भारत वर्ष में गौ सेवा को सर्वोच्च धर्म माना जाता है, लेकिन भयंकर सूखे और कठोर मौसम में हजारों गायों का पेट भरना और उन्हें आश्रय देना किसी भी गौशाला कमेटी के लिए एक पहाड़ जैसी चुनौती होती है। जब राजस्थान के तपते इलाकों में बेजुबान गायें भूख से तड़प रही थीं और हरियाणा में खुले आसमान के नीचे मौसम की मार झेल रही थीं, तब संत रामपाल जी महाराज ने स्वयं एक मसीहा (रक्षक) के रूप में कदम आगे बढ़ाया। चूरू (राजस्थान) की दो बड़ी गौशालाओं में हजारों क्विंटल चारा भेजने से लेकर हिसार (हरियाणा) में विशाल शेड बनवाने तक, उन्होंने सिद्ध कर दिया है कि सच्ची करुणा की कोई भौगोलिक सीमा नहीं होती। आइए पढ़ते हैं इंसानियत और निस्वार्थ गौ-सेवा की यह अद्भुत महा-रिपोर्ट:
गांव भनीण (चूरू, राजस्थान): “मांगने गए थे चारा, बिना मांगे मिला शेड”
राजस्थान के चूरू जिले (तहसील चूरू) के गांव भनीण में स्थित गौशाला में करीब 750 गौवंश आश्रय लिए हुए हैं। शुष्क क्षेत्र होने के कारण यहाँ पशुओं के लिए हर महीने लगभग 1500 क्विंटल सूखे चारे की भारी आवश्यकता थी। चारे की कमी के कारण 750 गायों का पेट भरना मुश्किल हो गया था।
दिव्य सेवा:
इस भारी संकट के बीच, गौशाला कमेटी के सदस्य संत रामपाल जी महाराज के पास मदद मांगने सतलोक आश्रम (धनाना धाम) पहुंचे। संत रामपाल जी महाराज ने बिना किसी देरी के उनकी अर्जी स्वीकार की। उनके आदेश से मात्र 3-5 दिनों के भीतर 25 से 30 ट्रकों का विशाल काफिला 1500 क्विंटल सूखा चारा लेकर भनीण गांव पहुंच गया। सबसे बड़ी बात यह थी कि कमेटी ने संकोचवश शेड की कोई मांग नहीं की थी, लेकिन गौवंश की स्थिति देखकर संत रामपाल जी महाराज ने स्वयं अपनी तरफ से गौशाला को एक नया विशाल शेड देने का वादा भी किया।
ग्रामीणों की प्रतिक्रिया:
- “आज तक दरबारों में सिर्फ लेने वाले देखे हैं, लेकिन खुद गौशालाओं में मदद भेजने वाले ऐसे भगवान रूपी संत पहली बार देखे हैं।”
- “हमें इतनी खुशी हो रही है कि हम स्वागत के लिए सुबह 4 बजे ही उठ गए थे। 750 गाय जो भूखी मर रही थीं, अब धाप के खाएंगी और मस्त रहेंगी।”
गांव कैलाश (चूरू, राजस्थान): मात्र 48 घंटे में 1000 क्विंटल चारे की महासहायता
चूरू जिले के ही कैलाश गांव की गौशाला में कम बारिश और सूखे के गंभीर हालातों के कारण करीब 250 से 300 गौवंश के चारे को लेकर भारी संकट बना हुआ था। इस विकट परिस्थिति में गांव के 20-30 ग्रामीणों का प्रतिनिधिमंडल धनाना धाम पहुंचा।
दिव्य सेवा:
ग्रामीणों की पुकार पर संत रामपाल जी महाराज ने तुरंत संज्ञान लिया और सर्वे करवाया। आवश्यकता की पुष्टि होते ही उन्होंने मात्र 48 घंटे के भीतर 20 गाड़ियों के माध्यम से 1000 क्विंटल सूखा चारा सीधे गांव कैलाश की गौशाला में सुरक्षित पहुंचा दिया। इस त्वरित मदद से महीनों का सूखा और अकाल का भय एक झटके में समाप्त हो गया।
ग्रामीणों की प्रतिक्रिया:
- “सतलोक आश्रम की व्यवस्था देखकर हमारे बुजुर्गों ने कहा कि हम कहीं नहीं जाएंगे, यहीं रहेंगे। वहां सिर्फ तारीख या आश्वासन नहीं दिया जाता, बल्कि सीधी कार्रवाई होती है।”
- “हमने कभी नहीं सोचा था कि हरियाणा से संत आएंगे और गायों के लिए इतनी बड़ी चारे की व्यवस्था कर देंगे। जब आंखों से देखा, तो पूरा विश्वास हो गया कि ऐसा केवल भगवान ही कर सकता है।”
- “गुरु जी यदि हमें आदेश देंगे कि कैलाश गांव से 1,000 आदमी चाहिए, तो हम अपने टूटे-फुटे साधनों के साथ उनके परमार्थ कार्यों में उपस्थित हो जाएंगे, यही हमारा प्रण है।”
गांव गुराना, हिसार (हरियाणा): हथेली पर सरसों उगा दी, मात्र 15 दिनों में 150×50 फीट का विशाल शेड
हिसार जिले के गांव गुराना में स्थित ‘राष्ट्रीय गौ संस्थान’ पूरे नौ गांवों की एक सर्वजातीय गौशाला है। यहाँ सबसे बड़ी समस्या सुरक्षित आश्रय (शेड) की थी। तेज धूप, कड़कड़ाती सर्दी, या भारी बरसात में हजारों गायों को मजबूरी में खुले आसमान के नीचे खड़ा रहना पड़ता था। पुरानी टीन शेड पर क्षमता से बहुत अधिक दबाव था।
दिव्य सेवा:
गौशाला कमेटी, पंचायत प्रतिनिधि और खाप के जिम्मेदार लोग संत रामपाल जी महाराज के समक्ष मदद की गुहार लेकर पहुंचे। उन्होंने तुरंत अपनी टीम को सर्वे का आदेश दिया और अगले ही दिन 150 फीट लंबे और 50 फीट चौड़े (150×50 ft) एक अत्यंत विशाल और मजबूत शेड का निर्माण कार्य शुरू करवा दिया। जो काम सरकारी फाइलों में महीनों अटका रहता है, उसे संत रामपाल जी ने मात्र 10 से 15 दिनों के भीतर पूरा करवाकर ग्राम पंचायत को सौंप दिया।
गुराना गौशाला में आया बदलाव:
| विशेषता | पहले | संत रामपाल जी महाराज की कृपा के बाद |
| गौवंश का आश्रय | हजारों गायें खुले आसमान के नीचे बिना छत के खड़ी रहती थीं। | 150×50 फीट का विशाल, मजबूत और पक्का शेड बन गया। |
| मौसम की मार | गर्मी, सर्दी और भारी बरसात में गायें तड़पती और सिकुड़ती थीं। | अब गौवंश पूरी तरह से सुरक्षित है और उनके लिए स्थायी आश्रय है। |
ग्रामीणों की प्रतिक्रिया:
- “हमारे हरियाणा में एक कहावत है कि हथेली पर सरसों नहीं जमती। लेकिन संत जी ने 10 दिन के अंदर शेड पूरा करके उस कहावत को सिद्ध कर दिया कि हथेली पर सरसों उग सकती है!”
- “जब हम गए थे तो एक शेड की मांग की थी, महाराज जी ने कहा ‘एक बनवाना है एक बनवाओ, तीन बनवाने हैं तीन बनवाओ’।”
सुकृत और बंदगी
राजस्थान की रेतीली भूमि पर 2500 क्विंटल चारे की महासहायता से लेकर हरियाणा के मैदानों में 150×50 फीट के विशाल शेड का निर्माण, संत रामपाल जी महाराज के अतुलनीय परोपकार (सुकृत) का एक जीता-जागता और प्रत्यक्ष प्रमाण है। वे केवल सत्य आध्यात्मिक ज्ञान (बंदगी) तक सीमित नहीं हैं; वे समाज के हर शोषित और बेसहारा वर्ग के दुखों को धरातल पर उतरकर जड़ से मिटा रहे हैं। जहाँ बड़े-बड़े पूंजीपति, संस्थाएँ और सरकारें केवल कागजी दावे करती हैं, वहीं संत रामपाल जी महाराज मात्र 48 घंटों में फाइल पास करके बिना मांगे ही गौशालाओं को भर रहे हैं। उनका यह निस्वार्थ ‘गौ सुरक्षा अभियान’ यह सिद्ध करता है कि एक पूर्ण संत ही इस दुनिया का सबसे बड़ा दाता और मानवता का सच्चा रक्षक होता है।



