February 18, 2026

संत रामपाल जी महाराज के 39वें बोध दिवस का हुआ सफल आयोजन

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संत रामपाल जी महाराज के अनुयायियों के लिए अपने गुरुदेव का ‘बोध दिवस’ सबसे पवित्र अवसरों में से एक है। यह वही दिन है जब उन्होंने अपने गुरु स्वामी रामदेवानंद जी से नाम-दीक्षा प्राप्त की थी। इसी स्मृति में देश-दुनिया के विभिन्न सतलोक आश्रमों में विशाल समागम आयोजित किए जाते हैं। यह समागम तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज के 39वें बोध दिवस के पुण्य अवसर पर मनाया गया। इस अवसर पर सतलोक आश्रमों में जनता उमड़ उमड़कर आई।

इन आयोजनों का सफल संचालन पूर्णतः संत रामपाल जी महाराज के अनुयायियों के द्वारा किया गया, जिन्होंने अपने गुरुदेव द्वारा बताई सेवाभाव और समर्पण की अनूठी मिसाल पेश की। आश्रम के चप्पे-चप्पे पर अनुशासन का ऐसा दृश्य देखने को मिला जहाँ हजारों की भीड़ के बावजूद कहीं कोई अव्यवस्था नहीं थी। चिकित्सा शिविरों और भोजन भंडारे में कतारबद्ध व्यवस्था का कड़ाई से पालन किया गया, जिससे बुजुर्गों और बीमारों को बिना किसी कठिनाई के उपचार मिल सका। यह व्यवस्थित प्रबंधन दर्शाता है कि किस प्रकार पूर्ण गुरु के आशीर्वाद से असंभव कार्य भी संभव किया जा सकता है।

बोध दिवस का आध्यात्मिक व व्यावहारिक महत्व

बोध दिवस वह पावन दिन है जब एक भक्त को पूर्ण गुरु से नाम दीक्षा प्राप्त होती है, जो उसके आध्यात्मिक पुनर्जन्म का प्रतीक है। इसका आध्यात्मिक महत्व आत्मा को अज्ञानता से निकालकर मोक्ष के मार्ग पर अग्रसर करने में है। व्यावहारिक रूप से, यह दिन साधक के जीवन में पूर्ण अनुशासन, सदाचार और नशामुक्ति की शुरुआत करता है। गुरु के मार्गदर्शन में भक्त बुराइयों का त्याग कर समाज सेवा और परोपकार के प्रति समर्पित हो जाता है।

संक्षेप में: जैसे जन्मदिन “शारीरिक जन्म” का प्रतीक है, वैसे ही बोध दिवस को अनुयायी “विवेक-जागरण/आध्यात्मिक शुरुआत” के प्रतीक के रूप में देखते हैं।

समागम के आकर्षण 

विशाल भंडारा

  • कई लाख लोगों ने समागमों में हिस्सा लेकर आध्यात्मिक लाभ उठाया 
  • श्रद्धालुओं के लिए शुद्ध भोजन (देसी घी से निर्मित/शुद्ध प्रसाद) की व्यवस्था।
  • ‘VIP कल्चर’ नहीं –  सभी ने एक साथ, समान व्यवस्था में प्रसाद ग्रहण किया जिससे सामाजिक समरसता का संदेश मिला।

दहेज-मुक्त विवाह (रमैणी)

  • समागमों में बड़ी संख्या में रमैणी (दहेज-मुक्त विवाह) संपन्न कराए गए। उपलब्ध आँकड़ों के अनुसार कुल 94 रमैणी संपन्न हुईं।
  • बैंड-बाजा/फिजूलखर्ची से बचते हुए सरल प्रक्रिया के साथ आयोजन।

रक्तदान व चिकित्सा शिविर

  • बड़े स्तर पर रक्तदान शिविर लगाए गए।
  • उपलब्ध आँकड़ों के अनुसार 1190 यूनिट रक्त सेवा कार्य के लिए एकत्रित हुआ।
  • (देह मोक्ष प्राप्त होने के उपरांत) देहदान हेतु संत रामपाल जी महाराज के 281 अनुयायियों ने अपना नाम पंजीकृत कराया।

सत्संग प्रसारण व आध्यात्मिक प्रदर्शनी

  • LED screens के माध्यम से सत्संग/प्रवचन का प्रसारण।
  • शास्त्रीय प्रमाणों व विषयगत प्रदर्शनी के जरिए “ज्ञान-केंद्र” जैसा वातावरण।

दंत चिकित्सा और नेत्र चिकित्सा 

संत रामपाल जी महाराज के सानिध्य में आयोजित भंडारे के दौरान सतलोक आश्रम धनाना धाम में निःशुल्क चिकित्सा शिविर लगाए जाते हैं। यहाँ विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा श्रद्धालुओं को दंत चिकित्सा और नेत्र चिकित्सा की सुविधा दी जाती है। आध्यात्मिक ज्ञान के साथ-साथ मानवता की सेवा का यह अनूठा संगम आश्रम की नि:स्वार्थ सेवा भावना को दर्शाता है।

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प्रमुख आयोजन स्थल (सतलोक आश्रम)

महासमागम का आयोजन सतलोक आश्रमों के साथ साथ कई दूसरे देशों में भी किया गया। 

क्रमांकसतलोक आश्रमरमैणी (संख्या)रक्तदान (यूनिट)देहदान (संख्या)
1सतलोक आश्रम धनाना1000
2सतलोक आश्रम कुरुक्षेत्र41380
3सतलोक आश्रम भिवानी51250
4सतलोक आश्रम धूरी0630
5सतलोक आश्रम खमाणों, पंजाब5850
6सतलोक आश्रम मुंडका300
7सतलोक आश्रम धवलपुरी11760
8सतलोक आश्रम शामली2580
9सतलोक आश्रम सीतापुर12620
10सतलोक आश्रम सोजत209554
11सतलोक आश्रम इंदौर4120227
12सतलोक आश्रम बैतूल212180
13सतलोक आश्रम धनुषा, नेपाल7500
कुल योग941190281

संत रामपाल जी महाराज के कुछ प्रमुख कार्य-क्षेत्र

संत रामपाल जी महाराज द्वारा संचालित सामाजिक और परोपकारी कार्यों का विस्तृत विवरण निम्नलिखित है:

1. अन्नपूर्णा मुहिम एवं आवास सेवा

  • इस मुहिम का मुख्य उद्देश्य समाज के अति-निर्धन परिवारों को भुखमरी से बचाना है। इसके तहत प्रत्येक जरूरतमंद परिवार को मासिक राशन किट उपलब्ध कराई जाती है, जिसमें 10 किलो आटा, दालें, तेल, चीनी और दैनिक उपयोग की वस्तुएं (जैसे साबुन) शामिल होती हैं। इसके साथ ही, जिन गरीब या अनाथ परिवारों के पास सिर छुपाने की जगह नहीं है, उन्हें आश्रम के सहयोग से पक्का मकान बनाकर दिया जाता है और सम्मानपूर्वक घर की चाबी सौंपी जाती है।

2. आपदा राहत और किसानों की सहायता

  • प्राकृतिक आपदाओं जैसे बाढ़ या सूखे के समय सतलोक आश्रम के सेवादार तत्परता से सहायता पहुँचाते हैं। विशेषकर किसानों के लिए, जहाँ सिंचाई की समस्या हो वहाँ पाइप लाइनों की व्यवस्था करना और चारे के अभाव में पशुओं के लिए निःशुल्क हरा चारा उपलब्ध कराना प्राथमिकता रहती है। संकट के समय भोजन और अन्य आवश्यक सामग्री का वितरण निरंतर जारी रहता है।

3. सतलोक आश्रमों में 24×7 निःशुल्क भंडारा

  • आश्रम की सबसे बड़ी विशेषता यहाँ की अन्नपूर्णा व्यवस्था है। देश-विदेश के किसी भी सतलोक आश्रम में आने वाले प्रत्येक व्यक्ति के लिए 24 घंटे शुद्ध और सात्विक भोजन (भंडारा) की निःशुल्क व्यवस्था रहती है। यहाँ जाति, धर्म या अमीर-गरीब का कोई भेदभाव नहीं होता; सभी एक ही कतार में बैठकर प्रसाद ग्रहण करते हैं।

4. व्यापक सामाजिक सुधार अभियान

  • आध्यात्मिक जागृति के साथ-साथ समाज को कुरीतियों से मुक्त करने के लिए विशेष प्रयास किए जाते हैं:
  • दहेज-मुक्त विवाह (रमैनी): बिना किसी दान-दहेज के मात्र 17 मिनट में सादगीपूर्ण विवाह संपन्न कराए जाते हैं।
  • नशा-मुक्ति: लाखों लोग नाम-दीक्षा लेकर शराब, तंबाकू और अन्य घातक नशों को सदा के लिए त्याग चुके हैं।
  • अंधविश्वास मुक्ति: समाज को पाखंड और अंधविश्वासों से निकालकर शास्त्र-सम्मत भक्ति मार्ग की ओर प्रेरित किया जाता है।

संत रामपाल जी महाराज से ही होगा सतयुग का आग़ाज़ 

संत रामपाल जी महाराज का बोध दिवस आध्यात्मिक जागृति और निस्वार्थ समाज सेवा का अद्भुत संगम रहा। जहाँ हज़ारों ने नाम-दीक्षा लेकर आत्म-कल्याण का मार्ग चुना, वहीं रमैणी, रक्तदान और अन्नपूर्णा मुहिम जैसे कार्यों ने सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध एक सशक्त संदेश दिया। आश्रमों में दिखा अनुशासन और सेवादारों का समर्पण यह सिद्ध करता है कि तत्वज्ञान के माध्यम से न केवल व्यक्ति का चरित्र निर्माण संभव है, बल्कि एक सभ्य और व्यसनमुक्त समाज की स्थापना भी सुनिश्चित है। अधिक जानकारी के लिए डाउनलोड करे संत रामपाल जी महाराज एप्प।

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