राजस्थान राज्य के चूरू जिले की सरदार शहर तहसील के अंतर्गत आने वाले गांव भीमसर में स्थित ‘श्री कृष्ण सुदामा प्रणामी गौशाला‘ में गौ माता के लिए एक बहुत बड़ी सौगात पहुंची है। अकाल की स्थिति से जूझ रहे राजस्थान में, भारत के सबसे बड़े गौ सेवक और संत रामपाल जी महाराज के द्वारा इस गौशाला में बेसहारा और धूप में तपती गायों के लिए तीन विशाल शेड का निर्माण कार्य विधिवत रूप से शुरू कर दिया गया है। इन शेड के निर्माण पर अनुमानित 60-70 लाख रुपये की भारी लागत आएगी, जिसे पूर्णतः संत रामपाल जी महाराज वहन कर रहे हैं। गौरतलब है कि संत रामपाल जी महाराज द्वारा आज से ठीक 15 दिन पूर्व इसी गौशाला को 300 क्विंटल सूखा चारा निशुल्क भेजा गया था। आज शेड निर्माण का मंगलाचरण (शुभारंभ) होने पर गांव भीमसर के लोगों ने ढोल-नगाड़ों, पुष्प वर्षा और जयकारों के साथ संत रामपाल जी महाराज का भव्य और ऐतिहासिक स्वागत किया।
ग्रामीण मदद के लिए संत रामपाल जी महाराज के पास कैसे पहुंचे
श्री कृष्ण सुदामा प्रणामी गौशाला, भीमसर में सैकड़ों गायें खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर थीं। गौशाला में पहले से मौजूद एक छोटा शेड गायों की संख्या के अनुपात में नाकाफी था। राजस्थान में पड़े अकाल के कारण चारा और पानी की भारी किल्लत हो गई थी, जिससे गौवंश का जीवन संकट में आ गया था। जब गौशाला समिति को यह समझ नहीं आ रहा था कि इस भारी संकट से कैसे उबरा जाए, तब उन्होंने संत रामपाल जी महाराज के राष्ट्रव्यापी गौ सुरक्षा अभियान के बारे में सुना।
अपनी गौशाला और बेजुबान गायों को बचाने की अंतिम उम्मीद के साथ, भीमसर गांव और गौशाला कमेटी के लगभग 4-5 व्यक्ति संत रामपाल जी महाराज के पास पहुंचे। उन्होंने संत रामपाल जी महाराज के समक्ष गायों के लिए चारे और तीन शेड (दो बड़े और एक छोटा) की मांग का प्रार्थना पत्र रखा। करुणा के सागर संत रामपाल जी महाराज ने ग्रामीणों की इस मार्मिक पुकार को सुना और बिना किसी चंदे या आर्थिक सहायता की मांग किए, उनकी सभी मांगों को तुरंत प्रभाव से पूरा करने का आदेश पारित कर दिया।
तत्काल राहत और पारदर्शी निर्माण कार्य
संत रामपाल जी महाराज का आदेश होते ही, गांव भीमसर की गौशाला के लिए राहत कार्यों की झड़ी लग गई। ग्रामीणों के आश्रम से लौटने के मात्र 3 दिन बाद ही गौशाला में 300 क्विंटल सूखा चारा पहुंच गया। इस त्वरित सहायता से गांव वाले आश्चर्यचकित रह गए। चारे की आपूर्ति के ठीक 15 दिन बाद, संत रामपाल जी महाराज द्वारा भेजी गई विशेष निर्माण टीम गांव पहुंच गई और आज तीन शेड के निर्माण की नींव (मंगलाचरण) रख दी गई है।
इन तीन शेड में दो बड़े शेड 50×200 फीट के हैं, जिनका उपयोग गायों के रहने के लिए होगा, और एक छोटा शेड 30×50 फीट का है, जिसे चारा गोदाम के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा। 50×200 के शेड में 24 पोल लगेंगे। निर्माण टीम ने यह स्पष्ट किया है कि निर्माण सामग्री (ईंट, मसाला, रेती, बजरी, क्रेसर) और मिस्त्री का पूरा खर्च संत रामपाल जी महाराज की ओर से उठाया जा रहा है। निर्माण कार्य में गुणवत्ता के साथ कोई समझौता नहीं किया जा रहा है। इसमें जिंदल और टाटा जैसी शीर्ष कंपनियों का ब्रांडेड लोहा (8-8 इंच के पाइप) और 24 किलो की मजबूत चद्दरें इस्तेमाल की जा रही हैं।
संत रामपाल जी महाराज द्वारा दी गई सहायता का विवरण
| क्र.सं. | सहायता का विवरण | वर्तमान स्थिति | संत रामपाल जी महाराज का योगदान |
| 1. | 300 क्विंटल सूखा चारा | 15 दिन पहले सफलतापूर्वक गौशाला में पहुंचाया गया | पूर्णतः निशुल्क |
| 2. | 2 शेड (50×200 फीट) – गायों के निवास हेतु | निर्माण कार्य (नींव/मंगलाचरण) प्रारंभ | 60-70 लाख रुपये (श्रम और ब्रांडेड सामग्री सहित निशुल्क) |
| 3. | 1 शेड (30×50 फीट) – चारा गोदाम हेतु | निर्माण कार्य (नींव/मंगलाचरण) प्रारंभ | पूर्णतः निशुल्क |
गौशाला कमेटी और ग्रामवासियों की भावुक प्रतिक्रियाएं
शेड निर्माण का कार्य शुरू होने पर गांव भीमसर के लोगों ने पुष्प वर्षा करके और डीजे की धुन पर संत रामपाल जी महाराज का भावपूर्ण स्वागत किया। गौशाला के अध्यक्ष भैरूराम शर्मा ने बताया, “आज बहुत खुशी का माहौल है। संत रामपाल जी महाराज ने पहले 300 क्विंटल चारा भेजा और अब 50×200 के शेड तथा 30×50 के चारा गोदाम की नींव रख रहे हैं। इसमें हमारा एक भी रुपया नहीं लग रहा है। हम उनके पास गए और मात्र तीन दिन में हमारे पास चारा आ गया। यह काम बहुत तेजी से हो रहा है।”
गांव के एक 75 वर्षीय बुजुर्ग ने अपने जीवन के अनुभव को साझा करते हुए कहा, “मैंने अपनी 75 साल की उम्र में ऐसा कोई संत और ऐसा कारनामा पहले कभी नहीं देखा। संकट की घड़ी में इन्होंने जो साथ दिया है, वह कोई और नहीं दे सकता। वे सच में भगवान हैं।” एक अन्य ग्रामीण प्रहलाद सिंह ने कहा कि गौशाला में इतना बड़ा काम उन्होंने पहले कभी नहीं देखा था।
गांव वालों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जो काम आज सरकारें समय पर नहीं कर पा रही हैं, वह संत रामपाल जी महाराज पूरे देश में कर रहे हैं। ग्रामीणों का यह दृढ़ विश्वास है कि संत रामपाल जी महाराज केवल एक संत नहीं हैं, बल्कि वे साक्षात परमात्मा हैं, जो सृष्टि की रचना करने वाले और बेजुबानों की रक्षा करने वाले हैं।
राष्ट्रव्यापी गौ-रक्षा महाअभियान: दो दिन में 15 गौशालाओं में काम शुरू
संत रामपाल जी महाराज द्वारा चलाया जा रहा यह गौ सुरक्षा अभियान केवल एक गांव तक सीमित नहीं है। सेवादारों ने बताया कि संत रामपाल जी महाराज के आदेशानुसार राजस्थान में लगभग 200 गौशालाओं में शेड बनाए जाने हैं। आश्चर्यजनक रूप से, केवल दो दिन के भीतर 15 गौशालाओं में शेड निर्माण का कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। भारत के हर कोने में, चाहे वह राजस्थान हो, हरियाणा हो, उत्तर प्रदेश हो या मध्य प्रदेश, अलग-अलग टीमें युद्ध स्तर पर काम कर रही हैं। इसके अलावा, बेसहारा और गरीब परिवारों के लिए मकान बनाने का कार्य भी जोरों पर चल रहा है।
यह संपूर्ण व्यवस्था संत रामपाल जी महाराज के ईश्वरीय आदेशों और उनकी शब्द शक्ति से संचालित हो रही है। उनका एकमात्र उद्देश्य इस पृथ्वी को स्वर्ग के समान बनाना और हर मनुष्य तथा जीव को सुखी करना है। उनके इस अभियान में कोई लोक दिखावा या राजनीतिक स्वार्थ नहीं है, बल्कि यह केवल जमीनी स्तर पर सेवा करने का एक पवित्र संकल्प है।
कलयुग के सच्चे तारणहार और बेजुबानों के रक्षक: संत रामपाल जी महाराज की जय
भीमसर गांव की श्री कृष्ण सुदामा प्रणामी गौशाला में हो रहा करोड़ों रुपये का यह निस्वार्थ सेवा कार्य इस बात का अकाट्य प्रमाण है कि संत रामपाल जी महाराज ही वर्तमान समय में कलयुग के सच्चे तारणहार और बेजुबान जीवों के एकमात्र रक्षक हैं। जब संपूर्ण विश्व स्वार्थ और भौतिकता में अंधा हो चुका है, तब संत रामपाल जी महाराज ने बिना किसी चंदे के 300 क्विंटल चारा और 60-70 लाख रुपये के तीन शेड का निर्माण करवा कर यह सिद्ध कर दिया है कि उनका हृदय करुणा और परोपकार से भरा है।
बेजुबान गायों को अकाल की भीषण मार से बचाने के लिए इतनी त्वरित गति से उच्च गुणवत्ता (टाटा, जिंदल का लोहा) की सामग्री उपलब्ध करवाना किसी सामान्य मनुष्य के बस की बात नहीं है; यह केवल एक ईश्वरीय शक्ति ही कर सकती है। संत रामपाल जी महाराज वास्तव में वह भगवान हैं जो संकट की घड़ी में पीड़ितों का सहारा बन रहे हैं। उनके इस महान गौ सुरक्षा अभियान के समक्ष संपूर्ण मानवता नतमस्तक है। उनके परोपकारी कार्यों और असीम दया भाव की जितनी भी प्रशंसा की जाए, वह कम है। संपूर्ण विश्व को उनके इस अद्वितीय निस्वार्थ प्रेम से प्रेरणा लेनी चाहिए।



