संत रामपाल जी महाराज: मानवता के सच्चे मसीहा और किसानों के रक्षक को नवाज़ा गया “जन सेवक रत्न सम्मान”

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आज जब समाज स्वार्थ और आडंबरों में घिरा है, ऐसे में हरियाणा के हांसी जिले में आयोजित “जन सेवक रत्न सम्मान” समारोह ने सिद्ध कर दिया कि सच्चा संत वही है जो समाज के दुःख में सबसे आगे खड़ा हो। संत रामपाल जी महाराज, जो वर्तमान में जेल में हैं, लेकिन उनकी दया और प्रेरणा की गूंज आज हर खेत और हर गरीब की झोपड़ी में सुनाई दे रही है। यह सम्मान उन्हें किसी संस्था ने नहीं, बल्कि उन हजारों किसानों और ग्रामीणों ने दिया है जिन्होंने उनकी निस्वार्थ सेवा को अपनी आँखों से देखा और महसूस किया है 

बाढ़ राहत: जब सरकारें पीछे हटीं, तो मसीहा आगे आया

वर्ष 2025 की प्रलयकारी बाढ़ ने हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के किसानों की कमर तोड़ दी थी। खेतों में 5 से 10 फुट तक पानी भरा था, फसलें बर्बाद हो चुकी थीं और भविष्य अंधकारमय दिख रहा था। ऐसे समय में जब प्रशासन के हाथ-पाँव फूल चुके थे, संत रामपाल जी महाराज ने कमान संभाली।

हरियाणा के लगभग 400 से 500 गाँवों में संत रामपाल जी महाराज ने हजारों फीट पाइप, सैकड़ों हैवी मोटरें और डीजल की व्यवस्था की ताकि खेतों से पानी निकाला जा सके और किसान अगली फसल की बिजाई कर सकें। हांसी के किसानों ने भावुक होकर बताया कि यदि महाराज जी ने मदद न की होती, तो किसान आत्महत्या करने पर मजबूर हो जाते।

कार्यक्रम का भव्य नजारा

हांसी के इस विशाल पंडाल में हजारों की संख्या में लोग उपस्थित थे। चारों तरफ फूलों की बारिश हो रही थी और संत रामपाल जी महाराज के दिव्य स्वरूप (चित्र) को एक भव्य झांकी के रूप में मंच तक लाया गया। स्टेज को फूलों और रंगोलियों से सजाया गया था, जिसमें महाराज जी की प्रमुख मुहिम—रोटी, कपड़ा, शिक्षा, चिकित्सा और मकान—को प्रदर्शित किया गया था।

वक्ताओं के विचार और महत्वपूर्ण संबोधन

कार्यक्रम में समाज के हर वर्ग, किसान संगठनों और राजनेताओं ने शिरकत की। सभी ने एक स्वर में संत रामपाल जी महाराज के कार्यों की सराहना की:

नरेश यादव (सरपंच, टीम नरेश के प्रमुख):

आयोजक नरेश यादव ने कहा, “जब किसान के घर में कोई अनाज डालने वाला न हो और जब बाढ़ की आपदा ने सबको बेसहारा कर दिया था, तब संत रामपाल जी महाराज ने भगवान का रूप लेकर किसानों को बचाया। उन्होंने केवल किसानों को नहीं, बल्कि समाज के सबसे निचले तबके को जीने की राह दिखाई है।” उन्होंने यह भी कहा कि जो जनता की सेवा करे, वही भगवान का रूप है।

विनोद भयाना (विधायक, हांसी):

विधायक विनोद भयाना ने महाराज जी को नमन करते हुए कहा, “प्राकृतिक आपदा के समय अकेले सरकार सब कुछ नहीं कर सकती। हमने अपनी आँखों से देखा कि संत रामपाल जी की ‘फौज’ (सेवादार) ने ट्रैक्टर, ट्रालियाँ और मोटरें लाकर खेतों से पानी निकाला। ऐसे संत जो मानव कल्याण की बात करें, वे बिरले ही होते हैं।” उन्होंने महाराज जी के स्वास्थ्य और उनके कष्टों के निवारण के लिए भी प्रार्थना की।

Also Read: मानवता के मसीहा और किसानों के रक्षक संत रामपाल जी महाराज का जींद जिले के जुलाना (शादीपुर) में ऐतिहासिक सम्मान 

जसवीर जस्सी पेटवाड़ (विधायक, नारनौंद):

उन्होंने कहा, “जब किसान फसल खो चुका था और मजदूर घर खो चुका था, तब महाराज जी के आदेश पर उनके अनुयायियों ने इतिहास रचने वाला काम किया। जो काम सरकार नहीं कर पाई, वह संत रामपाल जी महाराज की टीम ने कर दिखाया।”

जोगेंद्र मायड़ (किसान नेता):

उन्होंने भावुक होते हुए कहा, “सरकारें पाइप और मोटरें देकर एहसान जताती थीं, लेकिन इस महाराज ने तो पाइप और मोटरें किसानों को सौंप ही दीं कि भविष्य में कभी फिर जरूरत पड़े तो किसान को किसी के आगे हाथ न फैलाना पड़े। यह किसी अवतार से कम नहीं है।”

प्रदीप लादी (सरपंच, शेखपुरा – सरपंच एसोसिएशन प्रधान):

उन्होंने कहा कि महाराज जी ने जेल में रहते हुए भी 473 पंचायतों का पानी निकाला है। यदि वे बाहर होते, तो पूरे हरियाणा में कहीं भी पानी की समस्या नहीं रहने देते।

अन्नपूर्णा मुहिम: रोटी, कपड़ा, मकान और शिक्षा

कार्यक्रम के दौरान एक विशेष डॉक्यूमेंट्री दिखाई गई जिसमें अन्नपूर्णा मुहिम के तहत किए जा रहे कार्यों का विवरण था। इस मुहिम की शुरुआत 21 मार्च 2025 को हुई थी।

  • मकान निर्माण: जिन अनाथ बच्चों या गरीबों के पास छत नहीं है, उन्हें मात्र 10-12 दिनों में पक्के मकान बनाकर दिए जा रहे हैं। उदाहरण के तौर पर कुरुक्षेत्र के धनौरा जटान गाँव के अनाथ बच्चों को एक सुंदर पक्का मकान हर सुख-सुविधा के साथ बनाकर दिया गया।
  • दहेज मुक्त विवाह (रमैनी): महाराज जी के शिष्य मात्र 17 मिनट में बिना किसी दान-दहेज के विवाह संपन्न कराते हैं, जिससे गरीब पिता कर्ज के बोझ से बच रहे हैं।
  • शिक्षा और चिकित्सा: अनाथ बच्चों की स्कूल की पूरी फीस और स्टेशनरी का खर्च भी महाराज जी के द्वारा उठाया जा रहा है।

जनसेवक रत्न का सच्चा हकदार

हांसी की इस ऐतिहासिक धरती पर संत रामपाल जी महाराज को “जन सेवक रत्न” से सम्मानित करना वास्तव में उस सेवा का सम्मान है जो बिना किसी राजनीतिक लालच या स्वार्थ के की गई है। जेल की सलाखों के पीछे रहकर भी लाखों परिवारों के चूल्हे जलाना और किसानों के मुरझाए चेहरों पर मुस्कान लाना किसी चमत्कार से कम नहीं है।

आज का यह समारोह संदेश देता है कि यदि समाज को बदलना है, तो संत रामपाल जी महाराज के बताए मार्ग—नशा मुक्ति, दहेज मुक्ति और मानवता की सेवा—को अपनाना होगा। 

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