हरियाणा/झज्जर – गाँव शेखूपुर जट्ट: संत रामपाल जी महाराज की असीम दया से बाढ़ ग्रस्त खेतों को मिला जीवनदान

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​​हरियाणा के झज्जर जिले की तहसील झज्जर स्थित गाँव शेखूपुर जट्ट पिछले कई महीनों से एक गंभीर प्राकृतिक आपदा का सामना कर रहा था। यहाँ के किसानों की व्यथा किसी से छिपी नहीं थी। खेतों में लबालब पानी भरा होने के कारण खरीफ की फसलें, विशेषकर धान और पशुओं के चारे के लिए ज्वार-बाजरा, पूरी तरह से नष्ट हो चुकी थीं। किसानों के सामने सबसे बड़ा संकट यह था कि यदि खेतों से पानी जल्द नहीं निकाला गया, तो रबी की प्रमुख फसल गेहूं की बुवाई भी असंभव हो जाएगी।

ऐसी स्थिति में किसान कर्ज के गहरे दलदल में फंसने की कगार पर थे। जब चारों ओर से निराशा हाथ लगी और सरकारी तंत्र या राजनेताओं से कोई सहायता नहीं मिली, तब संत रामपाल जी महाराज एक मात्र आशा की किरण बनकर सामने आए।

ग्रामीणों ने मदद के लिए संत रामपाल जी महाराज से लगाई गुहार

​गाँव के सरपंच और अन्य प्रतिष्ठित लोगों ने बताया कि उन्होंने हर संभव प्रयास किया था, लेकिन कहीं से कोई सुनवाई नहीं हुई। अंततः, गाँव की पंचायत और ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से संत रामपाल जी महाराज के दरबार में एक लिखित अर्जी (प्रार्थना पत्र) लगाई। यह प्रार्थना पत्र लगभग एक सप्ताह पूर्व भेजा गया था, जिसमें गाँव की बदतर स्थिति और जलभराव की समस्या का विवरण दिया गया था।

ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने केवल एक उम्मीद के सहारे यह कदम उठाया था, लेकिन उन्हें यह अंदाजा नहीं था कि उनकी सुनवाई इतनी शीघ्र और इतने व्यापक स्तर पर होगी। संत रामपाल जी महाराज, जो स्वयं एक किसान परिवार से संबंध रखते हैं और अन्नदाता के दर्द को बखूबी समझते हैं, ने तुरंत इस प्रार्थना को स्वीकार किया और अपने अनुयायियों को तत्काल प्रभाव से सहायता पहुँचाने का आदेश दिया।

संत रामपाल जी महाराज द्वारा प्रदान की गई सहायता सामग्री का विवरण

​संत रामपाल जी महाराज के आदेश पर गाँव शेखूपुर जट्ट में एक विशाल राहत काफिला पहुँचा। सेवादारों ने बताया कि गुरुजी का स्पष्ट आदेश है कि किसानों को किसी भी प्रकार की कमी नहीं होनी चाहिए। संत रामपाल जी महाराज द्वारा भेजी गई सहायता इतनी विशाल और त्वरित थी कि गाँव वाले इसे किसी चमत्कार से कम नहीं मान रहे हैं। प्रदान की गई सामग्री का विवरण निम्न प्रकार है:

क्र.सं.सामग्री का नामविवरण/मात्रा
1पाइपलाइन8000 फुट (8 इंच चौड़ी)
2पानी की मोटर02 नग (10 एचपी क्षमता)
3स्टार्टरआवश्यकतानुसार
4स्पेयर पार्ट्सपूर्ण सेट
5अन्य एक्सेसरीजस्थापना हेतु आवश्यक सभी उपकरण

गाँव में उत्सव का माहौल और संत रामपाल जी महाराज का जयघोष

​जैसे ही संत रामपाल जी महाराज द्वारा भेजी गई राहत सामग्री से लदे वाहन गाँव की सीमा पर पहुँचे, वहाँ का माहौल पूरी तरह से बदल गया। महीनों से छाया मातम और उदासी का वातावरण एक उत्सव में तब्दील हो गया। ग्रामीणों ने ढोल-नगाड़ों के साथ संत रामपाल जी महाराज के सेवादारों का स्वागत किया। गाँव के प्रवेश द्वार पर ही ग्रामीणों ने संत रामपाल जी महाराज के चित्र पर पुष्प वर्षा की और फूल-मालाएं अर्पित कीं।

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​हर तरफ “बंदी छोड़ सतगुरु रामपाल जी भगवान की जय” के नारे गूंजने लगे। ग्रामीणों के चेहरों पर कृतज्ञता और आँखों में खुशी के आंसू स्पष्ट देखे जा सकते थे। गाँव के बुजुर्गों, युवाओं और महिलाओं ने एक स्वर में कहा कि आज तक उन्होंने ऐसा दानी नहीं देखा। वोट मांगने के समय नेता बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन संकट के समय कोई झांकने भी नहीं आता। वहीं दूसरी ओर, संत रामपाल जी महाराज ने बिना किसी राजनीतिक स्वार्थ के, केवल मानवता के नाते यह भारी भरकम मदद भेजी है।

ग्रामीणों और किसानों की प्रतिक्रियाएँ

​गाँव के सरपंच और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने इस सहायता के लिए संत रामपाल जी महाराज का कोटि-कोटि धन्यवाद किया। सरपंच जी ने कहा, “हमने उम्मीद लगाई थी कि हफ्ता-दस दिन लगेगा, लेकिन संत रामपाल जी महाराज की कृपा से दूसरे-तीसरे दिन ही 8000 फुट पाइप और मोटरें हमारे गाँव में पहुँच गईं। हमारा कोई खर्चा नहीं हुआ और न ही हमें बार-बार चक्कर काटने पड़े। यह हमारे लिए भगवान के आशीर्वाद जैसा है।”

​गाँव के बुजुर्ग कपूर डबास जी ने भावुक होकर कहा, “संत रामपाल जी महाराज की उम्र लंबी हो। आज के समय में ऐसे महापुरुष ही भगवान का रूप हैं। हमारे गाँव के कई किले (एकड़) जमीन पानी में डूबी थी, लेकिन अब हमें पूरी राहत मिलेगी।”

​एक अन्य ग्रामीण मुकेश जी ने इसे एक महान सामाजिक और धार्मिक कार्य बताया। उन्होंने कहा कि यदि यह मदद नहीं मिलती तो किसान पूरी तरह बर्बाद हो जाता। गाँव की एक बुजुर्ग महिला (ताई जी) ने कहा, “सरकार और नेताओं ने हमें निराश किया, लेकिन संत रामपाल जी महाराज ने हमारे बच्चों के भविष्य और हमारी रोजी-रोटी को बचा लिया। अब पानी निकल जाएगा और हम फसल बो सकेंगे। संत रामपाल जी महाराज हमारे लिए देवता समान हैं।”

​ग्रामीणों ने बताया कि संत रामपाल जी महाराज के अनुयायी (सेवादार) न केवल सामान लेकर आए, बल्कि उन्होंने यह सुनिश्चित करने का भी बीड़ा उठाया कि यह सिस्टम सही ढंग से काम करे।

संत रामपाल जी महाराज का संदेश और भविष्य की योजना

​राहत सामग्री सौंपते समय, संत रामपाल जी महाराज के सेवादारों ने ग्राम पंचायत के सामने गुरुजी का संदेश भी पढ़कर सुनाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि संत रामपाल जी महाराज का उद्देश्य केवल दिखावा करना नहीं, बल्कि धरातल पर काम करना है। उन्होंने पंचायत को एक निवेदन पत्र भी सौंपा, जिसमें कुछ महत्वपूर्ण बातें कही गई थीं:

  1. समयबद्ध कार्य: यह सामग्री इसलिए दी गई है ताकि निर्धारित समय पर पानी निकाला जा सके और अगली फसल की बुवाई हो सके। यदि पानी नहीं निकला और बिजाई नहीं हुई, तो भविष्य में ट्रस्ट द्वारा मदद नहीं दी जाएगी।
  2. पारदर्शिता: गाँव में पानी भरे होने की वीडियो ड्रोन द्वारा बनाई गई है। पानी निकलने के बाद और फिर फसल लहलहाने पर दोबारा वीडियो बनाई जाएगी। यह वीडियो सभी आश्रमों और समागमों में दिखाई जाएगी ताकि दानदाताओं को पता चले कि उनके पैसे का सदुपयोग “जीवन दान” देने में हुआ है।
  3. सामूहिक जिम्मेदारी: यह 36 बिरादरी के हित का कार्य है। सभी ग्रामवासियों को मिलकर जल्द से जल्द पानी निकालना होगा।
  4. निस्वार्थ सेवा: संत रामपाल जी महाराज बाढ़ पीड़ित किसानों की मदद को सबसे बड़ा पुण्य मानते हैं। उनका मानना है कि किसान के घर चूल्हा जलेगा, तभी मजदूर के घर भी चूल्हा जल पाएगा।

सरपंच द्वारा सम्मान और आभार प्रदर्शन

​इस अद्वितीय सहायता के प्रति आभार व्यक्त करने के लिए गाँव शेखूपुर जट्ट की पंचायत ने संत रामपाल जी महाराज को सम्मानित करने का निर्णय लिया। चूँकि संत रामपाल जी महाराज स्वयं वहाँ भौतिक रूप से उपस्थित नहीं थे, इसलिए सरपंच और गाँव के मौजिज लोगों ने उनके चित्र के समक्ष नतमस्तक होकर और सेवादारों को पगड़ी पहनाकर सम्मान व्यक्त किया। उन्होंने एक स्मृति चिन्ह (Momento) भी भेंट किया, जिस पर लिखा था: “गाँव शेखूपुर जट्ट में बाढ़ राहत कार्य में सहयोग हेतु 8000 फीट 8 इंची पाइप और दो पंप सेट भेंट करने के लिए संत रामपाल जी महाराज का बहुत-बहुत आभार।”

​सेवादारों ने इस सम्मान को स्वीकार करते हुए कहा कि यह पगड़ी और सम्मान सीधे संत रामपाल जी महाराज के चरणों में समर्पित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि संत रामपाल जी महाराज के आदेश से अब तक 300 से अधिक गाँवों में ऐसी ही सेवा दी जा चुकी है और यह अभियान निरंतर जारी है।

जगतगुरु संत रामपाल जी महाराज – कलयुग में मानवता के सच्चे रक्षक

​अंत में, यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि संत रामपाल जी महाराज आज के इस दौर में मानवता के लिए एक मसीहा बनकर उभरे हैं। जहाँ एक ओर प्राकृतिक आपदाओं से किसान और मजदूर वर्ग त्रस्त है, वहीं संत रामपाल जी महाराज बिना किसी भेदभाव, बिना किसी राजनीतिक लाभ और बिना किसी विलंब के उनकी सहायता कर रहे हैं। शेखूपुर जट्ट की घटना यह सिद्ध करती है कि संत रामपाल जी महाराज केवल आध्यात्मिक ज्ञान ही नहीं दे रहे, बल्कि समाज को एक नई दिशा भी दिखा रहे हैं। 

उनकी यह परोपकारी मुहिम, जिसे ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ के तहत नहीं बल्कि सीधे उनके आदेश और आशीर्वाद के रूप में देखा जाना चाहिए, यह सुनिश्चित कर रही है कि कोई भी व्यक्ति भूख या अभाव में न रहे। संत रामपाल जी महाराज की यह दयालुता और दूरदर्शिता उन्हें वास्तव में “जगतगुरु” और “बंदी छोड़” की उपाधि का सच्चा अधिकारी सिद्ध करती है। उनका यह कार्य न केवल हरियाणा बल्कि पूरे विश्व के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण है।​बंदी छोड़ सतगुरु रामपाल जी भगवान की जय हो!

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