हरियाणा के भोजराज गाँव में भी पहुँची संत रामपाल जी महाराज की राहत 

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हरियाणा बाढ़: हरियाणा के हिसार जिले के भोजराज गाँव में आई भीषण बाढ़ ने गाँव के किसानों को गहरे संकट में डाल दिया था। खेतों में चार से छह फुट तक पानी भर जाने से लगभग 80 से 90 प्रतिशत फसलें बर्बाद हो गईं और किसान प्रति एकड़ एक लाख रुपये तक के कर्ज में डूब गए। सरकारी स्तर पर मदद की कोई उम्मीद नज़र नहीं आ रही थी। ऐसे में जब हर तरफ से निराशा का अंधेरा छा गया, तब गाँव के लोगों ने संत रामपाल जी महाराज के राहत अभियानों की खबरें देखीं और इसी को अंतिम उम्मीद मानकर उन्होंने सहायता की अर्जी लगाई।

संकट की घड़ी में लगाई संत रामपाल जी महाराज से गुहार 

Haryana Flood: ग्राम पंचायत भोजराज के सरपंच प्रदीप पूनिया के नेतृत्व में पूरी पंचायत ने संत रामपाल जी महाराज से सहायता की अपील की। ग्रामीणों ने बरवाला स्थित संत रामपाल जी के आश्रम में जाकर 11,000 फुट पाइप और तीन मोटर सेट की मांग की, ताकि गाँव से बाढ़ का पानी निकाला जा सके। किसी को भरोसा नहीं था कि इतनी जल्दी मदद मिलेगी, लेकिन महज़ तीन दिनों के भीतर ही संत रामपाल जी महाराज जी के आदेश पर, आश्रम की ओर से राहत सामग्री का विशाल काफिला भोजराज पहुँच गया। गाड़ियों में पाइप, मोटर, केबल और स्टार्टर सहित वह सब कुछ था जो पानी निकालने के लिए आवश्यक था।

भोजराज गाँव के लोगों ने जब गाड़ियों की कतारें देखीं तो उन्होंने कहा  “यह हमारे लिए उम्मीद का सागर है।” संत रामपाल जी महाराज के आदेशानुसार इस राहत सामग्री में तीन बड़ी 10 हॉर्स पावर की मोटरें, 11,000 फुट उच्च गुणवत्ता वाले 8 इंची पाइप, और संपूर्ण इंस्टॉलेशन सामग्री थी ताकि ग्रामीणों को किसी भी नट-बोल्ट तक की चिंता न करनी पड़े। संत रामपाल जी महाराज द्वारा प्रदान की गई राहत सामग्री ग्रामवासियों द्वारा की गई प्रार्थना से अधिक थी। यह राहत अभियान केवल भोजराज तक सीमित नहीं है। रिपोर्टों के अनुसार अब तक 200 से अधिक बाढ़-प्रभावित गाँवों में इसी तरह की सेवाएँ पहुँचाईं जा चुकी हैं, और यह अभियान लगातार जारी है।

संत रामपाल जी महाराज का संदेश : जमीनी स्तर पर उतरकर सेवा 

Haryana Flood: संत रामपाल जी महाराज के अनुयायियों का कहना है कि गुरुजी के स्पष्ट निर्देश हैं, “हमें लोक दिखावा नहीं करना, बल्कि जमीन पर काम करके दिखाना है।” इस सिद्धांत के साथ संत रामपाल जी महराज के आदेश पर सेवाकार्य करने वाले सेवादारों ने दिन-रात मेहनत कर गाँव तक सामग्री पहुँचाई। उन्होंने यह भी बताया कि सहायता केवल अस्थायी नहीं, बल्कि स्थायी समाधान के रूप में दी जा रही है ताकि भविष्य में गाँव में दोबारा ऐसी समस्या न आए।

किसान हुए कृतज्ञ, मिली समय पर राहत 

Haryana Flood: सामग्री मिलने के बाद जब सरपंच प्रदीप पूनिया से बातचीत हुई तो उन्होंने बताया कि उन्होंने तीन दिन पहले अर्जी दी थी और चौथे दिन मदद गाँव में पहुँच गई। 11,000 फुट पाइप और तीन मोटरों का जो सामान मिला, वह हमारी उम्मीद से कहीं अधिक है। पूरा गाँव संत रामपाल जी महाराज का तहे दिल से धन्यवाद करता है। किसानों ने भावुक होकर कहा कि उन्हें ऐसा लग रहा है जैसे आज ही दिवाली आ गई हो। जब कोई रास्ता नहीं दिख रहा था, तब उन्हें संत रामपाल जी महाराज के रूप में भगवान मिले।

हरियाणा से गुजरात तक संत रामपाल जी महाराज की राहत सेवा का विस्तार

Haryana Flood: संत रामपाल जी महाराज का “अन्नपूर्णा अभियान” पिछले कई महीनों से देश के विभिन्न राज्यों में जारी है। उत्तराखंड, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और गुजरात जैसे राज्यों में भी बाढ़ और आपदा के समय उन्होंने किसानों और मजदूरों तक राहत पहुँचाई है। सेवादारों के अनुसार, गुरुजी का सख्त आदेश है कि किसी भी गाँव का एक भी खेत पानी में डूबा नहीं रहना चाहिए। जब तक किसान अपनी अगली फसल बोने के काबिल न हो जाएँ, सेवा जारी रखनी है।

Also Read: बाढ़ त्रासदी के बीच संत रामपाल जी महाराज ने सिंधड़ गांव को दी नई उम्मीद

संत रामपाल जी महाराज द्वारा भेजी गई राहत सामग्री के साथ एक निवेदन पत्र भी दिया गया। उसमें लिखा गया कि अगर इस सामग्री से गाँव का पानी निर्धारित समय में नहीं निकाला गया और किसान अगली फसल की बुआई नहीं कर पाए, तो आगे से उस गाँव को सहायता नहीं दी जाएगी। यह पत्र इस उद्देश्य से दिया गया ताकि ग्रामीण इस सामग्री का सही उपयोग करें और सामूहिक रूप से गाँव से पानी बाहर निकालने में जुटें। इसके साथ ही यह भी कहा गया कि आश्रम द्वारा गाँव की ड्रोन से वीडियोग्राफी की जानी है एक वीडियो पानी भरने से पहले, दूसरी पानी निकलने के बाद और तीसरी जब नई फसल लहराएगी। इन वीडियो को देशभर के आश्रमों में दिखाया जाएगा ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास दृढ़ किया जा सके।

प्रशासन से पहले पहुँची सेवा

Haryana Flood: गाँव के कई किसानों ने बताया कि जब उन्होंने प्रशासन से मदद की गुहार लगाई, तो उन्हें केवल दो मोटरें दी गईं और कहा गया कि “अब कुछ और नहीं मिल सकता।” लेकिन 1500 किलों में फैले डूब चुके खेतों से पानी निकालने के लिए यह नाकाफी था। संत रामपाल जी महाराज के आश्रम से मिली सहायता के बाद किसानों को वह सब कुछ मिला जो उन्हें पानी निकालने के लिए चाहिए था। एक किसान ने कहा कि प्रशासन ने महीना बीत जाने पर भी कुछ नहीं किया। लेकिन संत रामपाल जी महाराज ने तीन दिन में हमारी पुकार सुन ली। 

यह सचमुच अविश्वसनीय है कि संत रामपाल जी महाराज ने वो कर दिखाया है जी सरकारें नहीं कर पाईं। जहाँ नक़ली धर्मगुरु एक एक कथा करने के लिए करोड़ों रुपए लेते हैं वहीं संत रामपाल जी महाराज ने करोड़ों रुपए जनता के लिए लगा दिए। यह किसी साधारण संत की नहीं बल्कि एक पूर्ण संत की लीला है।

किसानों के चेहरे पर लौटी मुस्कान

बाढ़ से पहले तक जो किसान अपनी बर्बाद फसलों को देखकर निराश थे, वही अब फिर से खेतों की ओर उम्मीद से देख रहे हैं। खेतों से पानी निकल जाने पर अब वे जल्द ही गेहूँ की बिजाई करने की तैयारी में हैं। किसानों ने बताया कि इस मदद के बाद उन्हें अगली फसल के लिए किसी और से उधार नहीं लेना पड़ेगा। एक वृद्ध किसान ने कहा, “संत रामपाल जी महाराज ने जो किया, वह किसी सरकारी योजना से भी बड़ा काम है। अब हमें यकीन है कि हमारी धरती फिर से हरी होगी।” ग्रामवासी नई उम्मीद से पुनः कृषिकार्य कर पाएंगे। ग्रामवासियों के अनुसार गाँव का 80 प्रतिशत हिस्सा जलमग्न था जो कि संत रामपाल जी महाराज की मेहर से ही ठीक किया जा सकेगा।

मानवता सबसे बड़ा धर्म : पूर्ण संत रामपाल जी महाराज 

Haryana Flood: संत रामपाल जी महाराज ने हमेशा कहा है कि धार्मिक संस्थाओं को केवल उपदेश नहीं, बल्कि सेवा करनी चाहिए। उनके अनुयायियों का कहना है कि आश्रम में आने वाला प्रत्येक दान जनसेवा और परमार्थ में लगाया जाता है चाहे वह अन्न वितरण हो, आपदा राहत हो या शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ी सेवाएँ वहीं समाज में अन्य कथावाचकों पर कटाक्ष करते हुए ग्रामीणों ने कहा कि जो लोग कथा करने के लाखों रुपये लेते हैं, वे संकट के समय जनता के काम नहीं आते, जबकि संत रामपाल जी महाराज ने निःस्वार्थ भाव से सेवा कर यह दिखाया कि सच्ची भक्ति क्या होती है।

भविष्य के लिए स्थायी समाधान संत रामपाल जी महाराज द्वारा दी गई राहत सामग्री केवल तत्काल मदद नहीं, बल्कि भविष्य की आपदा से बचाव का स्थायी उपाय है। सरपंच ने सेवादारों ने बताया कि सभी पाइपों को जमीन में दबा दिया जाएगा ताकि भविष्य में अगर दोबारा भारी बारिश हो तो मोटर चालू होते ही पानी अपने आप बाहर निकले और खेत डूबने से बचें। गाँव के सरपंच प्रदीप पूनिया ने भरोसा दिलाया कि, “हम इस राहत सामग्री का पूरा सदुपयोग करेंगे। पाइपों को स्थायी रूप से ड्रेन तक दबाया जाएगा ताकि भविष्य में गाँव को फिर कभी ऐसी परेशानी न झेलनी पड़े।”

किसानों को मिला जीवनदान

Haryana Flood: भोजराज गाँव के ग्रामीणों ने संत रामपाल जी महाराज द्वारा भेजी गई इस सहायता को ‘किसानों के लिए वरदान’ बताया। किसान प्रशासन से मदद माँग माँग कर थक चुके थे। उन्होंने कहा कि यह केवल पाइप और मोटरों का सेट नहीं, बल्कि एक नया जीवन है। क्योंकि अगर यह मदद समय पर नहीं मिलती, तो अगली फसल की बिजाई संभव नहीं थी। गाँव के एक बुजुर्ग किसान ने भावुक होकर कहा  “अगर पानी नहीं निकलता तो हम सब खत्म हो जाते। लेकिन आज हमें नया जीवन मिला है। ये संत नहीं, भगवान हैं जो हमारी पुकार सुनकर आए।” भोजराज गाँव की यह कहानी केवल एक बाढ़ग्रस्त क्षेत्र से पानी निकालने की नहीं है, यह उम्मीद, करुणा और सामूहिक मानवता की कहानी है। 

संत रामपाल जी महाराज ने न केवल किसानों की तत्काल समस्या हल की, बल्कि उन्हें भविष्य के लिए आत्मनिर्भर बनने का रास्ता भी दिखाया। संत रामपाल जी महाराज ने अपने जीवन की आहुति जनकल्याण में दी है। उन्होंने भक्ति के अनमोल ज्ञान के साथ-साथ समय-समय पर दुख में डूबी जनता को सहारा दिया है। संत रामपाल जी भगवान एकमात्र ऐसे संत हैं जिन्होंने तन मन धन से स्वयं को समाज को समर्पित कर दिया है, समाज उनका सदैव ऋणी रहेगा।

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