गुराना, हिसार में ऐतिहासिक क्षण: 45 गांवों की खापों ने संत रामपाल जी महाराज को दिया “किसान रक्षक सम्मान”

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हरियाणा के हिसार जिले के बरवाला क्षेत्र, गाँव गुराना में 9 नवंबर 2025 को हजारों ग्रामीणों, पंचायत प्रतिनिधियों और किसान संगठनों की उपस्थिति में एक ऐतिहासिक कार्यक्रम संपन्न हुआ-“किसान रक्षक सम्मान समारोह”। नौगामा बूरा खाप, भ्याण खाप, पुनिया खाप और सरपंच एसोसिएशन बरवाला के संयुक्त मंच से, 45 गांवों के प्रतिनिधियों ने बाढ़ संकट के समय किसानों की तत्काल मदद, खेतों से बड़े पैमाने पर पानी की निकासी, पशुओं के लिए चारा आपूर्ति और समय पर बुवाई सुनिश्चित कराने जैसे कार्यों के लिए संत रामपाल जी महाराज को यह सम्मान प्रदान किया। कार्यक्रम का स्थान खेल मैदान, बस स्टैंड के पास, गाँव गुराना रखा गया और SA News ने इसका लाइव प्रसारण किया। 

Table of Contents

कार्यक्रम कब, कहाँ और किसके द्वारा?

  • तारीख: 9 नवंबर 2025 (रविवार)
  • स्थान: खेल ग्राउंड, बस स्टैंड के पास, गाँव गुराना, बरवाला क्षेत्र, जिला हिसार, हरियाणा
  • आयोजक मंच: नौगामा बूरा खाप पंचायत, पुनिया खाप पंचायत, भ्याण खाप और सरपंच एसोसिएशन बरवाला
  • प्रतिनिधित्व: 45 गांवों की खाप-पंचायतें और सरपंच संघों की सहभागिता

क्यों दिया गया “किसान रक्षक सम्मान”

बाढ़ के दौरान कई जिलों-हिसार, रोहतक, भिवानी आदि में खेत जलमग्न हो गए। ऐसे में संत रामपाल जी महाराज के आदेश पर स्वयंसेवकों ने गाँव-गाँव 10–20 HP की मोटरें, पम्प और हजारों फीट पाइप पहुँचाकर खेतों से पानी निकाला और किसानों को समय पर बुवाई कराने के लिए आवश्यक उपकरण तक उपलब्ध कराए। कई स्थानों पर आर्थिक सहायता भी दी गई ताकि कार्य त्वरित हो सके। आयोजकों ने इन्हीं सेवाओं को सम्मान का आधार बताया। 

खाप-पंचायतों की एकजुटता: ग्रामीण लोकतंत्र की ताकत

खाप-पंचायतें हरियाणा के सामाजिक-सामुदायिक ताने-बाने की धुरी हैं। नौगामा बूरा, भ्याण खाप और पुनिया खाप के साथ सरपंच एसोसिएशन बरवाला का एक मंच पर आना केवल सम्मान नहीं, बल्कि सामुदायिक कृतज्ञता का उत्सव था। गुराना के खेल मैदान में हज़ारों ग्रामीणों ने उपस्थिति दर्ज कराई और किसान प्रतिनिधियों ने मंच से अपने अनुभव साझा किए। SA News द्वारा कार्यक्रम का लाइव प्रसारण और सोशल चैनलों पर व्यापक कवरेज ने पूरे प्रदेश का ध्यान इस मानवीय पहल की ओर खींचा। 

“45 गांव”-स्थानीय जनसमर्थन का सूचक

समारोह में 45 गांवों की भागीदारी का होना यह दर्शाता है कि संत रामपाल जी महाराज द्वारा की गई किसान हित की सेवाएँ किसी एक गाँव तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि इसका व्यापक असर पड़ा। यह आँकड़ा कार्यक्रम की सोशल कवरेज में सामने आया। 

मैदान से मिली आवाज़: किसान सेवा का ‘ऑपरेशन मोड’

कई प्रभावित गाँवों में संत रामपाल जी महाराज ने “आप बताओ-हम पहुँचाते हैं” मॉडल पर काम किया। जिस गाँव से जो मांग आई, उससे अधिक संसाधन भेजे गए ताकि अगली फसल की बुवाई में देरी न हो। इस दौरान पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में राहत सामग्री और मशीनरी पहुँची-यह काम प्रचार से पहले सेवा की भावना से हुआ। 

प्रमुख कार्य (उदाहरण)

  • खेतों से पानी निकालने के लिए हाई-कैपेसिटी मोटर पंप की आपूर्ति 
  • हजारों फीट PVC पाइप की आपूर्ति
  • तथा जहाँ आवश्यक, नगद अन्य सहयोग-ताकि स्थानीय मजदूरी व डीजल का खर्च तुरंत निकल सके। 

कार्यक्रम का प्रवाह और सार्वजनिक सहभागिता

सुबह 11 बजे सत्संग से कार्यक्रम शुरू हुआ, ग्रामीण प्रतिनिधियों और किसान संगठनों के वक्तव्यों के साथ सम्मान-अर्पण हुआ। SA News के लाइव स्ट्रीम ने देश-विदेश के दर्शकों तक यह संदेश पहुँचाया कि संकट में पूर्ण संत का नेतृत्व कैसा दिखता है। आयोजकों ने इसे संत रामपाल जी महाराज के प्रति “आस्था, कृतज्ञता, भक्ति और सम्मान का संगम” कहा। 

आधिकारिक घोषणाएँ और सोशल अपडेट

कार्यक्रम से पहले @SatlokChannel (SA News) ने 9 नवंबर को गुराना में सम्मान की सूचना X (पूर्व Twitter) पर दी, जिससे समय, स्थान और उद्देश्य स्पष्ट रहे। 

इससे पहले हुए सम्मान/कार्यक्रम: पृष्ठभूमि जो समझना ज़रूरी है

9 नवंबर के गुराना समारोह से पहले, अक्टूबर-नवंबर 2025 में दो प्रमुख कार्यक्रम हुए –

(1) “मानवता रक्षक सम्मान”-महम चौबीसी, रोहतक (12 अक्टूबर 2025)

महम चौबीसी के ऐतिहासिक चबूतरे से संत रामपाल जी महाराज को बाढ़ राहत एवं समाज-सुधार कार्यों के लिए “मानवता रक्षक सम्मान” दिया गया। महम चौबीसी खाप के सार्वजनिक निर्णय और सरपंचों के वक्तव्यों में राहत कार्यों के प्रत्यक्ष अनुभव उद्धृत हुए। 

(2) “धनाना रत्न”-36 बिरादरी, गाँव धनाना (8 नवंबर 2025)

जन्मभूमि धनाना (जिला सोनीपत) की 36 बिरादरियों ने “अन्नपूर्णा मुहिम” और निरंतर सामाजिक-आध्यात्मिक सेवाओं के लिए “धनाना रत्न” उपाधि से सम्मानित किया। यह समारोह गुराना कार्यक्रम से एक दिन पहले हुआ। 

किसान हित में किये गये कार्य: कौन-सी बातें बनीं सम्मान का आधार?

  1. तेज रेस्पॉन्स: “एप्लिकेशन/अनुरोध” पहुँचते ही संत रामपाल जी महाराज जी के आदेशानुसार कुछ ही समय में मशीनें, पाइप और जरूरत की सारी सामाग्री पहुंचाई गई।
  2. वैज्ञानिक समाधान: 10–20 HP मोटर और हाई-क्वालिटी पाइप से बाढ़ निकासी तेज हुई और कम समय में बड़े रकबे को काबिल-खेती बनाया जा रहा है।
  3. समय पर बुवाई: पानी हटते ही बीज-खाद और जुताई का रास्ता बना, जिससे किसान रबी/आगामी फसल समय पर बो सके। 
  4. पशुधन सुरक्षा: चारा/चारागाह तथा पशुओं की बाढ़ से सुरक्षा कर किसान परिवारों की रीढ़, यानी पशुधन को संभाले रखा। 
  5. सम्पूर्णता का भाव: लाभार्थी कौन है, इससे ऊपर उठकर-हर ज़रूरतमंद तक सहायता। 

“तीन सौ से अधिक गाँव”-सेवा का विस्तार

राहत और उपकरणों की आपूर्ति सिर्फ हिसार तक सीमित नहीं बल्कि 300 से अधिक गाँवों तक इस सेवा का लाभ पहुँचा। 

किसानों की आवाज़: सम्मान क्यों मायने रखता है?

“किसान रक्षक” का अर्थ ‘समस्या आने पर किसान के साथ सबसे पहले खड़े होने वाला’ है। जब खेत महीनों पानी में डूबे रहें तो केवल राहत सामग्री काफी नहीं-यांत्रिक समाधान, समन्वय और वित्तीय-लॉजिस्टिक सपोर्ट चाहिए। गुराना के मंच से कई सरपंचों ने कहा कि समय पर मदद से अगली बुवाई हो पाएगी नहीं तो किसानों के लिए 2 बार की फसल खराब होना बहुत बड़ी त्रासदी बन जाता क्योकि एक बार की फसल तो खराब हो ही गई और इससे दुःखी होकर कई किसान आत्म हत्या तक कर सकते थे।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

  • समय पर बुवाई से इंटर-क्रॉप गैप कम हुआ, इनपुट-लॉस घटा।
  • पशुधन बचने से परिवारों की डेयरी-आय कायम रही।
  • मनोवैज्ञानिक राहत-“हम अकेले नहीं”-हमारे साथ पूर्ण संत का साथ है। 

सेवा का दायरा: संत रामपाल जी महाराज ने पूरे देश में पहुचाई राहत

संत रामपाल जी महाराज की बाढ़ राहत सेवा हरियाणा के बाहर पंजाब, राजस्थान, गुजरात, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर तक पहुँची। संत रामपाल जी महाराज ने किसी भी तरीक़े के भेदभाव को न देखकर आख़िरी पंक्ति तक के आख़िरी व्यक्ति को भी देखा ताकि कोई भी कष्ट में ना रहे। इस तरह से उन्होंने लोगों को बचाने के लिए सारे संसाधन झोंक दिए।

करुणा-आधारित सेवा मॉडल: संकट में वास्तविक समाधान  

जब किसानों पर असाधारण दबाव पड़ा और कोई भी सहायता नहीं पहुंची, तब संत रामपाल जी महाराज ने राहत पहुचाई। उन्होंने बिना किसी निजी स्वार्थ के समय प्रबंधन, विज्ञान-आधारित उपकरणों के उपयोग और समानता की दृष्टि के साथ मिलकर राहत पहुचाई। यही कारण है कि उनके निर्देशन में चलाए जा रहे राहत कार्य बिना किसी भेदभाव के हर ज़रूरतमंद तक पहुँचते हैं — चाहे वह अनुयायी हो या नहीं।

सत्य, समानता और परोपकार पर आधारित यह “संत रामपाल जी महाराज मॉडल” केवल एक इवेंट नहीं, बल्कि एक जीवन-पद्धति है, जिसकी झलक उनके सत्संगों और आधिकारिक चैनलों पर स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है। (अधिक जानकारी हेतु: आधिकारिक वेबसाइट/YouTube/X हैंडल)

FAQs

1) “किसान रक्षक सम्मान” क्या है और किसे दिया गया?

यह सम्मान खाप-पंचायतों व सरपंच एसोसिएशन बरवाला के संयुक्त मंच से 9 नवंबर 2025, गुराना (बरवाला, हिसार) में दिया गया। इसे बाढ़ संकट में किसानों की तत्काल, विज्ञान-आधारित और व्यापक सहायता के लिए संत रामपाल जी महाराज को प्रदान किया गया। 

2) सम्मान देने वाले प्रमुख संगठन कौन-से थे?

नौगामा बूरा खाप, भ्याण खाप, पुनिया खाप और सरपंच एसोसिएशन बरवाला-जिन्होंने 45 गांवों के प्रतिनिधियों के साथ मंच साझा किया। 

3) कौन-से कार्य इस सम्मान का मुख्य आधार बने?

खेतों से पानी निकालने हेतु 10–20 HP मोटर पम्प व हजारों फीट पाइप की आपूर्ति, कई जगह नगद सहयोग, और सबसे महत्वपूर्ण-समय पर बुवाई सुनिश्चित करना। 

4) क्या यह सेवा केवल हरियाणा तक सीमित रही?

नहीं। रिपोर्टों के अनुसार पंजाब, राजस्थान, गुजरात, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर आदि राज्यों में भी सहायता पहुँची। 

5) इस कार्यक्रम से पहले कौन-कौन से सम्मान हुए?

(क) महम चौबीसी, रोहतक (12 अक्टूबर 2025)-“मानवता रक्षक सम्मान”। (ख) धनाना, सोनीपत (8 नवंबर 2025)-“धनाना रत्न” (36 बिरादरी)। 

6) कार्यक्रम का आधिकारिक वीडियो/प्रमाण कहाँ देखें?

SA News Channel के YouTube/Facebook LIVE पर पूरा समारोह उपलब्ध है; साथ ही @SatlokChannel और अन्य सोशल हैंडल्स पर अपडेट्स देखे जा सकते हैं। 

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