संत रामपाल जी महाराज जी का ज्ञान अन्य संतों व धर्मगुरुओं से भिन्न कैसे है?

spot_img

आज हम जानेंगे कि संत रामपाल जी महाराज जी के ज्ञान का क्या आधार है और यह अन्य संतों से भिन्न क्यों हैं? पूर्ण संत की क्या पहचान हैं? वर्तमान में पूर्ण संत कौन हैं जिसकी शरण में जाने से हमारा मोक्ष होगा ? संत रामपाल जी ने प्रत्येक बात पर शास्त्रों का हवाला दिया है आइये विस्तार से जानें। 

क्या है अन्य सन्तों का ज्ञान

सन्त रामपाल जी महाराज जी को छोड़कर अन्य सभी सन्तों का ज्ञान मात्र अंधविश्वास और पाखंड तक सीमित है। सभी सन्त, धर्मगुरु, कथावाचक मात्र पुराणों में लिखी कहानियाँ दोहराते हैं किन्तु उससे शिक्षा क्या मिल रही है इस पर ज़ोर नहीं देते हैं। आज तक के इतिहास में कभी किसी भागवत कथावाचक द्वारा श्रीमद्भगवद्गीता खोलकर नहीं दिखाई गई और न ही उसमें वर्णित श्लोकों का अर्थ बताया गया। सभी धर्मगुरु केवल उपवास और राशियों, ग्रह एवं नक्षत्रों के ऊपर बल देते हैं। मोक्ष के विषय में न उनके पास स्वयं कोई ज्ञान है और न ही वे इसके विषय में कुछ भी बोल पाते हैं। सभी सन्त ब्रह्मा, विष्णु, महेश और अन्य सभी देवी देवताओं की भक्ति के विषय में बताते हैं। जबकि सन्त रामपाल जी महाराज ने एक सही तरीका और सही भक्ति से लोगों को अवगत कराया है। 

समस्या केवल यह नहीं है कि अन्य धार्मिक गुरु दिखावे पर बल देते हैं और सही भक्ति विधि से जनता को वंचित रखते हैं बल्कि सबसे बड़ी समस्या यह है कि वे शास्त्रों यथा वेदों, पुराणों, गीता में वर्णित साधनओं और ज्ञान से विपरीत ज्ञान बताते हैं। जानें कैसे?

  • गीता अध्याय 6 श्लोक 16 में व्रत, उपवास, जागरण वर्जित है। किन्तु सभी धार्मिक गुरु व्रत करने पर बल देते हैं। वे बताते हैं व्रत कैसे, किस विधि से, किस मुहूर्त में करें।
  • भगवतगीता में तप करना स्पष्ट रूप से मना है। अध्याय 17 के श्लोक 5 से 6 में तप करने सम्बंधी वर्जना स्पष्ट है। साथ ही तप करने वाले पाखंडी और दम्भी कहे गए हैं।
  • ब्रह्मा विष्णु शिव जी की उपासना श्रीमद्भगवद्गीता में वर्जित है। फिर ये धर्मगुरु रात और दिन किसके गुणगान करते हैं? श्रीमद्भागवत गीता अध्याय 7 श्लोक 12 से 15, 20 से 23 तथा अध्याय 9 श्लोक 20 से 23 में प्रत्यक्ष प्रमाणित कर दिया गया है कि तीनों गुणों ( रजगुण ब्रह्मा, सतगुण विष्णु, तथा तमगुण शिव) अर्थात तीनों भगवानों की भक्ति करने वालों को असुर स्वभाव को धारण किये हुए, मनुष्यों में नीच, दूषित कर्म करने वाले, मूढ़ लोग बताया है।
  • वेदों में परमेश्वर का नाम कविर्देव यानी कबीर बताया है। जबकि ये धर्मगुरु वेदों का क ख भी नहीं जानते हैं।
  • गीता के अध्याय 4 श्लोक 34 में तत्वदर्शी सन्त की शरण में जाने के लिए कहा है एवं अध्याय 15 श्लोक 1 से 5 में तत्वदर्शी सन्त के लक्षण भी बताए हैं। किन्तु कोई सन्त या धार्मिक गुरु यह नहीं प्रमाणित कर पाया कि कौन है तत्वदर्शी सन्त।
  • वे कहते हैं विधि का विधान नहीं बदल सकता जबकि सन्त रामपाल जी महाराज ने यह करके दिखाया है इसकी गवाही वेद देते हैं।
  • अध्याय 9 श्लोक 23 में श्राद्ध पूजा एवं पितर पूजा वर्जित बताई है लेकिन धर्मगुरु आगे बढ़कर पिंडदान, श्राद्ध आदि के विषय में बताते हैं।
  • वे मंत्र जाप मनमुखी तरीके से देते हैं। जबकि गीता अध्यय 17 श्लोक 23 के अनुसार ॐ, तत, सत ये तीन मन्त्र हैं पूर्ण परमेश्वर को पाने के लिए जिसका इन नकली धर्मगुरुओं को कोई अंदेशा नहीं है।
  • महर्षि दयानंद जी ने स्वयं अपनी पुस्तक सत्यार्थ प्रकाश में वेद विरुद्ध बातें लिखी हैं जबकि वे वेदों की और लौटने का नारा दे रहे थे।
  • अनेकों मनमाने और शास्त्रविरुद्ध आचरण बताकर धर्मगुरु स्वयं जो सच्चा सन्त सिद्ध करते हैं जबकि वे सभी आचरण या साधनाएँ जैसे मूर्तिपूजा, श्राद्ध, व्रत आदि जो शास्त्रों में नहीं दिए गए हैं वे व्यर्थ हैं और गीता अध्याय 16 श्लोक 23-24 में प्रमाण है कि शास्त्र विधि त्यागकर मनमाने आचरण से कोई लाभ नहीं होता

ये केवल बानगी के तौर पर प्रस्तुत बिंदु हैं। ऐसी जाने कितनी साधनाएँ, गलत मन्त्र हैं जो ये नकली धर्मगुरु बताते हैं एवं जनता गुमराह होती है। ये स्वयं अपने लिए और अपने शिष्यों के लिए नरक के दरवाजे खोल रहे हैं।

नकली धर्मगुरुओं का ज्ञान भेजेगा नरक में

संत रामपाल जी महाराज जी के ज्ञान के अतिरिक्त अन्य संतों का जो भी ज्ञान है उसका कोई आधार नहीं है ना कोई प्रमाण है! अन्य धर्मगुरु जगत समाज को मनमानी साधना, पूजा विधि बताते हैं जैसे व्रत रखना, पितर पूजा, श्राद्ध निकालना, आदि सभी क्रियाएं जिनका श्रीमद्भागवत गीता में मना किया गया है इस तरह सेधर्म गुरुओं ने ढोंग पाखंड को भी बढ़ावा दिया है। यह सभी क्रियाएं शास्त्र विरुद्ध है शास्त्र विरुद्ध होने के कारण इनसे हमें कोई भी लाभ नहीं हो सकता। क्योंकि गीता अध्याय 16 श्लोक 23-24 में लिखा है कि जो व्यक्ति शास्त्र विधि को त्याग कर मनमानी साधना करता है उनको ना कोई लाभ होता है ना उनको कोई सुख-शांति मिलता है, और ना ही उनका मोक्ष होता हैं। अर्थात मनमानी पूजा, साधना करना व्यर्थ है।

अन्य धर्मगुरु जो भी मंत्र जाप बताते हैं जैसे हरे राम, राम राम, राधे राधे, कृष्णा-कृष्णा, हरि ॐ तत् सत्, ॐ नमः शिवाय, ॐ भगवते वासुदेवाय नम; मृत्युंजय जाप आदि मंत्र हमारे पवित्र शास्त्रों में प्रमाणित नहीं है। ये सब शास्त्रविरुद्ध व मनमाना आचरण होने से व्यर्थ है। जिस कारण से हमें कोई लाभ, सुख-शांति प्राप्त नहीं हो सकती है और ना ही हमारा पूर्ण मोक्ष हो सकता है। बल्कि शास्त्रों में वर्णित आचरण न करके हम नरक में धकेले जाएंगे। शिक्षित समुदाय से अपेक्षित है कि वह स्वयं अपने सद्ग्रन्थों को उठाकर देखे एवं सही गलत का आकलन करे।

संत रामपाल जी महाराज जी का ज्ञान

  • जहाँ एक ओर अन्य धार्मिक गुरुओं के ज्ञान का कोई आधार या प्रमाण नहीं है वहीं सन्त रामपाल जी का ज्ञान पूर्णतः वैज्ञानिक, तर्कपूर्ण एवं शास्त्रों में वर्णित पद्धति पर आधारित है।
  • जहां अन्य सन्तों का ज्ञान पाखंड और आंख मूंदकर विश्वास करने में बल देता है वहीं सन्त रामपाल जी महाराज का ज्ञान कबीर साहेब के “मैं कहता हूं आँखन देखी” की तर्ज पर हैं। जहाँ नकली धर्मगुरु भाग्य के परिवर्तन को असम्भव बताते हैं वहीं सन्त रामपाल जी महाराज इसे बदल करके भी दिखाते हैं।
  • सन्त रामपाल जी महाराज का ज्ञान हमे ज्ञान कराता है इस लोक और परलोक दोनों के सुख की। मानव शरीर एक ब्रह्मांड के समान होता है और इसी ब्रह्मांड से रास्ता खुलता है मोक्ष का। लेकिन यह रास्ता कैसा है इससे होकर कैसे जाया जाएगा यह केवल तत्वदर्शी सन्त रामपाल जी महाराज ही बता सके हैं।
  • जहां अन्य धर्मगुरुओं के लिए परलोक केवल ब्रह्मलोक और विष्णुलोक तक सीमित है वहीं सन्त रामपाल जी महाराज का बताया परलोक वेदों में वर्णित सतलोक है। सतलोक कभी नष्ट नहीं होता अविनाशी है जबकि ब्रह्मा विष्णु महेश समेत काल ब्रह्म और 21 ब्रह्मांड नष्ट होते हैं (गीता अध्याय 8 श्लोक 16)।

क्या है सन्त रामपाल जी महाराज जी द्वारा बताई भक्ति विधि?

वास्तव में मनुष्य जिन देवताओं की खोज में मंदिर मंदिर और तीर्थ धाम दौड़ता फिरता है वे उसके भीतर बने कमलों में नियत स्थान पर विराजमान हैं। इसका पूरा विवरण शास्त्रों में है जिनकी जानकारी सन्त रामपाल जी महाराज अपने सत्संगों के माध्यम से देते हैं। सन्त रामपाल जी ने कभी नहीं कहा कि इनकी साधना मत करो बल्कि ये बताया कि शास्त्रों में कहे अनुसार साधना करो। इन सभी कमलों के खुलने के बाद ही जीव आगे बढ़कर त्रिकुटी तक पहुंचता है।

शरीर में बने इन कमलों को अत्यंत कठिन साधना से खोला जा सकता है लेकिन यदि तत्वदर्शी सन्त से नामदीक्षा लेकर स्मरण किया जाए तो ये बहुत कम समय में खुल जाते हैं। इनके आगे का रास्ता त्रिकुटी के बाद का है। आगे के वज्रकपाट केवल सतनाम और सारनाम के स्मरण से खुलते हैं। जो कि केवल तत्वदर्शी सन्त ही बताने का अधिकारी होता है। तत्वदर्शी सन्त से दीक्षा लेकर भक्ति करने वाला साधक आसानी से सारे रास्ते पार करता है और मार्ग के सारे देवताओं के लोकों को पार करता हुआ सतलोक जाता है। 

उस अविनाशी लोक में उसे एक तत्व का नया शरीर प्राप्त होता है। उस शरीर का प्रकाश सोलह सूर्यों एवं चन्द्रमाओं के बराबर होता है। वहीं परमेश्वर कबीर के एक रोमकूप का प्रकाश करोड़ों सूर्य एवं करोड़ चन्द्रमाओं के बराबर है। सतलोक में कर्म का सिद्धान्त नहीं है। परमेश्वर की सभी संतानें जब जो इच्छा करती हैं वह सामने प्रकट हो जाता है। जबकि ब्रह्मलोक तक के सभी लोकों में व्यक्ति की पुण्य कमाई खर्च होने के बाद पुनः पृथ्वीलोक में भेज दिया जाता है। वही जो साधक मनमुखी साधना करते हैं वे त्रिकुटी तक भी नहीं पहुंच पाते एवं मृत्यु के उपरांत अन्य योनियों (कीट, गधे, कुत्ते, सुअर आदि) में दुख उठाते हैं। 

अच्छे कर्म करते हुए भी हम दुखी क्यों

हम सभी सतलोक के निवासी हैं और गलती से काल ब्रह्म यानी क्षरपुरुष जो दुर्गा का पति है एवं ब्रह्मा, विष्णु, महेश का पिता है उसकी साधना पर आसक्त होकर अपने वास्तविक निजधाम को छोड़कर चले आये। यहाँ आते ही काल ब्रह्म ने कर्म के सिद्धांत के तहत हमारी बुरी स्थिति कर दी। आज इस पृथ्वी पर अनजाने में हुए पापों का भी बोझ जीव पर लाद दिया जाता है। हम इस लोक में सद्कर्म करते हुए भी दुखी ही रहेंगे। क्योंकि अब हम पर अरबों युगों के पाप लाद दिए गये हैं। हमारे पिता कविर्देव सतलोक से हल्के तेजपुंज का शरीर धारण करके तत्वदर्शी सन्त के रूप में हमें सत मन्त्र एवं भक्ति बताकर लेने आते हैं। जिस प्रकार कोयल की आवाज़ सुनकर उसके बच्चे कौए के घोंसले से निकलर कोयल के पास चले जाते हैं उसी प्रकार हम भी सतज्ञान समझकर तत्वदर्शी सन्त की शरण में जाएंगे एवं पूर्ण मोक्ष की तैयारी करेंगे।

क्या गुरु बदल सकते हैं?

अन्य धर्म गुरुओं का कहना है कि एक गुरु बना लिया तो दूसरा गुरु नहीं बदलना चाहिए। ऐसा नहीं है। इस भवसागर को पार करने के लिए और इस जन्म मरण के रोग को समाप्त करने के लिए हमारे जीवन में गुरु वैद्य की भूमिका निभाता है और जब हमें एक वैद्य से आराम नहीं होता तो हम दूसरे वैद्य की शरण में जाते हैं। आज यदि आपको अभ्यास है कि आप जिस गुरु की शरण मे हैं वह तत्वदर्शी सन्त नही है तो उसे छोड़ने में देर नहीं करनी चाहिए क्योंकि हमारी सांसों का भरोसा नहीं है। माता अनुसुइया के पुत्र दत्तात्रेय जी ने 24 गुरु बनाये थे तब जाकर उन्हें पूर्ण तत्वदर्शी सन्त मिले। 

कबीर साहेब जी कहते हैं कि 

जब तक गुरु मिले ना सांचा, तब तक गुरु करो दस पांचा।।

वर्तमान में पूर्ण तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जी हैं जो सभी धर्मों के पवित्र सतग्रंथों में से प्रमाणित करके बताते हैं कि पूर्ण परमात्मा आकार में हैं, सहशरीर है उसका नाम कबीर है। वह तख्त पर विराजमान है वह पूर्ण परमात्मा अजर, अमर, अविनाशी, दयालु, सर्वोच्च, सर्वशक्तिमान, अखंड परमेश्वर। तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जी पूर्ण परमात्मा की सतभक्ति साधना शास्त्रों से प्रमाणित करके बताते हैं।

सन्त रामपाल जी महाराज जी द्वारा बताई गई सद भक्ति से मिले सुख

प्रत्येक मानव मोक्ष का अधिकारी है और प्रत्येक मानव गृहस्थ आश्रम में ही अपने परिवार के साथ रहते हुए भी मोक्ष की प्राप्ति कर सकता है लेकिन उसे सर्वप्रथम गीता अध्याय 4 श्लोक 34 के अनुसार तत्वदर्शी सन्त की शरण में जाना होगा एवं अध्याय 17 श्लोक 23 में बताए मोक्ष मन्त्र तत्वदर्शी सन्त से लेकर जाप करने होंगे। संत रामपाल जी महाराज सभी देवी देवताओं की साधना के वास्तविक मंत्र बताते हैं। जिससे साधक को इस लोक में भी सुख मिलता हैं जो उसके भाग्य में नहीं होता।

अब सवाल यह उठेगा कि जिसे मोक्ष चाहिए उसे इस लोक के सुखों की क्या आवश्यकता। जब व्यक्ति भक्ति करता है तो उसके भीतर सर्वप्रथम आर्थिक चिंताएँ होती हैं और पूर्ण परमेश्वर अपने साधक की प्रत्येक चिंता का निवारण करता है। सत्य मन्त्रों के जाप से व्यक्ति की भक्ति की कमाई जुड़ती जाती है एवं इस लोक के कष्टों का निवारण स्वतः ही हो जाता है।

■ Also Read: अवतरण दिवस 2021: 8 सितम्बर सतगुरु संत रामपाल जी महाराज जी का अवतरण दिवस

साहेब जी की शास्त्र विधि साधना करने से मनुष्य को सर्व सुख-शांति और लाभ प्राप्त होता है और पूर्ण मोक्ष की गारंटी भी मिलती है। यही कारण है कि संत रामपाल जी महाराज जी से लोग तेजी से जुड़ रहे हैं क्योंकि वे पूर्ण परमात्मा की सतभक्ति शास्त्र अनुकूल बता रहे हैं। संत रामपाल जी महाराज जी का ज्ञान पवित्र सतग्रंथों पर आधारित है। इसलिए देश-विदेश के लोग भी संत रामपाल जी महाराज जी के ज्ञान से प्रभावित हो रहे हैं। संत रामपाल जी महाराज के आदर्शों पर चलने से एक स्वच्छ समाज का निर्माण भी हो रहा है। संत रामपाल जी महाराज जी के जितने भी अनुयाई हैं। वे सभी बुराइयों से दूर रहते हैं जैसे नशा, दहेज, चोरी, ठगी, रिश्वतखोरी आदि। संत रामपाल जी महाराज जी का ऐसा निर्मल ज्ञान है कि सभी बुराइयों से लोग अपने आप दूर हो जाते हैं। संत रामपाल जी महाराज ढोंग पाखंडवाद, जातिवाद आदि का खात्मा कर रहे हैं।

संत रामपाल जी महाराज जी का एक नारा है-

जीव हमारी जाति हैं, मानव धर्म हमारा।

हिंदू, मुस्लिम, सिख, इसाई, धर्म नहीं कोई न्यारा।।

संत रामपाल जी महाराज जी अपने ज्ञान के माध्यम से बताते हैं कि:

इन सभी प्रश्नों का उत्तर केवल संत रामपाल जी महाराज जी ही प्रमाण सहित बता रहे हैं। केवल संत रामपाल जी महाराज जी के पास ही इसका समाधान है। अन्य धर्म गुरुओं के पास इसका समाधान बिल्कुल भी नहीं है। क्योंकि संत रामपाल जी महाराज जी ही वह पूर्ण संत हैं जिसके बारे में गीता जी, वेद, गुरु ग्रंथ साहिब, बाइबल, कुरान और अन्य महापुरुषों ने भी वर्णन किया है और विश्व के सभी महान भविष्यवक्ताओं ने भी जो भविष्यवाणिया की है वह भी संत रामपाल जी महाराज जी के ऊपर ही सटीक बैठती है। इससे यह सिद्ध होता है कि संत रामपाल जी महाराज जी वह महापुरुष हैं जिनके सान्निध्य में भारत विश्व गुरु बनेगा।

पूर्ण संत की क्या पहचान हैं?

आज शिक्षित समुदाय आने ग्रन्थ खोलकर ढूंढ सकता है की तत्वदर्शी सन्त की क्या पहचान है। अनेकों सन्तों ने भी अपनी वाणियों में इसका प्रमाण दिया है।

  • श्रीमद्भगवत गीता अध्याय 15 श्लोक 1 से 4 एवं 16, 17 में कहा गया है जो संत इस संसार रूपी उल्टे लटके हुए वृक्ष के सभी विभाग को सही-सही बता देगा वह पूर्ण संत होगा और कहा गया है कि जो पूर्ण संत होगा वह भक्त समाज को शास्त्र अनुकूल भक्ति विधि साधना बताएगा। 
  • संत गरीबदास जी की वाणी में पूर्ण संत की पहचान 

सतगुरु के लक्षण कहूं, मधुरे बैन विनोद।

चार वेद षट शास्त्र, कहै अठारा बोध।।

पूर्ण संत चारों वेदों, छः शास्त्रों, अठारह पुराणों आदि सभी ग्रंथों का पूर्ण जानकार होगा। 

  • कबीर साहेब ने भी कबीर सागर में बताया है कि उनका भेजा जो नुमाइंदा कलियुग में आएगा उससे सभी नकली धर्मगुरु दुश्मनी करेंगे

जो मम सन्त उपदेश दृढ़ावै (बतावै), वाके सनज सभि राड़ बढ़ावै |

या सब सन्त महान्तन की करणी, धर्मदास मैं तो से वर्णी ||

  • यजुर्वेद अध्याय 19 मन्त्र 25 में प्रमाण है कि  पूर्ण तत्वदर्शी सन्त शास्त्रों के सांकेतिक वाक्यों के गूढ़ शब्दों के अर्थ समझाता है।
  • यजुर्वेद अध्याय 19 मन्त्र 26 में बताया है कि पूर्ण तत्वदर्शी सन्त दिन में तीन समय की आरती देता है जिसमे सभी देवी देवताओं की उपासना होती है।
  • यजुर्वेद अध्याय 19 मन्त्र 30 के अनुसार पूर्ण सन्त केवल उसे ही शिष्य बनाता है जो सदाचारी हो, जो अभक्ष्य पदार्थों के सेवन एवं नशीली वस्तुओं का सेवन न करने का आश्वासन देता है। पूर्ण तत्वदर्शी सन्त भिक्षा अथवा चंदा नहीं मांगता है।
  • सामवेद उतार्चिक अध्याय 3 खंड 5 श्लोक 8 के अनुसार पूर्ण तत्वदर्शी सन्त तीन बार में नाम उपदेश सम्पन्न करता है। इसी मन्त्र में कबीर परमेश्वर का जिक्र भी है।
  • आदरणीय नानक देव जी ने भी श्वांसों के मन्त्र देने वाले को पूर्ण तत्वदर्शी सन्त बताया है। इसके अतिरिक्त अनेकों भविष्यवाणियाँ भी सन्त रामपाल जी महाराज को अलौकिक शक्तियुक्त सिद्ध करती हैं।

वर्तमान समय में पूर्ण गुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जी ही हैं जिनके शरण में आने से ही मानव का कल्याण हो सकता है। पूरे विश्व से निवेदन है कि देर ना करके पूर्ण संत रामपाल जी महाराज जी के ज्ञान को समझें और ग्रहण करें व अपने मनुष्य जीवन को सफल बनाएं। इस संसार में एक पल का भरोसा नहीं कब क्या हो जाए। इसलिए जब भी ज्ञान समझ में आए उसी समय पूर्ण गुरु की शरण ग्रहण कर लेना चाहिए। ज्ञान समझने के लिए ज्ञान गंगा पुस्तक निशुल्क उपलब्ध है।

Latest articles

Israel’s Airstrikes in Rafah Spark Global Outcry Amid Rising Civilian Casualties and Calls for Ceasefire

In the early hours of 27th May 2024, Israel launched a fresh wave of...

Cyclone Remal Update: बंगाल की खाड़ी में मंडरा रहा है चक्रवात ‘रेमल’ का खतरा, तटीय इलाकों पर संकट, 10 की मौत

Last Updated on 28 May 2024 IST: रेमल (Cyclone Remal) एक उष्णकटिबंधीय चक्रवाती तूफान है,...

Odisha Board Class 10th and 12th Result 2024: Check Your Scores Now

ODISHA BOARD CLASS 10TH AND 12TH RESULT 2024: The Odisha Board has recently announced...

Lok Sabha Elections 2024: Phase 6 of 7 Ended with the Countdown of the Result Starting Soon

India is voting in seven phases, Phase 6 took place on Saturday (May 25,...
spot_img

More like this

Israel’s Airstrikes in Rafah Spark Global Outcry Amid Rising Civilian Casualties and Calls for Ceasefire

In the early hours of 27th May 2024, Israel launched a fresh wave of...

Cyclone Remal Update: बंगाल की खाड़ी में मंडरा रहा है चक्रवात ‘रेमल’ का खतरा, तटीय इलाकों पर संकट, 10 की मौत

Last Updated on 28 May 2024 IST: रेमल (Cyclone Remal) एक उष्णकटिबंधीय चक्रवाती तूफान है,...

Odisha Board Class 10th and 12th Result 2024: Check Your Scores Now

ODISHA BOARD CLASS 10TH AND 12TH RESULT 2024: The Odisha Board has recently announced...