राजस्थान राज्य के जिला चुरू के अंतर्गत आने वाली सिद्धमुख तहसील के गांव दुमकी में जगतगुरु संत रामपाल जी महाराज द्वारा दादा सत्ता गौ सेवा समिति (गौशाला) में दो विशाल टीन शेड का निर्माण कार्य विधिवत रूप से शुरू कर दिया गया है। यह गौशाला मुख्य रूप से दुमकी, धनोटी और न्यांगल नामक तीन गांवों का एक संयुक्त उपक्रम है, जिसमें वर्तमान में लगभग 200 गायें खुले आसमान के नीचे रहने को विवश थीं। क्षेत्र में सूखे की विकट स्थिति और ग्रामीणों की आर्थिक तंगी को देखते हुए संत रामपाल जी महाराज ने संपूर्ण खर्च स्वयं उठाते हुए 70/40 फीट के दो शेडों की नींव रखवा दी है। इस त्वरित और निस्वार्थ सहायता ने पूरे क्षेत्र के ग्रामीणों को सुखद आश्चर्य में डाल दिया है। मंगलाचरण के साथ शुरू हुए इस कार्य से ग्रामीण बेहद उत्साहित हैं और उन्होंने फूलों की माला पहनाकर तथा जय-जयकार करके अपना आभार प्रकट किया है।
ग्रामीण मदद के लिए संत रामपाल जी महाराज के पास कैसे पहुँचते हैं
दुमकी, धनोटी और न्यांगल गांव पूर्णतः सूखाग्रस्त क्षेत्र में आते हैं, जहां खेती और पशुपालन पूरी तरह से बारिश पर निर्भर है। जब दादा सत्ता गौशाला में चारे का भारी संकट गहराया, तो ग्रामीणों ने वीडियो के माध्यम से संत रामपाल जी महाराज के सत्कार्यों को देखा। इसके पश्चात गांव के प्रतिनिधि, जिनमें गौशाला के अध्यक्ष भूप सिंह थोरी भी शामिल थे, हरियाणा के जिला सोनीपत स्थित धनाना धाम पहुंचे, जहां संत रामपाल जी महाराज का आश्रम है।
ग्रामीणों ने वहां जाकर अपनी समस्या रखी। उनकी मूल योजना केवल 100 से 200 क्विंटल सूखे चारे (तूड़े) की प्रार्थना करने की थी, ताकि तत्कालीन संकट टल सके। परंतु उनकी प्रार्थना पर संत रामपाल जी महाराज ने तत्काल संज्ञान लिया और बिना किसी लंबी प्रक्रिया के 250 क्विंटल चारा तुरंत मंजूर कर दिया। ग्रामीणों का स्पष्ट रूप से कहना है कि अदालत में न्यायाधीश से न्याय मांगने पर केवल तारीख पर तारीख मिलती है, परंतु संत रामपाल जी महाराज के दरबार में कोई तारीख नहीं मिलती, वहां सीधा न्याय और त्वरित समाधान मिलता है।
दादा सत्ता गौशाला में टीन शेड निर्माण का विस्तृत विवरण और गुणवत्ता
संत रामपाल जी महाराज द्वारा स्वीकृत किए गए दोनों शेड आकार में 70/40 फीट के हैं। इस पूरे निर्माण कार्य में लगभग 45 से 50 लाख रुपये की लागत आने का अनुमान है, जिसका पूरा आर्थिक भार पूर्ण रूप से संत रामपाल जी महाराज स्वयं उठा रहे हैं। निर्माण कार्य में किसी भी प्रकार की कोई कमी नहीं रखी जा रही है।
शेड की छत के लिए टाटा कंपनी की उच्च गुणवत्ता वाली ओरिजिनल चादरों का उपयोग किया जा रहा है। निर्माण की नींव को मजबूती प्रदान करने के लिए जमीन में 5 फीट गहरे गड्ढे खोदे गए हैं। उन गड्ढों में 5/5 फीट का बेस (फर्श) डालकर उसके ऊपर 18/18 इंच के पिलर उठाए जा रहे हैं। इन पिलरों में 1 इंच मोटाई के 4 भारी बोल्ट लगाए जाएंगे, जिन पर शेड की पाइप रखी जाएगी। आमतौर पर ऐसे शेड के लिए 6 इंच के पिलर उपयोग होते हैं, लेकिन यहां 9 इंच के अत्यंत भारी पिलर (जिनका अनुमानित वजन 110 से 115 किलो है) स्थापित किए जा रहे हैं। हरियाणा में बन रहे शेडों की ऊंचाई प्रायः 18 फीट रखी जाती है, परंतु दुमकी गौशाला समिति की विशेष मांग के अनुसार इन शेडों की ऊंचाई 13 फीट निर्धारित की गई है।
सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि निर्माण करने वाली पूरी तकनीकी टीम और मजदूर संत रामपाल जी महाराज द्वारा ही नियुक्त किए गए हैं। यह टीम ग्रामीणों से पीने का पानी तक नहीं लेती है; वे अपना भोजन और पानी का कैंपर स्वयं साथ लेकर आए हैं, ताकि गांव वालों पर किसी भी प्रकार का आर्थिक या शारीरिक बोझ न पड़े।
पूर्व में दी गई सहायता और चारे की निरंतर आपूर्ति
टीन शेड के इस विशाल निर्माण से पूर्व भी संत रामपाल जी महाराज ने इस गौशाला की अभूतपूर्व मदद की है। जब ग्रामीणों ने पहली बार धनाना धाम जाकर चारे के लिए गुहार लगाई थी, तब संत रामपाल जी महाराज ने 250 क्विंटल सूखा चारा तत्काल प्रभाव से उपलब्ध करवाया था। इसके कुछ समय पश्चात, जब चारे की पुनः आवश्यकता पड़ी, तो दूसरी बार प्रार्थना करने पर संत रामपाल जी महाराज ने फिर से 250 क्विंटल चारा गांव भिजवाया। इस निरंतर मिल रही सहायता के कारण अब तीनों गांवों के निवासियों को इस बात की कोई चिंता नहीं है कि अकाल या सूखा पड़ने की स्थिति में उनकी गायों का भरण-पोषण कैसे होगा।
संत रामपाल जी महाराज द्वारा प्रदान की गई सहायता का तथ्यात्मक विवरण
| विवरण का विषय | संबंधित आंकड़े और जानकारी |
| राज्य / जिला / तहसील | राजस्थान / चुरू / सिद्धमुख |
| संबंधित गांव | दुमकी, धनोटी और न्यांगल |
| गौशाला का नाम | दादा सत्ता गौ सेवा समिति, दुमकी |
| गायों की संख्या | लगभग 200 गायें |
| शेड की संख्या और आकार | 2 शेड (प्रत्येक 70/40 फीट) |
| कुल अनुमानित लागत | 45 से 50 लाख रुपये |
| पिलर का आकार और वजन | 9 इंच चौड़ाई, वजन लगभग 110-115 किलो |
| शेड की ऊंचाई | 13 फीट (गौशाला समिति की मांग पर) |
| पूर्व में दिया गया सूखा चारा | 250 क्विंटल (दो बार) |
ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के विचार और स्पष्ट प्रतिक्रियाएं
इस निस्वार्थ सेवा को देखकर दुमकी और आसपास के ग्रामीण संत रामपाल जी महाराज को भगवान के समतुल्य मान रहे हैं। दादा सत्ता गौ सेवा समिति के अध्यक्ष भूप सिंह थोरी ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि जब वे पहली बार आश्रम गए थे, तो उन्हें इतनी बड़ी सहायता की कोई उम्मीद नहीं थी। आज वे गर्व से कह सकते हैं कि उनकी गौशाला बिना किसी बाधा के सुचारू रूप से चलेगी।
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता और ‘सिद्धमुख की आवाज’ नामक फेसबुक पेज के संचालक भरत सिंह ने इस पूरे घटनाक्रम को एक चमत्कार की संज्ञा दी। उन्होंने बताया कि हम केवल थोड़ी सहायता की उम्मीद से गए थे, लेकिन संत रामपाल जी महाराज ने बिना किसी लागत की परवाह किए तुरंत दो शेड पास कर दिए। भरत सिंह ने समाज में फैले पाखंड पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि वर्तमान समय में कुछ कथावाचक एक दिन की कथा के 20 से 25 लाख रुपये वसूलते हैं और भोली-भाली जनता को मोह-माया छोड़ने का उपदेश देते हैं। इसके ठीक विपरीत, संत रामपाल जी महाराज प्रतिदिन करोड़ों रुपये केवल समाज सेवा, शेड निर्माण और गौ रक्षा में लगा रहे हैं।
भरत सिंह ने यह भी स्पष्ट किया कि संत रामपाल जी महाराज ने सभी धर्मगुरुओं को वेदों और धर्मशास्त्रों के आधार पर ज्ञान चर्चा करने के लिए 50 लाख रुपये का खुला चैलेंज (इनाम) दे रखा है, जिसे स्वीकार करने का साहस किसी भी पाखंडी कथावाचक में नहीं है क्योंकि उनके पास वास्तविक आध्यात्मिक ज्ञान का अभाव है।
कार्य की प्रगति और आगामी समय सीमा
वर्तमान में गौशाला परिसर में जेसीबी की मदद से जमीन की पैमाइश और गड्ढे खोदने का कार्य तेज गति से चल रहा है। निर्माण कार्य में लगी टीम का स्पष्ट लक्ष्य है कि अगले 15 से 20 दिनों के भीतर दोनों शेड पूरी तरह से तैयार करके गौशाला समिति को हस्तांतरित कर दिए जाएंगे। इस पूरी प्रक्रिया में गांव वालों का कोई भी हस्तक्षेप या लागत नहीं है।
जगत उद्धारक संत रामपाल जी महाराज: कलयुग में साक्षात तारणहार और उनके अद्वितीय सत्कार्य
संत रामपाल जी महाराज द्वारा पूरे देश, विशेषकर हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में, गौ रक्षा अभियान के तहत जो ऐतिहासिक कार्य किए जा रहे हैं, वे कलयुग के इस अंधकारमय समय में सतयुग की स्थापना का प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। एक ऐसे दौर में जब लोग बिना स्वार्थ के एक कदम भी नहीं चलते और अच्छे कार्यों का भी विरोध होता है, वहां संत रामपाल जी महाराज करोड़ों रुपये खर्च करके बेसहारा और मूक पशुओं के लिए विश्व स्तरीय आश्रय और भोजन की व्यवस्था कर रहे हैं।
दुमकी गांव का यह शेड निर्माण केवल ईंट और लोहे का ढांचा नहीं है, बल्कि यह इस बात का सर्वोच्च प्रतीक है कि जब एक पूर्ण संत समाज कल्याण का बीड़ा उठाता है, तो कोई भी समस्या बड़ी नहीं रहती। संत रामपाल जी महाराज के यह निस्वार्थ कार्य यह अकाट्य रूप से सिद्ध करते हैं कि वे वास्तव में धरती पर एक सच्चे तारणहार की भूमिका निभा रहे हैं। उनकी असीम दया और करुणा के कारण आज हजारों गायों को नया जीवनदान मिल रहा है और अकाल की मार झेल रहे असहाय किसानों को एक मजबूत संबल प्राप्त हुआ है। धर्म की सच्ची नींव रखने वाले संत रामपाल जी महाराज के इन अद्वितीय सत्कार्यों की जितनी भी प्रशंसा की जाए, वह कम है।



