Supreme Court Decision on Sedition Law | सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, देशद्रोह कानून पर लगाई रोक, नहीं होंगे नये मामले दर्ज

Published on

spot_img

Supreme Court Decision on Sedition Law (Hindi) : राजद्रोह कानून के खिलाफ दर्ज याचिकाओं की सुनवाई करते हुए देश की सबसे बड़ी अदालत ने 152 साल पुराने कानून पर बुधवार को ऐतिहासिक फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने देशद्रोह कानून (Sedition Law) की री-एग्जामिन प्रोसेस पूरी होने तक नये मामले दर्ज करने और पहले से दर्ज मामलों पर कार्यवाही करने पर रोक लगा दी है।

Supreme Court Decision on Sedition Law [Hindi] : मुख्यबिंदु

  • अंग्रेजों के समय से चले आ रहे देशद्रोह कानून (Sedition Law) पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक।
  • CJI एनवी रमना समेत तीन जजों की बेंच ने देशद्रोह (राजद्रोह) कानून पर सुनाया फैसला।
  • IPC की धारा 124A के तहत राजद्रोह (Sedition) कानून पर पुनर्विचार तक ना ही होंगे नये मामले दर्ज और ना ही पहले से दर्ज मामले पर कार्यवाही होगी।
  • सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद, देशद्रोह के तहत जेलों में बंद लोग जमानत के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं।
  • कोर्ट के फैसले के बाद केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि वह अदालत और इसकी स्वतंत्रता का सम्मान करते हैं, लेकिन एक “लक्ष्मण रेखा” है जिसे पार नहीं किया जा सकता है।

राजद्रोह पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला (Supreme Court Decision on Sedition)

अंग्रेजों के समय से चले आ रहे देशद्रोह कानून (Sedition Law) पर बड़ा फैसला सुनाते हुए केंद्र सरकार को पुनर्विचार करने के लिए आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्यों को आदेश देते हुए कहा कि जब तक राजद्रोह (देशद्रोह) कानून की IPC की धारा 124A की समीक्षा पूरी नही हो जाती तब तक कोई भी नया मामला दर्ज नहीं किया जाये और देशद्रोह के जो पहले से मामले दर्ज हैं उन पर भी कार्यवाही करने पर रोक लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा कि देशद्रोह मामले में जेल में बंद लोग जमानत के लिए संबंधित कोर्ट पर याचिका दायर कर सकते हैं। कोर्ट ने निचली अदालतों से भी अपील की है कि वे पारित आदेश को ध्यान में रखते हुए पीड़ित पक्ष की तरफ से मांगी गई राहत की जांच करें।

Supreme Court Decision on Sedition Law | केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू की प्रतिक्रिया

देशद्रोह कानून (Sedition Law) पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि “वह अदालत और इसकी स्वतंत्रता का सम्मान करते हैं”, लेकिन एक “लक्ष्मण रेखा” है जिसका किसी को भी उल्लघंन नहीं करना चाहिए। उनका इशारा इसी कानून से होने वाले फैसले की तरफ था।

देशद्रोह कानून पर केंद्र सरकार का पक्ष

देशद्रोह कानून का बचाव करते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष केंद्र सरकार का पक्ष रखते हुए कहा – 

  • केंद्र ने कहा कि जहाँ तक लंबित मामलों की बात है तो इसके लिए संबंधित अदालतों को आरोपियों की जमानत पर शीघ्रता से विचार करने का निर्देश दिया जा सकता है।
  • केंद्र सरकार ने कहा कि संज्ञेय अपराध को दर्ज करने से नहीं रोका जा सकता है और इस कानून के प्रभाव को रोकना भी सही नहीं है। इसके लिए एक जिम्मेदार अधिकारी होना चाहिए जिससे जाँच के बाद ही देशद्रोह का मामला दर्ज किया जाये।
  • सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट में कहा कि देशद्रोह के दर्ज मामलों की गंभीरता का पता नहीं है। इनमें आंतकी या मनीलांड्रिंग से संबंधित मामले हो सकते हैं। अभी ये मामले कोर्ट में विचाराधीन है, हमें फैसला आने का इंतजार करना चाहिए। हालांकि केंद्र की यह दलील कोर्ट ने खारिज कर दी थी।
  • केंद्र सरकार की ओर से SG तुषार मेहता ने यह भी दलील दी कि कोर्ट की संविधान पीठ द्वारा देशद्रोह के लंबित मामलों पर रोक लगाने का आदेश लगाना सही तरीका नहीं है।

पाँच पक्षों ने देशद्रोह कानून को कोर्ट में दी थी चुनौती

सेना के दिग्गज मेजर-जनरल एसजी वोम्बटकेरे (सेवानिवृत्त) और एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया, पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी, टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा समेत पाँच पक्षों ने देशद्रोह कानून को चुनौती देने वाली 10 याचिकाएँ दायर की थी। जिसकी सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच ने देशद्रोह कानून (Sedition Law) पर रोक लगा दी है।

तीन जजों की बैंच का ऐतिहासिक फैसला

देशद्रोह मामले की सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना की अध्यक्षता वाली तीन जजों की संविधान पीठ ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए देशद्रोह कानून पर रोक लगा दी है। इस संविधान पीठ में जस्टिस सूर्यकांत त्रिपाठी और जस्टिस हिमा कोहली भी शामिल हैं। इससे पहले भी कई बार देशद्रोह कानून पर सवाल उठाया गया कि क्या हमे इस कानून की सही में जरूरत है जिसको अंग्रेजो के जमाने में आज़ादी की आवाज को दबाने के लिए बनाया गया था? क्योंकि एक तर्क यह भी लोगो के मन में है कि सरकार द्वारा इसका उपयोग अपने विरोधियों पर किया जाता है। इसलिए इस फैसले की इतनी मांग की जा रही थी।

Supreme Court Decision on Sedition Law पर विपक्ष के नेताओं की प्रतिक्रिया

देशद्रोह कानून पर सर्वोच्च न्यायालय का ऐतिहासिक फैसला आने के बाद कुछ नेताओं की भी प्रतिक्रिया सामने आई है। कांग्रेस के नेता और लोकसभा सांसद राहुल गाँधी ने कहा कि “सच बोलना देशभक्ति है, देशद्रोह नहीं। सच कहना देश प्रेम है, देशद्रोह नहीं। सच सुनना राजधर्म है, सच कुचलना राजहठ है। डरो मत!”

देशद्रोह मामले पर NCRB की रिपोर्ट

नेशनल क्राइम रिपोर्ट ब्यूरो (NCRB) की रिपोर्ट के मुताबिक 2015 से 2022 के दौरान IPC की धारा 124A के तहत 356 राजद्रोह के मामले दर्ज हुए, जिसमें 548 लोगों को गिरफ्तार किया गया। चौंकाने वाली बात यह है कि इन 6 वर्षों के दरम्यान केवल 12 गिरफ्तार लोगों पर ही आरोप साबित हो पाए।

क्या है देशद्रोह कानून (What is Sedition Law)?

भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 124A में राजद्रोह या देशद्रोह (Sedition) का उल्लेख किया गया है। इस कानून में गैर-जमानती प्रावधान है। इस कानून के अनुसार किसी व्यक्ति द्वारा लिखकर या बोलकर या चिन्हित करके भारत के कानून द्वारा स्थापित सरकार के खिलाफ नफरत, अवमानना, असंतोष फैलाना देशद्रोह माना जाता है। इस कानून के तहत आरोपी को तीन वर्ष से लेकर आजीवन कारावास तक सजा का प्रावधान है।

देशद्रोह (राजद्रोह) का इतिहास (History of Sedition Law)

देशद्रोह (Sedition) कानून सबसे पहले इंग्लैंड में आया था। सत्ता के विरुद्ध उठ रही आवाजों को रोकने के लिये इस कानून को 17वीं सदी में लाया गया था। फिर जब भारत, ब्रिटेन का उपनिवेश बनाया तो थॉमस मैकाले को इंडियन पीनल कोड (IPC) का ड्राफ्ट तैयार करने की जिम्मेदारी मिली। 1860 में IPC लागू कर दिया गया लेकिन बाद में क्रांतिकारियों को रोकने, उन्हें परेशान करने के लिए 1870 में IPC में धारा 124A को जोड़ा गया। जिसके तहत ही महात्मा गांधी, बाल गंगाधर तिलक, भगत सिंह आदि को अंग्रेजों ने गिरफ्तार किया था।

कौन है भगवान का द्रोही?

हम सभी मानव एक परमेश्वर के बच्चे हैं और हमें यह मनुष्य जन्म भगवान ने सतभक्ति करने के लिए प्रदान किया है। भगवान की सतभक्ति कोई पूर्णसंत/पूर्णगुरु ही बता सकता है लेकिन कुछ नकली संत भगवान के बच्चों को गलत मार्गदर्शन करके उनका मनुष्य जन्म व्यर्थ कर देते हैं। जिससे भगवान के बच्चों को 84 लाख योनियों का कष्ट उठाना पड़ता है। गलत मार्गदर्शन करके मनुष्य जन्म को व्यर्थ करवाने वाले नकली संत/गुरु ही भगवान के द्रोही होते हैं।

पूर्ण गुरु की पहचान

परमेश्वर कबीर जी ने “कबीर सागर” अध्याय “जीव धर्म बोध” पृष्ठ 1960 (2024) में पूर्णगुरु के लक्षण बतायें हैं कि – 

गुरु के लक्षण चार बखाना। प्रथम वेद शास्त्र का ज्ञाना (ज्ञाता)।।

दूसरा हरि भक्ति मन कर्म बानी। तीसरा सम दृष्टि कर जानी।।

चौथा बेद विधि सब कर्मा। यह चारि गुरु गुन जानों मर्मा।।

भावार्थ:- जो गुरू अर्थात् परमात्मा कबीर जी का कृपा पात्र दास गुरू पद को प्राप्त होगा, उसमें चार गुण मुख्य होंगे।

1 वह सन्त वेदों तथा शास्त्रों का ज्ञाता होगा। वह सर्व धर्मों के शास्त्रों को ठीक-ठीक जानेगा।

2 वह केवल ज्ञान-ज्ञान ही नहीं सुनाऐगा, वह स्वयं भी परमात्मा की भक्ति मन कर्म वचन से करेगा।

3 सर्व अनुयाइयों के साथ समान व्यवहार करेगा, वह समदृष्टि वाला होगा। आप देखते हैं कि आश्रम में सर्व श्रद्धालुओं को एक समान खाना-पीना, एक समान बैठने का स्थान। सन्त रामपाल दास जी के माता-पिता, बहन-भाई, बच्चे जब कभी आश्रम में आते हैं साधारण भक्त की तरह आश्रम में रहते हैं।

4 चौथा लक्षण गुरू का बताया है कि वह सन्त वेदों में वर्णित भक्ति विधि अनुसार साधना अर्थात् प्रार्थना (स्तुति) यज्ञ अनुष्ठान तथा मंत्र बताएगा।

संत रामपाल जी महाराज ही केवल पूर्णगुरु हैं

वर्तमान समय में यदि देखा जाये तो पूर्णगुरु संत रामपाल जी महाराज जी ही हैं। जोकि चारों वेदों, सभी धर्मों के शास्त्रों का पूर्ण ज्ञान रखते हैं। स्वयं तो भक्ति करते ही हैं अपने अनुयायियों को भी वेदों में वर्णित विधि अनुसार स्तुति, प्रार्थना, यज्ञ और मंत्र करने को बताते हैं। 
संत रामपाल जी महाराज जी ही वह पूर्ण संत हैं जो ऊंच नीच, जाति धर्म के भेदभाव को दूर करते हुए सभी के साथ समान व्यवहार करते हैं और सभी को समान दृष्टि से देखते हैं। पूर्णगुरु संत रामपाल जी महाराज जी से नाम दीक्षा लेकर आप भी वेदों में वर्णित विधि अनुसार भक्ति करें। पूर्णसंत संत रामपाल जी महाराज का वेदों, धर्म शास्त्रों से प्रमाणित अद्वितीय आध्यात्मिक ज्ञान जानने के लिए गूगल प्लेस्टोर से Sant Rampal Ji Maharaj App डाउनलोड करें।

Latest articles

International Mother Earth Day 2026: Know How To Empower Our Mother Earth

Last Updated on 11 April 2026 IST: International Mother Earth Day is an annual...

संत रामपाल जी महाराज सभी 11 मामलों में बाइज्जत बरी और FIR 428 में जमानत, जेल से बाहर आए: जानें कैसे हुई असत्य पर...

आध्यात्मिक नेतृत्व और न्यायिक संघर्ष के बदलते परिदृश्य में संत रामपाल जी महाराज का...

Preserving Our Past, Protecting Our Future: World Heritage Day 2026

Last Updated on 9 April 2026 IST: Every year on April 18, people commemorate...

Sant Rampal Ji Maharaj Granted Bail in Sedition Case— Release Expected Soon

Chandigarh/Hisar, April 9, 2026: The prolonged legal battle of Sant Rampal Ji Maharaj for...
spot_img

More like this

International Mother Earth Day 2026: Know How To Empower Our Mother Earth

Last Updated on 11 April 2026 IST: International Mother Earth Day is an annual...

संत रामपाल जी महाराज सभी 11 मामलों में बाइज्जत बरी और FIR 428 में जमानत, जेल से बाहर आए: जानें कैसे हुई असत्य पर...

आध्यात्मिक नेतृत्व और न्यायिक संघर्ष के बदलते परिदृश्य में संत रामपाल जी महाराज का...

Preserving Our Past, Protecting Our Future: World Heritage Day 2026

Last Updated on 9 April 2026 IST: Every year on April 18, people commemorate...