आज के इस भागदौड़ और स्वार्थ से भरे दौर में जहां आम इंसान अपनी छोटी-बड़ी समस्याओं को लेकर दर-दर भटकने पर मजबूर हो जाता है, वहीं समाज में एक ऐसा आध्यात्मिक और सेवाभावी स्थल भी है जो हर पीड़ित, असहाय, जनप्रतिनिधि और समाजसेवी के लिए उम्मीद की सबसे मजबूत किरण बन चुका है। आज संत रामपाल जी महाराज की शिक्षाएं केवल धार्मिक साधना तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे दीन-दुखियों, गौ-माताओं, किसानों और असहाय मरीजों के लिए संजीवनी का केंद्र बन गए हैं।
राजस्थान के दूरदराज के आदिवासी बहुल जिलों से लेकर गुजरात के जलभराव से पीड़ित गांवों तक, और हरियाणा के स्थानीय जन-प्रतिनिधियों से लेकर बुद्धिजीवी व व्यवसायियों तक—समाज का हर वर्ग अपनी आस्था और फरियाद लेकर जगतगुरु संत रामपाल जी महाराज के पावन चरणों में पहुंच रहा है। लोग केवल अपनी समस्याएं लेकर ही नहीं आ रहे, बल्कि उनके द्वारा चलाए जा रहे विशालकाय परोपकारी कार्यों—जैसे ‘अन्नपूर्णा मुहिम’, नशामुक्ति, दहेजमुक्त विवाह (रमैणी), गौ-सेवा, आधुनिक पुस्तकालय और ग्रामीण विकास परियोजनाओं को अपनी आंखों से देखकर नतमस्तक हो रहे हैं।
समाज के हर कोने से उमड़ता जन-सैलाब: जनप्रतिनिधि, समाजसेवी और पीड़ित
संत रामपाल जी महाराज जी के आश्रम में कदम रखते ही यह अनुभूति होती है कि यहाँ कोई भेदभाव नहीं है। क्या अमीर और क्या गरीब, क्या कोई निर्वाचित जन-प्रतिनिधि और क्या कोई गंभीर बीमारी से जूझता लाचार नागरिक—सभी को समान आत्मीयता, सम्मान और संबल प्राप्त होता है।
संत रामपाल जी से मिलने आए आगंतुकों का विवरण और उनके विचार
| हस्ती | बयान | वीडियो स्रोत |
| श्रद्धालु / ग्रामीण(गाँव: गढ़ी देवकी, गणेशपुर, डूंगरपुर, राजस्थान) | अन्नपूर्णा मुहिम, गौशाला सेवा और निःशुल्क शिक्षा के कार्यों को सोशल मीडिया पर देखकर प्रेरित हुए तथा आश्रम पहुंचकर दर्शन व आशीर्वाद प्राप्त किया। | वीडियो देखें |
| दिलीप सिंह थतरवाल व 25 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल(सुरपुरा, हनुमानगढ़, राजस्थान) | आश्रम के सामाजिक सरोकारों की सराहना की तथा सुरपुरा स्थित गरीब गौशाला के लिए चारा और शेड (टीन-शेड) की व्यवस्था का निवेदन किया, जिसे संत जी ने तुरंत स्वीकार किया। | वीडियो देखें |
| सरपंच प्रतिनिधि एवं ग्रामीण(गांजीसर, संतालपुर, पाटन, गुजरात) | 25 वर्षों से 500 बीघा उपजाऊ भूमि पर जलभराव की गंभीर समस्या के समाधान हेतु पाइपलाइन और मोटर पंप की मांग रखी, जिसे संत जी ने बिना किसी विलंब के मंजूरी दी। | वीडियो देखें |
| केमिस्ट(गोहाना, सोनीपत, हरियाणा) | आश्रम के विशाल अनुशासित प्रबंधन, पुस्तकालय और संत जी की निस्वार्थ सर्व-कल्याणकारी भावना को देखकर उन्हें ईश्वरीय रूप माना और व्यवस्था की भूरी-भूरी प्रशंसा की। | वीडियो देखें |
| सरपंच प्रतिनिधि एवं पीड़ित परिवार(देवरड़/दौड़, जुलाना, जींद, हरियाणा) | पूर्व में मिली पाइपलाइन के लिए आभार जताया, नई पेयजल/निकासी पाइपलाइन की मांग रखी तथा 3 साल से दर-दर भटक रहे किडनी फेल युवा मरीज के ट्रांसप्लांट हेतु संपूर्ण आर्थिक मदद की गुहार लगाई, जिस पर संत जी ने तुरंत सहायता का वचन दिया। | वीडियो देखें |
दिल को छू लेने वाली विशेष प्रतिक्रियाएं और ज़मीनी हकीकत
आश्रम में आने वाले लोगों की प्रतिक्रियाएं केवल औपचारिक बातचीत नहीं हैं, बल्कि यह उनकी आत्मा से निकली वह आवाज है जो लंबे समय के दुख-दर्द के बाद मिले सच्चे सहारे से प्रस्फुटित होती है।
जीवन और मौत से जूझते गरीब युवक को मिला नया जीवन (देवरड़, जींद)
हरियाणा के जींद जिले के देवरड़ (दौड़) गांव से आए सरपंच प्रतिनिधि ने जब एक बेहद भावुक प्रसंग रखा, तो वहाँ मौजूद हर आंख नम हो गई। गांव का एक निर्धन युवक पिछले तीन सालों से दोनों किडनियां फेल होने के कारण मौत से लड़ रहा था। उसकी माँ अपनी एक किडनी अपने बेटे को देने के लिए तैयार थी, लेकिन अत्यंत निर्धन होने के कारण उनके पास ऑपरेशन और ट्रांसप्लांट के लाखों रुपयों का कोई बंदोबस्त नहीं था।
पीड़ित युवक ने रोते हुए बताया कि वह तीन वर्षों तक मंत्रियों, नेताओं और अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर काटता रहा, लेकिन किसी ने उसकी सुध नहीं ली। जब यह गुहार संत रामपाल जी महाराज के सामने रखी गई, तो संत जी ने पल भर का भी संकोच किए बिना कहा—“लिख के दे दो, पूरी मदद कराएंगे, हर संभव सहायता करेंगे”। यह सुनकर पूरा प्रतिनिधिमंडल कृतज्ञता से भर उठा।
गुजरात के किसानों की 25 साल पुरानी व्यथा का क्षणभर में निवारण (पाटन, गुजरात)
गुजरात के पाटन जिले के संतालपुर तहसील अंतर्गत गांजीसर गांव से आए सरपंच और ग्रामीणों ने बताया कि पिछले 25 वर्षों से गांव की 500 बीघा जमीन पर बरसात का पानी भर जाता है, जिससे साल में दो-दो फसलें बर्बाद हो जाती हैं। वर्षों से प्रशासन के सामने गुहार लगाने के बावजूद इस समस्या का कोई हल नहीं निकला था।
ग्रामीणों ने संत रामपाल जी महाराज से पानी की निकासी के लिए पाइप और मोटर की प्रार्थना की। संत रामपाल जी महाराज ने उनकी लिखित अर्जी देखते ही तुरंत कहा कि पाइप और मोटर की व्यवस्था करवा दी जाएगी। ग्रामीणों के चेहरे पर खिली खुशी यह बयां कर रही थी कि जो काम दशकों में नहीं हो सका, वह एक संत के परोपकारी संकल्प से चुटकियों में संभव हो गया।
बेजुबान गोवंश के लिए खुला वरदान का द्वार (हनुमानगढ़, राजस्थान)
हनुमानगढ़ के सुरपुरा गांव से जिला परिषद सदस्य और गौशाला प्रधान दिलीप सिंह थतरवाल 25 ग्रामीणों के साथ पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि वे लंबे समय से संत रामपाल जी महाराज जी के सामाजिक सरोकारों और सेवा कार्यों की चर्चा सुनते आ रहे थे। गांव की गौशाला में चारे और गायों को धूप-बारिश से बचाने के लिए शेड की भारी कमी थी। संत जी ने तुरंत फरमाया—“चारा और शेड, दोनों मंजूर हैं”। गोवंश की रक्षा के लिए इस त्वरित फैसले ने पूरे दल को भावविभोर कर दिया।
व्यवस्था और अनुशासन देखकर नतमस्तक हुए बुद्धिजीवी (गोहाना, सोनीपत)
गोहाना से आए एक केमिस्ट बंधु ने आश्रम की व्यवस्था, स्वच्छता और ज्ञान गंगा के प्रसार हेतु बनाए गए विशाल पुस्तकालय का अवलोकन किया। उन्होंने अत्यंत विनम्रता से कहा कि इतनी बड़ी व्यवस्था और लाखों लोगों को बिना किसी स्वार्थ के संभालना व उनका कल्याण करना किसी साधारण मनुष्य के बस की बात नहीं है, यह साक्षात ईश्वरीय सामर्थ्य और सच्ची सेवा भावना से ही संभव है।
उम्मीद और विश्वास का सुरक्षित किनारा
डूंगरपुर के जंगलों से लेकर गुजरात के कच्छ-पाटन के मैदानों और हरियाणा-पंजाब के गांवों तक, जिस प्रकार जनसाधारण, जनप्रतिनिधि और पीड़ित अपनी फरियाद लेकर संत रामपाल जी महाराज की शरण में आ रहे हैं, वह इस बात का अकाट्य प्रमाण है कि संत जी का सेवा मॉडल कागजी नहीं, बल्कि पूरी तरह व्यावहारिक और संवेदनशील है।
सच्चा संत वही है जो समाज को आध्यात्मिक मार्ग दिखाकर मोक्ष का अधिकारी तो बनाए ही, साथ ही सांसारिक जीवन में भी दुखियारों के आंसू पोंछे, गरीबों का इलाज कराए, भूखों को अन्न दे और किसानों व ग्रामीणों की बुनियादी समस्याओं को अपना समझकर सुलझाए। संत रामपाल जी महाराज आज के युग में इन्हीं उच्च आदर्शों के जीवंत प्रतीक बनकर करोड़ों हृदयों में श्रद्धा और सम्मान का सर्वोच्च स्थान प्राप्त कर चुके हैं। उनकी यह अविरल परोपकार-धारा समाज को नई दिशा और उज्ज्वल भविष्य प्रदान कर रही है।



