क्या आम और क्या खास, पंचायतों के जनसैलाब से लेकर देश के प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय पहलवानों, प्रशासनिक अधिकारियों, पत्रकारों और सैन्य अधिकारियों तक हर वर्ग संत रामपाल जी महाराज के जन-कल्याणकारी कार्यों के आगे नतमस्तक है।
मंगाली (हिसार) की 6 पंचायतों का उमड़ा सैलाब
व्यापक जनसेवा की सराहना और गौशाला को मदद का आश्वासन
हरियाणा के तीसरे सबसे बड़े गांव मंगाली (हिसार) से एक विशाल प्रतिनिधिमंडल सतलोक आश्रम पहुंचा। इस ऐतिहासिक मुलाकात में 6 पंचायतों के प्रतिनिधि, 5 वर्तमान सरपंच, 5 पूर्व सरपंच, संयुक्त गौशाला के प्रधान और भारी संख्या में ग्रामीण शामिल थे। इन सभी ने एक स्वर में संत रामपाल जी महाराज द्वारा किसानों, गरीबों और जल-निकासी (बाढ़ राहत) के लिए किए गए निस्वार्थ कार्यों की भूरि-भूरि प्रशंसा की और उनका आभार व्यक्त किया। इसी दौरान, 8 गांवों की संयुक्त गौशाला (जिसमें लगभग 1600 गायें हैं) के प्रधान ने सूखे चारे की मदद के लिए एक लिखित अर्जी भी सौंपी। संत रामपाल जी ने अत्यंत सहजता से उनकी अर्जी स्वीकार करते हुए तुरंत “काम हुआ समझो” कहा और गौशाला के लिए चारे व पानी की पूरी व्यवस्था करने का पक्का आश्वासन दिया।
सुन्दरपुर (रोहतक) के 40 राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पहलवानों ने किया संत रामपाल जी का सम्मान
रोहतक जिले के सुन्दरपुर गांव स्थित ‘महाकाल अखाड़ा’ के 40 पहलवान, कोच और पूर्व सरपंच सतलोक आश्रम पहुंचे। इस दल में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के कई पदक विजेता, भारत केसरी और आर्मी सूबेदार जैसे प्रतिष्ठित खिलाड़ी शामिल थे। बातचीत के दौरान कोच ने बताया कि वे गरीब बच्चों को खेल में आगे बढ़ाने के लिए अपनी नौकरी पर लोन लेकर ‘निःशुल्क (फ्री) अकेडमी’ चला रहे हैं। इन खिलाड़ियों ने संत रामपाल जी महाराज द्वारा किसानों, मजदूरों और बाढ़ पीड़ितों के लिए किए गए निस्वार्थ कार्यों की जमकर प्रशंसा की और उन्हें सम्मानस्वरूप पगड़ी पहनाई। संत जी ने भी इन खिलाड़ियों के निस्वार्थ जज्बे और देश का नाम रोशन करने के प्रयासों की भूरि-भूरि प्रशंसा की और कहा कि आप जैसे युवाओं से समाज सेवा का हौसला और बढ़ता है।
बाढ़ राहत पर कुम्भा (हांसी) पंचायत ने जताया अनूठा आभार
पत्रकार ने भी की जनसेवा और समानता की पुष्टि
हांसी क्षेत्र के कुम्भा गांव की ग्राम पंचायत और ग्रामीणों ने सतलोक आश्रम पहुंचकर संत रामपाल जी महाराज से विशेष मुलाकात की। प्राकृतिक आपदा (जलभराव) के समय पाइप भेजकर की गई त्वरित सहायता के प्रति कृतज्ञता प्रकट करते हुए, ग्रामीणों ने संत जी को एक विशेष फोटो फ्रेम भेंट कर सम्मानित किया, जिसमें उन्हें ट्रैक्टर पर पाइप ले जाते हुए दर्शाया गया था। इस प्रतिनिधिमंडल में ‘टोटल खबर हरियाणा’ के एक पत्रकार भी शामिल थे, जिन्होंने बताया कि उन्होंने महम और बरवाला सहित कई क्षेत्रों में संत जी के राहत कार्यों (पानी-भोजन की व्यवस्था और रातों-रात मकान बनवाने) की ग्राउंड रिपोर्टिंग की है। पत्रकार ने आश्रम के जाति-धर्म मुक्त और भेदभाव रहित माहौल की जमकर प्रशंसा की और बताया कि जिन लोगों को यह मदद मिली है, उनके लिए संत जी साक्षात भगवान के समान हैं। संत रामपाल जी ने अत्यंत विनम्रता से इस सम्मान को स्वीकारते हुए स्वयं को केवल एक ‘सेवक’ बताया और पत्रकार से समाज को यही सच्चाई दिखाते रहने का आग्रह किया।
आईपीएस (IPS) अधिकारी के परिवार ने की जनसेवा की सराहना: संत रामपाल जी ने दिया शास्त्र-प्रमाणित सत्यभक्ति का संदेश
गुड़गांव के एक आईपीएस (IPS) अधिकारी के भाई, देवेंद्र लोचब, अपने पूरे परिवार के साथ सतलोक आश्रम पहुंचे। उन्होंने संत रामपाल जी महाराज के अद्भुत समाज सेवा कार्यों (विशेषकर किसानों और जल संकट से जूझते गांवों के उत्थान) की जमकर प्रशंसा करते हुए कहा कि जो कार्य आज तक कोई सरकार या अन्य बड़े आश्रम नहीं कर सके, वह संत जी ने कर दिखाया है। बातचीत के दौरान जब परिवार ने कहा कि वे भविष्य में सभी सदस्यों के साथ मिलकर दीक्षा (‘नाम’) लेना चाहते हैं, तो संत रामपाल जी ने उन्हें कबीर साहेब की प्रसिद्ध वाणी “काल करे सो आज कर…” याद दिलाते हुए तुरंत भक्ति शुरू करने की सलाह दी, क्योंकि काल (मृत्यु) का कोई भरोसा नहीं है। संत जी ने स्पष्ट किया कि उनके मिशन और विशाल समाज सेवा की अपार सफलता का एकमात्र कारण यही है कि उनकी बताई गई भक्ति पूर्णतः शास्त्रों पर आधारित है, जो समाज के हर दुख की ‘असली दवा’ है।
पंजाब के वकीलों का आभार: सूचना के महादान से जनसेवा में भागीदारी
रोपड़ (पंजाब) से एडवोकेट वैशाली सैनी और अन्य वकीलों ने सतलोक आश्रम पहुंचकर संत रामपाल जी महाराज से विशेष मुलाकात की। यह वही जागरूक समूह है जिन्होंने पिछले वर्ष रोपड़ में आई भीषण बाढ़ के समय आश्रम को प्रभावित इलाकों की सटीक जानकारी (सर्वे) दी थी, जिसके आधार पर आश्रम की तरफ से 250 से 300 राहत किटें और जल-निकासी की मदद तुरंत पहुंचाई गई थी। बातचीत के दौरान बताया गया कि इन्हीं वकीलों की सूचना के आधार पर ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ के तहत 5 अत्यधिक गरीब परिवारों को भी गोद लिया गया है, जिनकी पूरी जिम्मेदारी अब आश्रम उठा रहा है। यह मुलाकात इस बात का उत्कृष्ट उदाहरण है कि संत रामपाल जी महाराज गैर-अनुयायियों से कोई आर्थिक दान (चंदा) स्वीकार नहीं करते, लेकिन वे आम जनता को ‘सूचना और जानकारी के महादान’ के जरिए इस विशाल जन-कल्याणकारी मिशन में भागीदार बनने के लिए हमेशा प्रेरित करते हैं।
हिसार से रिटायर्ड आर्मी मेजर का आभार: संत रामपाल जी के कार्यों को बताया समाज के लिए प्रेरणा
हिसार (मूल रूप से गोहाना, सोनीपत के मदीना गांव) के एक रिटायर्ड आर्मी मेजर जयभगवान ने सतलोक आश्रम पहुंचकर संत रामपाल जी महाराज से विशेष मुलाकात की। मेजर जयभगवान ने बताया कि उन्होंने यूट्यूब और सोशल मीडिया पर संत जी द्वारा किए जा रहे किसानों और मजदूरों की मदद के व्यापक कार्यों (जैसे बाढ़ राहत, अन्नपूर्णा मुहिम आदि) के वीडियो देखे थे। इन वीडियोज में जन-कल्याण के कार्यों को देखकर वे इतने प्रभावित हुए कि उनसे रहा नहीं गया और वे स्वयं आश्रम आकर संत जी का आभार व्यक्त करने पहुंचे। पूर्व सैन्य अधिकारी ने संत रामपाल जी की निस्वार्थ समाज सेवा की जमकर सराहना की और कहा कि समाज में जिस स्तर पर वे दुखियों की मदद कर रहे हैं, वह अत्यंत प्रशंसनीय है। संत जी ने भी उनका गर्मजोशी से स्वागत करते हुए कहा कि वे हर संभव कोशिश करके समाज के दुखों को दूर करने का प्रयास करते रहेंगे।
काकड़ौद (जींद) की गौशाला के प्रधान का आभार: जनसेवा को बताया “आध्यात्मिक पुनर्वास” (Spiritual Rehabilitation)
हाल ही में हरियाणा के जींद जिले (गांव काकड़ौद) की गौशाला के प्रधान रामस्वरूप चौधरी और उनके साथियों ने सतलोक आश्रम पहुंचकर संत रामपाल जी महाराज से विशेष मुलाकात की। इस भेंट का मुख्य उद्देश्य संत जी द्वारा समाज के लिए किए जा रहे विशाल कल्याणकारी कार्यों की प्रशंसा करना और उनका हौसला बढ़ाना था। प्रधान ने संत रामपाल जी के कार्यों की जमकर सराहना करते हुए इसे समाज के लिए एक “स्पिरिचुअल रिहैबिलिटेशन” (Spiritual Rehabilitation) यानी ‘आध्यात्मिक पुनर्वास’ बताया। (आध्यात्मिक पुनर्वास का अर्थ है समाज को उसकी नैतिक, वैचारिक और आध्यात्मिक गिरावट से बाहर निकालकर सत्य, परोपकार और इंसानियत के सही मार्ग पर फिर से स्थापित करना।) प्रधान ने संत जी को इस परमार्थ के मार्ग पर निरंतर आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया और कहा कि जगत के कल्याण के लिए उनका आशीर्वाद हम सब पर बना रहे।
कैथल के 4 अनाथ बच्चों को लिया गोद, बोले— “बैठाकर खिलाऊंगा और घर बनाऊंगा”
कैथल जिले के गुलियाना गांव के सरपंच और कुछ ग्रामीण एक अत्यंत मार्मिक समस्या लेकर सतलोक आश्रम पहुंचे। सरपंच ने संत रामपाल जी महाराज को 4 ऐसे मासूम बच्चों के बारे में बताया जिनके माता-पिता का साया उठ चुका है। फिलहाल उनकी ताई उनकी देखभाल कर रही हैं, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण उनका गुजारा बेहद मुश्किल हो रहा था। सरपंच ने आश्रम की ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ के तहत इन बच्चों की मदद की गुहार लगाई। यह सुनते ही संत रामपाल जी ने स्वयं उस ताई और सबसे बड़ी अनाथ बच्ची से बात की और उनका हौसला बढ़ाते हुए कहा, “बेटी चिंता मत कर, मैं तुम्हें पढ़ाऊंगा-लिखाऊंगा, बैठाकर खिलाऊंगा (राशन की पूरी व्यवस्था) और तुम्हारा मकान भी बनवाऊंगा।” एक तरह से संत रामपाल जी ने पूरे परिवार को गोद लेते हुए उनके सुरक्षित भविष्य की सम्पूर्ण जिम्मेदारी अपने कंधों पर ले ली।
सुकृत और बंदगी
संत रामपाल जी महाराज का मिशन मात्र कोरे उपदेशों तक सीमित नहीं है, यह ‘सुकृत’ (परोपकार व समाज सेवा) और ‘बंदगी’ (शास्त्र अनुकूल सत्यभक्ति) का एक व्यावहारिक और जीवंत स्वरूप है। एक ओर जहाँ उनका ज्ञान मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है, वहीं उनकी “अन्नपूर्णा मुहिम”, जल राहत कार्य और गौ-सेवा समाज में “आध्यात्मिक पुनर्वास” ला रही है। खेल जगत के दिग्गजों से लेकर न्यायपालिका, प्रशासन और गांवों की पंचायतों तक, समाज का हर वर्ग आज इस बात का साक्षी है कि सत्यभक्ति की जो मिसाल यहाँ पेश की जा रही है, वह पूरे विश्व के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण है।



