अनुसार प्रत्येक मनुष्य अपना जीवन सार्थकता के साथ यापन कर सके जिसको वेद, गीता, कुरान, बाइबल इत्यादि अनमोल पुस्तकों के माध्यम से समझा जा सकता है इन पुस्तकों को सद्ग्रंथ कहा जाता है।

सदग्रंथों के अनुसार जीवन यापन करने से मनुष्य जीवन की सार्थकता संपूर्ण हो जाती है लेकिन विडंबना यह रही कि मनुष्य को इन सब ग्रंथों का ज्ञान बताए कौन? इस समस्या के समाधान के लिए गुरुपद को बनाया गया तथा यह व्यवस्था की गई कि जो गुरु होगा वह शेष मानव समाज को सदग्रंथों के अनुसार जीवन यापन करने का तरीका बताएगा। सब उसका अनुसरण करेंगे। इस प्रकार कालांतर में गुरु पद बहुत गरिमाशाली हो गया। सभी गुरु को भगवान के तुल्य मानने लगे। इस बात का नाजायज फायदा उठा कर गुरु पद पर बैठे व्यक्तियों ने पूर्ण ज्ञान के अभाव में गलत ज्ञान प्रचार कर दिया और मानव के अनमोल जीवन के साथ खिलवाड़ किया जो कि काफी निंदनीय है।

अब सवाल यह उठता है की गुरु अगर ऐसा करता है तो विश्वास किस पर करें? क्या कोई सच्चा गुरु है जिस पर मानव पूर्ण दृढ़ता से अर्पित हो सके और जिसका अनुसरण करके इंसान परमात्मा प्राप्ति कर सके।

इस जटिल समस्या का समाधान हमारे सदग्रंथ देते हैं। पवित्र श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 15 श्लोक 1 से 4 तक यह निर्णय दिया गया है की अगर गुरु की शरण के बिना मोक्ष प्राप्ति असंभव है तो सच्चे गुरु की तलाश कैसे करें?

पूर्ण गुरु ( अध्यात्मिक शिक्षक) कौन है?

संसार रूपी पीपल के उल्टे लटके हुए वृक्ष के जड़ से लेकर पत्ते तक एक एक छंद की भिन्न-भिन्न व्याख्या करके जो मानव समाज को समझा देता है वह पूर्ण गुरु है।
गीता जी के अनमोल प्रवचनों में गीता ज्ञान दाता अर्जुन को गुरु की पहचान करने के लिए यह तरीका बताते हैं। इस प्रमाणित गुरु की परिभाषा से हम तुलनात्मक विवेचन करके निर्णय कर सकते हैं कि हम मोक्ष प्राप्ति के लिए किस गुरु की शरण में जाएं।
वर्तमान समय में भारतवर्ष ही नहीं संपूर्ण विश्व में गुरु पद पर बैठे हुए व्यक्तियों की संख्या करोड़ों में है लेकिन गीता जी के अनुसार इस परिभाषा में कोई भी धर्मगुरु, शंकराचार्य या टीचर समतुल्य नहीं है।
आज तक किसी भी धर्म गुरु को संसार रूपी उल्टे लटके हुए वृक्ष की भनक तक नहीं थी लेकिन वर्तमान में एक ऐसे संत हैं जिन्होंने इस संपूर्ण वृक्ष की व्याख्या प्रमाणित तरीके से बताई और मनुष्य को कृतार्थ किया। वह संत और कोई नहीं जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज हैं जिन्होंने संपूर्ण सदग्रंथों के ज्ञान का क्रमबद्ध अध्ययन करके उनके अनमोल संविधान को मनुष्य मात्र तक पहुंचाया और इतने प्रमाण दिए की किसी भी मानव मात्र के दिमाग में किसी भी प्रकार की
कोई शंका न रहे।

नम्र निवेदन

उपर्युक्त संपूर्ण विवेचन से स्पष्ट है की आज पृथ्वी पर एकमात्र सच्चे संत और पूर्ण गुरु संत रामपाल जी महाराज ही हैं। आज प्रत्येक मानव शिक्षित और बुद्धिजीवी है।
आप सभी से करबद्ध प्रार्थना और विनय निवेदन है कि आप शिक्षा का सकारात्मक उपयोग करें और अपने विवेक से सत्य और असत्य में अंतर करें और निर्णय लें कि कौन सच्चा संत है और किसका ज्ञान प्रमाणित है। इस प्रक्रिया में आप संत रामपाल जी महाराज द्वारा लिखित अनमोल आध्यात्मिक पुस्तक ज्ञान गंगा अपने घर पर नि:शुल्क मंगवा कर पढ़ें और अपने विवेक से निर्णय लें तथा मनुष्य जीवन को सफल बनाएं।
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